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Tuesday, March 17, 2026
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श्री गुरु नानक देव जी के 555वें प्रकाश पर्व का साप्ताहिक उत्सव: गुमला में सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

गुमला के श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे में इस वर्ष गुरु नानक देव जी के 555वें प्रकाश पर्व के साप्ताहिक कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि मानवीय एकता, भाईचारे और विनम्रता की गूंज भी बन गया है।

गुरु नानक देव जी, सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु, ने अपने उपदेशों के माध्यम से समाज को नई दिशा दी। इस प्रकाश पर्व पर उनके विचार और शिक्षाएं गुमला के सिख समुदाय और अन्य लोगों को प्रेरणा देने का कार्य कर रही हैं।

प्रकाश पर्व का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा के दिन 1469 में हुआ था। इसी कारण यह दिन सिख समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। गुरु नानक जयंती या प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाने वाला यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मानवता और सेवा का भी संदेश देता है।

गुरु नानक के प्रमुख उपदेश

  1. इक ओंकार: ईश्वर एक है और वह सभी जगह विद्यमान है।
  2. भाईचारा: सभी मानव एक समान हैं, और जाति, धर्म या रंग का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
  3. सेवा और विनम्रता: मानवीय सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
  4. ईमानदारी और मेहनत: अपनी कमाई को ईमानदारी से अर्जित करना और जरूरतमंदों की मदद करना हर इंसान का कर्तव्य है।

गुमला का सिख समुदाय: इतिहास और योगदान

सन् 1947 में भारत-पाक विभाजन के दौरान, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से कुछ सिख परिवार गुमला आए और यहीं बस गए। आज गुमला में लगभग 100 सिख परिवार मिलजुलकर रहते हैं।

बीपीओ दिलदार सिंह, जिन्होंने इस प्रकाश पर्व के अवसर पर अपने अनुभव साझा किए, ने बताया कि इन परिवारों ने न केवल अपने परिजनों की परंपराओं को जीवित रखा, बल्कि गुमला की सांस्कृतिक विविधता को भी समृद्ध किया है।

गुरु नानक देव जी के आदर्शों को सिख समुदाय ने न केवल अपने जीवन में उतारा है, बल्कि अन्य समुदायों के साथ इसे साझा कर समाज में एकता और सद्भाव का संदेश दिया है।

गुमला में प्रकाश पर्व का सप्ताह भर चलने वाला उत्सव

गुमला स्थित श्री गुरु सिंह सभा गुरुद्वारे में आयोजित यह कार्यक्रम एक सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है। सप्ताह भर चलने वाले इस आयोजन में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, और लंगर का आयोजन किया जा रहा है।

लंगर: सेवा और समानता का प्रतीक

गुरु नानक देव जी की परंपरा का पालन करते हुए, गुरुद्वारे में सभी के लिए निःशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। लंगर, सिख धर्म की सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक, समानता और सेवा का प्रतीक है।

भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा

सप्ताह भर कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया है, जिसमें गुरु नानक देव जी के उपदेशों और शिक्षाओं को भजनों के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है। यह न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि अन्य धर्मों के लोगों के लिए भी आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है।

गुरु नानक की शिक्षाएं: आज की दुनिया के लिए प्रासंगिक

गुरु नानक देव जी के उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने कि 15वीं सदी में थे। उनकी शिक्षाओं का सार है—समाज से जातिवाद, भेदभाव और अहंकार को खत्म करना।

समाज के लिए संदेश:

  • किसी का हक मत छीनो।
  • मेहनत और ईमानदारी से कमाओ।
  • जरूरतमंदों की मदद करो।
  • अहंकार को त्यागो और सेवा को प्राथमिकता दो।

गुमला के लोगों में उत्साह और सहभागिता

गुरुद्वारे में होने वाले आयोजन केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं हैं। अन्य धर्मों और समुदायों के लोग भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। यह भाईचारे और सामुदायिक एकता का एक सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

सिख समुदाय के बुजुर्ग से लेकर युवा, सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाई है।

प्रकाश पर्व से सीखने की प्रेरणा

गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व हमें हर साल यह याद दिलाता है कि मानवता, सेवा, और समानता से बड़ा कोई धर्म नहीं है।

गुमला का यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि समाज को एक बेहतर दिशा देने का प्रयास भी है। आइए, हम सभी गुरु नानक के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाएं और एक बेहतर समाज की ओर कदम बढ़ाएं।

 

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया 
एडिटेड – संजना कुमारी 

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