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Monday, November 2, 2026
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RTI के जवाब में हुआ खुलासा…CBSE ने 12वीं के नतीजों के बाद कॉपियों की दोबारा जांच के लिए छात्रों से वसूले 16.47 करोड़ रुपये, पर अंक बढ़ने के बावजूद छात्रों को फीस वापस नहीं मिली

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 2026 की 12वीं बोर्ड परीक्षा के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन के लिए छात्रों से कुल 16.47 करोड़ रुपये (अनंतिम आंकड़ा) जुटाए. हालांकि, बोर्ड ने यह नहीं बताया कि इन सेवाओं के लिए कुल कितने छात्रों ने आवेदन किया था. यह जानकारी हिंदुुुस्तान टाइम्स (एचटी) की ओर से दायर एक आरटीआई के जवाब में सामने आई है.

बोर्ड के मुताबिक, दोबारा मूल्यांकन के बाद जिन छात्रों के अंक बढ़े, उन्हें कुल 3.57 करोड़ रुपये लौटाए गए. यह कुल वसूली का करीब 21.68 फीसदी है. लेकिन सीबीएसई ने यह जानकारी नहीं दी कि कितने छात्रों को रिफंड मिला. कई छात्रों ने एचटी को बताया कि अंक बढ़ने के बावजूद उन्हें फीस वापस नहीं मिली.

14 अक्टूबर को दिए गए आरटीआई जवाब में सीबीएसई ने बताया कि स्कैन कॉपी के लिए छात्रों से 11.37 करोड़ रुपये और अंकों के सत्यापन तथा दोबारा मूल्यांकन के लिए संयुक्त रूप से 5.10 करोड़ रुपये मिले. बोर्ड ने कहा कि वह अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन से हुई कमाई का अलग-अलग हिसाब नहीं रखता. दोनों सेवाओं की फीस एक ही मद में दर्ज की जाती है.

पोर्टल की दिक्कतों और रिफंड को लेकर शिकायतों का अंबार

छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतों और रिफंड न मिलने की शिकायत भी की है. 2026 की परीक्षा देने वाले एक छात्र ने एचटी को बताया कि वह पांच विषयों के 32 सवालों की दोबारा जांच के लिए आवेदन करना चाहता था. उसे उम्मीद थी कि इससे उसके कुल अंक 27 तक बढ़ सकते थे.

छात्र के मुताबिक, उसने स्कैन कॉपी के लिए 500 रुपये दिए थे. 7 जून को रात 10.45 बजे तक उसने दोबारा मूल्यांकन के लिए सभी सवाल भर दिए थे, लेकिन पोर्टल ने उसे लॉग आउट कर दिया. इसके बाद एक घंटे तक कोशिश करने के बावजूद वह दोबारा लॉग इन नहीं कर सका.

दिल्ली के एक स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल के 12वीं के आधे से ज्यादा छात्रों ने दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था. उनके मुताबिक, एक छात्र के एक विषय में अंक 78 से बढ़कर 100 हो गए. वहीं, तीन से चार छात्रों को अलग-अलग विषयों में पूरे अंक मिले.

गुरुग्राम के एक सीबीएसई स्कूल के प्रिंसिपल ने ऑनलाइन मूल्यांकन और दोबारा जांच की प्रक्रिया को अव्यवस्थित बताया. उन्होंने कहा कि अपने दशकों के शिक्षण और स्कूल प्रशासन के अनुभव में उन्होंने इतनी अफरातफरी नहीं देखी. उनके मुताबिक, एक छात्र के एक विषय में दोबारा जांच के बाद 30 अंक बढ़े. प्रक्रिया में देरी के कारण कुछ छात्र विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करने का मौका भी गंवा बैठे.

दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रही 12वीं की एक पूर्व छात्रा ने बताया कि उसने पांच विषयों की स्कैन कॉपी, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन पर करीब 1,000 रुपये खर्च किए थे. उसके अंक सभी विषयों में बढ़े, लेकिन उसे कोई रिफंड नहीं मिला. उसका कुल स्कोर 88 फीसदी से बढ़कर 89.9 फीसदी हुआ. हालांकि, वह 92 फीसदी अंक की उम्मीद कर रही थी.

एक अन्य छात्र ने बताया कि अलग-अलग विषयों में उसके अंक पांच से 15 तक बढ़े. इससे उसका कुल प्रतिशत 89 से बढ़कर 92 हो गया. इसके बावजूद उसे भी फीस वापस नहीं मिली.

पुणे के संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल्स के ट्रस्टी प्रनीत मुंगली ने कहा कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी और दोबारा मूल्यांकन से पारदर्शिता बढ़ सकती है. लेकिन प्रक्रिया में वास्तविक मूल्यांकन संबंधी गलतियों और छात्रों की उम्मीदों के बीच अंतर को समझना जरूरी है. उन्होंने डिजिटल मूल्यांकन की शुरुआत के दौरान इंटरनेट की गति, प्रशिक्षण की कमी और छात्रों के बीच अनिश्चितता को भी समस्या बताया.

सीबीएसई की बैठक को लेकर भी नहीं मिला जवाब

एचटी ने आरटीआई में सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की 143वीं बैठक का कार्यवृत्त भी मांगा था. बोर्ड ने जवाब दिया कि आरटीआई में जिस तरह की बैठक का जिक्र है, वैसी कोई बैठक हुई ही नहीं.

आमतौर पर सीबीएसई की गवर्निंग बॉडी की बैठक जून और दिसंबर में होती है. बोर्ड की पिछली दो बैठकें जून और दिसंबर 2025 में हुई थीं.

सीबीएसई ने 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 के बीच 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कराई थीं. नतीजे 13 मई को घोषित हुए थे. इस साल पास प्रतिशत 85.20 रहा, जबकि 2025 में यह 88.39 फीसदी था.

ऑनलाइन मूल्यांकन को लेकर उठे सवालों के बीच बोर्ड ने 17 मई को स्कैन कॉपी लेने की फीस 700 रुपये से घटाकर 100 रुपये प्रति विषय कर दी थी. अंकों के सत्यापन की फीस 500 से घटाकर 100 रुपये और दोबारा मूल्यांकन की फीस 100 से घटाकर 25 रुपये प्रति सवाल कर दी गई थी. बोर्ड ने यह भी कहा था कि दोबारा मूल्यांकन में अंक बढ़ने पर पूरी फीस वापस की जाएगी. स्कैन कॉपी के लिए आवेदन 19 से 26 मई तक लिए गए थे. वहीं, अंकों के सत्यापन और दोबारा मूल्यांकन के लिए पोर्टल 1 से 7 जून तक खुला था.

-द वायर से साभार


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