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Friday, October 9, 2026
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जर्जर सड़क, गंभीर गड्ढे पर सड़क, होने के कारण गंभीर रोगियों और विशेष कर गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला में आजादी के कितने वर्ष बाद भी गुमला जिले के विभिन्न प्रखंडों को जोड़ने के लिए सड़क नहीं है और अगर है भी तो उक्त सड़कों की स्थिति जर्जर हो चुकी है , जहां एंबुलेंस नही पहुंच पाती है , और तो और बरसात के मौसम ने उक्त सड़कों की स्थिति जर्जर और दलदली बना दिया है, फलस्वरूप गंभीर रोगियों और गर्भवती महिलाओं को आपातकाल स्थिति में इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने का एकमात्र सहारा (शीकाभार ) बहंगी ही एक सहारा बना हुआ है, जिस पर पीड़ित गंभीर रोगियों और गर्भवती महिलाओं को बैठाकर इलाज के लिए अस्पताल तक ले जाने का एक मात्र सहारा बना हुआ है, शिकाभर ( बहंगी ) इसी से संबंधित इसी से संबंधित एक गंभीर घटना प्रकाश में आई है, गुमला जिला अंतर्गत स्थित घाघरा प्रखंड के कुहीपाट पंचायत के सुदूरग्राम गुनिया की जर्जर सड़के अपनी बदहाली का इतिहास लिखते हुए चर्चाओं में आ गया है, घाघरा प्रखंड प्रशासन की अकर्मण्यता और कार्य शिथिलता के कारण प्रखंड में बदहाल सड़क व्यवस्था की तस्वीर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में एक गर्भवती महिला को सड़क की जर्जर स्थिति के कारण दो लोगों के सहारे बहंगी (शिकाभार ) में बैठाकर उक्त गांव से मुख्य सड़क तक ले जाते हुए दिखाया गया है , संबंधित ग्रामीणों ने बताया हैं कि उक्त गांव तक एम्बुलेंस गाड़ी नहीं पहुंचने के कारण, लोग अपना जान गवा चुके हैं, उक्त पीडित गर्भवती महिला को स्वास्थ्य सहिया की मौजूदगी में उक्त गांव से मुख्य पथ तक शिकाभार – बहंगी में बैठ कर पहुंचाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, गुनिया गांव की सड़क इतनी जर्जर हो गई है कि, उक्त सड़क में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्डों – ( गड्ढे में सड़क ) नजर आ रहें हैं और तो और उक्त सडक कीचड़ से भरे होने के कारण और बारिश के बाद उक्त सड़कों की स्थिति इतनी गंभीर,दयनीय और खतरनाक हो गई है कि गांव के अंदर छोटे वाहन का भी पहुंचना दुर्लभ हो गया है, ऐसी परिस्थिति में पीडित गंभीर रोगियों और विशेष कर गर्भवती महिलाओं को पेट के बल बैठकर आपातकाल स्थिति में अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी गंभीर समस्या बन गयी है, ज्ञायव्य हैं की गत दो माह पहले बनी उक्त सड़क की स्थिति जर्जर और बद से बत्तर हो गई है, ग्रामीणों का आरोप है कि उक्त सडक में मिट्टी-मोरम से सडक निर्माण का कार्य करीब दो माह पूर्व 15 वें वित्त आयोग की राशि से कराया गया था, ग्रामीणों का यह भी गंभीर आरोप है कि उक्त सड़क निर्माण में पर्याप्त मात्रा में मोरम का इस्तेमाल नहीं किया गया, बाल्कि आसपास से मिट्टी काटकर सीधा सड़क पर डाल दी गई, जिसके कारण बारिश होते ही उक्त सड़क कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया हैं, अतः अभिलंब

उक्त सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए और अभिलंब उक्त सड़क का निर्माण कार्य भी समय सीमा के अंदर घाघरा प्रखंड प्रशासन द्वारा पूर्ण कराया जाए ।


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