गुमला : – गुमला जिले की स्थापना की 42 वीं वर्षगांठ के अवसर पर आज जिला मुख्यालय में एक गरिमामय एवं भावनात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिले की गौरवगाथा को समर्पित इस आयोजन में वर्तमान प्रशासनिक नेतृत्व के साथ-साथ गुमला में अतीत में कार्यरत रहे अधिकारी, पत्रकार, खिलाड़ी एवं समाजसेवी एकत्र हुए और जिले की यात्रा, चुनौतियों एवं उपलब्धियों को स्मरण किया।
श्रद्धांजलि से आरंभ हुई स्थापना दिवस की सुबह
प्रातः सर्वप्रथम उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी, पुलिस अधीक्षक शंभू कुमार सिंह, उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महत्तो एवं अन्य वरीय अधिकारियों ने इनडोर स्टेडियम गुमला में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके उपरांत विकास भवन परिसर स्थित शहीद तेलंगा खड़िया की प्रतिमा, अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की प्रतिमा, और बिरसा मुंडा एग्रो पार्क में बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा सहित अन्य शहीद स्मारकों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
“गुमला रिवाइंड” – इतिहास की झलकियों का उद्घाटन
मुख्य कार्यक्रम से पूर्व समाहरणालय सभागार के समीप ‘गुमला रिवाइंड’ नामक भव्य फोटो गैलरी का उद्घाटन किया गया, जिसमें गुमला के इतिहास, विभिन्न प्रशासनिक घटनाओं, विशिष्ट आगंतुकों की यात्राओं एवं सामाजिक आंदोलनों से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरें प्रदर्शित की गईं। वरिष्ठ अतिथियों ने इसे देखकर अतीत की अनेक स्मृतियों को पुनर्जीवित कियागया उक्त सभी फोटोग्राफ वरिष्ठ पत्रकार गणपत लाल चौरसिया द्वारा संजोग कर रखे गए थे , उक्त अधिकांश फोटोग्राफों में संबंधित विशिष्ट लोगों में पूर्व भारत के प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री ( बिहार ) कर्पूरी ठाकुर एवं उनके साथ उपस्थित लोकदल के नेता पूरन चंद , पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे , पूर्व मंत्री श्रीमती सुमति उरांव , गुमला के प्रथम उपयुक्त द्वारका प्रसाद सिन्हा सहित अन्य अनेक विशिष्ट लोगों से इंटरव्यू करते , गुमला जिला के वरिष्ठ पत्रकार गणपत लाल चौरसिया ।
मुख्य समारोह – इतिहास, अनुभव और सम्मान का संगम
चंडाली स्थित समाहरणालय सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सेवानिवृत्त उपायुक्त श्री गौरी शंकर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में वर्ष 2014-15 के कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि उस समय गुमला गंभीर उग्रवाद की चपेट में था। उन्होंने कहा कि—
> “मैंने बिना सुरक्षा बल के बानो प्रखंड के घोर उग्रवाद प्रभावित बनालाट गांव में मोटरसाइकिल से जाकर जनता दरबार आयोजित किया था। उस समय उग्रवादियों ने मुझे चारों ओर से घेर लिया था, लेकिन विश्वास, संवाद और संयम के साथ हम वहां से सुरक्षित लौटे। यह पहला अवसर था जब ग्रामीणों के बीच सरकार प्रत्यक्ष पहुंची थी और वहीं से विकास का बीज बोया गया।”
उन्होंने उपायुक्त गुमला कर्ण सत्यार्थी का विशेष रूप से धन्यवाद दिया कि उन्होंने सेवानिवृत्त अधिकारियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित कर पुराने अनुभवों को साझा करने का मंच प्रदान किया।
पूर्व पुलिस अधीक्षक उपेंद्र कुमार ने अपने वक्तव्य में गुमला के कठिन दौर को रेखांकित करते हुए बताया कि— “जब मैंने कार्यभार संभाला, गुमला और इसके ग्रामीण इलाकों में जाने से भी लोग डरते थे। लेकिन टाना भगतों के अहिंसक आंदोलन, जनता के सहयोग और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी से हम शांति बहाल कर पाए। गुमला सिर्फ उग्रवाद नहीं, बल्कि साहित्य, विज्ञान और खेल के लिए भी जाना जाता है।”
पूर्व उप विकास आयुक्त पुणे उरांव ने गुमला समाहरणालय भवन की प्रशंसा करते हुए कहा— “यह भवन एक अद्वितीय प्रशासनिक ढांचा है, जहाँ जिले के लगभग सभी विभाग एक छत के नीचे कार्यरत हैं। उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के नेतृत्व में गुमला प्रशासन जनता से सीधे संवाद में विश्वास रखता है। शौचालयों में भी कुड़ुक भाषा में लिखे गए संकेतक इस जिले की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता का प्रमाण हैं।”
उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान फील्ड विजिट में आने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे आज गुमला परिवर्तन की राह पर अग्रसर है। उन्होंने कृषि के क्षेत्र में अधिक नवाचार और संसाधनों के सही उपयोग पर बल दिया।
गुमला कार्यालय में लंबे समय तक सेवाएं देने वाले पूर्व कार्यालय अधीक्षक मार्शल होरो ने भावुकता के साथ अपने अनुभव साझा किए—“मैंने 39 वर्षों तक गुमला की सेवा की, कई स्थानों पर अवसर मिलने के बावजूद अपने जिले के लिए यहीं रहा। इस आयोजन से कई भूली-बिसरी स्मृतियाँ जीवंत हो उठीं। इस कार्यक्रम ने हमें हमारी जड़ों से फिर से जोड़ा है।”
इस अवसर पर पूर्व अंतरराष्ट्रीय एथलीट महावीर राम लोहारा ने खेल के प्रति अपने जुड़ाव की कहानी साझा करते हुए कहा—
> “मैं आठवीं कक्षा में था जब अखिल भारतीय प्रतियोगिता में भाग लेने का सपना देखा। बाद में मैंने लॉन्ग जंप, हॉकी और अन्य खेलों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर गुमला का नाम रोशन किया। आज के बच्चों को जो संसाधन व प्रशिक्षण मिल रहा है, उससे आने वाले समय में गुमला निश्चित ही स्पोर्ट्स मैप में और ऊपर जाएगा।”
वरिष्ठ पत्रकार अपनी अनुभव साझा की
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडेय ने गुमला के गठन से पूर्व के दौर और जिले की साहित्यिक, सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया—
> “गुमला को कभी मिनी शिमला कहा जाता था, ठंडा मौसम, शांत परिवेश और जन सहयोग प्रशासन की ताकत हुआ करता था , जिले के पत्रकार गणपत चौरसिया जैसे वरिष्ठ पत्रकारों का योगदान अविस्मरणीय है। साहित्यिक संस्थानों और विद्वानों ने गुमला को बौद्धिक दृष्टि से समृद्ध किया है।”
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार गणपत लाल चौरसिया और वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडेय मुख्य अतिथि ने झारखंडी शॉल ओढ़ाकर और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
पुस्तक विमोचन एवं सम्मान समारोह
कार्यक्रम के दौरान गुमला के ऐतिहासिक दस्तावेजों, उपलब्धियों, जनसांख्यिकी आंकड़ों और सांस्कृतिक पक्षों पर आधारित एक सुंदर पुस्तक का विमोचन भी किया गया। साथ ही जिले के 12 उत्कृष्ट शिक्षकों एवं राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिला का नाम रोशन करने वाले 14 खिलाड़ियों को मुख्य अतिथि एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
स्वागत भाषण एवं समापन
कार्यक्रम का संचालन एवं स्वागत भाषण उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महत्तो द्वारा किया गया, जिन्होंने कहा—
> “गुमला जिला 1983 में लोहरदगा से अलग होकर अस्तित्व में आया। यह जिला कभी सर्वाधिक शांत माना जाता था, फिर समय के साथ अनेक चुनौतियाँ आईं, लेकिन प्रशासन, पुलिस एवं नागरिकों के सामूहिक प्रयास से आज गुमला पुनः विकास, खेल और पर्यटन के मानचित्र पर उभर रहा है।”
कार्यक्रम का समापन परियोजना निदेशक ITDA रीना हांसदा द्वारा किया गया, उन्होंने सभी अतिथि गणों का धन्यवाद किया एवं गुमला जिले के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में उपायुक्त गुमला कर्ण सत्यार्थी, पुलिस अधीक्षक गुमला शंभू कुमार सिंह, परियोजना निदेशक ITDA रीना हांसदा, अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, एसडीओ चैनपुर पूर्णिमा कुमारी, एसडीओ बसिया जयवंती देवगम, नजारत उप समाहर्ता ललन कुमार रजक, जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार, अन्य प्रशासनिक पदाधिकारीगण, शिक्षाविद, पत्रकार बंधु एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया
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