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Saturday, March 7, 2026
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देश कोई दुकान नहीं है और न एक व्यक्ति…जो अपने बचाव में देशवासियों का भविष्य दाव पर लगा दे…अपने पूर्ववर्तियों को गाली देकर कोई बड़ा नहीं बन सकता

बलराज मधोक पूर्व जनसंघ अध्यक्ष और RSS नेता थे, जिन्हें पार्टी से मतभेदों के कारण निकाल दिया गया था। अपनी किताब में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाए, जिसमें कहा गया कि अटल जी ने दिल्ली के 30 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित जनसंघ कार्यालय/आवास को “व्यभिचार का अड्डा” बना दिया था, जहाँ नित्य नई-नई लड़कियाँ आती थीं। मधोक ने यह भी लिखा कि उन्होंने अटल जी को शादी करने की सलाह दी थी ताकि बदनामी से बचा जा सके।

“अय्याशी” जैसे शब्द का प्रयोग केवल मधोक की इस किताब में मिलता है

इसका मतलब कि यहाँ व्यभिचार की परंपरा बहुत पुरानी है। ग्रोक यह भी बताता है कि ये आरोप पार्टी के आंतरिक विवादों और मधोक की कड़वाहट से प्रेरित माने जाते हैं। कोई स्वतंत्र या विश्वसनीय स्रोत इनकी पुष्टि नहीं करता। अटल जी का निजी जीवन मुख्य रूप से उनकी लंबी साथी राजकुमारी कौल से जुड़ा रहा, जो सार्वजनिक रूप से जाना जाता है, लेकिन “अय्याशी” जैसे शब्द का प्रयोग केवल मधोक की इस किताब में मिलता है।

लंबी गोरी लड़की …..अब अनिल अंबानी का नाम एपस्टीन फाइलों में आ रहा है।

डरपोक लोग झूठे तो होते ही हैं लेकिन इतने डरपोक होंगे कि देश को संकट में डालकर भाग जाय …..क्या जनता के साथ धोखा नहीं है। संसद में अगर खतरा है तो फिर कहाँ सुरक्षित जगह है ? डील है या ढील, यह भी सामने आ रहा है ।

क्या हमें अमेरिका डिक्टेट कर रहा है ?

अजीब बात है न कि हम सिर्फ अमेरिकी बयानों पर रिएक्ट कर रहे हैं। क्या हमें अमेरिका डिक्टेट कर रहा है ? पहले कहा कि कृषि को नहीं खोला जाएगा , पर अब आप सस्ते डेयरी उत्पाद भी पाएंगे और उन गाय के जिन्हें मांस मिश्रित चारा खिलाया जाता है।

कहाँ गया अब धर्म और सनातन और हिंदूवादी संगठन ? देश को मूर्ख बनाया जा रहा है …..पर इस चक्कर में सिर्फ यह कहकर तो नहीं बचा जा सकता कि यह एक अय्याश आदमी की करतूत है। कुछ तो काला है दाल में।

सवाल यह भी उठता है कि हम इतने कमजोर कैसे साबित हुए ? अपने पूर्ववर्ती लोगों को गाली देकर आप बड़े नहीं हो सकते।

अब आप ही बताएं कि विदेशों में लोग अपना परिचय किस तरह देंगे, क्या कहेंगे कि हम उस देश से आए हैं जहां का मुखिया एक अय्यास आदमी है?

बिका हुआ मीडिया कभी सवाल नहीं कर पाएगा

दुनियाभर के बड़े-बड़े लोगों ने नाम आने पर एप्सटीन फाइल में इस्तीफा दे दिया.  मगर क्या यहां जरा भी नैतिकता बची है ? कोई वक्तव्य दिया क्या ? चुप्पी माना कि कई बातों का जवाब होती है मगर क्या इस तरह की चुप्पी सही है ? ये बिका हुआ मीडिया क्या कभी सवाल कर पाएगा देश हित में ?

अचानक इस किताब ने इसे पढ़ने की जिज्ञासा पैदा कर दी है। जब अगली पीढ़ी इनके बारे में जानेगी तो इन्हें किस तरह संबोधित करेगी ? प्रश्न देश का है, देश की इज्जत का है, देश के किसानों का है।

हम तो ईरान जितनी इच्छाशक्ति के भी नहीं निकले…! 

जनरल नरवाने की किताब को लेकर पहले ही बबाल मचा हुआ है। लोकसभा में भाषण भी नहीं हो सका, राज्यसभा में भी बस गालियों का जिक्र और पुराने लोगों का अपमान ही हुआ। ऐसा लगता है जैसे नेताओं की इज्जत उतारने का स्ट्रिप शो चल रहा हो। न देश के लिए कोई दिशा है और दशा पर चिंतन है ही नहीं। रूस जैसा भरोसेमंद दोस्त भी करीब-करीब हम खो चुके हैं। अब तो यह साफ हो चुका है कि हम अमेरिका के सामने घुटने टेक चुके हैं। हम तो ईरान जितनी इच्छाशक्ति के भी नहीं निकले ।

यह सब साबित करता है कि इज़राइल और उसका मोसाद अमेरिका में और भारत में किस हद तक घुसा हुआ है। देश कोई दुकान नहीं है और न एक व्यक्ति जो अपने बचाव में 140 करोड़ लोगों का भविष्य दाव पर लगा दे।

-केदार नाथ शब्द मसीहा, (फेसबुक से) 

 


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