रांची : चारा घोटाला, मधु कोड़ा लूट कांड, अवैध खनन घोटालों समेत कई बड़े मामलों को उजागर करनेवाले पूर्वी जमशेदपुर के विधायक सरयू राय ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती के मौके पर भ्रष्टाचार विरोधी प्रतिनिधि सम्मेलन का आयोजन किया. इसमें राज्य एक दर्जन से अधिक जिलों से करीब एक हजार प्रतिनिधि शामिल हुए. भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरयू राय की नीति और नीयत पर विश्वास जताते हुए अधिकतर प्रतिनिधियों ने कई सुझाव दिए और उसके समाधान के तरीके पर अमल करने करने की गुहार लगाई. सरयू राय ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सबके सुझावों का संकलन करने के बाद उनसे सलाह-मशविरा कर प्रमंडलीय स्तर पर आगे का कार्यक्रम तय किया जाएगा.
भ्रष्टाचार ने शासन व्यवस्था को पंगु बना दिया
इस मौके पर सरयू राय ने भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए कहा कि झारखंड में व्यवस्था को ऊपर से नीचे तक संचालित करने की संवैधानिक जिम्मेदारी संभालने वाले लोकसेवकों के भ्रष्ट आचरण को बढ़ावा देनेवाली कार्य संस्कृति संसदीय लोकतंत्र के मूल्यों को नष्ट करने पर उतारू है. भ्रष्टाचार ने झारखंड की शासन व्यवस्था को बुरी तरह जकड़ लिया है. कहीं कोई सुनवाई नहीं है. भष्टाचार के बारे में जहां जाइएगा हमें पाइयेगा की उक्ति चरितार्थ हो रही है. श्री राय ने कहा कि ईडी जैसी संस्था जांच के बाद न्यायालय में दोषियों को चिन्हित कर आरोप पत्र जमा कर देता है. सत्ता शीर्ष से जुड़े प्रशासनिक एवं गैर प्रशासनिक अधिकारी और बिचौलिए गिरफ्तार हो जाते हैं पर ऊपर बैठे आकाओं को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के साथ-साथ पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल पर भी प्रमाण सहित ठोस आरोप सिद्ध कर ईडी ने न्यायालय में आरोप पत्र सुपुर्द किया है. इसी तरह मैनहर्ट, टॉफी, टीशर्ट एवं अन्य घोटालों में एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच में दोष सिद्ध हो जाने के बाद भी सरकार दोषियों पर कार्रवाई नहीं कर रही है. इसी तरह दर्जनों मुकदमे एसीबी की संचिकाएं धूल फांक रही है. लेकिन सरकार का इसपर कोई ध्यान नहीं है.
जेपी ने आखिर व्यवस्था परिवर्तन पर जोर क्यों दिया?
श्री राय ने 1974 के जेपी आंदोलन की याद दिलाते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन को पड़ाव माना था. जेपी ने व्यवस्था परिवर्तन पर जोर दिया. इसीलिए जेपी ने सपूर्ण क्रांति का उदघोष किया था. उन्होंने कहा कि आज के परिप्रेक्ष्य में जेपी के विचार और भी प्रासंगिक हैं. आज जब राजनीतिक भ्रष्टाचार चरम पर है. समस्त जनजीवन और शासकीय व्यवस्था हर स्तर पर बुरी तरह से आक्रांत है, तो ऐसे समय में समाज में हो रही गिरावट को रोकने के लिए भष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके युवापीढ़ी को सजग प्रहरी की भूमिका में आना होगा. इसलिए यह प्रतिनिधि सम्मेलन भ्रष्ट व्यवस्था में परिवर्तन करने के लिए राज्य की जनता, खासकर नौजवानों का आह्वान करता है.

कई प्रस्ताव के प्रारूप पेश किये गए
प्रतिनिधि सम्मेलन के अंत में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कई प्रस्ताव विचारार्थ प्रारूप पेश किये गए. इनमें मुख्य रूप से सरकारी विभागों में ई-फाइल की कार्य संस्कृति लागू करने पर जोर दिया गया, ताकि संचिकाओं में हेराफेरी नहीं की जा सके. लोक निर्माण कार्य विभागों में शत-प्रतिशत ई-टेंडरिंग लागू करने, भूमि रिकार्ड को पूर्णत: डिजिटाइज किया जाए और ई-रजिस्ट्री के साथ ही ई-म्यूटेशन भी जाए. यदि भू-रिकार्ड का विवाद है तो वह भी इसमें परिलक्षित हो जाए. इसके अलावा 100 के बड़े नोट बंद करने, संपत्ति को आधार से लिंक करने, बेनामी संपत्ति शत-प्रतिशत जब्त करने, 50,000 से ऊपर की लेन-देन बंद करने और बैंक निकासी में पैन कार्ड अनिवार्य करने के प्रस्ताव शामिल हैं.












