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Saturday, September 19, 2026
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कर्मा पूजा से पहले गुमला के छात्रों को मिला मांदर, DC बोले- संस्कृति को सहेजना हमारी जिम्मेदारी

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

Gumla: कर्मा पूजा को लेकर गुमला में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में जिला प्रशासन की ओर से कल्याण विभाग के आवासीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के बीच पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर का वितरण किया गया। कार्यक्रम का आयोजन सर्किट हाउस परिसर स्थित सभागार में हुआ।

उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने विद्यार्थियों के बीच मांदर वितरित किए। प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और लोक विरासत से जोड़ना है।

कर्मा पूजा में मांदर की थाप का खास महत्व

कर्मा पूजा झारखंड की जनजातीय संस्कृति से जुड़ा प्रमुख पर्व है। इस पर्व के दौरान मांदर की थाप, पारंपरिक गीत और सामूहिक नृत्य का विशेष महत्व होता है।

जिला प्रशासन की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी विद्यार्थियों को मांदर दिए गए हैं, ताकि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी रहे और पारंपरिक लोक विरासत को आगे बढ़ाने में उसकी भागीदारी हो।

‘आधुनिक बनें, लेकिन अपनी जड़ों को न भूलें’

कार्यक्रम में उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने विद्यार्थियों को कर्मा पूजा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी संस्कृति और परंपराओं से होती है। आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी सभ्यता, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को भूलना नहीं चाहिए।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी लोक परंपराओं को जानने, समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की अपील की। उपायुक्त ने कहा कि मांदर महज एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक जीवन की जीवंत अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कर्मा पर्व की मूल भावना—प्रकृति के प्रति सम्मान, भाईचारा, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकजुटता—को जीवन में अपनाने की बात कही।

अधिकारियों ने भी संस्कृति से जुड़े रहने का दिया संदेश

अपर समाहर्ता राजीव नीरज ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति सिर्फ त्योहारों तक सीमित नहीं है। इसमें जीवन जीने की समृद्ध परंपरा और प्रकृति के साथ संतुलन का संदेश भी शामिल है। उन्होंने मांदर वितरण को विद्यार्थियों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल बताया।

वहीं, अनुमंडल पदाधिकारी सदर अखिलेश कुमार ने कर्मा पूजा को सामाजिक समरसता, भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि मांदर की थाप झारखंड की लोक संस्कृति की विशिष्ट पहचान है और विद्यार्थियों को पारंपरिक कला एवं संस्कृति से जोड़ने से लोक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलेगी।

मांदर पाकर विद्यार्थियों में दिखा उत्साह

जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक कुमार ने कहा कि कल्याण विभाग के आवासीय विद्यालयों और महाविद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना भी जरूरी है। मांदर वितरण का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ पारंपरिक कला और लोक संगीत के प्रति रुचि बढ़ाना है।

मांदर मिलने के बाद विद्यार्थियों में खासा उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने कहा कि पारंपरिक वाद्य यंत्र के जरिए उन्हें अपनी संस्कृति को करीब से समझने और उसे आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मांदर की थाप के साथ अपनी पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के प्रति उत्साह भी प्रदर्शित किया।

कार्यक्रम में अपर समाहर्ता राजीव नीरज, अनुमंडल पदाधिकारी सदर अखिलेश कुमार, जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक कुमार, सहायक जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी एलीना दास समेत संबंधित पदाधिकारी-कर्मी और जिले के विभिन्न कल्याण आवासीय विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थी मौजूद रहे।


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