अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस पर सामाजिक संस्था सागर भक्ति संगम के तत्वाधान में स्थानीय स्वर्ण पार्क में ‘समाज के वृद्ध और हमारा कर्तव्य’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विचार गोष्ठी के अध्यक्षता संगम के संयोजक विजय केसरी संचालन डॉ सुरेश प्रसाद ने किया। मुख्य अतिथि शिक्षाविद के.सी. मेहरोत्रा ने दीप प्रचलित कर विधिवत गोष्ठी का उद्घाटन किया। गोष्ठी में सम्मिलित सभी सदस्यों ने समाज में उपेक्षित बुजुर्गों की सेवा का संकल्प लिया।
मुख्य अतिथि शिक्षाविद क मेहरोत्रा ने कहा कि वृद्ध जन हमारे समाज के आधार स्तंभ है। नींव है। उनका हर हाल में बेहतर से बेहतर ढंग से ख्याल रखा जाना चाहिए । आज उन्हें बुजुर्गों की हम सब नई पौध हैं । उनके अनुभव, उनकी कड़ी मेहनत और त्याग के कारण ही हम सब पुष्पित और पल्लवित हो रहे हैं। अगर वे अपेक्षित रहते हैं, तो यह हमारे समाज के लिए एक कलंक की बात होगी । आज समाज के हर वर्ग के लोगों को अपने-अपने परिवार के बुजुर्गों के ख्याल के लिए आगे आना चाहिए। अगर समाज के हर परिवार के लोग अपने-अपने परिवार के बुजुर्गों का बेहतर ढंग खयाल रखते हैं, तो बच्चे आगे इसका अनुसरण करेंगे।
अध्यक्षता करते हुए संगम के संयोजक विजय केसरी ने कहा कि आज समाज के बुजुर्गों की स्थिति अच्छी नहीं है। आज देश के हर जिले के वृद्ध आश्रमों में वृद्धों की संख्या बढ़ती चली जा रही है। समाज के हर वर्ग के लोगों का कर्तव्य बनता है कि अपने-अपने परिवार के बुजुर्ग के पास उनके जीवनभर के अनुभवों से आगे जीवन जीने का मूल मंत्र प्राप्त करें। बुजुर्ग के अनुभव से आप कई मुश्किलों से उबर सकते हैं। बुजुर्ग निश्चित तौर पर हमारे समाज के एक मजबूत आधार स्तंभ होते हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेता सह समाजसेवी बटेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि मैं स्वाधीनता सेनानी रामेश्वर महतो के पुत्र होने का गौरव प्राप्त है। मेरे पिता 107 वर्ष की उम्र में चलते-फिरते इस दुनिया से विदा हो गए थे। उन्होंने अपने पिता की खूब खिदमत की थी। वे समय-समय पर उनसे राय मशवरा भी किया करते थे । मैंने भी उनकी खुब सेवा की थी । आज हमारे बच्चे भी मेरी सेवा कर रहे हैं। इसलिए समाज के हर वर्ग के लोगों का दायित्व बनता है कि समाज के आधार स्तंभ बुजुर्गों का बेहतर ढंग से ख्याल रखें।
शिक्षाविद वीरेंद्र जायसवाल ने कहा कि जब बुजुर्गों की सबसे ज्यादा परिवार के सहयोग की जरूरत होती है, तब परिवार उनसे दूर चला जाता है। यह बहुत ही भयावह स्थिति है। समाज को यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि आज उनका जो वर्तमान है, वह उनके अपने-अपने बुजुर्गों की कड़ी मेहनत और तपस्या का प्रतिफल है। अगर आज वे अपने बुजुर्गों की अनदेखी करते हैं, तो कल उनके बच्चे भी उनकी अनदेखी करेंगे। इसलिए अपने-अपने बुजुर्गों का समुचित ख्याल रखें।
डॉक्टर सुरेश प्रसाद ने कहा कि भारतीय संस्कृति की यह परंपरा रही है कि अपने-अपने बुजुर्गों का पूरा-पूरा ख्याल रखें। अपने अपने बुजुर्गों की ही हम सब देन है। अगर वे ना होते तब शायद हम भी ना होते । हम सबों को बुजुर्गों की उपेक्षा की कल्पना भी नहीं करनी चाहिए । यह एक महापाप के समान होगा। अगर हम अपने बुजुर्गों की उपेक्षा करेंगे तो कल हमारे बच्चे भी हमें अपेक्षित करेंगे। वृद्धा आश्रम में मुझे जाने का बराबर अवसर प्राप्त होता है। उनकी सेवा कर महासुख का अनुभव करता हूं।
व्यवसायी सह समाजसेवी सुरेश होर्रा ने कहा कि जिनके घरों में बुजुर्ग होते हैं। वे घर स्वर्ग के समान होते है । आज मुझे अपने पिता की सेवा कर अपार आनंद का अनुभव होता है । आज हमारी मां नहीं है। उनके न होने का कष्ट क्या होता है ?यह मैं महसूस करता हूं । इसलिए बुजुर्ग हमारे लिए बेस कीमती खजाने के समान है। उनके पास अनमोल राय हैं ,जो हमें आगे के जीवन संघर्ष से निपटाने का पाठ पढ़ाते हैं।
समाजसेवी योगेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि मैं अपने पिताजी से अपने बुजुर्गों की सेवा करने का सबक लिया था। आज मैं खुद बुजुर्ग हूं। हमारे बच्चे भी मुझे उसी तरह की सेवा प्रदान कर रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर हमारे समाज के बुजुर्गों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। एकल परिवार के कारण बुजुर्गों का जीवन गुजारना बहुत ही कष्ट कारक हो गया है । बच्चे नौकरियों में घर से बाहर चले जा रहे हैं । वृद्ध माता-पिता घर में रह जाते हैं । आखिर उनकी देखभाल कौन करेगा ? यह बड़ा यक्ष सवाल है,समाज के लिए। इसलिए आज की नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के ख्याल रखने के लिए आगे आना होगा। आज उनका जो पुष्पित पल्लवी जीवन है, वह उनके बुजुर्गों की ही देन है ।
गृहणी सह समाजसेविका तृप्ता गुप्ता ने कहा कि मैं जिस परिवार से आई हूं, उस परिवार की यह परंपरा रही है कि अपने बुजुर्गों का सही ढंग से देखभाल करें । और यहां मैं जिस घर की बहू बनी हूं ,हमारे पति अपने पिता और माता की खूब सेवा किया करते थे। अपने बच्चों को भी दादा-दादी की सेवा के लिए कहते थे। आज हमारे सास और ससुर हमारे बीच नहीं है। लेकिन उनका आशीर्वाद अप्रत्यक्ष रूप से हमारे परिवार को मिलता रहता है। हमारे पति अपने पिता के तब तक पर दबते रहते थे, जब तक कि उनके पिता उन्हें जाने के लिए ना कह देते थे। आज उसका प्रतिफल है कि हमारे बच्चे भी उसी आदर के साथ हमारी सेवा सुश्रुषा करते हैं ।इसलिए समाज के हर वर्ग के लोगों को अपने-अपने बुजुर्गों का ख्याल रखना चाहिए।
समाजसेवी जयप्रकाश गुप्ता ने कहा कि माता-पिता भगवान के समान होते हैं। उनका ख्याल उसी रूप में करना चाहिए। उनसे जीवन के अनुभव की सीख की मिलती है। बुजुर्गों का अनादर महापाप करने के समान है।
समाजसेवी सह व्यवसायी सुरेंद्र गुप्ता ‘पप्पू’ ने कहा कि मां-बाप की सेवा सबसे बड़ी सेवा होती है। उनका अनादर महापाप के समान होता है। यह हमारे धर्म ग्रंथ भी बताते हैं। बुजुर्ग को सहेज और समेट कर रखना चाहिए। विपत्ति के समय उनकी राय हमें कई मुसीबतों से उबर सकते हैं।
बी.पी कुशवाहा ने कहा कि माता-पिता इस धरती के भगवान होते हैं। उनसे जीवन का पाठ सीखना चाहिए। उन्हें ईश्वर के समान दिल में जगह देनी चाहिए। मां-बाप चलते फिरते ईश्वर होते हैं।
इन वक्ताओं के अलावा कृष्ण प्रसाद गुप्ता, गोपाल ठाकुर,अजीत कुमार, अखिलेश सिंह, अशोक प्रसाद, विजय गुप्ता, संजय खत्री, प्रदीप स्नेही ने भी अपने-अपने विचार रखें। धन्यवाद ज्ञापन गोपाल ठाकुर ने किया।
News – Vijay Chaudhary