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Saturday, October 24, 2020
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कोचिंग संस्थान के शिक्षकों की हालत दयनीय:- सूरज शाहदेव

रांची – मोदी जी की योजना को सुनकर और समझ कर अत्यंत खुशी हुई। लगा कि कोई प्रधानमंत्री तो है जो गरीब किसानों,मजदूरों के बारे में सोचता है। लेकिन मैं जिस वर्ग से आता हूँ वो ऐसा वर्ग है जो देश के बच्चों की भविस्य को सँवारने का काम करते है। यह वर्ग है शिक्षक वर्ग। जी हां ऐसा वर्ग जिसका आत्मसम्मान बहुत अधिक होता है। वो हर काम या कदम बहुत ही सोच समझ कर उठाता है। वह हमेशा इस बात का ध्यान रखता है कि कोई उसका अपमान न कर दे। मैं बात कर रहा हूँ रांची सहित पूरे झारखंड में प्राइवेट कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की। झारखंड की राजधानी रांची में ही प्राइवेट कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या लगभग 1000 से लेकर 2000 की होगी। रांची में पढ़ाने वाले अधिकतर शिक्षक झारखंड के विभिन्न कोने से आकर रांची में रहते है और पढ़ाते है। ये शिक्षक रांची में मेडिकल,इंजीनियरिंग,बैंकिंग,रेलवे,एसएससी,क्लेट, एनडीए, सीए ,कमीशन की तैयारी सहित स्कूल के बच्चों को पढ़ाते है।मेडिकल और इंजीनियरिंग के बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों की तनख्वाह 50 हजार से लेकर 1 लाख तंक हो सकती है। लेकिन 99 प्रतिशत प्राइवेट कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की महीने की आमदनी 8000 रु से लेकर 20 हजार रुपये की होती है। ये शिक्षक अपने महीने की आमदनी से रांची जैसे शहर में किराए के मकान में रहते है,अपना खर्च निकाल कर कुछ पैसे अपने गाँव मे रह रहे बुजुर्ग माता पिता एवम छोटे भाई बहनों को भेजते है। बचत के नाम पर कुछ नही हो पाता है। ऐसा देखा गया है कि ज्यादातर कोचिंग संस्थानों में इन शिक्षकों को समय पर वेतन नही दिया जाता है। किसी किसी संस्थान में तो तीन से चार महीने तक कि तनख्वाह को रोक लेते है कोचिंग संस्थान के मालिक।चुकी उन्हें नॉकरी करनी होती है तो ये संस्थान के खिलाफ आवाज भी नही उठा पाते है। इन शिक्षकों को सिर्फ तनख्वाह ही दी जाती है। न तो इनका पीएफ कटता है,न ही मेडिकल की सुविधा दी जाती है । अगर ये अनुपस्थित होते है तो इनकी पैसे भी काट लिए जाते है। बड़ा दुख होता है जब ये शिक्षक मुझसे आग्रह करते है कि सर मुख्यमंत्री जी से मिलकर हमारे लिए भी कुछ करवाइए। यह शिक्षकों का वर्ग ऐसा वर्ग है जो गरीब होते हुए भी समाज के लोगो के द्वारा की जा रही मदद को ले भी नही सकते है। इन्हें सरकारी सुविधा भी नही मिलती है। लॉक डाउन के कारण सभी संस्थान पिछले चार महीने से बंद है और इनकी आमदनी भी बंद है। जो हालात देश का है ,उसे देखते हुए ऐसा लगता है कि इस साल कोचिंग संस्थान खुलने के बावजूद भी बच्चे संस्थान में नही आ पाएंगे। क्योंकि उनके अभिभावकों का भी काम धंधा बंद है तो इन खर्चो में वो भी कुछ कटौती करेंगे। अभी केंद्र या राज्य सरकार कोई रिक्तियां भी निकालने से शायद परहेज ही करेंगी।अतः इस साल इनकी आमदनी होने से रही। अतः राज्य सरकार से आग्रह होगा कि इन प्राइवेट कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भी कुछ मदद की जाए ताकि ये मानसिक तनाव से बाहर आ सके और आत्म सम्मान से जी सके और अगर जिंदा रहे तो फिर से एक बार देश के बच्चों की भविस्य को गढ़ सके। सूरज नाथ शाहदेव एक शिक्षक

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