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Sunday, August 30, 2026
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30 अगस्त की आदिवासी महाजुटान रैली का BJP ने किया विरोध, चर्च मिशन पर लगाए गंभीर आरोप

गुमला न्यूज़ ब्यूरो – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: रांची के मोरहाबादी मैदान में 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान रैली को लेकर सियासी विरोध तेज हो गया है। भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के पदाधिकारियों ने शनिवार को गुमला के होटल बिंदेश में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रैली का विरोध किया। भाजपा नेताओं ने रैली के आयोजन और उसके उद्देश्य पर सवाल उठाते हुए आदिवासी समाज के लोगों से इसमें शामिल नहीं होने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को भाजपा महिला मोर्चा की महामंत्री सोना मनी उरांव, भाजपा जिलाध्यक्ष सागर उरांव और अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष छोटेलाल उरांव (भगत) ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।

रैली के पीछे चर्च मिशन का हाथ होने का आरोप

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी एकता के नाम पर चर्च मिशन की ओर से रैली का आह्वान किया गया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन समेत दूसरे मुद्दों के नाम पर आदिवासी समाज को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। नेताओं ने समाज के लोगों से ऐसे आयोजनों को लेकर सतर्क रहने की अपील की।

भाजपा नेताओं ने यह भी दावा किया कि आर्चबिशप हाउस की ओर से एक पत्र जारी कर ईसाई विश्वासियों से 30 अगस्त की रैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में आदिवासी समाज के राजनीतिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर प्रभाव स्थापित करने की कोशिश की जा सकती है।

परिसीमन को लेकर कांग्रेस-JMM पर भी निशाना

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं ने परिसीमन के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और झामुमो पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज के बीच गलत धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है।

भाजपा नेताओं ने जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ आदिवासी धार्मिक पहचान के मुद्दे को भी उठाया। उनका कहना था कि आदिवासी समाज से जुड़े संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों को आदिवासी संगठनों के माध्यम से प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए।

धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर भी उठाए सवाल

भाजपा नेताओं ने आदिवासी और ईसाई समुदायों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान को अलग-अलग बताते हुए कहा कि सरना समाज की अपनी विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने कहा कि इससे जुड़े मामलों का नेतृत्व आदिवासी संगठनों के माध्यम से ही होना चाहिए।

उन्होंने जल, जंगल, जमीन और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई और आदिवासी समाज से इन विषयों पर सजग एवं जागरूक रहने की अपील की।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने एक बार फिर 30 अगस्त को होने वाली रैली से आदिवासी समाज के लोगों को दूर रहने की अपील की।


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