बच्चो के लिए सुरक्षित, समावेशी और शोषण-मुक्त वातावरण के निर्माण का प्रयास, विद्यालय स्तर पर SCPC के गठन और प्रशिक्षित परामर्शदाता का प्रस्ताव हो रहा है तैयार
✦ झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक ने दो माह में नीति का ड्राफ्ट तैयार करने का दिया निर्देश, सभी स्कूलों में लागू होगी नीति
✦ अभिभावक बच्चों के पढ़ाई के साथ साथ भलाई के लिए भी सजग और जागरूक रहे – राज्य परियोजना निदेशक
झारखंड के सभी स्कूलों में बच्चो को एक सुरक्षित, समावेशी और शोषण-मुक्त वातावरण में शिक्षा प्रदान करने, और बच्चो के प्रति किसी भी प्रकार के शारीरिक, भावनात्मक, यौन, मौखिक या साइबर नुकसान के लिए शून्य सहनशीलता (zero tolerance) का वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा विभिन्न गैर सरकारी सामाजिक संगठनो के सहयोग से बाल संरक्षण और सुरक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। सब कुछ सही रहा, तो आने वाले दो माह के अंदर यह ड्राफ्ट तैयार भी हो जाएगा। आज झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा बाल संरक्षण और सुरक्षा नीति पर एक दिवसीय परामर्श सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र में झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. अविनव कुमार, प्रतिज्ञा फाउंडेशन से श्री अजय कुमार, यूनिसेफ से श्रीमती प्रीती श्रीवास्तव, चेंज इंक फाउंडेशन से श्रीमती गोपिका और श्रीमती स्मृति, बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री पीजूष सेन गुप्ता समेत विभिन्न गैर सरकारी/सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधि शामिल हुए।
सत्र को संबोधित करते हुए झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन ने कहा कि डिजिटल काल में स्कूली बच्चों के बीच तरह तरह के इन्फार्मेशन का संचार हो रहा है, उसे फ़िल्टर करने के लिए बच्चों को डायरेक्शन देना जरूरी है। हम घरों में भी देखते है कि आज के बच्चों का अवेयरनेस लेवल पहले के बच्चों से अलग है। आज का शैक्षणिक वातावरण भी अलग है। उसे जो माहौल मिलता है, उसी से बच्चो का व्यक्तिगत चरित्र निर्माण भी होता है।
श्री शशि रंजन ने कहा कि भारत सरकार ने बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले से ही ‘नो पनिशमेंट पॉलिसी’ लागू की है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि अभिभावक भी बच्चों के पढ़ाई और भलाई दोनों के लिए सजग और जागरूक रहे। बच्चों के साथ माता पिता भी संवेदनशीलता के साथ व्यवहार करे। आज बच्चे काफी समय मोबाइल पर व्यतीत करते है, उन्हें मोबाइल के सुरक्षित और सकारात्मक उपयोग के बारे में जागरूक करना जरूरी है। इन सभी विषयों को देखते हुए एक विस्तृत नीति बनायी जानी चाहिए।
स्कूलों में स्कूल बाल संरक्षण समिति (School Child Protection Committee – SCPC) के गठन का प्रस्ताव
परामर्श सत्र के दौरान राज्य के सभी स्कूलों में स्कूल बाल संरक्षण समिति (School Child Protection Committee – SCPC) के गठन का प्रस्ताव तैयार किया गया। यह समिति सभी विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी, शिकायतें प्राप्त करेगी और उनकी जाँच करेगी, तथा चाइल्डलाइन (1098), पुलिस और जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) के साथ समन्वय स्थापित कर कार्य करेगी। समिति प्रत्येक तिमाही में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और DCPU को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। किसी भी प्रकार के शोषण या नीति के सिद्धांतो के उल्लंघन की सूचना तुरंत शिक्षक / प्राचार्य / परामर्शदाता / SCPC को दिया जाएगा। SCPC यह सुनिश्चित करेगी कि बच्चे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर हो।
परामर्शदाता और मानसिक स्वास्थ्य सहायता
ड्राफ्ट में प्रत्येक विद्यालय में एक प्रशिक्षित परामर्शदाता (trained counsellor) कि अनिवार्यता पर बल दिया गया है, जो बच्चों को भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य आवश्यकताओं में सहायता करे। यदि अधिक सहायता की आवश्यकता हो, तो मामलों को टेली मानस हेल्पलाइन (14416 / 1800-89-14416) या अन्य अधिकृत सेवाओं को संदर्भित करे।
डिजिटल पोर्टल के विकास पर जोर
ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि नीति के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए शिक्षा विभाग और SCPC मिलकर एक डिजिटल पोर्टल विकसित करेंगे ताकि बाल संरक्षण मामलों की रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग में पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों और SCPC सदस्यों को बाल अधिकारों, POCSO अधिनियम, JJ अधिनियम और सकारात्मक अनुशासन पर समय समय पर प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। नीति की हर तीन वर्ष में या आवश्यकता अनुसार समीक्षा का प्रस्ताव है। यह समीक्षा स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (Department of School Education & Literacy) द्वारा SCPCR और DCPU के परामर्श से की जाएगी। निरंतर निगरानी से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि झारखंड के सभी विद्यालय सुरक्षित, समावेशी और बाल-अनुकूल वातावरण (child-friendly spaces) बने रहें।
यह नीति निम्नलिखित अधिनियमों और संधियों द्वारा निर्देशित है:
- संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार अभिसमय (UN Convention on the Rights of the Child – UNCRC)
- शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 – धारा 17 शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न को प्रतिबंधित करती है।
- बाल यौन अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012 – रिपोर्टिंग और गोपनीयता को अनिवार्य बनाता है।
- किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 – बाल-अनुकूल न्याय और पुनर्वास को बढ़ावा देता है।
News Desk
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