25.1 C
Ranchi
Monday, September 14, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGumlaगुमला में तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग, शिव-पार्वती के साथ...

गुमला में तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग, शिव-पार्वती के साथ गणपति की भक्ति में डूबा जिला

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: गुमला में सोमवार को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का खास संयोग देखने को मिला। जिला मुख्यालय समेत जिले के अलग-अलग हिस्सों में महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना से हरतालिका तीज का निर्जला व्रत रखा। वहीं, कुंवारी कन्याओं ने मनचाहे वर की कामना से तीज का व्रत किया।

दूसरी ओर, गणेश चतुर्थी के मौके पर विभिन्न पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं की स्थापना के साथ पूजा-अर्चना शुरू हुई। पट खुलते ही गणपति के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कई जगहों पर महाआरती और धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।

पति की लंबी उम्र और मनचाहे वर की कामना

हरतालिका तीज को सुहागिन महिलाओं के प्रमुख व्रतों में माना जाता है। महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि इससे अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है।

वहीं, अविवाहित युवतियां भी मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता से हरतालिका तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव के अटूट प्रेम से जोड़ा जाता है।

सखियां पार्वती को ले गई थीं जंगल, इसलिए पड़ा ‘हरितालिका’ नाम

पंडितों के अनुसार ‘हरितालिका’ शब्द ‘हरत’ यानी हरण और ‘अलिका’ यानी सखी से मिलकर बना है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे।

माता पार्वती की सखियां उन्हें वहां से दूर घने जंगल में ले गईं। वहां उन्होंने कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कथा के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है।

एक दिन, दो बड़े पर्व

इस वर्ष पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने के कारण हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है। हरतालिका तीज के लिए उदया तिथि के आधार पर 14 सितंबर को व्रत रखा गया।

वहीं, सुबह 7:18 बजे के बाद चतुर्थी तिथि शुरू होने के साथ गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू हुआ। गणेश पूजा के लिए सुबह 11:03 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक का शुभ मुहूर्त बताया गया था।

इस विशेष संयोग के कारण श्रद्धालुओं के लिए सोमवार का दिन धार्मिक रूप से और भी खास रहा। एक तरफ महिलाएं शिव-पार्वती की आराधना में लीन रहीं, तो दूसरी ओर पूजा पंडालों में ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारे गूंजते रहे।

10 दिनों तक चलेगा गणेशोत्सव

गणेश चतुर्थी के साथ गुमला में 10 दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत हो गई है। विभिन्न स्थानों पर भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। पूजा-पंडालों में धार्मिक अनुष्ठान, आरती और अन्य कार्यक्रम शुरू हो गए हैं।

गणेशोत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। इसी दिन विभिन्न स्थानों पर स्थापित गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज श्रद्धा और निष्ठा से करने वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद मिलता है, जबकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा को सुख-समृद्धि और विघ्नों के निवारण से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में इस बार दोनों पर्वों का एक ही दिन पड़ना श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक अवसर बन गया।


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading