24.6 C
Ranchi
Saturday, March 7, 2026
Advertisement
Homeभयानक काली अँधेरी रात – सुवीर कुमार परदेशी
Array

भयानक काली अँधेरी रात – सुवीर कुमार परदेशी

पहले तो कभी कभी अँधेरी रात होती थी , जिसमे कुछ उम्मीद की रोशनी होती थी ,
अब भयानक काली अँधेरी रात है ,
नाही रोशनी है नहीं उम्मीद की किरण है ,
अपने हिम्मत और बलबूते यहाँ तक अँधेरे में अकेले आ गया हु ,
कुछ लोग मेरे साथ भी बढ़ चले है ,
मगर उनके पास चाईंनिज टोर्च है ,
पता नहीं कब मुझे अँधेरे का लाभ उठाकर अपनी टोर्च की रौशनी में मुझे छोड़ जाएं ,
कहना मुश्किल है ,
जमाना ख़राब है किन्तु हम तो अभी भी वही है , जो अँधेरे में भी लोगों को रोशनी दिखाते है ,
पता नहीं वही रोशनी भगवान मुझे कब दिखाएंगे जिसके सहारे ,
घनघोर काली अँधेरी रात से निकल पाऊं,

लेखक – सुवीर कुमार परदेशी पटना , बिहार


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading