18.1 C
Ranchi
Thursday, November 5, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGumlaगुमला में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिखे बाल सुरक्षा पर...

गुमला में 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने लिखे बाल सुरक्षा पर निबंध, पॉक्सो कानून के प्रति किया गया जागरूक

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

कक्षा 6 से 12 तक के बच्चों के लिए दो श्रेणियों में प्रतियोगिता आयोजित, गुड टच-बैड टच और असुरक्षित व्यवहार की पहचान के बारे में दी गई जानकारी

गुमला: बच्चों को उनके अधिकारों और व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के लिए गुमला जिले में विशेष अभियान चलाया गया। जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकार के समन्वय से झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से जिले के सरकारी, अल्पसंख्यक और निजी विद्यालयों में ‘बाल सुरक्षा एवं सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें कक्षा 6 से 12 तक के 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों को बाल अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार के बीच अंतर समझाना था। प्रतियोगिता को दो श्रेणियों में बांटा गया। पहली श्रेणी में कक्षा 6 से 8 और दूसरी श्रेणी में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को शामिल किया गया।

प्रार्थना सभा में पॉक्सो कानून और व्यक्तिगत सुरक्षा की जानकारी

निबंध प्रतियोगिता से पहले सभी विद्यालयों की प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को पॉक्सो अधिनियम, 2012 यानी यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के बारे में जानकारी दी गई। शिक्षकों ने सरल भाषा में बच्चों को उनके अधिकारों, गुड टच-बैड टच और सुरक्षित-असुरक्षित व्यवहार के बारे में समझाया।

बच्चों को बताया गया कि किसी भी असहज या अनुचित परिस्थिति में बिना डर और संकोच के किसी विश्वसनीय व्यक्ति से मदद मांगनी चाहिए। उन्हें यह भी समझाया गया कि शोषण या अनुचित व्यवहार के लिए बच्चा कभी जिम्मेदार नहीं होता। ऐसी स्थिति में चुप रहने के बजाय उचित सहायता लेना जरूरी है।

संकुल और प्रखंड स्तर पर होगा निबंधों का मूल्यांकन

जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खलखो ने बताया कि प्रत्येक विद्यालय से शिक्षकों द्वारा तीन-तीन उत्कृष्ट निबंधों का चयन किया जाएगा। इसके बाद संकुल और प्रखंड स्तर पर दोनों श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के निबंध चुने जाएंगे। इन चयनित निबंधों का जिला स्तर पर गठित मूल्यांकन समिति अंतिम मूल्यांकन करेगी। जिला स्तर पर विजेता विद्यार्थियों को आगामी कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा।

बाल सुरक्षा पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी : उपायुक्त

उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार या विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का दायित्व है। यह आयोजन विद्यार्थियों को प्रतियोगिता का मंच देने के साथ उन्हें अपने अधिकारों, व्यक्तिगत सुरक्षा और गरिमा के प्रति जागरूक बनाने की पहल है।

वहीं, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने कहा कि जिला प्रशासन, जिला विधिक सेवा प्राधिकार और शिक्षा विभाग का संयुक्त प्रयास बच्चों के लिए सुरक्षित, संवेदनशील और भयमुक्त वातावरण तैयार करने की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments