29.5 C
Ranchi
Saturday, June 6, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGomiaप्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में ईस्टर का त्यौहार शोकपूर्ण...

प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में ईस्टर का त्यौहार शोकपूर्ण वातावरण में मनाया गया

न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में ईस्टर का त्यौहार शोकपूर्ण वातावरण में मनाया गया

गुमला : – गुमला जिला में ईसाई धर्म लंबियों द्वारा जिले के समस्त चर्चो में प्रभु यीशु मसीह की याद में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण और शोकपूर्ण दिन है, जो प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है। इस दिन ईसा मसीह को यहूदी शासकों द्वारा असहनीय यातनाएं देने के बाद सलीब क्रॉस पर चढ़ाया गया था। यह घटना ईस्टर संडे से पहले वाले शुक्रवार को हुई थी, जिसे मानवता के उद्धार का प्रतीक मानकर ‘गुड’ या पवित्र माना जाता है।
गुड फ्राइडे का इतिहास और महत्व:
बलिदान का दिन: ईसाई मान्यता के अनुसार, प्रभु यीशु ने मानव जाति को उनके पापों से मुक्ति दिलाने और प्रेम व क्षमा का मार्ग दिखाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
ऐतिहासिक घटना: लगभग 30 ईस्वी में, यरूशलेम में यहूदी शासकों और रोमन गवर्नर पोंटियस पिलातुस के आदेश पर ईसा मसीह को क्रॉस पर चढ़ा दिया गया था।
अहिंसा का संदेश: सलीब पर चढ़ने से पहले उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने हत्यारों के लिए भी ईश्वर से क्षमा मांगी।
ईस्टर से संबंध: गुड फ्राइडे के तीन दिन बाद, रविवार को ईसा मसीह का पुनर्जन्म हुआ, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है।
प्रार्थना और उपवास: ईसाई धर्म के अनुयायी इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना सभाओं में भाग लेते हैं, सादगी बरतते हैं और उपवास रखते हैं।
गुड फ्राइडे को ‘ब्लैक फ्राइडे’ या ‘होली फ्राइडे’ भी कहा जाता है, जो दुख के साथ-साथ यीशु के महान प्रेम का स्मरण कराता है।

गुमला : – गुमला जिला में ईसाई धर्म लंबियों द्वारा जिले के समस्त चर्चो में प्रभु यीशु मसीह की याद में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, गुड फ्राइडे ईसाई धर्म का एक महत्वपूर्ण और शोकपूर्ण दिन है, जो प्रभु यीशु मसीह के बलिदान की याद में मनाया जाता है। इस दिन ईसा मसीह को यहूदी शासकों द्वारा असहनीय यातनाएं देने के बाद सलीब क्रॉस पर चढ़ाया गया था। यह घटना ईस्टर संडे से पहले वाले शुक्रवार को हुई थी, जिसे मानवता के उद्धार का प्रतीक मानकर ‘गुड’ या पवित्र माना जाता है।
गुड फ्राइडे का इतिहास और महत्व:
बलिदान का दिन: ईसाई मान्यता के अनुसार, प्रभु यीशु ने मानव जाति को उनके पापों से मुक्ति दिलाने और प्रेम व क्षमा का मार्ग दिखाने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
ऐतिहासिक घटना: लगभग 30 ईस्वी में, यरूशलेम में यहूदी शासकों और रोमन गवर्नर पोंटियस पिलातुस के आदेश पर ईसा मसीह को क्रॉस पर चढ़ा दिया गया था।
अहिंसा का संदेश: सलीब पर चढ़ने से पहले उन्हें शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने हत्यारों के लिए भी ईश्वर से क्षमा मांगी।
ईस्टर से संबंध: गुड फ्राइडे के तीन दिन बाद, रविवार को ईसा मसीह का पुनर्जन्म हुआ, जिसे ईस्टर के रूप में मनाया जाता है।
प्रार्थना और उपवास: ईसाई धर्म के अनुयायी इस दिन चर्च में विशेष प्रार्थना सभाओं में भाग लेते हैं, सादगी बरतते हैं और उपवास रखते हैं।
गुड फ्राइडे को ‘ब्लैक फ्राइडे’ या ‘होली फ्राइडे’ भी कहा जाता है, जो दुख के साथ-साथ यीशु के महान प्रेम का स्मरण कराता है।


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading