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Wednesday, November 4, 2026
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दीपावली की रोशनी में कुम्हारों की मेहनत का उजाला, मिट्टी के विभिन्न आकार प्रकार मूर्तियां – दीयों और बर्तनों से जीवंत होती है सदियों पुरानी परंपरा

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

मिट्टी के दीये केवल घरों को रोशन नहीं करते, बल्कि कुम्हारों की मेहनत, भारतीय संस्कृति और स्वदेशी परंपरा की पहचान भी हैं। आधुनिक सजावटी लाइटों के बढ़ते चलन के बीच आज भी दीपावली पर मिट्टी के विभिन्न आकार प्रकार के दीयों की मांग और उनका धार्मिक महत्व बरकरार है

गुमला : – गुमला जिला में – दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों और घरों में तैयारियां तेज हो जाती हैं। कहीं रंग-बिरंगी झालरों और आकर्षक सजावटी सामान की खरीदारी होती है, तो कहीं पूजा के लिए मिट्टी के भगवान गणेश – माता लक्ष्मी – सहित विभिन्न आकार प्रकार के ग्वालिन – घोड़े – हाथी – दीये – कलश – धूपदानी और अन्य पारंपरिक बर्तनों की मांग बढ़ने लगती है। इस पूरे उत्सवी त्योहार के माहौल के बीच कुम्हार समुदाय की मेहनत विशेष महत्व रखती है। महीनों की तैयारी, मिट्टी को आकार देने की कला और भट्ठी की तपिश से तैयार होने वाले मिट्टी के दीये – दीपावली की असली सांस्कृतिक पहचान को जीवंत करते हैं।

दीपावली पर जब घरों की चौखट, आंगन, मंदिर और तुलसी चौरा मिट्टी के दीयों की रोशनी से जगमगा उठते हैं, तब उस उजाले के पीछे कुम्हारों की मेहनत, हुनर और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा भी दिखाई देती है। मिट्टी के छोटे-छोटे दीये केवल प्रकाश फैलाने का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय लोकजीवन, आस्था और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं।

मिट्टी के दीयों से जुड़ी है दीपावली की धार्मिक आस्था

हिंदू धार्मिक परंपरा में दीपावली को अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर आशा की विजय का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है तथा घरों में दीप जलाकर सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की जाती है।

मिट्टी का दीया इस पर्व के धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष स्थान रखता है। मिट्टी से बने दीये में तेल या घी और बाती डालकर प्रकाश किया जाता है। अनेक परिवारों में पूजा स्थल, घर के मुख्य द्वार, आंगन और अन्य स्थानों पर दीये जलाने की परंपरा है।

मिट्टी से बना दीया प्रकृति और मनुष्य के गहरे संबंध को भी दर्शाता है। धरती की मिट्टी से तैयार होकर – आग में पकने वाला यह साधारण पात्र जब प्रकाश फैलाता है, तो वह जीवन में सकारात्मकता और आशा का प्रतीक बन जाता है। यही कारण है कि बिजली की झालरों और आधुनिक विभिन्न आकार प्रकार के सजावटी लाइटों के प्रचलन के बावजूद पारंपरिक मिट्टी के दीयों का महत्व अब तक बना हुआ है।

चाक पर आकार लेती है कुम्हारों की मेहनत

मिट्टी का एक छोटा-सा दीया देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन उसे तैयार करने के पीछे काफी मेहनत और कौशल होता है। कुम्हार सबसे पहले उपयुक्त मिट्टी एकत्र करते हैं। इसके बाद मिट्टी को साफ कर, गूंथकर और आवश्यकतानुसार तैयार करके चाक या सांचे की मदद से दीयों तथा विभिन्न आकार प्रकार के मूर्तियां – मिट्टी के खिलौने आदि और बर्तनों का आकार दिया जाता है।

तैयार कच्चे दीयों को धूप में सुखाया जाता है। इसके बाद उन्हें भट्ठी में पकाया जाता है, ताकि वे मजबूत और उपयोग के योग्य बन सकें। कुछ कारीगर दीयों पर रंग, सजावट और अन्य कलात्मक काम भी करते हैं। हर चरण में सावधानी और अनुभव की जरूरत होती है।

दीपावली के समय मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए कुम्हार परिवार पहले से ही उत्पादन की तैयारी करते हैं। परिवार के अलग-अलग सदस्य मिट्टी तैयार करने, दीये बनाने, उन्हें सुखाने, भट्ठी में पकाने और बाजार तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं।

इस तरह दीपावली केवल खरीदारों के लिए उत्सव नहीं, बल्कि कुम्हार परिवारों के लिए अपने पारंपरिक हुनर को प्रदर्शित करने और आजीविका अर्जित करने का महत्वपूर्ण अवसर भी बनती है, इस बार बादलों, आंधी – तूफान सहित समय पर सूर्योदय का नहीं होना और बारिश के इस मौसम ने उन्हें कुछ अधिक ही मायूस किया है ।

दीयों के साथ मिट्टी के बर्तनों की भी रहती है मांग

दीपावली और महा छठ व्रत के अवसर पर मिट्टी के दीयों के अलावा पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों का भी विशेष महत्व है। विभिन्न पूजा-पाठ और त्योहार में उपयोग होने वाले कलश, छोटे पात्र, धूपदानी, मिट्टी के दीपस्तंभ और सजावटी वस्तुएं कुम्हारों की कला का हिस्सा हैं।

कुछ क्षेत्रों में मिट्टी के खिलौने, हाथी-घोड़े की आकृतियां, छोटी बड़ी ग्वालिन मूर्तियां और अन्य अनेक पारंपरिक सजावटी सामान भी त्योहारों के अवसर पर बनाए जाते हैं। इन वस्तुओं में स्थानीय संस्कृति, लोककला और कारीगरों की रचनात्मकता की झलक दिखाई देती है।

दशकों पूर्व समस्त जाति धर्म के लोगों के घरों में खाना पकाया जाता था, और आज के आधुनिक युग में भी मिट्टी के बर्तनों में खाना बाने और खाने की परंपरा पुण: जोर पकड़ती जा रही है, लोग अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं और लोग मिट्टी के बर्तनों का खाना खाने के लिए बेचैन हो रहे हैं, फलस्वरूप उक्त मिट्टी के बर्तनों की संबंधित उपयोग और उनकी खासियत यह है कि इन्हें स्थानीय जरूरतों और परंपराओं के अनुसार मिट्टी के अलग-अलग आकारों में बनाया जा सकता है। साधारण दीयों से लेकर कलात्मक पात्रों तक, हर वस्तु कुम्हार के अनुभव और हाथों की कारीगरी का परिणाम होती है।

आधुनिक बाजार की चुनौतियों से जूझते कुम्हार

समय के साथ बाजार में बिजली से चलने वाली सजावटी लाइटों, प्लास्टिक की वस्तुओं और विभिन्न प्रकार के तैयार सजावटी सामान का चलन बढ़ा है। इन उत्पादों की उपलब्धता ने पारंपरिक मिट्टी के दीयों के बाजार को कई जगह प्रतिस्पर्धा के सामने खड़ा किया है।

कुम्हारों के सामने मिट्टी की उपलब्धता, ईंधन की लागत, परिवहन, उत्पादन में लगने वाला समय और तैयार सामान को उचित मूल्य पर बेचने जैसी चुनौतियां भी हो सकती हैं। दीये बनाने में श्रम अधिक लगता है, जबकि कई बार कारीगरों को अपने उत्पादों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता।

इसके बावजूद मिट्टी के दीयों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक सुंदरता आज भी लोगों को आकर्षित करती है। प्राकृतिक मिट्टी से बने दीये दीपावली की पूजा और पारंपरिक सजावट में अलग स्थान रखते हैं। स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीदारी करने से उनके श्रम का उचित मूल्य मिलने में मदद मिल सकती है।

स्वदेशी परंपरा और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा

दीपावली पर स्थानीय कुम्हारों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये और बर्तन खरीदना केवल एक वस्तु खरीदना नहीं, बल्कि पारंपरिक कारीगरी और स्थानीय रोजगार को प्रोत्साहित करना भी है।

जब लोग स्थानीय बाजारों से मिट्टी के दीये खरीदते हैं, तो इसका लाभ उन परिवारों तक पहुंचता है जो अपने पारंपरिक हुनर के माध्यम से आजीविका चलाते हैं। इससे स्थानीय बाजार में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और नई पीढ़ी को भी इस कला से जुड़े रहने की प्रेरणा मिल सकती है।

स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का अर्थ है अपने क्षेत्र के कारीगरों, उनकी कला और उनकी मेहनत को सम्मान देना। त्योहारों पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी इस दिशा में एक छोटा, लेकिन महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी रखें ध्यान

मिट्टी के दीये पारंपरिक सजावट का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उनका पर्यावरणीय लाभ इस बात पर भी निर्भर करता है कि उन्हें कैसे बनाया, इस्तेमाल किया और निपटाया जाता है। स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए सादे मिट्टी के दीये उपयोग के बाद सामान्यतः आसानी से मिट्टी में मिल सकते हैं, बशर्ते उनमें प्लास्टिक, रासायनिक कोटिंग या अन्य गैर-जैविक सामग्री न मिली हो।

दीपावली पर दीये जलाते समय तेल या घी का सीमित उपयोग करना, आग से सुरक्षा के उपाय अपनाना और दीयों को सुरक्षित स्थान पर रखना भी आवश्यक है। सजावट के लिए ऐसे उत्पाद चुनना बेहतर है जिनसे अनावश्यक कचरा न बढ़े।

इस प्रकार परंपरा को अपनाने के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी दीपावली की खुशियों को और सार्थक बना सकता है।

कुम्हारों की कला को बचाना समाज की साझा जिम्मेदारी

मिट्टी के दीये बनाने की कला केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह कला पीढ़ियों के अनुभव, पारंपरिक तकनीक और स्थानीय संसाधनों से विकसित हुई है। यदि इस कला को प्रोत्साहन नहीं मिला, तो आने वाले समय में कई पारंपरिक कौशलों के कमजोर पड़ने की आशंका बनी रह सकती है।

स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों, स्वयं सहायता समूहों और आम नागरिकों के सहयोग से कुम्हारों को बाजार, प्रशिक्षण और उचित बिक्री के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों के लिए बाजार या प्रदर्शनी आयोजित करना भी उपयोगी कदम हो सकता है।

इसके साथ ही स्कूलों और सामाजिक संस्थानों में मिट्टी के दीये बनाने की कला से परिचित कराने वाले कार्यक्रम नई पीढ़ी को इस परंपरा से जोड़ सकते हैं।

दीया खरीदें, परंपरा बचाएं और मेहनत को सम्मान दें

दीपावली का वास्तविक संदेश केवल घरों को रोशन करना नहीं, बल्कि समाज में खुशियां, सहयोग और सकारात्मकता फैलाना भी है। कुम्हारों के हाथों से बने मिट्टी के दीये इसी संदेश को साकार करते हैं। इनमें मिट्टी की सादगी, कारीगरों का हुनर, धार्मिक आस्था और भारतीय संस्कृति की गहरी छाप दिखाई देती है।

जब दीपावली की रात मिट्टी के दीये घरों में प्रकाश फैलाते हैं, तो उनके साथ कुम्हार परिवारों की मेहनत और उम्मीदें भी रोशन होती हैं। इसलिए इस दीपावली स्थानीय कुम्हारों के बनाए दीये और पारंपरिक मिट्टी के बर्तन खरीदकर उनकी कला को प्रोत्साहित करना एक सार्थक पहल हो सकती है।

आइए, इस दीपावली मिट्टी के दीयों से घर सजाएं, स्थानीय कारीगरों की मेहनत का सम्मान करें और भारतीय परंपरा की इस अमूल्य विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अपना योगदान दें। क्योंकि मिट्टी का एक छोटा-सा दीया केवल अंधकार दूर नहीं करता, वह मेहनत, आत्मनिर्भरता और संस्कृति की लौ भी जलाए रखता है।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिले में 02 से 07 नवम्बर तक विभिन्न स्थानों पर आयोजित होंगे निःशुल्क विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविर

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, स्कूली बच्चों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के स्वास्थ्य पर रहेगा विशेष फोकस, आम नागरिकों से शिविरों का लाभ उठाने की अपील

गुमला : – गुमला जिला में आयुष, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखण्ड, राँची के निर्देशानुसार एवं उपायुक्त, गुमला के अनुमोदन के आलोक में जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा जिले में 02 से 07 नवम्बर 2026 तक विभिन्न प्रखण्डों, विद्यालयों एवं चिन्हित ग्रामीण क्षेत्रों में निःशुल्क विशेष आयुष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का उद्देश्य ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के नागरिकों तक आयुष चिकित्सा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना, विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाओं की सुविधा उपलब्ध कराना है। सभी शिविर निर्धारित तिथियों को पूर्वाह्न 10:00 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे।

इस क्रम में 02 नवम्बर को जिले के विभिन्न स्थानों पर ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मांसपेशियों तथा हड्डियों से संबंधित विकारों की जांच एवं उपचार के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत बसिया, घाघरा, सिसई, चैनपुर एवं बिशुनपुर के राजकीय आयुर्वेदिक औषधालयों, डुमरी एवं रायडीह के राजकीय होम्योपैथिक औषधालयों तथा गुमला स्थित जिला संयुक्त औषधालय में शिविर लगाए जाएंगे। इसके अतिरिक्त पालकोट, जारी एवं भरनो प्रखण्ड परिसर तथा कामडारा में बैंक के समीप भी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।

वहीं, 03 नवम्बर को वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विशेष जेरियाट्रिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से बुजुर्गों को स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं आवश्यक आयुष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। शिविरों का आयोजन बसिया, घाघरा, सिसई, चैनपुर, बिशुनपुर, डुमरी, रायडीह एवं गुमला के संबंधित आयुष औषधालयों के साथ-साथ पालकोट, जारी एवं भरनो प्रखण्ड परिसर तथा कामडारा में में बैंक के समीप किया जाएगा।

04 नवम्बर को जिले के विभिन्न सरकारी विद्यालयों में आयुर्वेदीय विद्यालयी स्वास्थ्य एवं योग कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत सिसई, बिशुनपुर, बसिया, गुमला, घाघरा, रायडीह, डुमरी एवं चैनपुर प्रखण्ड के चयनित विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य जागरूकता, आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य संबंधी जानकारी एवं योग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वस्थ जीवनशैली, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य तथा योग के महत्व के प्रति जागरूकता विकसित करना है।

इसी क्रम में 05 नवम्बर को विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के स्वास्थ्य एवं कल्याण को प्राथमिकता देते हुए विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत घाघरा प्रखण्ड के मथनीडीपा, बिशुनपुर प्रखण्ड के जेहनगुटवा एवं बिरहोर कॉलोनी तथा चैनपुर के दिना एवं डुमरी क्षेत्र के असुर टोली में शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

06 नवम्बर को बसिया, गुमला एवं चैनपुर प्रखण्ड में कारुण्या स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 07 नवम्बर को आयुष ग्राम स्वास्थ्य शिविर के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अंतर्गत घाघरा प्रखण्ड के बड़काडीह, देवाकी एवं नवडीहा, सिसई प्रखण्ड के नगर, जमगई एवं रेड़वा, रायडीह प्रखण्ड के पतराटोली, खीराखाड़ एवं भलमण्डा तथा गुमला प्रखण्ड के टोटो, आंजन एवं करौन्दी गांव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे।

जिला प्रशासन एवं जिला आयुष चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे अपने नजदीकी निर्धारित शिविर स्थल पर पहुंचकर निःशुल्क आयुष स्वास्थ्य जांच, चिकित्सकीय परामर्श एवं दवाओं का लाभ अवश्य उठाएं। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, स्कूली बच्चों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों से इन शिविरों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की गई है।

शिविरों की जानकारी ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने के लिए सहिया दीदियों के माध्यम से भी व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, ताकि जिले के अधिकाधिक जरूरतमंद नागरिक इन स्वास्थ्य सुविधाओं से लाभान्वित हो सकें। जिला प्रशासन का प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं को जनसुलभ बनाते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।

राम भक्तों के लिए

गुमला पुलिस कप्तान हारिस बिन जामां की अध्यक्षता में अपराध समीक्षा बैठक संपन्न

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित गुमला पुलिस पुलिस लाइन कार्यालय के सभागार में गुमला पुलिस अधीक्षक ( जिला पुलिस कप्तान हारिस बिन जामां ) , गुमला की अध्यक्षता में मासिक अपराध समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, उक्त बैठक में पुलिस उपाधीक्षक( मुख्यालय ), गुमला, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, गुमला सुरेश – बसिया, पुलिस अंचल निरीक्षक, गुमला – चैनपुर – बसिया – सिसई, परिचारी प्रवर एवं परिचारी, परिवहन पुलिस केन्द्र, गुमला के साथ सभी थाना प्रभारी तथा शाखा प्रभारी उपस्थित रहे। अपराध गोष्ठी प्रारंभ करने के पूर्व आगामी दीपावली – लक्ष्मी पूजा – काली पूजा और छठ त्यौहार के अवसर पर हाट-बाजार – बैंक- एटीएम में लोगों की आवाजाही अधिक होने लगती है, जिससे क्षेत्र में चोरी – छिनतई इत्यादि घटना की रोक थाना हेतु सार्वजनिक स्थानों – हाट-बाजार – आभूषण के दुकान – बैंक – एटीएम एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर विभिन्न् माध्यमों से आम जनों को जागरूक करने, दीपावली, लक्ष्मी पूजा, काली पूजा और छठ पर्व को शांतिपूर्ण तरीके से सम्पन्न् कराने के लिए महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विस्तृत चर्चा की गई तथा उक्त अवसर पर आयोजित विभिन्न् कार्यक्रम – पूजा पंडाल – विसर्जन – मेला, यातायात व्यवस्था विशेष कर छठ घाटों में सी0सी0टी0वी0 कैमरा की व्यवस्था – पर्याप्त रोशनी एवं गोताखोरों की व्यवस्था इत्यादि को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। दीपावली के पूर्व जगह-जगह पर जुआ खेला जाता है, जुआ खेलने हेतु अन्य विभिन्न जिलों से भी लोगों के आने की संभावना बनी रहती है, जिसके लिए संभावित जुआ अड्डों पर छापामारी करने, भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सूक्ष्म निगरानी रखने, सीमावर्ती थाना के प्रभारियों को विशेष सतर्कता बरतने एवं निगरानी रखने एवं क्षेत्र में सुरक्षा – विधि – व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी थाना प्रभारी को अपने-अपने थाना क्षेत्र में भ्रमणशील रहने तथा पेट्रोलिंग/गश्ती पार्टी को रात्रि के समय हुटर बजाते हुये पेट्रोलिंग करने का निर्देश दिया गया। तत्पश्चात् POCSO/SC-ST/ अज्ञात हत्या/बलात्कार/लापता बच्चे/अपहरण आदि से संबंधित कांडों पर त्वरित कार्यवाही करते हुए ससमय कांडो का निष्पादन हेतु निर्देश दिया गया। लूट – डकैती – गृहभेदन से संबंधित कांडों की विस्तृत समीक्षा की गई। आगामी दीपावल पर्व को लेकर मादक पदार्थों की बिक्री – तस्करी, जगह-जगह पर जुआ खेलने इत्यादि की रोकथाम हेतु सभी आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश सभी थाना प्रभारी को दिया गया। सूचना अधिकार अधि0 – जन शिकायत से संबंधित आवेदन पत्रों का ससमय त्वरित निष्पादन करने तथा निष्पादन नहीं होने की स्थित में अविलम्ब वरीय पदाधिकारी को इसकी सूचना देने का निर्देश दिया गया। लंबित वारंट/स्थाई वारंट – कुर्की – इस्तेहार, पारपत्र – चरित्र सत्यापन संबंधी पत्रों का ससमय निष्पादन हेतु निर्देश दिये गये। मानव तस्करी – पलायन एवं महिलाओं से संबंधित अपराधों की रोक-थाम हेतु आमजनों के बीच अपने-अपने थाना क्षेत्र में समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाने के संबंध में निर्देश दिये गये। सभी थाना प्रभारी को अपने-अपने थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना को कम करने के उद्देश्य से बिना हेलमेट के – शराब का सेवन कर – तेजी रफ्तार – लापरवाही से वाहन नहीं चलाने, मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत कार्यवाही करने के संबंध में निर्देश दिये गये। क्षेत्र में विभिन्न् अपराधों से संबंधित गुटो – गैंग – अपराधियों के विरूद्ध अधिक से अधिक आसूचना संकलन करने तथा वरीय पदाधिकारी को सूचित करते हुए अविलम्ब त्वरित कार्रवाई करने तथा संबंधित थाना प्रभारियों को अपने-अपने थाना क्षेत्रों के विकासात्मक कार्य स्थलों तथा उसपर लगे वाहनों/मशीनों पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से विशेष निगरानी रखने तथा आसूचना संकलन करने हेतु निर्देश दिये गये। आगामी पर्व त्यौहारों को लेकर अपने-अपने थाना क्षेत्र में स्थान एवं समय बदल-बदल कर एंटी क्राईम वाहन चेकिंग चलाने हेतु आवश्यक निर्देश दिये गये। और स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा स्थानीय नागरिकों को अपने – अपने घर में ताला लगाकर बाहर जाने के बजाय, उक्त घर में अपने परिवार के एक सदस्य को घर में जरूर रहने की अपील की गई है ताकि किसी प्रकार की अपराधिक घटनाएं और निर्जन स्थानों पर स्थित घरों में चोरी की घटनाएं ना हो सके l

राम भक्तों के लिए

नगर भवन ( टाउन हॉल ) गुमला में दिव्यांगजनों के लिए चलंत न्यायालय-सह-जागरूकता शिविर का भव्य आयोजन

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री , उपायुक्त दिलेश्वर महतो एवं उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया कार्यक्रम का शुभारंभ

दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा और समस्याओं का त्वरित निष्पादन शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता – कीर्तिश्री राज्य निःशक्तता आयुक्त

दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और अवसर प्रदान करना प्रशासन का संकल्प: दिलेश्वर महतो, उपायुक्त

शिविर में दिव्यांग प्रमाण पत्र, पेंशन स्वीकृति पत्र एवं सहायक उपकरणों का ऑन-द-स्पॉट वितरण

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखण्ड सरकार तथा राज्य निःशक्तता आयुक्त कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आज शनिवार गुमला जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन में दिव्यांगजनों के मामलों के त्वरित निष्पादन एवं जन-जागरूकता हेतु एक दिवसीय चलंत न्यायालय – सह-जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री जी (भा०प्र०से०), गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन एवं सिविल सर्जन डॉ० शंभूनाथ चौधरी द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मूक-बधिर विद्यालय, गुमला के बच्चों द्वारा अत्यंत मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का कुशल संचालन जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी ने किया।

जिला स्तर पर ही समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु चलंत न्यायालय की पहल: राज्य निःशक्तता आयुक्त

मुख्य अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए राज्य निःशक्तता आयुक्त कीर्तिश्री जी ने कहा कि राज्य निःशक्तता आयुक्त कार्यालय द्वारा दिव्यांगजनों के विधिक व संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु विशेष कोषांग का गठन किया गया है। राज्य स्तर पर प्राप्त होने वाले अधिकांश मामलों की प्रकृति ऐसी होती है, जिनका निष्पादन जिला स्तर पर ही संभव है। दिव्यांगजनों को राजधानी तक की लंबी यात्रा की परेशानी से बचाने और उनके द्वार तक न्याय पहुंचाने के उद्देश्य से इस प्रकार के चलंत न्यायालय का आयोजन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों को समाज में सम्मान, समान भागीदारी और एक समावेशी परिवेश उपलब्ध कराना राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य है। शिविर में मेडिकल बोर्ड की उपस्थिति से दिव्यांगता प्रमाण पत्र संबंधी विसंगतियों का ऑन-द-स्पॉट समाधान किया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी दिव्यांगजनों से सरकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।

दिव्यांगजनों को सहानुभूति नहीं, अवसर और सहयोग की आवश्यकता:

उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने अपने संबोधन में कहा कि दिव्यांगजनों में अदम्य इच्छाशक्ति और अद्वितीय प्रतिभा होती है। वे स्वावलंबन के साथ आगे बढ़ने में पूर्णतः सक्षम हैं, आवश्यकता केवल उन्हें उचित अवसर और थोड़ा सहयोग प्रदान करने की है। उन्होंने जिला स्तर पर इस प्रकार के शिविर के आयोजन हेतु राज्य निःशक्तता आयोग का आभार व्यक्त किया।
उपायुक्त ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से कोई भी योग्य दिव्यांगजन वंचित न रहे, इसके लिए जिला प्रशासन कृतसंकल्पित है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि शिविर के माध्यम से प्राप्त सभी आवेदनों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनका गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें।

गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार सुनिश्चित करना ही प्राथमिकता: उप विकास आयुक्त

उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का मूल अधिकार है। नए दिव्यांगता अधिनियम के तहत श्रेणियों की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है। न्यूनतम 40% दिव्यांगता पर प्रमाण पत्र निर्गत किया जाता है, जो शिक्षा, रोजगार में आरक्षण और परिवहन रियायत जैसी सुविधाएं प्राप्त करने में सहायक सिद्ध होता है।
उन्होंने दिव्यांगजनों, विशेषकर बच्चों की शिक्षा पर बल दिया, कहा कि शिक्षा से ही आप आगे बढ़ सकते हैं इसपर विशेष रूप ध्यान दें। इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि गुमला सदर अस्पताल में प्रत्येक बुधवार को मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है इसका अवश्य लाभ उठाए, और दिव्यांग प्रमाण पत्र अवश्य बनवाये।

प्रशासनिक संवेदनशीलता और योजनाओं के क्रियान्वयन पर बल

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित विभाग के अवर सचिव विक्रमा राम ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सामाजिक व आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति पूर्णतः संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर संचालित कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं को धरातल पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने दिव्यांगजनों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हों और शिविर में उपलब्ध कराई जा रही प्रशासनिक सुविधाओं का पूरा लाभ उठाएं।

गुमला में 12,374 चिन्हित दिव्यांगजन: जिला समाज कल्याण पदाधिकारी

जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि गुमला जिले में चिन्हित कुल 12,374 दिव्यांगजनों में से राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत वर्तमान में 11,586 लाभुकों को प्रतिमाह ₹1,000 की दर से पेंशन राशि का नियमित भुगतान किया जा रहा है। इसके तहत केन्द्र प्रायोजित इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 628 पेंशनधारियों को जुलाई 2026 तक तथा राज्य प्रायोजित स्वामी विवेकानन्द निःशक्त स्वावलंबन प्रोत्साहन योजना के 10,958 पेंशनधारियों को सितम्बर 2026 तक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष बचे चिन्हित दिव्यांगों को भी शीघ्र इन योजनाओं से जोड़कर लाभान्वित करने की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

स्टॉल्स, ऑन-द-स्पॉट सेवाएं एवं परिसंपत्ति वितरण

कार्यक्रम स्थल पर जिला समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग,जिला ग्रामीण विकास विभाग, पेंशन योजना, कल्याण विभाग, निबंधन , श्रम नियोजन प्रशिक्षण कार्यालय, JSLPS , आपूर्ति विभाग, सहित अन्य संबंधित विभागों द्वारा विशेष स्टॉल्स (कैंप) लगाए गए थे। इन स्टॉल्स के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी गई तथा उन्हें योजनाओं से सीधे आच्छादित किया गया।

चलंत न्यायालय के दौरान आयोजित प्रश्नोत्तरी/जनसुनवाई सत्र में दिव्यांगजनों ने अपनी व्यक्तिगत व सामूहिक समस्याएं सीधे आयुक्त एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों के समक्ष रखीं, जिन पर त्वरित संज्ञान लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथियों द्वारा योग्य लाभुकों के बीच दिव्यांगता प्रमाण पत्र, दिव्यांग पेंशन स्वीकृति प्रमाण पत्र, तथा आवश्यक सहायक यंत्रों एवं उपकरणों का वितरण किया गया।

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के वरीय प्रशासनिक पदाधिकारी, चिकित्सक, समाज कल्याण विभाग के कर्मी, मूक-बधिर विद्यालय के शिक्षक, बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए दिव्यांगजन एवं उनके अभिभावक उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

भारत में तलाक के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? घरेलू हिंसा, आर्थिक तनाव और बदलती अपेक्षाएं प्रमुख कारण

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शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, विशेषकर महिलाओं के बीच, लोगों को असंतोषजनक या असुरक्षित रिश्तों से बाहर निकलने का विकल्प दे रही

नई दिल्ली: भारत में विवाह और पारिवारिक संबंध तेजी से बदल रहे हैं। सामाजिक अपेक्षाओं, आर्थिक दबाव और व्यक्तिगत अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता का असर वैवाहिक रिश्तों पर भी दिखाई दे रहा है।

2025 में International Journal of Population Studies में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, भारत में वैवाहिक संबंध टूटने के पीछे गरीबी, निःसंतानता, बाल विवाह, पति-पत्नी के बीच शैक्षणिक अंतर, शहरीकरण और घरेलू हिंसा जैसे कारक जुड़े पाए गए हैं।

बदलती अपेक्षाएं और आपसी तालमेल की कमी

विशेषज्ञों के अनुसार, संवाद की कमी, भावनात्मक सहयोग का अभाव, आपसी असहमति और जीवनशैली में अंतर वैवाहिक तनाव के प्रमुख कारण हो सकते हैं। सोशल मीडिया का अत्यधिक इस्तेमाल, शक, विवाहेतर संबंध और विश्वास की कमी भी कई मामलों में विवाद को बढ़ाते हैं।

शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता, विशेषकर महिलाओं के बीच, लोगों को असंतोषजनक या असुरक्षित रिश्तों से बाहर निकलने का विकल्प दे रही है।

घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न

घरेलू हिंसा, दहेज के लिए प्रताड़ना, क्रूरता और नियंत्रणकारी व्यवहार वैवाहिक विवादों की गंभीर वजह बने हुए हैं। 2024 में प्रकाशित एक शोध में पाया गया कि गंभीर शारीरिक या यौन हिंसा का सामना करने वाली महिलाओं में वैवाहिक संबंध टूटने की संभावना अधिक थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा या प्रताड़ना से बचने के लिए अलग होना कई बार असफल विवाह नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान की दिशा में जरूरी कदम होता है।

पारिवारिक हस्तक्षेप और आर्थिक दबाव

पैसों, नौकरी, घरेलू जिम्मेदारियों, बच्चों की परवरिश और संयुक्त परिवार के हस्तक्षेप को लेकर मतभेद भी रिश्तों में तनाव पैदा करते हैं। काम का दबाव और समानता तथा व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर बदलती सोच भी वैवाहिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

फैमिली कोर्ट में बढ़ रहे मामले

केंद्रीय कानून मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2024 में देश की फैमिली कोर्ट में 9,39,100 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 8,25,502 थी। हालांकि, इन आंकड़ों में विभिन्न पारिवारिक विवाद शामिल हैं, केवल तलाक के मामले नहीं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां संभव हो, वहां काउंसलिंग और मध्यस्थता से विवाद सुलझाए जा सकते हैं। वहीं, हिंसा और प्रताड़ना के मामलों में पीड़ितों को सुरक्षा और न्याय मिलना बेहद जरूरी है।

भारत में वैवाहिक संबंधों में आ रहे बदलाव सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन को दर्शाते हैं। स्वस्थ संवाद, आपसी सम्मान और कानूनी अधिकारों की जानकारी आज पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

राम भक्तों के लिए

स्थापना समिति की बैठक में विभिन्न प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों पर हुई चर्चा

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आयोजित हुई बैठक, अनुकम्पा नियुक्ति, प्रोन्नति, प्रतिनियुक्ति एवं स्थानांतरण से जुड़े प्रस्तावों पर किया गया विचार-विमर्श

गुमला : – गुमला उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में जिला स्थापना समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विभिन्न विभागों एवं कार्यालयों से प्राप्त प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी मामलों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।

बैठक के दौरान अनुकम्पा नियुक्ति, उग्रवादी हिंसा से संबंधित प्रस्ताव, एम०ए०सी०पी०एस०, सेवा सम्पुष्टि एवं प्रोन्नति से जुड़े मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। इसके अतिरिक्त विभिन्न कार्यालयों में कर्मियों की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थापन एवं प्रतिनियुक्ति से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई।

वहीं, कर्मियों के स्थानांतरण, पदस्थापन में संशोधन, वेतन निर्धारण एवं अन्य सेवा संबंधी अभ्यावेदनों को भी बैठक में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के आलोक में संबंधित मामले पर विधिक परामर्श के साथ विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में प्रस्तुत सभी प्रस्तावों एवं अभ्यावेदनों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। संबंधित मामलों में नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया एवं प्रावधानों के आलोक में विचार किया गया।

इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन सहित संबंधित पदाधिकारी एवं जिला स्थापना समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

झारखण्ड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET)-2026 के कदाचारमुक्त एवं सफल संचालन को लेकर समाहरणालय में संयुक्त ‘प्री-एग्जामिनेशन ब्रीफिंग’ आयोजित

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

उपायुक्त दिलेश्वर महतो एवं पुलिस अधीक्षक हारिस बिन ज़मा ने प्रतिनियुक्त दण्डाधिकारियों एवं पुलिस पदाधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

सरकार की एसओपी (SOP) का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश; बिना किसी बाहरी एजेंसी के सीधे जिला प्रशासन के नेतृत्व में आयोजित हो रही है परीक्षा

दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए सुगम बैठक व्यवस्था, सघन जांच, सीसीटीवी निगरानी एवं सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर रहेगी पैनी नजर

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन (टाउन हॉल) में झारखण्ड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET)-2026 के सफल, पारदर्शी एवं कदाचारमुक्त संचालन को लेकर समाहरणालय सभागार में उपायुक्त दिलेश्वर महतो एवं पुलिस अधीक्षक हारिस बिन ज़मा की संयुक्त अध्यक्षता में जिला स्तरीय प्री-एग्जामिनेशन ब्रीफिंग बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) अखिलेश कुमार समेत जिले के सभी प्रतिनियुक्त जोनल, गश्ती एवं स्टैटिक दण्डाधिकारी, केंद्राधीक्षक और पुलिस पदाधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य सरकार द्वारा निर्गत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सभी स्तरों पर अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने पदाधिकारियों को सजग करते हुए कहा कि इस बार परीक्षा के आयोजन में कोई बाहरी एजेंसी शामिल नहीं है, इसलिए पूरी परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने का सीधा दायित्व जिला प्रशासन का है। उन्होंने सभी कर्मियों को समय का कड़ाई से पालन करने की हिदायत देते हुए कहा कि परीक्षा प्रारंभ होने से ठीक आधे घंटे पूर्व वीक्षकों को प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराए जाएं। परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान परीक्षार्थियों के एडमिट कार्ड के साथ उनके मूल पहचान पत्र की गहनता से जांच की जाएगी, और यदि किसी अभ्यर्थी के फोटो अथवा हस्ताक्षर में कोई विसंगति मिलती है तो उसका मिलान पहचान पत्र से किया जाएगा। इसके अतिरिक्त उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर दिव्यांग परीक्षार्थियों के लिए सुगम बैठक व्यवस्था सुनिश्चित करने, कक्षों में बैठने के उचित प्रबंध रखने, सभी केंद्रों पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता पर पैनी नजर बनाए रखने का निर्देश दिया। किसी भी प्रकार की समस्या या व्यवधान की स्थिति में तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को सूचित करने को कहा गया है।

वहीं पुलिस अधीक्षक हारिस बिन ज़मा ने विधि-व्यवस्था के संधारण पर जोर देते हुए कहा कि परीक्षा केंद्रों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहेंगे। परीक्षार्थियों और आम लोगों के आवागमन को सुगम बनाए रखने के लिए यातायात प्रबंधन को दुरुस्त रखा जाएगा ताकि मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परीक्षा के दौरान भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। आमजन एवं अभ्यर्थी किसी भी आपात स्थिति या संदिग्ध सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर 112 अथवा जिला नियंत्रण कक्ष पर संपर्क कर सकते हैं। अंत में उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने सभी प्रशासनिक व पुलिस पदाधिकारियों को अपने दायित्वों का संजीदगी और निष्ठा के साथ निर्वहन करते हुए परीक्षा को शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने का निर्देश दिया गया।

राम भक्तों के लिए

दिव्यांगजनों के लिए चलन्त न्यायालय-सह-जागरूकता शिविर का आयोजन 31 अक्टूबर 2026 को

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन( टाउन हॉल) में जिला के समस्त दिव्यांगजनों एवं उनके परिजनों को सूचित किया जाता है कि दिनांक 31 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को जिला मुख्यालय स्थित नगर भवन (टाउन हॉल), गुमला में राज्य निःशक्तता आयुक्त, झारखण्ड सरकार की उपस्थिति में चलन्त न्यायालय-सह-जागरूकता शिविर का आयोजन किया जाएगा।

राज्य निःशक्तता आयुक्त का कार्यालय, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग, झारखण्ड, राँची से प्राप्त पत्र के आलोक में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों से संबंधित मामलों एवं शिकायतों का निष्पादन करना तथा उन्हें उनके अधिकारों, सुविधाओं एवं सरकार द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करना है।

इस शिविर में दिव्यांगजनों से संबंधित समस्याओं एवं शिकायतों को प्रस्तुत करने तथा उनके निराकरण हेतु आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अतः जिले के सभी दिव्यांगजनों से अपील है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिविर में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठाएँ। संबंधित मामलों से जुड़े आवश्यक दस्तावेज एवं उपलब्ध प्रमाण पत्र साथ लेकर आएँ, ताकि शिकायतों के निष्पादन में सुविधा हो सके।

स्थान : नगर भवन (टाउन हॉल), गुमला दिनांक : – 31 अक्टूबर 2026, शनिवार
आयोजन: राज्य निःशक्तता आयुक्त, झारखण्ड सरकार का चलन्त न्यायालय-सह-जागरूकता शिविर

राम भक्तों के लिए

दीपावली सहित आगामी त्योहारों में पटाखे फोड़ने की समय-सीमा निर्धारित, नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कानूनी कार्रवाई

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

दीपावली पर रात्रि 08:00 बजे से 10:00 बजे तक ही पटाखे चलाने की अनुमति

प्रदूषण एवं जनसमस्याओं से संबंधित शिकायतों के लिए जिला नियंत्रण कक्ष का हेल्पलाइन नंबर जारी

गुमला : – गुमला जिला में आगामी त्योहारों के दौरान वायु प्रदूषण पर नियंत्रण रखने तथा आम नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन, गुमला द्वारा पटाखों के उपयोग को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, गुमला के कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार, माननीय राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान खंडपीठ, नई दिल्ली के आदेश के अनुपालन में झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद, राँची द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

निर्देशों के अनुसार, जिन शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता का स्तर अच्छी अथवा संतोषजनक श्रेणी में है, वहाँ केवल निर्धारित ध्वनि सीमा 125 डेसीबल (dB(A)) से कम वाले पटाखों की बिक्री की अनुमति होगी। दीपावली के अवसर पर पटाखे केवल दो घंटे, अर्थात रात्रि 08:00 बजे से 10:00 बजे तक ही चलाए जा सकेंगे।

विभिन्न त्योहारों के लिए पटाखे चलाने की निर्धारित अवधि

जिला प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, विभिन्न त्योहारों में पटाखे चलाने के लिए निम्न समय-सीमा निर्धारित की गई है:

– दीपावली एवं गुरुपर्व: रात्रि 08:00 बजे से 10:00 बजे तक।
– छठ पर्व: प्रातः 06:00 बजे से 08:00 बजे तक।
– क्रिसमस एवं नववर्ष: मध्यरात्रि 11:55 बजे से अगले दिन मध्यरात्रि 12:30 बजे तक।

निर्धारित समय-सीमा के अतिरिक्त पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। सभी नागरिकों से अपील है कि वे पर्यावरण संरक्षण एवं जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी विधिसम्मत कार्रवाई

आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस ), वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 37 तथा अन्य सुसंगत विधिक प्रावधानों के तहत सक्षम पदाधिकारी द्वारा विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

जिला नियंत्रण कक्ष का हेल्पलाइन नंबर जारी

आगामी त्योहारों के दौरान पटाखों के उपयोग, वायु प्रदूषण अथवा जनसमस्याओं से संबंधित शिकायत दर्ज कराने के लिए जिला प्रशासन, गुमला द्वारा जिला स्तर पर हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

जिला नियंत्रण कक्ष, गुमला

– दूरभाष संख्या: 06524-223686
– मोबाइल नंबर: 9798148089

नागरिक उक्त नंबरों पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

जिला प्रशासन ने सभी जिलेवासियों से अपील की है कि वे त्योहारों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाएँ तथा पटाखों के उपयोग में निर्धारित समय-सीमा एवं अन्य दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करें। नियमों का पालन कर वायु प्रदूषण को कम करने और जनस्वास्थ्य की रक्षा करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएँ।

राम भक्तों के लिए

CJP नेता सौरभ दास के साथ अपने संबंधों को लेकर पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल अपनी सफाई दी

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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता सौरभ दास के साथ अपने संबंधों को लेकर सफाई दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सौरभ दास के मेंटर नहीं रहे हैं और दोनों की मुलाकात केवल एक-दो बार पत्रकार के तौर पर हुई थी। हालांकि, उन्होंने माना कि बातचीत के दौरान उन्होंने सौरभ को अपनी भाषा में संयम और नरमी बरतने की सलाह दी थी।

साल भर पहले सौरभ से मुलाकात हुई थी

समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में जस्टिस कौल ने बताया कि सौरभ दास के साथ उनकी वायरल तस्वीर करीब एक साल पहले दिवाली के समय खींची गई थी। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर के आधार पर उनके विचारों और विचारधारा को लेकर धारणाएं बनाई जा रही हैं, जबकि उनकी मुलाकात का मकसद सामान्य बातचीत था।

जस्टिस कौल ने बताया कि दिवाली के दौरान सौरभ दास ने उनसे मिलने का आग्रह किया था। उस समय वह कहीं और जाने वाले थे, लेकिन उन्होंने करीब 10 मिनट के लिए मिलने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह थोड़ी देर में वापस आ जाएंगे। जस्टिस कौल के मुताबिक, मुलाकात इतनी ही थी और इसे किसी खास संबंध या मार्गदर्शन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कभी सौरभ दास का मार्गदर्शन किया था, तो उन्होंने इससे इनकार किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि एक-दो मुलाकातों के दौरान उन्होंने सौरभ को अपनी भाषा पर ध्यान देने और बातचीत में संयम बरतने की सलाह जरूर दी थी।

जस्टिस कौल ने कहा कि अलग-अलग पीढ़ियों के बातचीत करने के तरीकों में अंतर होता है। उनकी पीढ़ी में सभ्य और शालीन भाषा को अधिक महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी की भाषा और अभिव्यक्ति का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन कई बार इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द पुरानी पीढ़ी के लोगों को असहज कर सकते हैं।

ECE की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया

सीजेपी के युवा कार्यकर्ताओं को आक्रामक भाषा कम करने की सलाह देने के सवाल पर जस्टिस कौल ने कहा कि वह इस मामले में कोई विशेष सलाह नहीं देना चाहते। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर वह ऐसा करेंगे, तो अगले दिन खबर आ सकती है कि वह सीजेपी के नेताओं को सलाह दे रहे हैं। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए बताया कि किस तरह किसी सामान्य मुलाकात या बातचीत को अलग अर्थ दे दिया जाता है।

जस्टिस कौल ने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि नियुक्ति प्रक्रिया में किसी निष्पक्ष तीसरे पक्ष को शामिल करने की जरूरत है या नहीं। उनके मुताबिक, ऐसी नियुक्तियों में प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता महत्वपूर्ण है।

 -देवेन्द्र कश्यप 

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