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भारत में तलाक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? घरेलू हिंसा, आर्थिक तनाव और बदलती अपेक्षाएं प्रमुख कारण

शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, विशेषकर महिलाओं के बीच, लोगों को असंतोषजनक या असुरक्षित रिश्तों से बाहर निकलने का विकल्प दे रही

नई दिल्ली: भारत में विवाह और पारिवारिक संबंध तेजी से बदल रहे हैं। सामाजिक अपेक्षाओं, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता का असर वैवाहिक रिश्तों पर भी दिखाई दे रहा है।

2025 में International Journal of Population Studies में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, भारत में वैवाहिक संबंध टूटने के पीछे गरीबी, निःसंतानता, बाल विवाह, पति-पत्नी के बीच शैक्षणिक अंतर, शहरीकरण और घरेलू हिंसा जैसे कारक जुड़े पाए गए हैं।

बदलती अपेक्षाएं और आपसी तालमेल की कमी

विशेषज्ञों के अनुसार, संवाद की कमी, भावनात्मक सहयोग का अभाव, आपसी असहमति और जीवनशैली में अंतर वैवाहिक तनाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं। सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, शक, विवाहेतर संबंध और विश्वास की कमी भी कई मामलों में विवाद को बढ़ाते हैं।

शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, विशेषकर महिलाओं के बीच, लोगों को असंतोषजनक या असुरक्षित रिश्तों से बाहर निकलने का विकल्प दे रही है।

घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न

घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ना, क्रूरता और नियंत्रणकारी व्यवहार वैवाहिक विवादों की गंभीर वजह बने हुए हैं। 2024 में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि गंभीर शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में वैवाहिक संबंध टूटने की संभावना अधिक थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा या प्रताड़ना से बचने के लिए अलग होना कई बार असफल विवाह नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान की दिशा में जरूरी कदम होता है।

पारिवारिक हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव

पैसों, नौकरी, घरेलू जिम्मेदारियों, बच्चों की परवरिश और संयुक्त परिवार के हस्तक्षेप को लेकर मतभेद भी रिश्तों में तनाव पैदा करते हैं। काम का दबाव और समानता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बदलती सोच भी वैवाहिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

फैमिली कोर्ट में बढ़ रहे मामले

केंद्रीय कानून मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2024 में देश की फैमिली कोर्ट में 9,39,100 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 8,25,502 थी। हालांकि, इन आंकड़ों में विभिन्न पारिवारिक विवाद शामिल हैं, केवल तलाक के मामले नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां संभव हो, वहां काउंसलिंग और मध्यस्थता से विवाद सुलझाए जा सकते हैं। वहीं, हिंसा और प्रताड़ना के मामलों में पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिलना बेहद जरूरी है।

भारत में वैवाहिक संबंधों में आ रहे बदलाव सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन को दर्शाते हैं। स्वस्थ संवाद, आपसी सम्मान और कानूनी अधिकारों की जानकारी आज पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।


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