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Sunday, October 11, 2026
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दिल्ली में गिरफ्तार माकपा नेताओं की अविलंब रिहाई की मांग, केंद्र पर लोकतंत्र के दमन का आरोप

न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गोमिया__भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की झारखंड राज्य कमेटी के सदस्य रामचंद्र ठाकुर और प्रदीप कुमार विश्वास ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर दिल्ली में गिरफ्तार माकपा के शीर्ष नेताओं को अविलंब रिहा करने की मांग की है। उन्होंने नेताओं की गिरफ्तारी को असंवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ बताते हुए इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की कार्रवाई करार दिया।
दोनों नेताओं ने कहा कि नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने और चुनाव सुधारों की मांग को लेकर माकपा नेता शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे। उनका आरोप है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।


गिरफ्तार नेताओं में माकपा महासचिव एम. ए. बेबी, पोलित ब्यूरो सदस्य एवं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, वरिष्ठ नेता वृंदा करात, एम. वी. गोविंदन, विजयराघवन तथा केंद्रीय समिति के सदस्य के. के. शैलजा, पी. के. श्रीमती, थॉमस इसाक, के. एन. बालगोपाल, पी. राजीव और जॉन ब्रिटास समेत कई नेता शामिल हैं।
रामचंद्र ठाकुर और प्रदीप कुमार विश्वास ने बताया कि पार्टी के दूसरे समूह के नेताओं को इंद्रजीत गुप्ता रोड स्थित हरकिशन सिंह सुरजीत भवन से मार्च निकालने की कोशिश के दौरान गिरफ्तार किया गया। इनमें बी. वी. राघवुलु, अरुण कुमार, विजू कृष्णन, मरियम धावले, ए. आर. सिंधु, लोकेनाथन तथा त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार सहित अन्य नेता शामिल हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए दिल्ली में इंटरनेट सेवाएं बंद करने, कई मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश द्वार बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने जैसे कदम उठाए गए। नेताओं ने कहा कि मताधिकार की रक्षा, निष्पक्ष चुनाव और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करना लोकतांत्रिक अधिकार है। ऐसी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे नेताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करती है।
माकपा नेताओं ने केंद्र सरकार से गिरफ्तार सभी नेताओं को तत्काल रिहा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति की आवाज को दबाने के बजाय जनता की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।


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