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Sunday, March 8, 2026
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शहीद झिरगा लकड़ा को दी गई अंतिम विदाई, गोलियों की सलामी के साथ गांव ने नम आंखों से किया विदा

हार्ट अटैक से अहमदाबाद में हुई थी मौत, तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर पहुंचा गुमला के नवाडीह गांव

गुमला, झारखंड — 101 इंजीनियर रेजीमेंट के जवान झिरगा लकड़ा का पार्थिव शरीर शनिवार को जब उनके पैतृक गांव नवाडीह पहुंचा, तो माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया। गांव में चूल्हे तीन दिन से नहीं जले थे, और जैसे ही सेना की गाड़ी तिरंगे में लिपटे शरीर के साथ पहुंची, परिजनों की चीख-पुकार और लोगों की भीड़ ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया।

कब, कैसे हुई मौत?

जानकारी के अनुसार, झिरगा लकड़ा की पोस्टिंग अहमदाबाद में थी। 26 जून की रात वह आर्मी मेंस में भोजन करने पहुंचे थे, जहां उन्हें अचानक तेज़ हिचकी और उल्टी हुई। साथियों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई।

अंतिम दर्शन में उमड़ा जनसैलाब

पार्थिव शरीर को एयरलिफ्ट कर रांची लाया गया, जहाँ से सेना की गाड़ी द्वारा गुमला जिला अंतर्गत नवाडीह गांव लाया गया। शव के गांव पहुंचते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पत्नी अनीता लकड़ा, 10 वर्षीय पुत्री सृष्टि और 5 वर्षीय पुत्र अयास की चीखें सुनकर हर आंख नम हो उठी। अंतिम दर्शन के लिए आसपास के दर्जनों गांवों से लोग उमड़ पड़े। पूरे गांव में शोक की लहर थी।

सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई

शहीद जवान को गोलियों की तड़तड़ाहट और झुकी संगीनों के साथ सेना द्वारा पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान उनके साथ आए सेना के जवानों ने परिजनों को ढांढस बंधाया और भरोसा दिलाया कि रेजिमेंट की ओर से सभी आवश्यक सुविधाएं और लाभ परिवार को मिलते रहेंगे।

2009 में हुई थी सेना में नियुक्ति

शहीद जवान के साले संजय उरांव ने बताया कि झिरगा लकड़ा ने 2009 में 101 इंजीनियर रेजीमेंट में सेना की सेवा शुरू की थी। वह अनुशासित और समर्पित सैनिक थे। परिवार और गांव वालों के अनुसार, उनका गांव के प्रति लगाव बहुत गहरा था।

गांव में पसरा मातम

गांववालों ने बताया कि जवान की मौत की सूचना के बाद से गांव में तीन दिन तक चूल्हा नहीं जला। हर घर में मातमी सन्नाटा था। झिरगा लकड़ा का यूँ अचानक चले जाना न केवल परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव के लिए अपूरणीय क्षति है।


सालों तक देश की सेवा करने वाले जवान झिरगा लकड़ा की शहादत ने यह याद दिला दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा के पीछे कितने परिवारों के त्याग और आंसू छिपे होते हैं। अंतिम सलामी के साथ जब उनका पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हुआ, तो गांव ने एक वीर सपूत को गर्व और आँसुओं के साथ अंतिम विदाई दी।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया


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