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Wednesday, August 26, 2026
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आकांक्षी प्रखंड डुमरी के ओखरगढ़ा में उपायुक्त ने लिया मशरूम उत्पादन का जायजा

गुमला न्यूज ब्यूरो – गणपत लाल चौरसिया 

35 से अधिक परिवार मशरूम उत्पादन से जुड़े, बटन मशरूम उत्पादन के लिए मशरूम शेड निर्माण की तैयारी

गुमला : – गुमला जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को वैकल्पिक खेती से जोड़ते हुए उनकी आय में वृद्धि एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित मशरूम उत्पादन अभियान के तहत बुधवार को उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने आकांक्षी प्रखंड डुमरी के ओखरगढ़ा पंचायत का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने गांव में संचालित मशरूम उत्पादन का जायजा लिया तथा मशरूम उत्पादन से जुड़ी महिला लाभुकों एवं ग्रामीणों से संवाद कर उनके अनुभव, उत्पादन एवं आय की जानकारी ली।

ओखरगढ़ा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला गांव है, जहां वर्तमान में 35 से अधिक परिवार मशरूम उत्पादन से जुड़कर वैकल्पिक खेती को अपना रहे हैं। उपायुक्त ने गांव के एक लाभुक के घर पहुंचकर स्वयं मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया का अवलोकन किया। उन्होंने मशरूम उत्पादन करने वाली महिला से उत्पादन, बिक्री एवं इससे प्राप्त आय के संबंध में जानकारी ली। लाभुक ने बताया कि ताजा मशरूम को डुमरी बाजार में बेचने के साथ-साथ मशरूम को सुखाकर भी बिक्री की जा रही है, जिससे अब तक लगभग 8 से 10 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई है।

उपायुक्त ने कहा कि इस क्षेत्र में पहले इस प्रकार मशरूम का उत्पादन भी किया जा सकता है, इसकी जानकारी ग्रामीणों के बीच व्यापक रूप से नहीं थी। जिला प्रशासन द्वारा नीति आयोग के आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के तहत उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए यहां के किसानों एवं महिलाओं को मशरूम उत्पादन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह पहल प्रारंभिक चरण में है और आगे इसे व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना है।

उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में ग्रामीणों को ऑयस्टर मशरूम के उत्पादन के लिए प्रशिक्षण एवं किट उपलब्ध कराया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं एवं ग्रामीण इसका उत्पादन कर रहे हैं तथा अपने उत्पाद की बिक्री से आय अर्जित कर रहे हैं। उपायुक्त ने कहा कि इस पहल को आगे और व्यापक स्तर पर संचालित किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक परिवार इससे जुड़कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।

उपायुक्त ने कहा कि आगामी चरण में बटन मशरूम के उत्पादन पर भी कार्य किया जाएगा। इसके लिए मशरूम शेड का निर्माण करने की योजना है। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि तत्काल प्रखंड स्तर पर उपलब्ध किसी उपयुक्त भवन अथवा कमरे की संभावनाओं का भी आकलन किया जाए, ताकि बटन मशरूम के उत्पादन की शुरुआत की जा सके। उन्होंने कहा कि बटन मशरूम के साथ-साथ मशरूम से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन की दिशा में भी ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

उपायुक्त ने ग्रामीणों एवं महिला स्वयं सहायता समूह की दीदियों से अधिक से अधिक संख्या में मशरूम उत्पादन से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि जिला प्रशासन जिले में वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों एवं ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की समस्याएं केवल उनकी अपनी समस्याएं नहीं हैं, बल्कि जिला प्रशासन भी उन्हें अपनी जिम्मेदारी के रूप में देखता है। आवश्यकतानुसार संसाधन एवं सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा, लेकिन उपलब्ध संसाधनों का सही एवं प्रभावी उपयोग करना भी उतना ही आवश्यक है।

इस अवसर पर मशरूम उत्पादन से जुड़ी महिला लाभुकों ने उपायुक्त के समक्ष अपने अनुभव साझा किए। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण एवं उपलब्ध कराए गए संसाधनों के माध्यम से उन्हें मशरूम उत्पादन की जानकारी मिली और इससे उन्हें अतिरिक्त आय का साधन प्राप्त हुआ है। महिलाओं ने आगे बड़े स्तर पर मशरूम उत्पादन करने की इच्छा व्यक्त करते हुए अतिरिक्त कमरे एवं उत्पादन के लिए आवश्यक सुविधाओं की मांग भी रखी।

कार्यक्रम के दौरान मशरूम उत्पादन से जुड़ी महिला लाभुकों के बीच उपायुक्त द्वारा मिक्सर ग्राइंडर, पैकेजिंग मशीन एवं ड्रायर मशीन का वितरण किया गया। इन उपकरणों के माध्यम से मशरूम के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन एवं पैकेजिंग को बढ़ावा मिलेगा तथा महिलाएं मशरूम से तैयार विभिन्न उत्पादों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी।

उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर ग्रामीणों को उनके उत्पाद के प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन, पैकेजिंग एवं बाजार से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उत्पाद की खरीद एवं विपणन के लिए संबंधित संस्था के सहयोग से व्यवस्था की जा रही है, जिससे उत्पादकों को उनके उत्पादन का उचित लाभ मिल सके।

ज्ञात हो कि जिला योजना विभाग द्वारा संचालित मशरूम उत्पादन अभियान के तहत एप एग्रीगेशन संस्था के सहयोग से डुमरी प्रखंड के औरापाठ सहित विभिन्न पीवीटीजी ग्रामों के ग्रामीणों को वैकल्पिक खेती से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीणों को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण, मशरूम किट एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्पादित मशरूम की खरीद एवं विपणन में भी सहयोग प्रदान किया जा रहा है। साथ ही मशरूम से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्माण एवं मूल्यवर्धन के लिए भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उपायुक्त ने कहा कि जिले में वैकल्पिक खेती की व्यापक संभावनाएं हैं। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ अन्य वैकल्पिक कृषि गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कार्य किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आय के अतिरिक्त साधन विकसित हो सकें और अधिक से अधिक परिवार आत्मनिर्भर बन सकें।

कार्यक्रम में चैनपुर अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरी प्रखंड विकास पदाधिकारी, पंचायत के मुखिया, जिला योजना विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी, संबंधित विभागों के पदाधिकारी-कर्मी, महिला स्वयं सहायता समूह की दीदियां एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।


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