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Wednesday, October 28, 2026
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त्रिपुरा सीमा पर देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की, पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित डुमरी प्रखंड के बीएसएफ के शहीद जवान तिरंगे में लिपटे प्रबोध तिर्की पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव आकाशी पकरीटोली पहुंचते ही उनके पार्थिव शरीर को देखने के लिए आम नागरिकों का जन सैलाब उमड पाड़ा, देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान प्रबोध तिर्की अपराधियों से लड़ते हुए शहीद हो गए और अब वह हमारे बीच नहीं रहे। बताया जाता है कि त्रिपुरा के मीनू बॉर्डर पर ड्यूटी के दौरान अपराधियों के हमले का जवाब देते हुए, गंभीर रूप से घायल हो गए, 42 वीं वाहिनी के जवान प्रबोध तिर्की ने इलाज के दौरान शहीद हो गए, उनके शहीद होने की खबर से झारखंड राज्य स्थित उनके पैतृक गांव, गुमला जिले के डुमरी प्रखंड स्थित अकाशी पकरीटोली ग्राम पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और जब उनका पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा, तो माहौल गमगीन हो गया , फिर भी वीर शाहिद प्रमोद तिर्की अमर रहे, भारत माता की जय आदि नारों से पूरा क्षेत्र गंजे मन हो उठा और अपने वीर शहीद जवान प्रबोध तिर्की को नम आंखों और भारी मन से ग्रामीणों ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

बताया गया कि प्रबोध तिर्की अपने ड्यूटी पर तैनात थे इसी क्रम में अपराधियों द्वारा एकाएक हुए हमले का जवाब देते हुए
और आराधियों का सामना, करते हुए गंभीर रूप से घायल हो गए, प्राप्त जानकारी के अनुसार, 43 वर्षीय बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की 21 अक्टूबर की रात त्रिपुरा के मीनू बॉर्डर पर ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान अपराधियों ने एकाएक उन पर हमला कर दिया उक्त विषम परिस्थितियों में भी वीर जवान प्रबोध तिर्की ने साहस का परिचय देते हुए हमलावरों का डटकर मुकाबला किया, लेकिन इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायल अवस्था में उन्हें इलाज के लिए अगरतला के एलियस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में उनका उपचार चल रहा था। हालांकि, जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते हुए उन्होंने 23 अक्टूबर को अंतिम सांस ली। उनके शहीद होने से न केवल परिवार ने अपना प्रिय सदस्य खो दिया, बल्कि देश ने भी एक समर्पित वीर जवान को खो दिया।

*2007 से देश सेवा में समर्पित था उक्त जीवन*

प्रबोध तिर्की वर्ष 2007 से सीमा सुरक्षा बल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लंबे समय से देश की सुरक्षा में जुटे प्रबोध ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। सीमाओं की निगरानी हो या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ड्यूटी का निर्वहन, वर्दी पहनकर देश की सेवा करना ही उनके जीवन का प्रमुख उद्देश्य था।

उनका जीवन उन हजारों जवानों के समर्पण का प्रतीक है, जो अपने परिवार से दूर रहकर देशवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। जब आम नागरिक अपने घरों में सुरक्षित जीवन बिताते हैं, तब सीमा पर तैनात जवान कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। प्रबोध तिर्की का बलिदान इसी कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण की याद दिलाता है।

*पैतृक गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई*
बीएसएफ के इंस्पेक्टर सिनु राम ईचागुटू की देखरेख में उक्त वीर जवान का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव अकाशी पकरीटोली लाया गया। जहाँ अपने गांव के वीर सपूत प्रबोध तिर्की को अंतिम बार देखने के लिए ग्रामीणों और शुभचिंतकों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर आंख नम थी और हर चेहरा गमगीन। जिस बेटे को परिवार और गांव ने गर्व के साथ देश सेवा के लिए विदा किया था, उसकी पार्थिव देह लौटने का दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।

इस दौरान उनके साथी जवानों ने अपने वीर बीएसएफ जवान प्रबोध तिर्की सम्मान में हवाई फायरिंग कर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और संगीन नीचे किये, और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। राष्ट्र की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले जवान को दी गई यह अंतिम सलामी उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देश के प्रति समर्पण का सम्मान थी।

*पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए पीछे*

प्रबोध तिर्की अपने पीछे पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे को छोड़ गए हैं। परिवार के लिए यह क्षति अपूरणीय है। जिस व्यक्ति के सहारे परिवार का भविष्य और बच्चों के सपने जुड़े थे, उसके अचानक चले जाने से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

एक ओर देश सेवा पर गर्व है, तो दूसरी ओर परिवार के बिछोह का असहनीय दर्द। एक सैनिक का परिवार भी उसके साथ देश सेवा के इस सफर में त्याग और प्रतीक्षा का जीवन जीता है। प्रबोध तिर्की के परिवार के लिए अब उनकी यादें ही सबसे बड़ी धरोहर हैं।

गांव ही नहीं, पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति

प्रबोध तिर्की का निधन गुमला जिले के लिए गहरा दुख लेकर आया है। उनका जीवन और देश के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को कर्तव्य, साहस और जिम्मेदारी का संदेश देता रहेगा। गांव का एक बेटा देश की सेवा करते हुए दुनिया से विदा हुआ है, लेकिन उसकी स्मृतियां लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।

उनकी शहादत के प्रसंग में यह याद रखना जरूरी है कि देश की रक्षा और सुरक्षा में लगे जवान केवल वर्दीधारी कर्मचारी नहीं होते, बल्कि वे अपने परिवारों की उम्मीदों, बच्चों के सपनों और समाज के विश्वास को भी अपने साथ लेकर चलते हैं। उनका योगदान अक्सर सीमाओं से बहुत दूर रहने वाले नागरिकों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का आधार बनता है।

प्रबोध तिर्की का जाना एक परिवार के लिए असहनीय दुख और पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है। देश सेवा के प्रति उनका समर्पण, कठिन परिस्थितियों में उनका साहस और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता हमेशा याद की जाएगी। अकाशी पकरीटोली की धरती अपने इस सपूत को खोने के दुख में जरूर डूबी है, लेकिन देश के लिए उनके योगदान पर सदैव गर्व भी करेगी।

वीर जवान प्रबोध तिर्की को भावभीनी श्रद्धांजलि। देश के प्रति आपका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।


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