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Saturday, September 19, 2026
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गुमला में धूमधाम से मनाई गई विश्वकर्मा जयंती, पूजा पंडालों में दिखी आस्था और शिल्प-कौशल की झलक

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

Gumla: गुमला जिला मुख्यालय समेत पूरे जिले में 17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा जयंती का त्योहार धूमधाम से मनाया गया। अलग-अलग स्थानों पर आकर्षक पूजा पंडाल बनाए गए, जहां भगवान विश्वकर्मा की विभिन्न आकार-प्रकार की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। पंडालों को विद्युत सज्जा, LED लाइट और लेजर लाइट से सजाया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया।

भगवान विश्वकर्मा को भारतीय परंपरा में देवशिल्पी, वास्तुकार और सृजन-कौशल के अधिष्ठाता के रूप में स्मरण किया जाता है। हर वर्ष 17 सितंबर को मनाई जाने वाली विश्वकर्मा जयंती इसी सृजन और कौशल के प्रति सम्मान का अवसर मानी जाती है।

औजारों और मशीनों की पूजा के साथ श्रम का सम्मान

विश्वकर्मा पूजा के दौरान औजारों, मशीनों, उपकरणों, कारखानों और कार्यस्थलों की पूजा करने की परंपरा है। इसे केवल धार्मिक परंपरा के तौर पर ही नहीं, बल्कि उस श्रम-संस्कृति के सम्मान के रूप में भी देखा जाता है, जिसके जरिए समाज और देश के विकास की नींव तैयार होती है।

कारीगर, बढ़ई, लोहार, मिस्त्री, इंजीनियर, तकनीशियन, शिल्पकार, मशीन ऑपरेटर और निर्माण श्रमिक अपने हुनर और मेहनत से रोजमर्रा की जिंदगी को आकार देते हैं। किसी भी क्षेत्र का विकास केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं होता, बल्कि उसके पीछे तकनीकी दक्षता और लाखों लोगों का परिश्रम भी होता है।

पूजा के साथ गुणवत्ता और जिम्मेदारी का संकल्प

विश्वकर्मा जयंती का संदेश सिर्फ औजारों और मशीनों की पूजा तक सीमित नहीं है। इस अवसर पर अपने काम के प्रति ईमानदारी, गुणवत्ता और जिम्मेदारी का संकल्प लेने की जरूरत पर भी जोर दिया जाता है।

मान्यता और परंपरा का भाव यह है कि अगर औजार पवित्र हैं तो उनसे किए जाने वाले काम में भी उत्कृष्टता और जिम्मेदारी होनी चाहिए। निर्माण और तकनीकी कार्यों में गुणवत्ता और सुरक्षा को महत्व देना इसी सोच का हिस्सा है।

कौशल विकास से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

आज के दौर में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ रोजगार पैदा करने वाली युवा शक्ति तैयार करना भी एक बड़ी चुनौती है। कौशल विकास, स्थानीय शिल्प, छोटे और कुटीर उद्योगों तथा तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा देकर युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

विश्वकर्मा जयंती हुनर को सम्मान देने, हुनरमंद लोगों को अवसर उपलब्ध कराने और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में सामाजिक चेतना का अवसर भी बन सकती है।

हुनर और आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ने का संदेश

विश्वकर्मा जयंती का व्यापक संदेश सृजन, श्रम, कौशल, तकनीक और जिम्मेदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने का है। जरूरत ऐसे विकास की है, जहां पारंपरिक हुनर और आधुनिक तकनीक एक-दूसरे के पूरक बनें।

साथ ही श्रमिकों को केवल श्रमशक्ति के तौर पर नहीं, बल्कि निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में सम्मान मिले। हर निर्माण में गुणवत्ता, सुरक्षा और लोककल्याण की भावना हो—विश्वकर्मा जयंती इसी सोच को आगे बढ़ाने का अवसर देती है।


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