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Thursday, November 5, 2026
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मारंग बुरू प्रकरण: सालखन ने कहा-17 जनवरी को 5 राज्यों के 50 जिलों में होगा धरना-प्रदर्शन, राष्ट्रपति को भेजा जाएगा ज्ञापन

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रांची : आदिवासी सेंगेल अभियान के केंद्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू ने कहा है कि गिरिडीह का पारसनाथ पहाड़ हम आदिवासियों का मारंग बुरु अर्थात ईश्वर है। जिसे जैनों ने हड़प लिया है। दुर्भाग्य से हेमंत सरकार ने भी 5 जनवरी को केंद्र को लिखकर जैनों को देने का काम किया है। मरांग बुरु की रक्षा आदिवासी समाज की रक्षा है। राज्य व केंद्र सरकार को पारसनाथ जनजुटान के बाद 17 जनवरी को 5 प्रदेशों के 50 जिलों में धरना-प्रदर्शन कर राष्ट्रपति को ज्ञापन पत्र भेजा जाएगा. इसके बाद तिलका मुर्मू की जयंती के दिन 11 फरवरी को मोराबादी मैदान में महा धरना किया जाएगा।

पहाड़-पर्वतों को आदिवासी समाज के हवाले किया जाए

उन्होंने कहा कि पारसनाथ पहाड़ में मरंगबुरू की रक्षा के साथ लुगू बुरु जो बोकारो जिला में अवस्थित है और अन्य पहाड़ों की रक्षा भी जरूरी है, जो आदिवासियों का तीर्थ स्थल है। सेंगेल की मांग है भारत सरकार और सभी राज्य सरकार भारत के सभी पहाड़-पर्वतों को आदिवासी समाज को सुपुर्द करें। क्योंकि सभी पहाड़-पर्वतों में आदिवासियों के देवी-देवता निवास करते हैं। साथ ही पहाड़ों के मार्फत प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भी मानवता की रक्षा के लिए आज बहुत जरूरी है। जिसको आदिवासी समाज बचा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोरेन परिवार ने पहले झारखंड को बेचा अब पारसनाथ पहाड़ को भी बेच दिया है। पारसनाथ का जैनीकरण कर दिया है तो लुगू बुरु का भी हिंदूकरण कर दिया है। संथालपरगना का ईसाईकरण और मुस्लिमकरण भी कर दिया है।

राम भक्तों के लिए

गुरुजी 79 साल के हुए, 79 पौंड का केक काटकर भव्य तरीके से मनाया गया जन्मदिन

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रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद, राज्य समन्वय समिति के अध्यक्ष सह राज्य निर्माता दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी का 79वां जन्मदिन पर पार्टी के रांची जिला समिति द्वारा जिलाध्यक्ष मुशताक आलम के नेतृत्व में दिन के 11.30 बजे मोराबादी स्थित गुरुजी के आवास में 79 पौंड का केक काटकर गुरुजी का जन्मदिन भव्य तरीके से मनाया गया। 7 ढाक और 9 नगाड़ा के साथ गुरुजी से मिलने झामुमो रांची जिला की पूरी टीम पहुंची और पूरा दिन कार्यकर्ता नाचते रहे। केक गुरुजी की धर्मपत्नी श्रीमती रूपी सोरेन, मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, बसंत सोरेन, सीता सोरेन, कल्पना सोरेन, पुत्री अंजली सोरेन और मुख्यमंत्री जी के दोनों पुत्रों ने संयुक्त रूप से केक काटकर बाबा को खिलाया।

हजारों नेता-कार्यकर्ताओं ने गुरुजी को बधाई दी

मौके पर पार्टी के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता एवं राज्य समन्वय समिति के सदस्य  विनोद कुमार पांडेय, राज्यसभा सांसद डॉ महुआ माजी,  झामुमो के केन्द्रीय महासचिव सह प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य, मुख्यमंत्री जी के प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पिन्टु,  केंद्रीय सदस्य समनूर मंसूरी, प्रो अशोक सिंह, नंदकिशोर मेहता, पवन जेडिया,पूर्व केन्द्रीय सदस्य अफरोज अन्सारी, अन्तु तिर्की, रोशन सिंह,  जिला सचिव डॉ हेमलाल मेहता, जिला उपाध्यक्ष अश्विनी शर्मा, जनक नायक, बीरू तिर्की, बीरू साहु, कलाम आजाद, रामानंद बेदिया, सुजीत उपाध्याय,  कुदूस अंसारी, डॉ  तालकेश्व महतो, जितेन्द्र गुप्ता, संजय राय, अरूण वर्मा, संजय राय, लालजी रमण, मंटू लाला, शांति तिर्की, सुनील साहू, रमेश साहू, बुढ़मू प्रखंड अध्यक्ष भुवनेश्वर साहु, रातु प्रखंड अध्यक्ष बेलाल अंसारी, चिंतामणि सांगा, रामचंद्र तिर्की, रौशन सिंह, नवीन चंचल, संध्या गुड़िया, नामकुम प्रखंड अध्यक्ष बिरिश मिंज, खुर्शीद आलम, अफरोज आलम, मोजाहिद हुसैन, इटकी प्रखंड अध्यक्ष रौशन एनामुल तिग्गा, कांके प्रखंड अध्यक्ष जावेद अख्तर अंसारी, नगड़ी प्रखंड अध्यक्ष विनोद तिर्की, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष नागेश्वर महतो, सुजीत कुजूर, आफताब आलम, प्रदीप मिर्धा, कैथरीना तिर्की, राधा देवी, महावीर विश्वकर्मा, अशुतोष वर्मा, प्रदीप भोक्ता, गुलाम रब्बानी, मृत्युंजय सिंह, शिवनंदन मिश्रा, सालो देवी, परविंदर नामधारी, सुनिता देवी, विश्वजीत दा बाबू, आफताब आलम डॉ बबलू राम, अजय वर्मा, राजेश सिंह, महादेव मुंडा, परवेज आलम गुड्डू, लक्ष्मण राम, कयूम अहमद, नरेश गंजू, जीत गुप्ता, अजीत नायक, सुजीत उपाध्याय, राखी देवी, निखिल, नयनतारा उरांव, शांति देवी, राकेश वर्मा, सोनू मुंडा, नवीन तिर्की, नंदकिशोर सिंह चंदेल, मुकेश महतो, अख्तर मंसूरी, साहिल यादव, गोपाल पांडे, वसीम राबिया खान, नीरज वर्मा, तुलसी वर्मा, लखपति साव, सैय्यद फिरोज, ओम शर्मा, अजय उरांव, फैयाज साह, प्रदीप शर्मा, कामरान, आसिफ, अवधेश यादव, रवि निरंजन टोप्पो के अलावा हजारों कार्यकर्ता शामिल थे।

राम भक्तों के लिए

एकमात्र मुस्लिम डोली मजदूर निजाम को क्या लेना-देना जो, जो वोट बैंक की खातिर पवित्र स्थान को सियासी बनाने पर तुले हैं…!

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मैं पारसनाथ के उस निजाम (एक डोली मजदूर है) को जानता हूं जो, हर शुक्रवार पीरटांड़ की मस्जिद में नमाज अता करता है और अपने रसूल से पूरे प्रखंड की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करता है…। पारसनाथ को टीनोपाल से धोने की मांग जब चल ही रही है तो, निज़ाम का जिक्र करना इसलिए जरूरी है कि वह एकमात्र मुस्लिम डोली मजदूर है, जिसे मैंने 15 साल की उम्र से अपने कंधे पर तीर्थयात्रियों को श्री सम्मेद शिखरजी की यात्रा कराते देखा है। आज वह करीब 65 वर्ष का है, शराब का सेवन करते हुए मैंने उसे देखा नहीं, हो सकता है कि वह इस्लाम की आयतों का पालन करता हो..! जोहार और जय जिनेन्द्र की ज़बान बोलने वाले और शिखरजी व मरांग बुरू पर टीनोपाल की राजनीति करनेवालों को निजाम से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। निजाम हर शाम मधुबन आता है और पारसनाथ की जयकार से पहाड़ की यात्रा करनेवाले यात्रियों से पूछता है कि बाबू, यात्रा पर जायेंगे क्या..?, हम निजाम हैं, आपको चंदप्रभु और पारसनाथ की टौंक पर ऊपर तक ले जायेंगे..! कोई तकलीफ नहीं होगा..! वह हर रोज यात्रियों की उम्र, ऊंचाई और शरीर देख कर उनका वजन बता देता है और निर्धारित मजदूरी की जानकारी देता है…! तीन महीने पहले उससे पारसनाथ भगवान की टौंक पर मुलाकात हुई तो पूछ बैठा… की हाल पिंकू बाबू…? कहां रेहो हीं.. मैंने कहा- रांची….! उसने कहा- बुतरू सब कइसन हो?… सब ठीक हो… !

स्थानीय समाज पर दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका

सेंधमारी बेशक सियासी हो, लेकिन दुष्प्रभाव जैन समाज और स्थानीय समाज पर व्यापक तौर पर होगा..! मौजूदा हालात चीख कर ये बता रहे हैं कि जो कभी मरांग बुरु की पूजा करने पारसनाथ नहीं गए, वो वोट बैंक को दुरुस्त करने पवित्र स्थान को सियासी बनाने पर तुले हैं! नफे-नुकसान का आकलन भविष्य में होगा लेकिन वर्तमान को सुरक्षित करना हम सब की प्राथमिकता होनी चाहिए। वाट्सअप यूनिवर्सिटी से निकलती सम्मेद शिखरजी की व्याख्याएं और शोर-शराबे में स्थानीय लोगों के बीच आशंकाएं अगर गहराती हैं तो यह समझ लीजिये कि सामाजिक समरसता को बिगाड़ने में दोनों पक्षों की भूमिका संदिग्ध होगी..! गंभीर बात यह है कि श्री सम्मेद शिखरजी को लेकर सबके पास अपने-अपने टीनोपाल हैं जो पवित्रता की पुंगी बजाने में लगे हैं।

सियासत के सिक्के को खरा करने को बेताब हैं सियासतदां

पूरे देश में जैन समाज का आक्रोश उबाल पर है तो पूरे राज्य में आदिवासियों की आहत भावनाओं पर राजनीति का टीनोपाल लगाकर कई अपनी सियासत के सिक्के को खरा करने को बेताब हैं। नेताओं की भीड़ में ऐसे भी हैं जो कभी पारसनाथ के मरांग बुरू जाहेरथान में कभी अपना मत्था टेकने नहीं गये तो जैन समुदाय में भी ऐसे हैं जो तीर्थ पर जाकर जैन धर्म को सीमाओं में बांध कर अपने-पराये का फर्क समझा रहे हैं। मेरी नाराजगी उन सबसे हैं जो शिखरजी के अमन-चैन को छीनने को बेताब हैं। निजाम का जिक्र इसलिए जरूरी है की वह पांच दशक से बिना किसी राजनीति का हिस्सा बने पारसनाथ के जयकारों से हौसला पाता है और अपने रसूल के बताए मार्ग पर सर्वधर्म समभाव की सूक्तियों के अनुरूप चल रहा है। इसलिए निजाम आपके लिए प्रेरक हो सकता है..!

राम भक्तों के लिए

खलारी – वीर शहीद नीलाम्बर पीताम्बर की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई

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खलारी, 10 जनवरी : नीलाम्बर पीताम्बर जन कल्याण समिति द्वारा खलारी के बड़कीटांड़ में वीर शहीद नीलाम्बर पीताम्बर की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि खरवार भोगता समाज विकास संघ के केंद्रीय सलाहकार झलकु गंझू तथा विशिष्ट अतिथि प्रखंड प्रमुख सोनी तिग्गा,मुखिया दीपमाला कुमारी, जालिम सिंह, खुलेश्वर भोगता,कन्हाई पासी,नरेश गंझू,अनिल पासवान, जगरनाथ महतो शामिल हुए। जयंती समारोह में सभी अतिथियों का स्वागत पारम्परिक तरीके से ढोल नगाड़ों के साथ किया गया।
शुरुआत में समिति के अध्यक्ष विश्वनाथ गंझू के द्वारा नीलाम्बर पीताम्बर के प्रतिमाओं की पारंपरिक तरीके से पूजा की गई। ततपश्चात अतिथियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। साथ ही उपस्थित लोगों ने भी बारी बारी से प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किया। अतिथियों के सम्मान में बच्चियों द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि झलकु गंझू ने अपने सम्बोधन में कहा कि नीलाम्बर पीताम्बर ने देश की आजादी की लड़ाई में अपनी अहम भूमिका निभाई और आजादी की लड़ाई में अपने प्राणों को आहुति दी।नीलाम्बर पीताम्बर के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है।हमे दोनो महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की जरूरत है।उनके आदर्शों को अपनाकर उनके बताए रास्ते पर चलना ही उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।प्रमुख सोनी तिग्गा, मुखिया दीपमाला कुमारी ने भी नीलाम्बर पीताम्बर को महान स्वतंत्रता सेनानी बताया और उनके बताए रास्ते पर चलने की अपील की। इस मौके पर खोड़हा टीमो द्वारा सांस्कृतिक नृत्य एवं नागपुरी कलाकारों द्वारा गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिगन सिंह भोगता एवं संचालन रामलखन गंझू ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अमृत भोगता ने किया। इस मौके पर बहुरा मुंडा,महेंद्र उरांव,देवपाल मुंडा,कन्हाई पासी ,महेंद्र भोगता, बालदेव गंझू,खुलेश्वर भोगता सहित कई लोगों ने संबोधित किया।इस मौके पर रतिया गंझू,मुकद्दर कुमार,विनय खलखो,प्रभाकर गंझू,लहसन भोगता,दिनेसर गंझू,मनोज गंझू,,अनीता गंझू,सुनीता देवी,कांता देवी,बुल्ला गंझू, शिवदयाल गंझू,रमेश गंझू,शिवनारायण लोहरा,अर्जुन गंझू,रमेशर भोगता,दामोदर गंझू,भोला गंझू,,छोटन भोगता, प्रकाश गंझू,नारायण गंझू,राजेन्द्र उरांव,ललकु गंझू,धनराज भोगता, भूषण यादव,बाबूलाल गंझू,चन्द्रदीप गंझू,कुलदीप साहू,बालेसर,बिगना गंझू,जगदीश गंझू ,सोमर गंझू,रामधारी गंझू,मिथुन गंझू,ललकु, मधु गंझू,हेमलाल गंझू,शिवनाथ भोगता ,रमेश गंझू,आदि मौजूद थे।

राम भक्तों के लिए

खलारी – विद्या मंदिर डकरा में क्रियात्मक शोध पर गोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ

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खलारी, 10 जनवरी : सरस्वती विद्या मंदिर डकरा में क्रियात्मक शोध पर गोष्ठी एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का आयोजन हुआ। जिसकी अध्यक्षता विद्यालय के उपाध्यक्ष अवधेश सिंह ने की। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए क्रियात्मक शोध बहुत सहायक होता है। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए आप यह कार्य कर रहे हैं, यह बहुत हीं सराहनीय है। विद्यालय के प्राचार्य गोपाल मिस्त्री विश्वकर्मा ने बताया कि विद्या भारती में क्रियात्मक शोध को काफी महत्व दिया जाता है, विद्या भारती योजना अनुसार ही आज की यह गोष्ठी आयोजित है। वर्तमान समय में छात्रों में पढ़ाई के प्रति रुचि में कमी, छात्रों की विद्यालय में अनुपस्थिति , छात्रों के गृह कार्य न करने की आदतें, कक्षा के दौरान मानसिक स्थिति अच्छी नहीं होना आदि विषयों पर क्रियात्मक शोध कर समाधान ढूंढनें की आवश्यकता है। गोष्ठी में विद्यालय की आचार्या रीता दास, अनिता सिंह ने छात्रों के हैंडराइटिंग, स्वास्थ्य व रुचिकर अध्ययन के ऊपर चर्चा की। आचार्य जितेंद्र पांडेय ने छात्रों की अनुपस्थिति, स्मरण शक्ति, पुरावृत्ति के द्वारा कैसे सुधार की जाए इस बात पर चर्चा की। राजेंद्र कामत ने अनुशासनहीनता व ससमय न सक्रिय रहने के साथ प्रतियोगिता में कैसे विद्यार्थियों की रुचि हो इस बात पर चर्चा की। संगीताचार्य दीक्षु शर्मा ने छात्रों के अध्ययन में संगीत उपयोगी माध्यम से कैसे सरल हो जाता है इस विषय-वस्तु पर शोध प्रस्तुत किया। गोष्ठी में आस-पास के विद्यालयों से भी कई शिक्षक व अभिभावकों की उपस्थिति रही। आयोजन में विद्यालय क्रियात्मक शोध में बीरेंद्र झा, वीरेंद्र पाठक, रामनिवास पांडेय, मनोरंजन ओझा, विजय प्रजापति, सिकंदर झा, आनंद जयसवाल, लक्ष्मण महतो, निकु वर्मन, ऋषिकेश सिंह, अजय मिश्रा, राजेश वर्मा, अर्चना सिंह, शशि रंजन, संदीप कुमार कर्ण, विजय उपाध्याय, अनुराग कुमार, अर्चना कुमारी, सरिता कुमारी, हरिनंदन नोनिया आदि शिक्षक-शिक्षिकाएं सक्रिय रहे।

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खलारी – संघर्ष के 82 साल, एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेंद्र कुमार का मना जन्मदिवस

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खलारी, 10 जनवरी : एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व सांसद रमेंद्र कुमार का 82वां जन्मदिन मंगलवार को सीसीएल के बड़का-सयाल क्षेत्र में मनाया गया। इस अवसर पर सीसीएल एनके एरिया, डकरा से प्रेम कुमार, कृष्णा चौहान, संजय प्रसाद, संजय यादव, मनोज कुमार ने बड़का- सयाल पहुंचकर उन्हें बुके देकर और माला पहनाकर कार्यकर्ताओं ने जन्मदिन की बधाई दी । साथ ही ईश्वर से उनकी बेहतर स्वास्थ्य व लंबी आयु की कामना की। मौके पर वक्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीवन संषर्घ के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से बताया। कहा कि कॉमरेड रमेंद्र कुमार के नेतृत्व में कोयलांचल ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर मजदूर-किसानों के संघर्ष को नया मुकाम मिला। उनका पूरा जीवन मजदूरों के हक और हकूक की लड़ाई में ही गुजर गया। वही वक्ताओ ने 11वें वेतन समझौता में महत्वपूर्ण योगदान का चर्चा किया। वहीं रमेंद्र कुमार ने कहा कि कार्यकर्ताओं का स्नेह और प्यार ही मेरी ताकत है। लेकिन इस बात की खुशी है कि संघर्ष के बल पर कोल इंडिया में कई निर्णायक लड़ाईयां लड़ी है, जिसका सुखद परिणाम है कि लाल झंडा की शान बरकरार है। उन्होंने हमेशा हक और अधिकार के लिए संघर्षरत रहने का आह्वान किया।

राम भक्तों के लिए

विश्व हिन्दी दिवस पर डोरंडा कॉलेज में कई प्रतियोगिताएं आयोजित

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रांची :  डोरंडा महाविद्यालय के बीएड विभाग में नये सत्र-2022-24 के प्रशिक्षुओं ने विश्व हिन्दी दिवस का आयोजन प्राचार्य डॉ. वी पी वर्मा के निर्देशन में किया।  इस मौके पर विभाग के सभी शिक्षक एवं शिक्षिका सहित प्रथम सत्र के प्रशिक्षु शिक्षकों ने भाग लिया। हमारी शान हिन्दी, माथे की बिंदी हिन्दी जैसी कविताओं एवं स्वरचित रचनाओं का पाठ किया गया. इस अवसर पर चिराग, अंजु, सूरज, विख्यात, रजनी ने भी अपनी प्रस्तुति दी। झारखंड सरकार युवा कार्य विभाग द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन तीन स्तर पर किया जा रहा है। डोरण्डा कॉलेज में एनएसएस सेल द्वारा कॉलेज स्तर पर यह प्रतियोगिता सम्पन्न हुई।

नौ प्रतिभागियों का चयन हुआ

इस मौके पर डॉ. ओम प्रकाश ने कहा कि विश्व पटल पर हिन्दी भाषा एवं साहित्य के माध्यम से भारत, भारतीयता और हम का परिचय दे रही है। राष्ट्रीय युवा दिवस सप्ताह के अवसर पर महाविद्यालय स्तरीय भाषण, पेंटिंग, निबंध लेखन प्रतियोगिता में नौ प्रतिभागियों का चयन हुआ। भाषण में तान्या राज, श्वेता कुमारी, आकाश कुमार झा, पेंटिंग में नम्रता बारजो, नीलू कुमारी, अभिषेक नायक, निबंध में आकाश कुमार, कुमार सत्यम, आरती कुमारी का चयन हुआ। महाविदयालय स्तर पर चयनित विद्यार्थी विश्वविद्यालय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परिचय देंगे उसके बाद राज्य स्तर पर भाग ले सकेंगे। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ बीपी वर्मा ने सभी चयनित प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दी। धन्यवाद ज्ञापन एवं मंच संचालन कुश एवं कल्पना ने किया।

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मधुबन में झारखंड बचाओ मोर्चा की रोषपूर्ण महारैली, सरकार हमारी भावनाओं को समझे, वरना उग्र आंदोलन होगा, बाजार बंद रहे, पुलिस मुस्तैद रही

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गिरिडीह: पारसनाथ पर्वत-सम्मेद शिखर को आदिवासियों का धार्मिक क्षेत्र घोषित करने और मारंग बुरू को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पारसनाथ बचाओ आंदोलन के बैनर तले पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत मधुबन में मंगलवार को कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था के बीच आदिवासी-मूलवासियों की रोषपूर्ण महारैली हुई। रैली को झारखंड बचाओ मोर्चा के मुख्य संयोजक लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि आदिवासियों का यह क्षेत्र पवित्रस्थल भी है, जहां फागुन माह की पहली तिथि को विशेष पूजा-अर्चना होती है. इसमें भारत, बांग्लादेश, भुटान समेत अन्य देशों के समाज के लोग भाग लेते हैं. कहा कि जो बाहरी लोग शिखरजी को अपना बताने पर आमादा हैं, वह सही नहीं है. आदिवासी समाज अपना हक और अधिकार लेना जानता है. जरूरत पड़ी तो उग्र आंदोलन होगा।

केन्द्र-राज्य सरकारों का पुतला दहन किया गया

रैली में पूर्व सांसद सालखन मुर्मू, पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव, जयराम महतो, सिकन्दर हेम्बम समेत समेत देश के कई भागों से आए लोगों ने आदिवासियों को संबोधित किया। आदिवासी समाज के नेताओं ने कहा कि सदियों से पारसनाथ क्षेत्र उनके आराध्य धर्मगुरू मरांग बुरू जाहेर स्थल है, जिसका उल्लेख 1956 के बिहार -हजारीबाग गजट में अंकित है. कहा कि इस दौरान रैली मघुबन फुटबॉल मैदान से निकल कर बाजार का भ्रमण करते हुए पर्वत मार्ग तक गई, जहां  केन्द्र सरकार व झारखंड सरकार का पुतला दहन किया गया. सरकारों पर आरोप लगाया गया कि दोनों सरकारें आदिवासियों की भावनाओं उपेक्षा कर रही है.

रैली में गैर आदिवासी संगठनों के लोग भी शामिल हुए

रैली में काफी संख्या में राज्य के विभिन्न इलाकों से समाज के लोगों का जुटान हुआ था। रैली में कई गैर आदिवासी संगठनों के लोग भी शामिल हुए। रैली के मद्देनजर जिला एंव पुलिस प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये थे। सीसीटीवी एंव ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही थी। जिसकी मॉनिटरिंग जिला मुख्यालय में की जा रही थी। आज की रैली को देखते हुए मघुबन बाजार बंद था। एक दर्जन से अधिक मजिस्ट्रेट प्रतिनियुक्त किये गये थे। चारों तरफ पुलिस बल की तैनाती की गयी थी। पुलिस-प्रशासन सुुुबह से ही सड़कों पर गश्त लगाते हुए नजर आए. शाम तक कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.

जैन समाज अपना एकाधिकार जताना बंद करना

रैली में कई लोगों ने एक स्वर से कहा कि आदिवासी समाज यह आरोप लगाता है कि पारसनाथ पर्वत पर जैन समाज अपना एकाघिकार जता ऱहा है। अफसोस इस बात का है कि इस मामले में सरकार के नुमाइंदे भी मौन धारण किए हुए है। हालांकि झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग ने आदिवासी समाज के आरोपों भ्रामक बताते हुए खंडन किया है. विभाग ने स्पष्ट किया कि पारसनाथ को लेकर आठ सदस्यीय कमेटी का गठन होगा जिसमें दोनों जैन समाज (दिगबंर-श्वेताबंर) से एक-एक और आदिवासी समाज से एक सदस्य को शामिल करने का नीतिगत निर्णय लिया गया है.

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गिरिडीह जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया, एससी-एसटी अपनी शिकायतें दर्ज करें

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गिरिडीह: अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर हो रहे अत्याचार के पीड़ितों द्वारा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के लिए गिरिडीह जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नं- (Toll Free No- 18002021989) अधिष्ठापित किया है. इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए हेल्पलाइन नंबर संचालित करने के लिए जिला स्तर पर व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करने का निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों को दिया गया है. उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नमन प्रियेश लकड़ा द्वारा जानकारी दी गई कि है भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा नागरिक सुरक्षा अधिनियम 1955 एवं अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के सफल कार्यान्वयन के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर अत्याचार के विरुद्ध नेशनल हेल्पलाइन नंबर संचालित किया गया है।

एससी-एसटी से इस योजना का लाभ उठाने की अपील

इस कॉल सेंटर में संचालित हेल्पलाइन नं. [Toll free No 18002021989) पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों पर हो रहे अत्याचार के पीड़ितों द्वारा ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। इस योजना का सफल कार्यान्वयन हेतु हेल्पलाइन नंबर संचालित करने के लिए जिला स्तर पर व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार करने का निर्देश सभी संबंधित अधिकारियों को दिया गया है, ताकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सदस्यों/पीड़ितों को जागरूक करते हुए इस योजना से लाभान्वित किया जा सके।

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मरांग बुरू पर हमारा जन्मसिद्ध अधिकार, केंद्र-राज्य सरकारें मामले की गंभीरता को समझें: वीएस नायक

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रांची : गिरिडीह: मरांग बुरू (पारसनाथ) पर झारखंड के आदिवासी मूलवासी समाज  का सदियों से जन्मसिद्ध अधिकार है, इसे दुनिया की कोई ताकत चाहे कोई भी सरकार रहे, उन्हें अधिकार से वंचित नहीं कर सकती. अगर ऐसा हुआ तो केंद्र व  राज्य सरकारों को इसके गंभीर परिणाम भुगतनी पड़ सकती है. उपरोक्त बातें झारखंड बचाओ मोर्चा के केंद्रीय संयोजक सह आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने कही. गिरिडीह में मंगलवार को मरांग  बुरू बचाओ अभियान के तहत हुए महाजुटान कार्यक्रम में देश के विभिन्न एवं राज्य के विभिन्न जिलों से लाखों की संख्या में उपस्थित आदिवासी-मूलवासी के महाजुटान कार्यक्रम की सफलता पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

जैन धर्मावलंबी आदिवासी संस्कृति पर हमला करना बंद करें

श्री नायक ने कहा कि मरांग बुरु बचाओ अभियान आंदोलन के अब दूसरे चरण में 30 जनवरी को भगवान बिरसा मुंडा का जन्म स्थल खूंटी के उलीहातू में एक दिवसीय उपवास का कार्यक्रम किया जाएगा. इसके बाद भी सरकार ने अगर ध्यान नहीं दिया तो फिर भोगनाडीह में 2 फरवरी को सिद्धू कानू के जन्म स्थल पर विशाल उपवास कार्यक्रम केंद्रीय संयोजक विधायक लोबिन हेंब्रम के नेतृत्व में किया जाएगा. इसके बाद भी अगर सरकार की नींद नहीं टूटी तो फिर चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा. श्री नायक ने कहा कि जैन धर्मावलंबी झारखंड के आदिवासी मूलवासी के रीति-रिवाज उनकी संस्कृति पर हमला करना बंद करें और भगवान महावीर के संदेश (जियो और जीने दो) की नीति पर काम करने का काम करें. उन्होंने कहा कि यह बहुत अजीब बात है कि संविधान की 5वीं और 6वीं अनुसूची के अनुसार आदिवासी-मूलवासी के स्वामित्व वाली जमीन को गैर-आदिवासी नहीं खरीद सकते। लेकिन यहां धड़ल्ले से जैन संप्रदाय के लोग जमीन खरीद रहे हैं तथा ऊंचे-ऊंचे आश्रम बना रहे हैं।

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