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Friday, October 30, 2026
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CJP नेता सौरभ दास के साथ अपने संबंधों को लेकर पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल अपनी सफाई दी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास के साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सौरभ दास के मेंटर नहीं रहे हैं और दोनों की मुलाकात केवल एक-दो बार पत्रकार के तौर पर हुई थी। हालांकि, उन्होंने माना कि बातचीत के दौरान उन्होंने सौरभ को अपनी भाषा में संयम और नरमी बरतने की सलाह दी थी।

साल भर पहले सौरभ से मुलाकात हुई थी

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में जस्टिस कौल ने बताया कि सौरभ दास के साथ उनकी वायरल तस्वीर करीब एक साल पहले दिवाली के समय खींची गई थी। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर के आधार पर उनके विचारों और विचारधारा को लेकर धारणाएं बनाई जा रही हैं, जबकि उनकी मुलाकात का मकसद सामान्य बातचीत था।

जस्टिस कौल ने बताया कि दिवाली के दौरान सौरभ दास ने उनसे मिलने का आग्रह किया था। उस समय वह कहीं और जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने करीब 10 मिनट के लिए मिलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे। जस्टिस कौल के मुताबिक, मुलाकात इतनी ही थी और इसे किसी खास संबंध या मार्गदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सौरभ दास का मार्गदर्शन किया था, तो उन्होंने इससे इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि एक-दो मुलाकातों के दौरान उन्होंने सौरभ को अपनी भाषा पर ध्यान देने और बातचीत में संयम बरतने की सलाह जरूर दी थी।

जस्टिस कौल ने कहा कि अलग-अलग पीढ़ियों के बातचीत करने के तरीकों में अंतर होता है। उनकी पीढ़ी में सभ्य और शालीन भाषा को अधिक महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की भाषा और अभिव्यक्ति का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन कई बार इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द पुरानी पीढ़ी के लोगों को असहज कर सकते हैं।

ECE की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया

सीजेपी के युवा कार्यकर्ताओं को आक्रामक भाषा कम करने की सलाह देने के सवाल पर जस्टिस कौल ने कहा कि वह इस मामले में कोई विशेष सलाह नहीं देना चाहते। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह ऐसा करेंगे, तो अगले दिन खबर आ सकती है कि वह सीजेपी के नेताओं को सलाह दे रहे हैं। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए बताया कि किस तरह किसी सामान्य मुलाकात या बातचीत को अलग अर्थ दे दिया जाता है।

जस्टिस कौल ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी निष्पक्ष तीसरे पक्ष को शामिल करने की जरूरत है या नहीं। उनके मुताबिक, ऐसी नियुक्तियों में प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है।

 -देवेन्द्र कश्यप 


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