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Wednesday, November 4, 2026
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चंदाली स्थित ईवीएम वेयरहाउस हाउस का उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो द्वारा किया गया निरीक्षण

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला समाहरणालय चंदाली स्थित ईवीएम वेयरहाउस हाउस का मासिक निरीक्षण जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो ने किया।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त के द्वारा ईवीएम वेयर हाउस की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित आवश्यक पहलुओं, सीसीटीवी व अन्य उपकरणों की स्थिति और रख रखाव आदि की जांच की गई। उन्होंने संपूर्ण परिसर का भ्रमण कर जायजा लिया तथा विद्युत व्यवस्था, बैलट यूनिट हॉल, अग्निशमन व्यवस्था, कमरों के सीलिंग, डबल लॉक की स्थिति एवं निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित अन्य मानदंडों का निरीक्षण कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

मौके पर संबंधित प्रशासनिक एवं निर्वाचन शाखा के कर्मी एवं राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिले के सभी मध्य, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में 05 नवंबर को होगी बाल सुरक्षा विषय पर निबंध प्रतियोगिता

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

पॉक्सो जागरूकता अभियान के तहत कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी लेंगे भाग

बाल अधिकार एवं सुरक्षित असुरक्षित व्यवहार के प्रति किया जाएगा जागरूक।

गुमला : – गुमला जिला में बच्चों की सुरक्षा, बाल अधिकारों तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं झारखंड शिक्षा परियोजना, गुमला द्वारा संचालित पॉक्सो जागरूकता (सुरक्षित बचपन अभियान) के तहत दिनांक 05 नवंबर 2026 को जिले के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त एवं निजी मध्य, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

सुश्री कविता खलखो, जिला शिक्षा पदाधिकारी गुमला द्वारा बताया गया कि उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन के निदेश अनुरूप जिले के वैसे सभी सरकारी अल्पसंख्यक एवं निजी विद्यालयों जहाँ कक्षा 06 से 12 तक की पढ़ाई होती है, को विद्यार्थियों के बीच “बाल सुरक्षा एवं सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार” विषय पर विद्यालय स्तरीय निबंध प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्देश दिया गया है ।

उन्होंने बताया कि संबंधित विषय पर विद्यार्थियों के बीच निबंध प्रतियोगिता दो श्रेणियों में होगी। प्रथम श्रेणी में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थी एक घंटे में 300 से 350 शब्दों का निबंध लिखेंगे, जबकि द्वितीय श्रेणी में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी 500 से 600 शब्दों में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे।

बच्चों को सुरक्षित एवं असुरक्षित व्यवहार की पहचान, बाल शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने, सहायता प्राप्त करने के तरीकों तथा बाल सुरक्षा में परिवार, विद्यालय, समाज एवं प्रशासन की भूमिका के प्रति जागरूक करना एवं बाल अधिकारों की जानकारी देना इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

प्रतियोगिता के आयोजन एवं मूल्यांकन के लिए विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक की अध्यक्षता में शिक्षकों की समिति गठित की जाएगी। दोनों श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का चयन कर उनके निबंध संकुल स्तर पर भेजे जाएंगे। इसके बाद संकुल एवं प्रखंड स्तर पर मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी करते हुए चयनित विद्यार्थियों की सूची एवं निबंध जिला कार्यालय को उपलब्ध कराए जाएंगे।

जिला स्तर पर गठित मूल्यांकन समिति द्वारा दोनों श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित प्रतिभागियों को माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के गुमला आगमन के अवसर पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने जिले के सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारियों, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों, प्रखंड साधनसेवियों, संकुल साधनसेवियों एवं विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों से अभियान को गंभीरता से लेते हुए 05 नवंबर को प्रतियोगिता का सफल आयोजन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

यह पहल बच्चों को जागरूक, सजग एवं आत्मरक्षात्मक बनाने के साथ-साथ विद्यालयों में सुरक्षित एवं बाल हितैषी वातावरण विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राम भक्तों के लिए

वीबी–जी राम जी एवं आवास योजनाओं की प्रगति की उप विकास आयुक्त ने की समीक्षा, समयबद्ध लक्ष्य प्राप्ति के दिए निर्देश

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

प्रत्येक पंचायत में 150 श्रमिकों को कार्य से जोड़ने का लक्ष्य, प्रधानमंत्री आवास योजना की लंबित किस्तों का भुगतान एक सप्ताह में करने का निर्देश

गुमला : – गुमला उप विकास आयुक्त, अनिमेष रंजन की अध्यक्षता में आज वीबी–जी राम जी एवं विभिन्न आवास योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा को लेकर सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों एवं प्रखंड आवास समन्वयकों के साथ वीडियो संवाद के माध्यम से बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजनाओं के अंतर्गत श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने, मानव दिवस सृजन, वित्तीय प्रबंधन तथा आवास निर्माण की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
वीबी–जी राम जी के अंतर्गत पंचायतवार श्रमिकों की कार्य में सहभागिता की समीक्षा करते हुए उप विकास आयुक्त ने प्रत्येक पंचायत में कम से कम 150 श्रमिकों को कार्य से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंचायतों में संचालित सभी योजनाओं यथा बिरसा हरित ग्राम योजना, अबुआ आवास योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, तालाब निर्माण, मिट्टी एवं मुरुम सड़क निर्माण तथा कूप निर्माण सहित अन्य कार्यों में श्रमिकों की मांग सृजित करते हुए मानव दिवस सृजन के निर्धारित लक्ष्य को शत-प्रतिशत प्राप्त किया जाए।

समीक्षा के दौरान घाघरा प्रखंड की एक पंचायत में श्रमिकों की सहभागिता शून्य पाए जाने पर संबंधित ग्राम रोजगार सेवक का वेतन अवरुद्ध करते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया। साथ ही संबंधित प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी से भी स्पष्टीकरण की मांग की गई।
बैठक में वीबी–जी राम जी के अंतर्गत सामग्री मद एवं प्रशासनिक मद में उपलब्ध कराई गई राशि के विरुद्ध शत-प्रतिशत विपत्र तैयार कर कोषागार में जमा करने का निर्देश दिया गया, ताकि उपलब्ध राशि का समय पर व्यय सुनिश्चित करते हुए उपयोगिता प्रमाण पत्र विभाग को उपलब्ध कराया जा सके। वहीं, मजदूरी मद में उपलब्ध राशि का भी नियमानुसार विपत्र तैयार कर कोषागार में जमा करने का निर्देश सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दिया गया।

बिरसा सिंचाई कूप योजना के अंतर्गत राज्य मद से प्राप्त प्रति कूप 50 हजार रुपये की राशि का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश सभी प्रखंडों को दिया गया। इसके अतिरिक्त वीबी–जी राम जी के अंतर्गत सभी सक्रिय श्रमिकों के जॉब कार्ड का ई-केवाईसी से संबंधित लंबित कार्य आगामी 15 दिनों के भीतर पूर्ण करने का निर्देश सभी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों को दिया गया। निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप ई-सक्षम पाठ्यक्रम को भी समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराने को कहा गया।
आवास योजनाओं की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत लंबित किस्त भुगतान की स्थिति पर उप विकास आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही आवास निर्माण के विभिन्न चरणों एवं पूर्ण आवासों से संबंधित लंबित भौगोलिक तस्वीरांकन का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया। उन्होंने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं प्रखंड आवास समन्वयकों को इस कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा।

आवास योजना के क्रियान्वयन में खराब प्रदर्शन को लेकर जारी एवं बिशुनपुर प्रखंड के आवास समन्वयकों से स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया गया।

बैठक के अंत में उप विकास आयुक्त ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को योजनाओं के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा सभी लंबित कार्यों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन एवं लक्ष्य प्राप्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उक्त योजनाओं की प्रगति की पुनः समीक्षा आगामी 17 नवम्बर 2026 को की जाएगी।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिला अंतर्गत स्थित कोबजा गांव में – ग्राम सभा – ने सर्वसम्मति से लिया फैसला – उक्त गांव में मिशनरी ईसाई धर्म के पास्टर-पादरियों के प्रवेश पर लगाई पूर्ण रोक

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर ग्रामीणों ने जताई चिंता

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित रायडीह प्रखंड मुख्यालय के कोबजा गांव में ग्राम सभा आयोजित कर सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि मिशनरी ईसाई धर्म के पास्टर और पादरियों को उक्त गांव में प्रवेश पर रोक लगाने का सामूहिक निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के बाद ग्रामीणों की ओर से गांव में उक्त प्रतिबंध से संबंधित एक बोर्ड लगाया गया, और गांव के समस्त ग्रामीण उक्त ग्राम सभा में उपस्थित होकर मिशनरी ईसाई धर्म के पोस्टर और पादरियों के गांव में प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए, ग्रामीणों ने अपनी – अपनी बातों को रखते हुए उक्त धर्म परिवर्तन से संबंधित आवश्यक ग्राम सभा की बैठक में उक्त गांव और आसपास के ग्रामीण और बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष उपस्थित हुए।

उक्त कार्यक्रम में आईआरएस अधिकारी निशा उरांव भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। ग्रामीणों ने मिशनरी पोस्टर और पादरियों द्वारा गांव में घूम-घूम कर धर्म प्रचार और धर्मांतरण को लेकर उपस्थित ग्रामीणों ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे उनकी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक पहचान प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त क्षेत्र में लगातार धर्मांतरण की गतिविधियां चल रही हैं, जिससे आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
पेसा कानून और ग्राम सभा की शक्तियों पर हुई विशेष चर्चा

इस दौरान निशा उरांव ने कहा कि धर्मांतरण सरना समुदाय के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने पांचवीं अनुसूची क्षेत्र और पेसा कानून का उल्लेख करते हुए ग्रामीणों को ग्राम सभा की शक्तियों एवं अधिकारों के प्रति जागरूक होने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को प्राप्त अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए उक्त निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है।
ग्राम सभा के दौरान निशा उरांव ने ग्रामीणों के साथ मिलकर बैनर लगाया और गांव की परंपरा एवं सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संकल्प लिया।
गांव के सरना समुदाय के बिशु उरांव ने कहा कि क्षेत्र में लगातार धर्मांतरण की गतिविधियों से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होने की आशंका है। इसी को लेकर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया है।
वहीं, गांव की एक महिला ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में धर्मांतरण के साथ ही साथ उक्त गांव में चर्च निर्माण की भी कोशिश की जा रही है, इससे ग्रामीणों में अपनी परंपरा और अस्तित्व को लेकर विशेष चिंता बनी हुई है।

उक्त ग्राम सभा बैठक और उक्त फैसले के बाद पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और आदिवासी सांस्कृतिक पहचान को लेकर चर्चा काफी तेज हो गई है।

राम भक्तों के लिए

तपकारा एवं धनसिंहटोली जलाशय में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन, स्थानीय विस्थापितों एवं मत्स्य पालकों के लिए रोजगार सृजन की पहल

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला के स्थानीय जलाशयों के विस्थापितों एवं मत्स्य पालकों की आजीविका को सुदृढ़ करने तथा रोजगार के नए अवसर सृजित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की जा रही है। इसी क्रम में दिनांक 02 नवम्बर 2026 को पालकोट प्रखंड के तपकारा जलाशय तथा 03 नवम्बर 2026 को बसिया प्रखंड के धनसिंहटोली जलाशय में मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया।

यह कार्य तालाब एवं जलाशय मत्स्य के विकास एवं जीर्णोद्धार योजना के अंतर्गत संपन्न कराया गया। दोनों जलाशयों में स्थानीय मत्स्य बीज उत्पादकों द्वारा उपलब्ध कराई गई मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन किया गया। इस दौरान मुख्य रूप से जिला मत्स्य पदाधिकारी कुसुम लता, तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ उपायुक्त, गुमला द्वारा गठित जिला स्तरीय संचयन समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जलाशयों की मत्स्य उत्पादन क्षमता में वृद्धि करना तथा स्थानीय विस्थापित परिवारों एवं मत्स्य पालकों को आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। जलाशयों में मत्स्य अंगुलिकाओं के संचयन से आगामी समय में मछली उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय मत्स्य पालकों की आय में वृद्धि के साथ-साथ ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय जल संसाधनों के समुचित उपयोग, मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल से स्थानीय समुदाय को मत्स्य पालन से जोड़कर आत्मनिर्भर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

राम भक्तों के लिए

‘इंडिया’ की रैली नरेटिव गढ़ने और संदेश देने के लिहाज से सफल रही, आखिर सत्तापक्ष को भी जवाब में रैली करनी पड़ी

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दिल्ली के रामलीला मैदान ने 1975 में जेपी को देखा है, 1993 में बीजेपी को देखा और अब 2026 में राहुल गांधी के 12 साल के संघर्षरत धैर्य और राजनीतिक सफर का गवाह बना. रामलीला में भीड़ को लेकर भाजपाइयों और उनके गोदी के एंकर-एंकरानियों का विधवा विलाप असरहीन साबित हुआ है, लेकिन मौसमी सिंह की रिपोर्टिंग की ग्राउंड रिपोर्ट क़ाबिले तारीफ़ है. रामलीला की भीड़ ने यह जरूर दर्शा दिया है कि देश में लोकतंत्र अभी जिंदा है।

देश में अब तक सत्तापक्ष के खिलाफ जितने भी बड़े आंदोलन हुए है, उनमें आरएसएस की सक्रिय भागीदारी रही है। वह चाहे 1977 का इमरजेंसी के खिलाफ आंदोनल हो, वीपी सिंह का बोफोर्स के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरना रहा हो या फिर 2011 में अन्ना आंदोलन हो। आरएसएस ने कांग्रेस की सत्ता के खिलाफ होने वाले हर आंदोलन में सहयोग किया। कड़वा सच यह भी है कि आरएसएस ने कभी अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती नहीं दी।

यह समझा जाने लगा था कि आजाद भारत में कोई आंदोलन तब तक सफल नहीं हो सकता, जब तक आरएसएस उसे समर्थन न दे। भले ही वह पीछे से दिया गया हो या आगे आकर दिया गया हो। कांग्रेस की रामलीला मैदान में जो रैली हुई है, वह आरएसएस की भागीदारी के बिना हुई है। भले ही कीचड़ और पानी की वजह से मैदान का कुछ हिस्सा खाली रह गया हो, लेकिन जनसैलाब ने बता दिया कि बीजेपी की सत्ता को चुनौती मिल रही है।

गोदी मीडिया पूरी शिद्दत और वफादारी से रैली को फ्लॉप बताने की कोशिश कर रहा है। सत्तापक्ष को कितनी जबरदस्त चुनौती मिल रही है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि सत्तापक्ष को भी जवाब में रैली करनी पड़ी। बीजेपी नेताओं को सामने आकर रैली की आलोचना करनी पड़ी। 2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए का जो किला दरका था, उसकी दरारें और चौड़ी हो चुकी हैं। एमएलसी के चुनाव ने ट्रेलर दिखा दिया है। युवाओं की बेचैनी को बीजेपी समझ नहीं रही है। वह अभी भी समझती है कि धर्म के नाम पर मंदिर-मस्जिद के नाम पर नैया पार लगा लेगी।

कांग्रेस युवाओं के बीच यह बात पहुंचाने में कामयाब रही है कि इस सरकार के रहते उन्हें रोजगार नहीं मिलेगा। यह संदेश भी देने में कामयाब रही है कि वोट चोरी का आरोप हवा हवाई नहीं है।

डीएमके, बीजू जनता दल और आप पार्टी भले इंडिया गठबंधन की रैली में शामिल नहीं हुई लेकिन सीईसी के एसआईआर की तमाम खामियों को लेकर वे भी साथ दे रहे हैं. वहीं एनडीए के सहयोगी दलों का भी मन अब डोल रहा है. बहुत जल्द वे भी अपना नफा-नुकसान के अनुसार कदम उठा सकते हैं. सत्तापक्ष को दक्षिण का डर जरूर सता रहा है.

रैली की सफलता-असफलता को लेकर मोदी के दरबारी मीडिया चाहे जिस एंगेल से बयां कर लें परन्तु इतना जरूर आभास हो रहा है कि आज की परिस्थितियों के मद्देनजर देश की साठ प्रतिशत से अधिक लोगों को मोदी एंड कंपनी मोहभंग हो चुका है. इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता.

‘दस लाख’ के बयान से कांग्रेस की हुई किरकिरी, भाजपा को मजाक उड़ाने का मौका दिया 

वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक वर्मा और अन्य बुद्धिजीवियों  के अनुसार राहुल गांधी को अपने बड़बोलेपन पर नियंत्रण रखना होगा. रामलीला मैदान में भीड़ के लिहाज से रैली कमजोर रही। दिल्ली के पत्रकार और एक्टिविस्ट मित्रों के मुताबिक अधिकतम दो लाख की उपस्थिति थी। राहुल गांधी ने लगातार दस लाख लोगों के आने का दावा कर ख्वामखाह भाजपा को मजाक उड़ाने का मौका दे दिया।
अलबत्ता, नरेटिव गढ़ने और संदेश देने के लिहाज से रैली सौ प्रतिशत सफल रही। सफलता को दो पैमानों पर आंका जा सकता है। पहला यह कि इंडिया गठबंधन की ठोस एकजुटता दिखी। अभी तक इंडिया गठबंधन में दरारें ही दरारें दिखती थीं। दूसरी सफलता यह कि राहुल गांधी निर्विवाद रूप से देश में विपक्ष के नेता के रूप में स्थापित हो गए। कोई चुनौती नहीं दिख रही।
राहुल को चुनौती देने वाले ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल निपट चुके हैं। अखिलेश यादव बखूबी जानते हैं कि उनकी औकात उत्तर प्रदेश तक ही है। अखिलेश की महात्वाकांक्षा सबसे बड़े प्रदेश का मुखिया बनने तक ही सीमित रहेगी।

अब यह राहुल गांधी के ऊपर निर्भर करता है कि वे रामलीला मैदान से बने मोमेंटम को कितना आगे ले जाते हैं। यह सच्चाई है कि वोट चोरी, लोकतंत्र और संविधान जैसे मुद्दों का जनता पर बहुत ज्यादा असर नहीं है। आर्थिक असमानता, मंहगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे आम लोगों को छूते हैं। इन मुद्दों को जोड़ेंगे तभी एक देशव्यापी जनांदोलन खड़ा होगा।

2029 आने में दो साल से अधिक का समय है। मुद्दे सही और जनता को छूने वाले हों तो छह महीने में आंदोलन रफ्तार पकड़ लेगा। वैसे उत्तर प्रदेश में भाजपा का प्रदर्शन अगर कमजोर रहा तो इंडिया गठबंधन के लिए 2029 के लिए दिल्ली फतह आसान हो सकता है.

कांग्रेस को एक आवाज, एक विचार पर मंथन करना होगा

अशोक वर्मा अपने जेपी आंदोलन के अनुभव के बारे में बताते हैं कि जेपी आंदोलन मार्च में शुरू हुआ और अक्टूबर आते-आते इतनी प्रचंड रफ्तार पकड़ ली थी। 2 से 4 अक्टूबर,1974 का तीन दिनों का स्वयंर्स्फूत बिहार बंद हुआ था। दो लाख से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए थे। दिल्ली में बैठी सत्ता तक की चूलें हिल गई थीं। आंदोलनों के इतिहास से सबक लेना अच्छा होता है।

उन्होंने कहा कि दरअसल, कांग्रेस दो भागों में बंटा हुआ, एक है आरएसएस विरोधी राहुल गांधी के कांग्रेस और एक है आरएसएस प्रायोजित नरसिंहा राव की कांग्रेस. कांग्रेस की लड़ाई शुरू से आरएसएस के स्लीपर सेल से, ये स्लीपर सेल कांग्रेस में सेंट्रल कमेटी से लेकर बूथ कमेटी तक में मौजूद है.

कांग्रेस को अपनी पकड़ मजबूत करनी है तो सबसे पहले कांग्रेस के अंदर संघी स्लीपर सेल से मुक्त करना होगा। सेंट्रल कमेटी से लेकर बूथ कमेटी तक सभी में एक आवाज एक विचार पर आंदोलन करने के बाद ही कांग्रेस पुनःस्थापित होगा।

कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा है कमज़ोर

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी की परिपक्वता को लेकर सवाल उठाया है. वोट चोरी और मतदाता सूचियों से नाम काटे जाने जैसे मुद्दे ग्रामीण जनता या कम पढ़े-लिखे लोगों की समझ से परे है. राहुल को असल मुद्दे उठाने चाहिए। इसी से आम जनता में उनकी सही छवि बनेगी।

असल मुद्दे हैं, बेरोज़गारी, मंहगाई , भ्रष्टाचार आदि। नफ़रत के बीज इतने गहरे हैं कि उनको आसानी से मिटाया नहीं जा सकता। इसे कोई सेकुलर सरकार ही कुछ हद तक कम कर सकती है। दूसरी बात यह कि कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा बहुत ही कमज़ोर है। बूढ़े और अकर्मण्य लोग पार्टी में भरे हुए हैं। इसलिए ज़रूरी है कि युवा पीढ़ी के ऐसे लोगों को स्थान दिया जाय जो कर्मठ और जुझारू हों। राजनीति में भावनाएं काम नहीं करतीं।

संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक से राहुल गांधी के परिवार पर घोर आपत्तिजनक कमेंट किये गये पर गांधी परिवार की ओर से कभी पलटवार नहीं किया गया. कई बार भाजपा के शीर्ष नेता से लेकर छुटभैये नेताओं ने बहुत हल्की बातें कही. कई मामलों में तो मानहानि का मुकदमा दायर हो सकता है पर राहुल गांधी ने कभी इसके लिए कदम नहीं उठाया जबकि राहुल गांधी पर आज भी मानहानि के कई मुकदमे चल रहे हैं. 

 

राम भक्तों के लिए

RTI के जवाब में हुआ खुलासा…CBSE ने 12वीं के नतीजों के बाद कॉपियों की दोबारा जांच के लिए छात्रों से वसूले 16.47 करोड़ रुपये, पर अंक बढ़ने के बावजूद छात्रों को फीस वापस नहीं मिली

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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन के लिए छात्रों से कुल 16.47 करोड़ रुपये (अनंतिम आंकड़ा) जुटाए. हालांकि, बोर्ड ने यह नहीं बताया कि इन सेवाओं के लिए कुल कितने छात्रों ने आवेदन किया था. यह जानकारी हिंदुुुस्तान टाइम्स (एचटी) की ओर से दायर एक आरटीआई के जवाब में सामने आई है.

बोर्ड के मुताबिक, दोबारा मूल्यांकन के बाद जिन छात्रों के अंक बढ़े, उन्हें कुल 3.57 करोड़ रुपये लौटाए गए. यह कुल वसूली का करीब 21.68 फीसदी है. लेकिन सीबीएसई ने यह जानकारी नहीं दी कि कितने छात्रों को रिफंड मिला. कई छात्रों ने एचटी को बताया कि अंक बढ़ने के बावजूद उन्हें फीस वापस नहीं मिली.

14 अक्टूबर को दिए गए आरटीआई जवाब में सीबीएसई ने बताया कि स्कैन कॉपी के लिए छात्रों से 11.37 करोड़ रुपये और अंकों के सत्यापन तथा दोबारा मूल्यांकन के लिए संयुक्त रूप से 5.10 करोड़ रुपये मिले. बोर्ड ने कहा कि वह अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन से हुई कमाई का अलग-अलग हिसाब नहीं रखता. दोनों सेवाओं की फीस एक ही मद में दर्ज की जाती है.

पोर्टल की दिक्कतों और रिफंड को लेकर शिकायतों का अंबार

छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों और रिफंड न मिलने की शिकायत भी की है. 2026 की परीक्षा देने वाले एक छात्र ने एचटी को बताया कि वह पांच विषयों के 32 सवालों की दोबारा जांच के लिए आवेदन करना चाहता था. उसे उम्मीद थी कि इससे उसके कुल अंक 27 तक बढ़ सकते थे.

छात्र के मुताबिक, उसने स्कैन कॉपी के लिए 500 रुपये दिए थे. 7 जून को रात 10.45 बजे तक उसने दोबारा मूल्यांकन के लिए सभी सवाल भर दिए थे, लेकिन पोर्टल ने उसे लॉग आउट कर दिया. इसके बाद एक घंटे तक कोशिश करने के बावजूद वह दोबारा लॉग इन नहीं कर सका.

दिल्ली के एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल के 12वीं के आधे से ज्यादा छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था. उनके मुताबिक, एक छात्र के एक विषय में अंक 78 से बढ़कर 100 हो गए. वहीं, तीन से चार छात्रों को अलग-अलग विषयों में पूरे अंक मिले.

गुरुग्राम के एक सीबीएसई स्कूल के प्रिंसिपल ने ऑनलाइन मूल्यांकन और दोबारा जांच की प्रक्रिया को अव्यवस्थित बताया. उन्होंने कहा कि अपने दशकों के शिक्षण और स्कूल प्रशासन के अनुभव में उन्होंने इतनी अफरातफरी नहीं देखी. उनके मुताबिक, एक छात्र के एक विषय में दोबारा जांच के बाद 30 अंक बढ़े. प्रक्रिया में देरी के कारण कुछ छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करने का मौका भी गंवा बैठे.

दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रही 12वीं की एक पूर्व छात्रा ने बताया कि उसने पांच विषयों की स्कैन कॉपी, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन पर करीब 1,000 रुपये खर्च किए थे. उसके अंक सभी विषयों में बढ़े, लेकिन उसे कोई रिफंड नहीं मिला. उसका कुल स्कोर 88 फीसदी से बढ़कर 89.9 फीसदी हुआ. हालांकि, वह 92 फीसदी अंक की उम्मीद कर रही थी.

एक अन्य छात्र ने बताया कि अलग-अलग विषयों में उसके अंक पांच से 15 तक बढ़े. इससे उसका कुल प्रतिशत 89 से बढ़कर 92 हो गया. इसके बावजूद उसे भी फीस वापस नहीं मिली.

पुणे के संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल्स के ट्रस्टी प्रनीत मुंगली ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और दोबारा मूल्यांकन से पारदर्शिता बढ़ सकती है. लेकिन प्रक्रिया में वास्तविक मूल्यांकन संबंधी गलतियों और छात्रों की उम्मीदों के बीच अंतर को समझना जरूरी है. उन्होंने डिजिटल मूल्यांकन की शुरुआत के दौरान इंटरनेट की गति, प्रशिक्षण की कमी और छात्रों के बीच अनिश्चितता को भी समस्या बताया.

सीबीएसई की बैठक को लेकर भी नहीं मिला जवाब

एचटी ने आरटीआई में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की 143वीं बैठक का कार्यवृत्त भी मांगा था. बोर्ड ने जवाब दिया कि आरटीआई में जिस तरह की बैठक का जिक्र है, वैसी कोई बैठक हुई ही नहीं.

आमतौर पर सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक जून और दिसंबर में होती है. बोर्ड की पिछली दो बैठकें जून और दिसंबर 2025 में हुई थीं.

सीबीएसई ने 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कराई थीं. नतीजे 13 मई को घोषित हुए थे. इस साल पास प्रतिशत 85.20 रहा, जबकि 2025 में यह 88.39 फीसदी था.

ऑनलाइन मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों के बीच बोर्ड ने 17 मई को स्कैन कॉपी लेने की फीस 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये प्रति विषय कर दी थी. अंकों के सत्यापन की फीस 500 से घटाकर 100 रुपये और दोबारा मूल्यांकन की फीस 100 से घटाकर 25 रुपये प्रति सवाल कर दी गई थी. बोर्ड ने यह भी कहा था कि दोबारा मूल्यांकन में अंक बढ़ने पर पूरी फीस वापस की जाएगी. स्कैन कॉपी के लिए आवेदन 19 से 26 मई तक लिए गए थे. वहीं, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन के लिए पोर्टल 1 से 7 जून तक खुला था.

-द वायर से साभार

राम भक्तों के लिए

गुमला में सीएम हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने पहुंचे भाजपा कार्यकर्ता, पुलिस ने पुतला छीना

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गम्हरिया में महिला के साथ कथित दुष्कर्म की घटना को लेकर भाजपा का विरोध प्रदर्शन, जिलाध्यक्ष सागर उरांव ने सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी दबाने का लगाया आरोप

गुमला। झारखंड में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर भाजपा ने गुमला में राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने की तैयारी थी, लेकिन मौके पर पहुंचे सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार पुलिस बल के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं के हाथ से पुतला लेकर चले गए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष सागर उरांव ने की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में लोगों को अपनी बात रखने और विरोध जताने की आजादी भी नहीं है। उनके मुताबिक, सरकार पुलिस का इस्तेमाल अपने कार्यकर्ताओं की तरह कर रही है।

भाजपा नेताओं ने सरायकेला-खरसावां के गम्हरिया में एक महिला के साथ पुलिसकर्मी द्वारा कथित दुष्कर्म की घटना को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। जिलाध्यक्ष सागर उरांव ने कहा कि सरकार महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात करती है, लेकिन राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं सामने आ रही हैं।

भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष मुनेश्वर साहू ने राज्य सरकार को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि प्रदेश की महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मईयां सम्मान योजना के नाम पर महिलाओं के मान-सम्मान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

वहीं, महिला मोर्चा की महामंत्री पायल तिवारी ने कहा कि गम्हरिया की घटना से महिलाओं के बीच असुरक्षा का माहौल बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पहले की तुलना में खराब हुई है।

कार्यक्रम में निर्मल गोयल, श्याम सुंदर साहू, सुरेश नाथ सिंह, संदीप प्रसाद, दामोदर कसेरा, विनोद प्रसाद, सबिन्द्र कुमार सिंह, मंगल सिंह, अनीता देवी, उर्मिला पन्ना, नीलम गुप्ता, सावित्री देवी, रेखा सिन्हा, खुशी कुमारी, देवेंद्र लाल उरांव, कौशलेंद्र जमुवार, कौशल साहू, सुजीत नंदा, किशोर मिश्रा, अजय साहू, शंभू सिंह, जयंत प्रसाद, शंकर उरांव, जय प्रकाश, सूरज सिंह और आकाश दीप समेत कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे।

राम भक्तों के लिए

गुमला पुलिस को मेरी बड़ी सफलता – गुमला में 18.57 ग्राम* *ब्राउन शुगर के साथ तीन युवक गिरफ्तार

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला पुलिस ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ छेड़ा अभियान

गुमला : – जिला पुलिस कप्तान हारिस बिना जामां दिशा निर्देश पर
कार्रवाई करते हुए गुमला जिला मुख्यालय स्थित करंज मोड़ सोसो के पास से ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री और सेवन में लिप्त तीन युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। गुमला पुलिस कप्तान हारिस बिन जामां को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध युवक जिला मुख्यालय में नशीले पदार्थों की बड़ी खेप खपाने की फिराक में हैं। उक्त गुप्त सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए , उक्त गुप्त सूचना की सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए, और एक छापामारी जल का गठन किया गया और उक्त अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य उक्त पुलिस टीम को त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिस पर कार्रवाई करते हुए उक्त छापामारी दल ने उक्त इलाके की घेराबंदी की और मौके से तीनों आरोपियों को दबोच लिया, और उक्त तीनों आरोपियों की तलाशी लेने पर उनके पास से 18.57 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की गई।
गुमला पुलिस ने ब्राउन शुगर की उक्त खेप के अलावा उक्त घटना में इस्तेमाल की जा रही, एक स्कूटी को भी जब्त कर लिया है, जिस पर सवार होकर उक्त तीनों आरोपी डिलीवरी और खरीद- फरोख्त का कार्य कर रहे थे, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि तकनीकी इनपुट और गुप्त सूचना के आधार पर यह कामयाबी गुमला पुलिस मिली है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि क्षेत्र में नशे के अवैध धंधे, तस्करी और सेवन के खिलाफ गुमला पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा और इस सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा।

राम भक्तों के लिए

जिला स्तरीय राष्ट्रीय युवा महोत्सव–2027 का हुआ आयोजन, 200 से अधिक युवाओं ने दिखाई प्रतिभा

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

‘नशा मुक्त युवा – विकसित भारत’ की थीम पर आयोजित हुआ विकसित भारत युवा लीडर डायलॉग (VBYLD), पांच विधाओं में हुई प्रतियोगिताएं

गुमला : – गुमला जिला में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य शाखा के अंतर्गत जिला खेल कार्यालय, गुमला द्वारा कुड़ुख सांस्कृतिक भवन, बम्हनी में जिला स्तरीय राष्ट्रीय युवा महोत्सव–2027 एवं विकसित भारत युवा लीडर डायलॉग (VBYLD) का आयोजन किया गया। ‘नशा मुक्त युवा – विकसित भारत’ की थीम पर आयोजित इस महोत्सव में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 200 से अधिक बालक एवं बालिका प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनमें नेतृत्व क्षमता, रचनात्मक सोच एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना तथा भारतीय कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देना था। इसके माध्यम से युवाओं को नशामुक्त समाज के निर्माण और विकसित भारत के संकल्प में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश भी दिया गया।

अतिथियों ने किया युवाओं का उत्साहवर्धन

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उप विकास आयुक्त, गुमला अनिमेष रंजन उपस्थित रहे। वहीं, जिला परिषद उपाध्यक्ष, गुमला विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त जिला खेल पदाधिकारी, जिला युवा अधिकारी, माई भारत , गुमला तथा जिला स्तरीय पर्यटन विशेषज्ञ सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही।

पांच विधाओं में आयोजित हुईं प्रतियोगिताएं

महोत्सव के दौरान 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं के लिए पांच विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इनमें चित्रकला, कविता लेखन, नुक्कड़ नाटक, सामूहिक लोकगीत एवं सामूहिक लोकनृत्य शामिल रहे।

प्रतिभागियों ने अपनी कला एवं रचनात्मकता के माध्यम से विभिन्न सामाजिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। चित्रकला एवं कविता लेखन में युवाओं ने अपनी कल्पनाशीलता और सामाजिक दृष्टिकोण को अभिव्यक्त किया, वहीं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता एवं सकारात्मक बदलाव का संदेश दिया गया। सामूहिक लोकगीत एवं लोकनृत्य की प्रस्तुतियों में जिले की समृद्ध लोकसंस्कृति और पारंपरिक कला की झलक देखने को मिली।

प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागी

आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों एवं समूहों को स्थान के अनुसार चयनित किया गया।

. चित्रकला प्रतियोगिता

1. विंसी केशरी – प्रथम
2. नकुल मुंडा – द्वितीय
3. तनीषा कुमारी – तृतीय

कविता लेखन प्रतियोगिता

1. इशिका कुमारी – प्रथम
2. सोनमती कुमारी – द्वितीय
3. नीलम कुमारी – तृतीय

नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता

1. कार्तिक उरांव बी.एड. कॉलेज, गुमला – प्रथम
2. परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज, चैनपुर – द्वितीय
3. बी.एन. जालान कॉलेज, सिसई – तृतीय

सामूहिक लोकगीत प्रतियोगिता

1. संध्या एवं समूह, परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज, चैनपुर – प्रथम
2. मनीषा एवं समूह, परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज, चैनपुर – द्वितीय
3. कार्तिक उरांव कॉलेज, गुमला – तृतीय

सामूहिक लोकनृत्य प्रतियोगिता

1. परमवीर अल्बर्ट एक्का मेमोरियल कॉलेज, चैनपुर – प्रथम
2. कार्तिक उरांव कॉलेज, गुमला – द्वितीय
3. सेंट इग्नेशियस इंटर कॉलेज, गुमला – तृतीय

कार्यक्रम के समापन पर जिला खेल कार्यालय, गुमला द्वारा सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, निर्णायकों एवं आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही युवाओं से नशे से दूर रहने, नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने, भारतीय कला एवं संस्कृति के संरक्षण तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय योगदान देने की अपील की गई।

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