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Monday, July 6, 2026
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 सौ साल में ये कैसा चरित्र निर्माण हुआ…! राम के दरबार को ही लूट लिया…ये किसी का घरेलू मामला नहीं है…जवाबदेही के बदले लीपापोती का खेल नहीं चलेगा…!

भाई साहब, अयोध्या राम मंदिर में मची चंदे की खुली लूट पर सत्तापक्ष और उनके समर्थकों का जो नया तर्क सामने आया है, उसे सुनकर तो किसी का भी खून खौल जाए। अब ये लोग सरेआम सीना तानकर कह रहे हैं कि राम मंदिर में हुई चोरी उनके घर का मामला है, इसलिए बाकी किसी को इसमें दखल देने की क्या जरूरत है? ये तर्क नहीं चलेगा जनाब…!!

मतलब गजब का कुतर्क है भइया! एक तरफ तो यही सत्ताधारी दल देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करवाने की पूरी तैयारी कर रहा है, जिसके बाद किसी भी आम आदमी के घर का मामला सिर्फ घरेलू नहीं रह जाएगा, उसमें सरकार और कानून का पूरा दखल होगा।

लेकिन जब बात खुद के बनाए ट्रस्ट में करोड़ों की चोरी और घोटाले पर उठ रहे सवालों की आती है, तो ये लोग बड़ी बेशर्मी से इसी घरेलू मामले की ढाल के पीछे छिपकर जवाबदेही से भागना चाहते हैं।

इन लोगों का अहंकार इस कदर बढ़ चुका है जैसे मानो राम मंदिर और साक्षात भगवान राम पर इनकी कोई कॉपीराइट हो। अब सवाल यह उठता है कि क्या राम मंदिर की यह लड़ाई सिर्फ भाजपा और आरएसएस ने लड़ी है?

खुद को सनातन धर्म का इकलौता ठेकेदार समझ बैठे

जब इस देश में भाजपा और आरएसएस का जन्म भी नहीं हुआ था, उससे कई सदियों पहले से लाखों सच्चे रामभक्त इस मंदिर के लिए अपना खून बहा रहे थे, लड़ रहे थे और कुर्बानियां दे रहे थे। अगर संयोग से इनके कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर बनाने का आदेश दे दिया, तो क्या ये लोग खुद को सनातन धर्म का इकलौता ठेकेदार समझने लगे हैं?

ज़रा इस पूरे खेल की क्रोनोलॉजी और इनकी नीयत को समझिए। जब सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया था, तब अयोध्या में श्रद्धेय शंकराचार्यों का ट्रस्ट पहले से मौजूद था।

बाकायदा सरकार और कोर्ट को लिखकर दिया था कि हम मंदिर का निर्माण करवा सकते हैं। लेकिन मोदी सरकार ने उसे दरकिनार करते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नाम से एक बिल्कुल नया ट्रस्ट बना दिया। इस नए ट्रस्ट में चुन-चुनकर बीजेपी और आरएसएस से जुड़े लोगों को शामिल किया गया और सबसे गजब की बात देखिए, इतने बड़े और पब्लिक डोनेशन वाले ट्रस्ट को सरकार ने आरटीआई (RTI) के दायरे से ही बाहर कर दिया।

RTI से बाहर कर ‘रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट’ बना लिया

अब समझ में आ रहा है कि आरटीआई से बाहर रखने की मंशा क्या थी! ऐसा लगता है कि इनके लिए यह मंदिर कोई आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक तगड़ा इन्वेस्टमेंट था, और अब जो यह चंदे की लूट सामने आ रही है, वो दरअसल इनका रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI)  है।

याद है ना, राम मंदिर को लेकर मोदी जी ने देश को क्या-क्या भारी-भरकम शब्द परोसे थे? कहा था कि यह देश का पुनर्जागरण है, हिंदू गौरव की वापसी है, नए इतिहास का सृजन है, नए युग की शुरुआत है और अगले 1,000 वर्षों के लिए भारत की नींव रखी जा रही है।

लेकिन हकीकत क्या निकली? उसी हिंदू गौरव को सरेआम लूट लिया गया! RSS हमेशा यह दावा करता है कि वह अपनी शाखाओं में हवा में लाठी भांजते हुए युवाओं का चरित्र निर्माण करता है। भइया, सौ साल तक चले इस चरित्र निर्माण के बाद आखिर कैसा चरित्र निर्मित हुआ कि इन लोगों ने साक्षात भगवान राम के दरबार को ही लूट लिया?

राम के नाम पर राजनीति करके सत्ता शीर्ष पर पहुंचे

हमारे देश का एक आम आदमी, एक गरीब इंसान भी किसी मंदिर में देवी-देवता को चढ़ाई गई कोई चीज़ छूने से कांपता है। चाहे वो पैसा हो, फल-फूल हो या मेवा-मिष्टान्न, आम आदमी भगवान के चढ़ावे से खौफ खाता है।

लेकिन भगवान राम के नाम पर राजनीति करके सत्ता के शीर्ष तक पहुंचने वाले ये तथाकथित ठेकेदार इतने निर्लज्ज और निडर निकले कि भगवान को लूटते हुए इन्हें न डर लगा, न शर्म आई, न पाप-पुण्य का ख्याल आया, और न ही कोई लोक मर्यादा याद आई।

सच्चाई तो यह है कि रामभक्तों को कदम-कदम पर ठगा गया है। 1992 से ही मंदिर के नाम पर चंदा बटोर-बटोर कर चोरी की जा रही है। सर्वोच्च सत्ता की ओर से नियुक्त संस्था की रहनुमाई में करोड़ों-अरबों लूट लिए गए, लेकिन जो बहुरुपिये भगवान के नाम पर जनता को भड़का कर वोट मांगते रहे हैं, वो सब आज भींगी बिल्ली बनकर मौन बैठे हैं। और तो और, बेशर्मी की हद तो यह है कि अब इस मामले की जो जांच हो रही है, उसमें भी घोटाला किया जा रहा है।

सच कहूं तो वो जो मशहूर भजन है ना-  मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे, राम आएंगे— इन ठेकेदारों ने असल में इसे अपने ही ऊपर पूरी तरह से चरितार्थ कर लिया है। भगवान राम के नाम पर इनकी अपनी तिजोरियों के भाग सच में खुल गए हैं। खैर, ऊपर बैठे प्रभु श्रीराम भी यह गजब का तमाशा देखकर यही सोच रहे होंगे कि कलियुग में धर्म के इन तथाकथित ठेकेदारों ने अभी न जाने और क्या-क्या गुल खिलाने हैं।

-अशोक झा के फेसबुक वाल से


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