धनबाद – प्रेम-प्रसंग के एक मामले को लेकर राजगंज का महेशपुर गांव चर्चा में है.इस कड़ाके की ठंड में भी एक 20 वर्षीया युवती पिछले 52 घंटे से अपने प्रेमी के महेशपुर अवस्थित मकान के आगे अनशन पर बैठी है.
बुधवार देर रात तक वह बैठी हुई थी. इधर, प्रेमी उत्तम महतो घर से फरार है, जबकि उसके परिजनों ने घर का दरवाजा बंद कर लिया है.युवती भूली इलाके के एक गांव की है. प्रेमिका का कहना है कि विगत चार वर्ष से महेशपुर के उत्तम पटेल उर्फ उत्तम महतो के साथ उसका प्रेम है.
जब वह एसएसएलएनटी कॉलेज में पढ़ रही थी तो उत्तम से परिचय हुआ था. उत्तम ने शादी का वायदा किया था.इसकी जानकारी दोनों परिवारों को भी है. लेकिन अब उत्तम शादी से इंकार कर रहा है।युवती का कहना है कि एकबार उत्तम सामने आये और उससे बात कर ले. वह जो बोलेगा,
मैं मान जाऊंगी. सूचना पाकर स्थानीय मुखिया मनोज महतो मौके पर पहुंचे और दोनो पक्षों से बात की, लेकिन हल नहीं निकला.इस मामले को लेकर मुखिया का कहना है कि सूचना राजगंज पुलिस को दी गयी है।
The Bharat Jodo Yatra is a cross-country journey undertaken by individuals and groups with the aim of promoting national unity and pride in India. The yatra, which means “journey” in Hindi, typically begins in the northernmost state of Jammu and Kashmir and ends in the southernmost state of Tamil Nadu, covering a distance of around 3,800 kilometers.
The yatra is considered a symbol of national integration, as it passes through various states, cultures, and languages. The participants in the yatra are often from different regions and backgrounds, and the journey provides an opportunity for them to come together and learn about the diversity of India.
The Bharat Jodo Yatra is not just a physical journey but also a cultural and historical one. The participants visit famous landmarks and historical sites, such as the Taj Mahal, the Golden Temple, and the Ram Sethu. They also interact with local communities and learn about their customs, traditions, and way of life.
The yatra is organized by various organizations, including the government, non-government organizations, and private groups. The participants are provided with accommodation, food, and transportation during the journey. It is an open event and is open to all.
The Bharat Jodo Yatra is considered a unique opportunity to understand and appreciate the cultural, historical, and geographical diversity of India. It is also a way to promote national unity and pride among the people of India. The yatra is a reminder that despite the diversity of the country, India is united and strong.
However, the Bharat Jodo Yatra is not without its challenges. The journey is physically demanding, and participants have to face harsh weather conditions and rough terrain. The yatra also requires a significant amount of planning and coordination, and there is always a risk of accidents and other mishaps.
In recent years, the Bharat Jodo Yatra has gained popularity among young people as a way to explore their country and learn about its history and culture. The yatra has also become a platform for promoting national unity and pride.
In conclusion, the Bharat Jodo Yatra is a symbol of national unity and pride in India. It is a journey that brings together people from different regions, cultures, and backgrounds, and provides an opportunity for them to learn about the diversity of the country. It is also a reminder of the rich cultural, historical, and geographical heritage of India. The yatra is an open event and is open to all, but it is not without its challenges and requires significant planning and coordination. Despite this, it remains an important event that promotes national unity and pride among the people of India.
Basukinath Mandir is one of the oldest temples in the region and is located near the village of Jarmundi. The present structure is estimated to be around 150 years old and is said to have been built by Basaki Tatme, a tribal. Basukinath Dham is known for its Shiva Temple. It is believed that after offering prayers and Ganga Jal at Baidyanath Dham Temple, pilgrims undertake a holy trek to Basukinath Dham, around 45 km away, to offer prayers at the Shiva temple here. The pilgrimage to Baidyanath Dham is considered complete only after offering prayers at Basukinath Dham, which is also dedicated to Lord Shiva.Basukinath Dham houses over 30 shrines within the complex and is also known as the Moniker Faujdari Dham.the distance from ranchi The distance of this temple from Ranchi is 282 kms and from dumka is 25kmsBy AirNearest airport is Deoghar airport which is 53kms awayBy TrainIt is situated at Jarmundi Block and lies in Dumka-Deoghar Railway Route. It is at a distant of 25 Km from Dumka and 50 Km from Jshidih Railway Station.By RoadIt is situated on Dumka – Deoghar state Highway at a distance of 24 Km from the district headquarter Dumka. Credit @360_dumka
रांची: प्रथम स्वतंत्रता संग्रामी तिलका मुर्मू के शहीद दिवस पर उनकी स्मृति के अवसर पर आदिवासी सेंगेल अभियान के अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने झारखंडी नियोजन नीति को लेकर कहा कि झारखंड की सभी सरकारी/गैर सरकारी नौकरियों का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों को आवंटित किया जाए। फिर उसको प्रखंडवार कोटा बनाकर केवल उसी प्रखंड के आवेदकों से तुरंत भरा जाए। प्रखंड में अवस्थित आबादी के अनुपात से हिस्से का बंटवारा किया जा सकता है। इसमें खतियान की कोई जरूरत नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में वास करनेवाले लगभग सभी आदिवासी और मूलवासी झारखंडी हैं. उसी प्रकार शहरी क्षेत्रों के बीच में 10 प्रतिशत का हिस्सा बांटा जा सकता है।
झारखंडी भाषा नीति पर सालखन की राय
श्री मुर्मू ने झारखंडी भाषा नीति के संबंध में कहा कि झारखंड की 5 आदिवासी भाषाएं+ 4 मूलवासी भाषाएं ही झारखंडी भाषाएं हैं। इनको समृद्ध किया जाए। बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर स्थापित झारखंड प्रदेश वस्तुत: एक आदिवासी प्रदेश है। अतः अविलंब एक आदिवासी भाषा को झारखंड की प्रथम राजभाषा का दर्जा देना अनिवार्य है। आठवीं अनुसूची में शामिल एकमात्र झारखंडी भाषा-संताली भाषा को प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जा सकता है।
झारखंड की मांग खतियान आधारित नहीं था
उन्होंने कहा कि झारखंड और वृहद झारखंड की मांग खतियान आधारित नहीं था और अब भी नहीं है। झारखंड के पड़ोस में स्थापित बिहारी, बंगाली, उड़िया आदि उप-राष्ट्रीयता से भिन्न झारखंडी उप-राष्ट्रीयता को स्थापित कर, आंतरिक उपनिवेशी शोषण से मुक्त होकर विकास के पथ पर राजकीय स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) के साथ अग्रसर करने का एक सपना था और है। झारखंड को माँगने वाले आदिवासी-मूलवासी (झारखंडी) को स्थापित करना ही झारखंडी स्थानीयता नीति बनाने का मूल लक्ष्य हो सकता है। जो बाकी उप-राष्ट्रीयता की तरह उनकी भाषा-संस्कृति और जातिगत पहचान (सूची) से स्वत: स्थापित हो जाता है। अतएव आदिवासी- मूलवासी ही झारखंडी और स्थानीय हैं।
स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के अवसर पर रांची की छाता टूरी चटकपुर स्थित है रूट राइडर चिल्ड्रन स्कूल में स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दिया गया और उनके बताए गए मार्ग पर चलने का प्रतिज्ञा किया गया स्कूल के बच्चों ने बारी बारी से स्वामी जी के तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए और उनके जयंती पर उन्हें नमन किया इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्रबंधक विक्रांत विश्वकर्मा शिक्षिकाओं में पूजा कुमारी शोभा कुमारी चांद कुमारी सोनी कुमारी किरण कुमारी श्रीमती साधना झा सहित विद्यालय के विद्यार्थी गण उपस्थित थे
खलारी,12 जनवरी : नोनिया चौहान एकता मंच, एनके-पिपरवार के द्वारा सीएचपी छठ घाट स्थित पृथ्वीराज चौहान चौक पर स्वामी विवेकानंद की 160वीं जयंती मनाई गई। इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित मंच के सभी सदस्यों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण किया। उसके बाद उनके जीवनी पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने बताया कि स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, वेदांत और योग को विश्वपटल पर पहचान दिलाने में महत्पूर्ण योगदान दिया। वे एक राष्ट्रीय संत थे, युग प्रवर्तक के रूप में वे हमेशा युवाओं के प्रेरणा स्रोत रहेंगे। उन्होंने बताया कि स्वामी विवेकानंद भगवान बुद्ध की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित थे। संन्यास में दीक्षित होने के तुरंत बाद, स्वामी विवेकानंद ने बोधगया के पवित्र शहर में बोधि वृक्ष की पूजा की, जिसके तहत भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। उन्होंने कहा कि उनके दर्शन और विचारों को हमें आत्मसात करना चाहिए। उनका जीवन दर्शन पढ़कर उनके आदर्शों से युवाओं को अनंत ऊर्जा प्राप्त होती है। इस कार्यक्रम में नंदलाल चौहान, रामबली चौहान, कृष्णा चौहान, बुटन चौहान, अभिषेक चौहान, अजय चौहान, दिनेश चौहान, हरकेश चौहान, डॉ राजकुमार महतो कमलेश प्रसाद, राजेन्द्र चौहान, राजकुमार चौहान, दिलीप चौहान जागीन चौहान, सुधीर चौहान, रामनारायण नोनिया, शिवनारायण नोनिया, लोरेंजो सहित कई स्वजातीय लोग उपस्थित थे।
ख़लारी, 12 जनवरी : झारखंड मुक्ति मोर्चा के खलारी प्रखंड अध्यक्ष, अनिल पासवान ने तुमांग पंचायत को मैक्लुस्किगंज थाना में शामिल किए जाने पर एक ज्ञापन डॉ० महुआ माजी राज्य सभा सांसद झारखंड को भेजते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सरकार को पत्र लिखा है। श्री पासवान ने ज्ञापन में लिखा कि खलारी प्रखंड के तुमांग पंचायत को मैक्लुस्किगंज थाना में शामिल करने के प्रस्ताव को केबिनेट में स्वीकृति दी गई। इसके बाद से तुमांग पंचायत के ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मच गया है । उन्होंने आगे लिखा कि तुमांग पंचायत में अति संवेदनशील विभिन्न ग्राम है। साथ ही इसकी सीमा से 3 जिला (लातेहार, चतरा, राँची) से सटा हुआ है। जिसके कारण यहां सन् 1990 के दशक में धमधमियां पुलिस पिकेट का निर्माण कराया गया था जो कि खलारी थाना से लगभग 5 कि०मी० दूर है फिर भी तुमांग पंचायत को खलारी थाना से मैकलुस्कीगंज थाना में परिवर्तित करना समझ से परे है। क्योंकि तुमांग के विभिन्न गाँवों के लोगों को खलारी थाना पहुँचने के लिए संसाधन हर वक्त सार्वजानिक ऑटो, चारपहिया वाहन उपलब्ध रहते हैं जिससे गरीब, असहाय, वृद्ध महिला-पुरुष एवं अपंग जैसे हर तरह के लोग आसानी से खलारी थाना दिन-रात कभी भी बिना भय के पहुँच जाते हैं और दूसरी ओर धमधमियां पिकेट के साथ-साथ खलारी थाना के अधिकारी भी समय पर घटनास्थल पर पहुँच जाते हैं। उन्होंने आगे लिखा कि मैक्लुस्किगंज थाना तुमांग पंचायत से लगभग 7 कि०मी० दूर है और तुमांग के किसी भी गांव से सार्वजनिक यातायात वाहन (बस, टेम्पू, चारपहिया वाहन) के साधन उपलब्ध नहीं है । जिससे गरीब लाचार, असहाय वृद्ध एवं दिव्यांग पिड़ितों को मैक्लुस्किगंज थाना पहुँचने में असुविधा होगी और सही समय पर मैक्लुस्किगंज थाना घटनास्थल पर नहीं पहुँच पाएगी। साथ ही तुमांग पंचायत से मैक्लुस्किगंज थाना पहुँचने के मार्ग पहुँचने के मार्ग अति संवदेनशील इलाकों से गुजरता है जिसमें आये दिन अपराधिक घटनाएं घटती रहती हैं जिस कारण से उन रास्ते में आवागमन काफी कम होता है। उन्होंने प्रदेश के सरकार से तुमांग पंचायत के ग्रामीणों की परेशानियों पर चिंतन करते हुए तुमांग पंचायत को मैकलुस्कीगंज थाना में परिवर्तित करने के प्रस्ताव की स्वीकृति को निरस्त करने का मांग किया है।
खलारी, 12 जनवरी : डीएवी स्कूल खलारी में स्वामी विवेकानंद की जयंती युवा दिवस के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य बीपी रॉय ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर माल्यार्पण करके और दीप प्रज्वलित करके की। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्राचार्य श्री रॉय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद बहुत अच्छे शिक्षक और लेखक थे। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है विवेकानंद ने अपने देश और धर्म को संपूर्ण विश्व में एक पहचान दिलाई। स्वामी जी ने संपूर्ण विश्व में भारत के ज्ञान और संस्कृति का प्रचार प्रसार किया। प्राचार्य ने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों पर चलने का आह्वान किया। विद्यार्थियों को विद्यालय के सुपरवाइजरी हेड कंचन सिंह ने भी संबोधित किया। श्री सिंह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक युग निर्माता थे। उन्होंने देश के युवाओं को एक नई दिशा दी। स्वामी जी ने युवाओं को आह्वान किया कि उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’। इस दौरान विद्यार्थियों में विद्यालय की कक्षा ग्यारहवीं की छात्रा मनाली मिश्रा ने हिंदी में, तो श्वेता कुमारी ने अंग्रेजी में स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं तनु एवं समूह ने ‘ज्ञान की निर्मल धारा, वैदिक धर्म हमारा’ गीत प्रस्तुत करके सभी का मन मोह लिया। कक्षा छठी के मानस बर्नवाल ने स्वामी विवेकानंद बनकर विद्यार्थियों की तालियाँ बटोरी। मंच संचालन लक्षिता कश्यप, काशफा निगर, नीलू कुमारी और रिया कुमारी का सराहनीय रहा। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
खलारी, 12 जनवरी : झारखंड पब्लिक स्कूल (जेपीएस) मोहन नगर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ स्वामी विवेकानंद की 160वीं जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम में सर्वप्रथम विद्यालय के सभी शिक्षिक-शिक्षिकाओ ने स्वामी विवेकानंद के छाया चित्र पर पुष्प अर्पण किया। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार चौहान ने बच्चों के बीच स्वामी विवेकानंद की जीवनी एवं उनके विचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया अपने जीवन में जब तक अपने लक्ष्य की प्राप्ति न कर ले तब तक हमें कड़ी मेहनत करते रहना चाहिए और हमें देखना चाहिए कि कही कोई कमी तो नहीं रह गई है, उस पर चिंतन मंथन करते हुए सुधारने का प्रयास हमेशा करना चाहिए। वही विद्यालय के सभी शिक्षिक- शिक्षिकाओ ने भी बच्चों के समक्ष स्वामी विवेकानंद के विचारों एवं उनके जीवन के परिचय को बताया। मालूम हो कि स्वामी विवेकानंद को भारत के युवाओं की प्रेरणास्रोत माना जाता है। 1985 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। स्वामीजी की शिक्षाओं और दर्शन ने लोगों, विशेष रूप से युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया है। इसलिए उनके जन्मदिन को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।इस कार्यक्रम में विद्यालय के मनोज कुमार यादव, संदीप कुमार महतो, राजेश कुमार, गणेश कुमार महतो, आरती कुमारी, रीता कुमारी, किरण कुमारी, गीता कुमारी, नवल कुमार दास, रमेश कुमार महतो, गौतम प्रताप सिंह, रेनू देवी, साजिया परवीन आदि उपस्थित थे।