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Saturday, March 7, 2026
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गुमला में झारखंड राज्य स्थापना के 25वें रजत पर्व और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर भव्य उत्सव

नगर भवन गुमला में सांस्कृतिक कार्यक्रम, परिसंपत्ति वितरण और विभागीय प्रदर्शनी के साथ गरिमामयी समारोह मंत्री चमरा लिंडा, उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित एवं वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में उत्साहपूर्ण आयोजन

गुमला : – झारखंड राज्य स्थापना दिवस के 25वें रजत पर्व और उलगुलान के महानायक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती के पावन अवसर पर आज गुमला जिला उत्सव, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर दिखा। नगर भवन गुमला में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम सह परिसंपत्ति वितरण समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों, महिला समूहों, छात्र-छात्राओं तथा अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति ने वातावरण को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मंत्री, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिण्डा उपस्थित रहे, जबकि उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित, पुलिस अधीक्षक हरिश बिन ज़मां, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर, उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो, अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, सिविल सर्जन गुमला, शंभू नाथ चौधरी, जिला नजारत उपसमाहर्ता ललन कुमार रजक, जिला योजना पदाधिकारी रमन कुमार, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी आशीष कुमार सहित सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

मुख्य कार्यक्रम के आरंभ से पूर्व मुख्य अतिथि द्वारा बिरसा मुंडा एग्रो पार्क में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गई और नगर भवन में द्वित प्रज्वलन के साथ मुख्य कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। पूरे माहौल में धरती आबा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना साफ झलक रही थी और नागरिकों ने एकस्वर में उनके अमर योगदान को नमन किया।

उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने स्वागत भाषण में झारखंड से अपने आत्मिक जुड़ाव, वन सेवा से प्रशासनिक सेवा तक की अपनी यात्रा, आदिवासी समाज के साथ अपने कार्यानुभव और जिले में बीते छह माह की उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि गुमला ने उन्हें जनजातीय समाज के साथ नजदीकी से काम करने और नागरिकों की समस्याओं को सीधे समझने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जिले में अंचल दिवस का आयोजन, आधार कार्ड अद्यतन कार्य, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, आयुष्मान कार्ड निर्माण, सिकल सेल जांच, आदिवासी भूमि संरक्षण, दूरदराज क्षेत्रों में सड़क स्वीकृति जैसे महत्वपूर्ण कार्य निरंतर गति से पूरे किए जा रहे हैं और एक जिला अधिकारी के रूप में वे हमेशा जनता के द्वार पर खड़ी रहेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य एवं केंद्र सरकार की सभी योजनाओं को धरातल पर उतारने और झारखंड को सोना से हीरे की तरह चमकाने के लिए सभी को मिलकर काम करने का आग्रह किया।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित मंत्री चमरा लिंडा ने झारखंड स्थापना दिवस एवं भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के संघर्षपूर्ण इतिहास, सांस्कृतिक गौरव एवं वर्तमान प्रगतिशील दिशा पर अपने विचार व्यक्त किए।

अपने संबोधन में मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि झारखंड की जनता ने 25 वर्ष पूर्व स्वतंत्रता का वह अहसास प्राप्त किया था, जिसके लिए हमारे वीर पूर्वजों और शहीदों ने कठिन संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि गुलामी के दौर में ब्रिटिश शासन द्वारा जमींदारी प्रथा, जमीनों पर कब्जा तथा प्राकृतिक संसाधनों का शोषण किया गया। इस दमन के विरुद्ध भगवान बिरसा मुंडा ने अल्पायु में ही क्रांति का नेतृत्व कर जनजातीय समाज को अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए एकजुट किया। उन्होंने गुरुजी शिबू सोरेन के योगदान को भी रेखांकित करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन का उद्देश्य था कि राज्य का प्रत्येक बच्चा शिक्षित होकर देश-विदेश में अपना परचम लहराए।

मंत्री लिंडा ने बताया कि राज्य सरकार SC-ST समुदाय के बच्चों को उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ाने के लिए कोटा की मोशन संस्था के सहयोग से 300 छात्रों के लिए विशेष कोचिंग की व्यवस्था कर रही है। उन्होंने कहा कि अब संघर्ष तलवार से नहीं, शिक्षा से होगा। शिक्षा ही आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बनाएगी।

स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि रांची और दुमका में दो बड़े कल्याण अस्पतालों की स्थापना की योजना पर कार्य चल रहा है, ताकि गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने नशा मुक्ति पर जोर देते हुए समाज से दारू के दुष्प्रभावों को समझने एवं रोकने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक धरोहर गीत, संगीत और नृत्य न केवल परंपरा का प्रतीक हैं, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। इन सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने की अपील करते हुए उन्होंने गुमला को खेल नगरी बताते हुए खेल एवं संस्कृति को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अंत में मंत्री लिंडा ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो मूल्य, विरासत और स्वतंत्रता हमें दी है, उसे आगे बढ़ाना और आने वाली पीढ़ी को शिक्षित व सशक्त बनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

कार्यक्रम के दौरान जिला सूचना एवं जन संपर्क विभाग के कला दल द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक गीत, नाट-नुक्कड़ नाटक, कलशा नृत्य तथा समाज कल्याण विभाग के महिला समूहों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक नृत्य से नगर भवन का वातावरण झारखंडी संस्कृति की सुगंध से भर उठा। मांदर, ढोल-नगाड़ों और लोकधुनों की लय से पूरा परिसर गूंजता रहा और दर्शकों ने तालियों और उत्साह के साथ कलाकारों का स्वागत किया।

नगर भवन परिसर में उद्योग, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, मत्स्य, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, JSLPS, पशुपालन, खाद्य आपूर्ति, श्रम नियोजन, कल्याण, पेयजल, खेलकूद तथा अन्य विभागों द्वारा लगाए गए सूचना स्टॉलों में नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ती रही और लोगों ने योजनाओं की जानकारी लेकर स्वयं को लाभान्वित किया। इससे पूरे परिसर में मेले जैसा उत्सव का माहौल बना रहा।

समारोह के दौरान कुल 53 लाभुकों के बीच विभिन्न विभागों की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया, जिनमें वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत पट्टे एवं प्रशस्ति पत्र, धुमकुड़िया भवन निर्माण के स्वीकृति पत्र, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना के अंतर्गत उपकरण, विशेष केंद्रीय सहायता (SCA to TSS) के तहत सिलाई मशीन, कृषि विभाग के सीड वितरण, उद्यान विभाग के मशरूम उत्पादन किट और पाली हाउस, भूमि संरक्षण विभाग द्वारा ट्रैक्टर, पर्यटन एवं खेलकूद विभाग द्वारा स्पोर्ट्स किट, समाज कल्याण विभाग द्वारा किशोरी समृद्धि योजना और कन्यादान योजना के लाभ तथा मत्स्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के तहत परिसंपत्ति वितरण शामिल रहा। इसके साथ ही आठ नागरिकों के बीच अनुकम्पा के तहत नियुक्ति से संबंधित प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।

गुमला जिला आज स्थापना दिवस एवं भगवान बिरसा मुंडा जयंती के इस द्वि-उत्सव में पूरी तरह उत्साह, आनन्द, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और विकास की ऊर्जा से दमकता दिखा। नगर भवन का वातावरण एक ओर जहां झारखंडी संस्कृति की समृद्ध धारा से भर गया, वहीं दूसरी ओर योजनाओं के वितरण और जनकल्याण की घोषणाओं ने नागरिकों के बीच नए उत्साह का संचार किया। यह आयोजन केवल उत्सव नहीं बल्कि झारखंड की आत्मा, संघर्ष, एकता और उज्ज्वल भविष्य की सामूहिक धड़कन के रूप में पूरे जिले में महसूस किया गया।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया 


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