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Saturday, June 6, 2026
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विनोबा भावे विश्वविद्यालय ने स्नातक नामांकन में मारी बाज़ी, पूरे राज्य में बना नंबर वन

विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि), हजारीबाग ने चार वर्षीय स्नातक सत्र 2025-29 में नामांकन के क्षेत्र में राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों को पीछे छोड़ते हुए प्रथम स्थान हासिल किया है। विश्वविद्यालय में अब तक कुल 31,738 छात्रों का नामांकन हो चुका है, जो इसे राज्य में अव्वल बनाता है।

राज्य के विश्वविद्यालयों में नामांकन की स्थिति

चांसलर पोर्टल के नोडल पदाधिकारी डॉ इंद्रजीत कुमार ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि रांची विश्वविद्यालय 24,597 नामांकन के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि सिद्धू कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका ने 24,238 नामांकन के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

डॉ इंद्रजीत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आँकड़े 4 अगस्त 2025 तक द्वितीय मेधा सूची के आधार पर लिए गए नामांकन को दर्शाते हैं।

“हमारा लक्ष्य अब भी अधूरा है” – डॉ इंद्रजीत कुमार

राज्य में पहले स्थान पर आने के बावजूद डॉ इंद्रजीत कुमार इस संख्या से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 50,000 नामांकन का है और विश्वविद्यालय इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है।”

उन्होंने इस सफलता का श्रेय कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा के मार्गदर्शन को दिया और कहा कि कुलपति के निर्देशन में पूरी टीम ने बेहतर समन्वय के साथ कार्य किया। उन्होंने सभी महाविद्यालय प्राचार्यों, सहयोगी अधिकारियों और विशेष रूप से नामांकन कोषांग के सहायक दीपू की कार्य क्षमता और कंप्यूटर दक्षता की सराहना की।

मीडिया की भूमिका को माना अहम

डॉ इंद्रजीत कुमार ने हजारीबाग मीडिया की भूमिका की भी प्रशंसा की और कहा कि “स्थानीय मीडिया द्वारा किए गए सशक्त कवरेज ने छात्रों और अभिभावकों के बीच विश्वविद्यालय की छवि को बेहतर बनाने में अहम योगदान दिया है।”

नामांकन में गिरावट पर जताई चिंता

हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में नामांकन की संख्या लगातार घट रही है, जो चिंताजनक है। इस प्रवृत्ति को लेकर डॉ कुमार अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मुख्य कारणों में से एक है ‘प्रयत्नलाघव’ यानी मेहनत से बचने की प्रवृत्ति।

डॉ इंद्रजीत ने कहा कि “कुछ विद्यार्थी ऐसे संस्थानों को प्राथमिकता दे रहे हैं जहां नियमित कक्षाओं की बाध्यता नहीं होती, भले ही वहाँ फीस अधिक हो। ऐसे संस्थान छात्रों को अच्छे अंक तो दे देते हैं, लेकिन उनके पास न विषय का गहराई से ज्ञान होता है और न ही किसी प्रतिस्पर्धा में टिकने की क्षमता।”

विभावि की यह सफलता राज्य के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक सकारात्मक संकेत है, परंतु नामांकन में गिरावट जैसे गंभीर मुद्दों पर दीर्घकालिक रणनीति बनाना आवश्यक है। ऐसे प्रयासों से ही न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी, बल्कि विद्यार्थियों का समग्र विकास भी संभव होगा।

News – Vijay Chaudhary


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