गुमला – गुमला जिला अंतर्गत स्थित रायडीह प्रखंड मुख्यालय स्थित मर्दा में श्री श्री 108 श्री महासदाशिव मंदिर मरदा के सप्तम वार्षिकोत्सव संपन्न हुआ , इस वर्ष का सातवां वार्षिक महोत्सव सम्पन्न , उक्त आयोजन अपनी भव्यता और विशालता के कारण कई मायनों में अनोखा और अभूतपूर्व था। इस बार की निकली गयी भव्य और आकर्षक कलश यात्रा आकर्षण का केंद्र बनी रहीं और कानपुर के नाटकीय मंडली के कलाकारों की भव्य और आकर्षक झांकी प्रस्तुति को लोगों ने काफी सहारा उक्त विशाल जुलूस में देवों के देव महादेव की आकर्षक और भव्य विशालकाय श्री श्री 108 श्री भगवान सदाशिव की सजीव लीला देख कर लोग धन्य हो गए, जिसमें शिव के गले में विशालकाय जिंदा लिपटा हुआ अजगर और अन्य सर्प की माला झांकी को और भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ था , वहीं दूसरी ओर यात्रा में सुप्रसिद्ध लोकगायक नर्तक हुलास महतो के दल द्वारा प्रस्तुत नटुआ नाच,पाइका नाच आदि नृत्य सबका मन अनायास ही मोह रहा था , इस अवसर पर रायडीह नवागढ़ पतराटोली स्थित भगवती मां दुर्गा मंदिर से श्री श्री 108 श्री महासदाशिव मंदिर तक की विशाल जुलूस लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित श्री श्री 108 श्री सदाशिव मंदिर तक का क्षेत्र तय करते हुए , लगातार हर हर महादेव, जय माता पार्वती, हर हर महादेव – हर हर गंगे ,जय श्रीराम , श्री राम लखन जानकी जय बोलो हनुमान की,,,,, आदि नारों से संपूर्ण क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था और पूरा वातावरण भक्तिमय से सराबोर हो चुका था , साथ ही साथ लोग भक्ति रस में डुबकर अपना शुद्ध बुद्ध हर , उनके जेहन में मात्र एक ही नारा एक ही नाम आ रहा था, शिव भक्तों के मुंह से वह था, हर हर महादेव, हर हर गंगे , के नारे लगा रहे थे , सभी शिव भक्त , श्रद्धालु अलौकिक आनन्द की अनुभूति का एहसास कर रहे थे।
इस वर्ष का अखंड हरिकीर्तन का भी नजारा अनोखा रहा , भक्तगण चौबीस घंटे तक भक्तिमय रस की धारा में बहकर सभी भक्तगण ,,,,, हरे रामा हरे रामा , रामा रामा हरे हरे , हरे कृष्णा , हरे कृष्णा , कृष्णा कृष्णा हरे हरे एक धुन एक लय में हरि कीर्तन मंडली , सभी नर नारी , युवक युवती, बड़े बूढ़े और नन्हे – नन्हे बच्चे – बच्चियों भी काफी उत्साहित होकर उक्त अखंड हरि कीर्तन का हिस्सा बने रहे , उक्त अखंड हरि कीर्तन में विशेषकर बच्चे बच्चियों और महिलाओं की संख्या काफी अधिक थी। उक्त अखंड हरी कीर्तन में 6 मंडलियों को आमंत्रित किया गया था , वहीं विभिन्न गांवों से इस बार 12 मंडलियां स्वत: भाग लेने को आ पहुंची थी , जो हिन्दू सनातन धर्म के पुनर्जागरण की चेतना का बोध करा रही थी , अखण्ड हरिकीर्तन का समापन मंदिर प्रांगण में भक्तिमय वातावरण में अलौकिक आनंदोत्साह की पराकाष्ठा के साथ हुआ , जिसमें उपस्थित सभी भक्तगण भक्तिमय वातावरण में लाल, गुलाल, अबीर और रंगो की बौछार करते रहे और उक्त समापन समारोह का आनंद उठाते रहे, और उनके उत्साह में किसी प्रकार की कमी नहीं आई।
इस वर्ष की गंगा आरती भी अद्भुत थी। बनारस की गंगा आरती की तर्ज पर , उक्त महा आरती के प्रस्तुतकर्ता पियूष पाठक के साथ उनके नेतृत्व में रांची के अन्य पांच कलाकारों की उपस्थिति में मुख्य मंच पर अद्भुत और भव्य महाआरती की प्रस्तुति को लोगों ने काफी सहारा और उनकी प्रशंसा हुई , उपस्थित दर्शकों को ऐसा महसूस हुआ कि , बनारस की गंगा आरती का साक्षात् अवलोकन कर रहे हैं और मां गंगा के समीप होने की अनुभूति भक्तों ने महसूस की , इस बार आरती के साथ डमरूवादन का अनोखा मेल बनारस घाट की उक्त मां गंगा महाआरती की प्रस्तुति की कल्पना करने पर उपस्थित भक्तगण मजबूर हुए , क्योंकि उपस्थित भक्तगण उक्त मां गंगा आरती की प्रस्तुति को कमतर नहीं आंक सकें , उक्त समारोह स्थल पर स्थित मेले में, झूला, सहित कई प्रकार के मनोरंजन के खेल थे। मीना बाजार भी लगा था तथा प्रकार की अन्य दुकानें सजी थी। खाने पीने से लेकर रोजमर्रा की वस्तुएं भी उपलब्ध थी। जहां बच्चों और युवक युवतियों ने झूले और अन्य मनोरंजन के साथ ही साथ विशेष कर मिठाई दुकान और विभिन्न आकार प्रकार के व्यंजन के दुकानों सहित चार्ट दुकानों में भी फूचका, गोलगप्पा , पानीपुरी का खूब लुफ्त उठाया।
और अंत में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी नागपुरी , गीत, संगीत और विभिन्न आकार प्रकार के नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति हुई। उक्त विशेष समारोह कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीगणेश दीप प्रज्ज्वलित कर श्री गणेश किया गया, साथ ही साथ महावीर साहू ने बाबा भोलेनाथ की स्तुति प्रस्तुत किया गया , इस बार के कार्यक्रम के लिए मंच बड़ा नहीं था , आगे रैंप भी बना हुआ था , जिसमें कलाकारों और दर्शकों के नजदीक पहुंचने और दर्शकों को कलाकारों को निकट से देखने का मौका मिला। इस बार कई नए कलाकारों को आमंत्रित किया गया था , जिन्होंने अपनी उतकृष्ट कला प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। ओडिशा से पधारे महिला कलाकार उर्मिला महंतो की टीम की कला प्रस्तुति में जहां पौराणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पारंपरिक नाट्य कला शैली की छाप परिलक्षित होती थी , वहीं आकर्षक मन्नत जैसे कलाकारों ने आधुनिक और भोजपुरी गीत , नृत्य प्रस्तुत कर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया । महिला कलाकार रजनी, केशव देवी, रूपेश बड़ाइक आदि कलाकारों ने ठेठ नागपुरी विधाओं जैसे, मर्दाना झूमर, गोलवारी, डोमकच, अंगनाई, फगुआ, बंगला आदि विधाओं की प्रस्तुति की, जिसमें दर्शक रात भर या तो मंत्रमुग्ध हो कर संगीत का आनंद उठते रहे या थिरकते रहे। कुमारी खुशी ने अपने नाट्य नृत्य कला से सबका मन मोह लिया। इनकी एक प्रस्तुति में भगवान श्री कृष्ण की प्रेम लीला को दर्शाया गया था , वहीं दूसरे तरफ रावण द्वारा सीता हरण का चित्रण था।इस बार के कार्यक्रम की खूबी यह रही कि हुलास की मांदर की थाप और उनकी नृत्य कला देख दर्शक पूरी रात झूमते रहे , साथ ही साथ महिला कलाकार रजनी के साथ का डुएल डांस में ताल मेल देख कर संगीत प्रेमी भाव विभोर थे।
कुछ नए मेहमान कलाकार भी थे जिन्होंने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया ।
संगीत का यह कार्यक्रमाज प्रात: 6 बजे तक चलता रहा और हज़ारों की संख्या में दर्शक रात भर झूमते रहे। इन कार्यक्रम को को कर्णप्रिय संगीत से पिरोया था सिमडेगा के लिटिल स्टार ग्रुप ने।
मंच पर मुख्य और विशिष्ट अतिथि के रूप में महासदाशिव मंदिर संचालन समिति के मुख्य संरक्षक अनिरुद्ध सिंह, अध्यक्ष विज्ञान सिंह, सचिव जगदीश सिंह, शिवव्रत सिंह, शंकर पाण्डे, जगनारायण सिंह, आकाश सिंह, संजय सिंह आदि उपस्थित थे। विशिष्ट अतिथि के रुप में रायडीह के थाना प्रभारी कुंदन कुमार सिंह भी उपस्थित थे। संपूर्ण कार्यक्रम में संजय सिंह के देख रेख एवं नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।
इस बार सभी कलाकारों को मंदिर प्रबंधन की ओर से स्मृति चिह्न भेंट किया गया एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी किया गया।
इस प्रकार इस वर्ष का महोत्सव भक्ति भाव, सामाजिक समरसता, एकता का एक अमिट और अविस्मरणीय छाप छोड़ गया।
यह जानकारी महासदाशिव मंदिर संचालन समिति मरदा के मुख्य संरक्षक अनिरुद्ध सिंह ने दी।
न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया
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