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Friday, October 30, 2026
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बाबा कार्तिक उरांव की जयंती पर गुमला के पुग्गु में लगभग 5 करोड़ की लागत से बनने वाले वृहद धूमकुड़िया भवन का मंत्री चमरा लिण्डा ने किया शिलान्यास

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में महान जननायक बाबा कार्तिक उरांव की जयंती के पावन अवसर पर आज गुमला प्रखंड अंतर्गत ग्राम पुग्गु में एक भव्य शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखण्ड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग (अल्पसंख्यक को छोड़कर) के मंत्री चमरा लिण्डा द्वारा राज्य संपोषित योजना के अंतर्गत चार करोड़ निन्यानवे लाख बहत्तर हजार पांच सौ रुपये ( ₹4,99,72,500/-) की प्राक्कलित राशि से निर्मित होने वाले वृहद धूमकुड़िया भवन का विधिवत शिलापट्ट अनावरण एवं पूजन कर शिलान्यास किया गया।

इस गरिमामयी अवसर पर जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, परियोजना निदेशक आईटीडीए, जिला कल्याण पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
प्रस्तावित वृहद धूमकुड़िया भवन को आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और युवाओं के शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखकर बहुउद्देशीय रूप से तैयार किया जा रहा है। इस आधुनिक भवन के भूतल पर एक विशेष प्रशिक्षण हॉल बनेगा, जहाँ मांदर, ढोल, नगाड़ा, झांझ और घंट सहित सभी आवश्यक पारंपरिक वाद्ययंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी पारंपरिक संगीत और नृत्य कला को सीख सके। इसके साथ ही भवन के ऊपरी तल पर विद्यार्थियों के लिए एक समृद्ध लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर की व्यवस्था होगी, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके। इसके अतिरिक्त, सामाजिक कार्यक्रमों और वैवाहिक आयोजनों के लिए भवन में एक विशाल विवाह हॉल का भी निर्माण कराया जाएगा।
शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री चमरा लिण्डा ने कहा कि जब हम अपने इतिहास, परंपराओं और संस्कृति को समझने लगते हैं, तब यह एहसास होता है कि हमने अपनी विरासत के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि जो कुछ हमने खोया है, उसे वापस लाने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने के लिए हमें अपनी संस्कृति को गहराई से जानना और समझना होगा, क्योंकि जुड़ाव पैदा होने पर ही उसे सहेजने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज युवाओं और कॉलेज के विद्यार्थियों में मांदर, नगाड़ा, ढोल और झांझ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों तथा लोकगीत-संगीत के प्रति रुचि कम होती जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान में भाषा, रीति-रिवाज, पारंपरिक वेशभूषा और वाद्ययंत्र महत्वपूर्ण आधार हैं, जिन्हें संविधान के तहत भी विशेष पहचान प्राप्त है। इसलिए अपनी भाषा और संस्कृति को संरक्षित रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
उन्होंने आगे कहा कि हमारी पारंपरिक धूमकुड़िया व्यवस्था केवल एक स्थान नहीं, बल्कि युवाओं के सीखने, सामाजिक व्यवहार को समझने और सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करने का माध्यम थी। सरकार का प्रयास है कि एक ही परिसर में संस्कृति के संरक्षण और युवाओं के शैक्षणिक विकास, दोनों की मजबूत व्यवस्था हो। एक तरफ हमारे बच्चे पारंपरिक वाद्ययंत्र सीखें, तो दूसरी ओर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर डॉक्टर, इंजीनियर और प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज का नाम रोशन करें।
उन्होंने उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन जैसे अधिकारियों के कठिन परिश्रम का उदाहरण देते हुए कहा कि सिविल सेवा या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सही मार्गदर्शन, उचित पुस्तकों के चयन और अनुभवी दिशा-निर्देश की बड़ी भूमिका होती है। सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण प्रतिभाएं आसानी से अपने लक्ष्य तक पहुँच सकती हैं। इसके साथ ही उन्होंने भवन तक सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित रास्ते को खुला रखने का भी आग्रह किया।

समारोह में सभी गणमान्य अतिथियों ने बाबा कार्तिक उरांव के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उपस्थित प्रशासनिक पदाधिकारियों ने निर्माण कार्य को गुणवत्तापूर्ण और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कराने का भरोसा दिलाया।


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