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Tuesday, July 7, 2026
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कथारा महाप्रबंधक के साथ राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की बैठक, 12 फरवरी की प्रस्तावित हड़ताल पर हुई चर्चा

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

गोमिया- राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ की बैठक कथारा जीएम कार्यालय के सभागार में आयोजित की गई। बैठक में कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक संजय कुमार तथा राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ, सीसीएल के रीजनल सचिव वरुण कुमार सिंह मुख्य रूप से उपस्थित थे।
बैठक को संबोधित करते हुए महाप्रबंधक संजय कुमार ने कहा कि 12 फरवरी को प्रस्तावित हड़ताल कोयला उद्योग के हित में नहीं है। उन्होंने बताया कि सीसीएल का इस वर्ष उत्पादन लक्ष्य 110 मिलियन टन निर्धारित किया गया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की हड़ताल उत्पादन लक्ष्य को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने श्रमिक संगठनों से अपील की कि वे हड़ताल में शामिल न हों और उत्पादन कार्य को सुचारू रूप से जारी रखने में सहयोग करें।
वहीं, रीजनल सचिव वरुण कुमार सिंह ने कहा कि 12 फरवरी की एक दिवसीय हड़ताल मजदूर हित में है और इसे पूरे देश में विभिन्न ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए चार लेबर कोड कानून मजदूर विरोधी हैं, जिसके विरोध में उनका संगठन हड़ताल में शामिल हो रहा है।
बैठक में प्रबंधन की ओर से स्वांग कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी श्री तिवारी, जारंगडीह के परियोजना पदाधिकारी पी.के. सेनगुप्ता, महाप्रबंधक (ऑपरेशन) विनोद कुमार, स्टाफ ऑफिसर (एचआर) माधुरी, राहुल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
वहीं संगठन की ओर से क्षेत्रीय उपाध्यक्ष वकील अंसारी, गोविंदपुर के सचिव विकास कुमार सिंह, अध्यक्ष राजकुमार साव, स्वांग वाशरी के सचिव बी.के. श्रीवास्तव, अध्यक्ष भैरव लाल प्रजापति, आरआर शॉप के सचिव गुलाम हसनैन, अध्यक्ष अर्जुन राम, कथारा वाशरी के रंजीत मंडल, अशोक कुमार ओझा, किशुन मंडल, रिंटू सिंह एवं मोहम्मद सिकंदर सहित कई पदाधिकारी मौजूद थे।

राम भक्तों के लिए

जिले के 8 मॉडल विद्यालयों में नामांकन प्रक्रिया प्रारंभ : आवेदन की अंतिम तिथि – 21 फरवरी 2026

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला शिक्षा पदाधिकारी, ने व्यापक प्रचार प्रसार सहित अधिक से अधिक आवेदन हेतु दिया निर्देश

साथ ही साथ झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची द्वारा जारी अधिसूचना के आलोक में जिला गुमला अंतर्गत संचालित 8 मॉडल विद्यालयों में सत्र 2026–27 के लिए कक्षा 6 में नामांकन हेतु ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। नामांकन प्रवेश परीक्षा (OMR आधारित) के माध्यम से किया जाएगा। आवेदन की अंतिम तिथि 21 फरवरी 2026 है तथा प्रवेश परीक्षा की तिथि अलग से प्रकाशित की जाएगी।

अभिभावकों से अपील है कि वे परिषद की आधिकारिक वेबसाइट www.jac.jharkhand.gov.in के माध्यम से निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन सुनिश्चित करें।

जिला गुमला के निम्नलिखित प्रखंडों में मॉडल विद्यालय संचालित हैं —

गुमला, रायडीह, बसिया, बिशुनपुर, पालकोट, भरनो, घाघरा, कामडारा

इन सभी मॉडल विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाती है।

*प्रचार-प्रसार हेतु सामान्य निर्देश*
जिला प्रशासन, गुमला द्वारा जिले के सभी BEEO, BPO, BRP एवं CRP को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार अंतर्गत इसका व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें।

सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में विशेष बैठक आयोजित कर कक्षा 5 के छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों को जानकारी देते हुए सूचना-पट्ट पर नोटिस एवं अन्य सोशल मीडिया माध्यम से सूचना प्रसारित करें ताकि अधिक से अधिक योग्य एवं इच्छुक विद्यार्थियों का अधिकतम आवेदन सुनिश्चित हो सके । यह सुनिश्चित किया जाए कि जानकारी के अभाव में कोई भी योग्य छात्र-छात्रा इस अवसर से वंचित न रहे । ऑनलाइन आवेदन के साथ सभी सीआरपी एवं बीआरपी अपने क्षेत्र के विद्यार्थियों से आवेदन प्राप्त कर जैक के वेबसाइट पर अपलोड करेंगे ।

कविता खलखो, डीईओ गुमला ने सभी अभिभावकों एवं छात्र-छात्राओं से आग्रह किया है कि वे समय पर आवेदन कर अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा का लाभ दिलाएँ।

राम भक्तों के लिए

उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की अध्यक्षता में कृषि एवं संबद्ध विभागों की संयुक्त बैठक आयोजित

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की अध्यक्षता में KCC, ऋण माफी, फसल राहत योजना, उद्योग, सहकारिता, JSLPS टास्क फोर्स, बैंक लिंकेज सहित कृषि, उद्यान, भूमि संरक्षण, मत्स्य, पशुपालन एवं गव्य विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक के दौरान उपायुक्त द्वारा फसल राहत योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित मद में व्यय (Expenditure) बढ़ाने तथा सभी पंचायतों में योजना के अंतर्गत अधिक से अधिक लाभुकों को जागरूक कर लाभान्वित करने के निर्देश दिए गए,साथ ही कृषि से संबंधित सभी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल देते हुए किसानों को योजनाओं से जोड़ने हेतु प्रभावी रणनीति अपनाने का निर्देश दिया गया।
धान अधिप्राप्ति के अंतर्गत अब तक 5,75 पंजीकरण पूर्ण होने की जानकारी दी गई, जिस पर उपायुक्त द्वारा लैंप्स (LAMPS) पंजीकरण की संख्या बढ़ाने हेतु आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए। सिसई में निर्मित कृषि पाठशाला के सामने भूमि विवाद के मामले में संबंधित अंचल अधिकारी को सत्यापन कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही रबी, मक्का, मसूर एवं अन्य दलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार पर विशेष फोकस करने तथा केसीसी के माध्यम से अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़ने के निर्देश दिए गए।
भूमि संरक्षण विभाग अंतर्गत ट्रैक्टर वितरण की समीक्षा की गई तथा तालाब जीवर्धन कार्य मार्च माह के अंत तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। ई-नाम पोर्टल पर पंजीकरण को बढ़ावा देने एवं अधिक से अधिक किसानों को इससे जोड़ने हेतु भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में मछली उत्पादन एवं संबद्ध विकास कार्यों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई, ( भारत सरकार की Fisheries and Aquaculture Infrastructure Development Fund (FIDF) योजना के तहत निजी क्षेत्र में मत्स्य पालन एवं संबंधित स्टार्ट-अप कार्यों हेतु ऋण उपलब्ध कराने को लेकर लाभुकों को जोड़ने पर विशेष चर्चा की गई। उपायुक्त द्वारा सिसई क्लस्टर में तालाब निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक के अंत में उपायुक्त द्वारा सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला कृषि पदाधिकारी, जिला पशुपालन पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, भूमि संरक्षण पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।

राम भक्तों के लिए

नगर निकाय चुनाव की तैयारी को लेकर अपर समाहर्ता गुमला एवं LRDC गुमला ने मतगणना व निर्वाचन केंद्रों का किया निरीक्षण

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में आगामी नगर निकाय चुनाव के मद्देनज़र जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित के निर्देश पर अपर समाहर्ता गुमला शशिंद्र कुमार बड़ाइक एवं LRDC गुमला राजीव कुमार द्वारा संयुक्त रूप से आज के.ओ. कॉलेज, गुमला स्थित मतगणना केंद्र का निरीक्षण किया गया। इस दौरान डिस्पैच सेंटर, रिसीविंग सेंटर एवं स्ट्रांग रूम का भी बारीकी से जायजा लिया गया।
निरीक्षण के क्रम में केंद्रों की भौतिक व्यवस्था, विद्युत, पेयजल, साफ-सफाई, आवागमन, सीसीटीवी निगरानी, अग्निशमन व्यवस्था तथा विधि-व्यवस्था व सुरक्षा प्रबंधों का भी अवलोकन किया गया। उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि निर्वाचन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध, पारदर्शी एवं निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएं।

उपायुक्त के निर्देशानुसार यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदान, मतगणना एवं सामग्री के आवागमन से संबंधित सभी कार्य शांतिपूर्ण एवं निर्बाध रूप से संपन्न हो उसके लिए पूरी तैयारी की जा रही है।

राम भक्तों के लिए

हर चुनाव का सिर्फ मोहरा बनता है नगर पंचायत क्षेत्र का कूमियाही गाँव

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला नगर परिषद् स्थित छतरपुर – पलमु – वार्ड नंबर 16 हैं जो नेशनल हाइवे से मात्र आधा किलोमीटर दूरीपर स्थित हैं कूमियाही गाँव है, जँहा हर नगर निकाय चुनाव मे सिर्फ वोट बैंक के लिए मोहरा बनता है ।
छतरपुर नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर -16 कूमियाही गाँव मे कई वर्षो से अब तक विकास की राह देख रहा है, और जब भी विधानसभा ,लोकसभा और अभी नगर निकाय चुनाव, में उक्त गाँव सिर्फ वोट बैंक की राजनीती बन कर रह जाती है।
जब भी देखो नालियाँ बजबजाती रहती हैं ,उबड़ खबड़ सड़क ही बता देती है की क्या येसा गलत हुआ की उक्त गाँव की सुध लेने वाला कोई नही हैं ।
कूमियाही गाँव के कृष्णदेव सिंह,अवध सिंह,सत्यदेव सिंह,राम प्रवेश साव,मनोज राम समेत दर्जनों लोगो ने बताया की हम सब ऐसे हालात मे रह रहे है की हर नेताओं को सिर्फ चुनाव मे ही हमारा गाँव याद आता है और चुनाव जितने के बाद कोई हाल खबर भी लेने नही आते है।
नगर वासियों ने बताया की इस गाँव की सड़क और नली की हालात बद से बतर हो चुकी हैं, नगर पंचायत द्वारा आज कोई सफाई कर्मी देखने तक नही आता हैँ ।
वहीं इस बार नगर निकाय चुनाव मे वोट बैंक की राजनीती करने वाले दर्जनों नेता अभी आ रहे हैं, वह भी मात्र और मात्र वोट माँगने आ जाते हैं, लेकिन विकास की राह की बाट जो रहा हैं, कूमियाही गाँव और वहां के निवासी, इस बार अपने मूड मे दिख रहे है।

राम भक्तों के लिए

जिला शिक्षा अधीक्षक ने किया मैट्रिक परीक्षा केंद्र का अनुश्रवण, परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त सम्पन्न

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न्यूज – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – गुमला जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खां ने जिला मुख्यालय स्थित उच्च विद्यालय करंजटोली के मैट्रिक परीक्षा केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान परीक्षा शांतिपूर्ण एवं कदाचार मुक्त वातावरण में संचालित पाई गई। कुल 185 परीक्षार्थियों में से 182 उपस्थित एवं 3 अनुपस्थित रहे। केंद्र में सभी सीसीटीवी कैमरे सुचारू रूप से संचालित पाए गए तथा सभी वीक्षक अपने निर्धारित दायित्वों का निर्वहन करते हुए उपस्थित थे।

निरीक्षण के क्रम में जिला शिक्षा अधीक्षक ने नगर पंचायत चुनाव हेतु बनाए गए बूथ का भी जायजा लिया तथा आवश्यक व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

इसके उपरांत वे कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाली कक्षा 10 की छात्राओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास के साथ परीक्षा में सम्मिलित होने, समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने तथा तनावमुक्त रहकर अपना शत-प्रतिशत प्रदर्शन देने के लिए प्रेरित किया। छात्राओं को परीक्षा से संबंधित आवश्यक टिप्स भी प्रदान किए गए।

इसी क्रम में राज्य स्तर से विभागीय सचिव द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रोत्साहन कार्यक्रम में भी छात्राओं ने भाग लिया। सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि छात्राएं किसी प्रकार का तनाव न लें, सकारात्मक सोच के साथ परीक्षा दें और अपने सामर्थ्य का पूरा उपयोग करें।

जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि विभाग द्वारा छात्र-हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है एवं जिले में शांतिपूर्वक बोर्ड परीक्षा संचालन के लिए सभी वरीय पदाधिकारियों द्वारा नियमित अनुश्रवण किया जा रहा है । उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस वर्ष जिले का प्रदर्शन बेहतर होगा ।

राम भक्तों के लिए

साहेब की बीमार इच्छाएं देश का कानून और आत्ममुग्ध समझ राष्ट्रीय दुर्भाग्य बन चुका है

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“एक अकेला सब पर भारी” यह अब केवल एक तकिया कलाम नहीं रहा, यह इस देश के लिए दुर्भाग्य का स्थायी प्रतीक बन चुका है। एक ऐसा वाक्य, जो कभी ताकत का भ्रम पैदा करता था, आज 140 करोड़ लोगों के लिए बोझ, अपमान और त्रासदी बन चुका है। वाकई, उस एक अकेले के कुकर्म, उनकी सनक, उनकी ज़िद और उनकी घोर अदूरदर्शिता अब पूरे देश पर भारी पड़ चुकी है। यह कोई भावनात्मक आरोप नहीं, यह एक कड़वा यथार्थ है जिसे देश रोज़ भुगत रहा है।

2014 के बाद जन्मा यह तथाकथित “अजैविक” अब भारत की अस्मिता, संप्रभुता और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा संकट बन चुका है। उनकी विकृत, विद्रूप और छुपी हुई मनोवृतियां ही आज इस देश का भाग्य तय कर रही है। उनकी बीमार इच्छाएं देश का कानून बन चुकी है. उनकी छिछली, अधकचरी और आत्ममुग्ध समझ ही देश का भविष्य बन चुकी है। उनका अहंकार अब व्यक्तिगत दोष नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दुर्भाग्य बन चुका है।

देश-विदेश में किए गए उनके कर्म और कुकर्म अब भारत के सिर पर भुगतान बनकर लाद दिए गए हैँ। वह भुगतान जिसे न चुना गया, न स्वीकार किया गया, लेकिन फिर भी 140 करोड़ लोगों को चुकाना पड़ रहा है. उनकी भीरुता आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की पहचान बन चुकी है। कभी जो देश आत्मसम्मान की बात करता था, आज डर और झिझक का दही जमाएं बैठा है.

देश के भीतर वे 56 इंची बनते हैँ। देश पर रौब झाड़ते हैँ। अहंकार थोपते हैँ। ज़िद परोसते हैँ। मनमर्जी चलाते हैँ। हीन भावना में लिपटी हुई ठसक बिखेरते हैँ। लेकिन जैसे ही चीन और अमेरिका का नाम आता हैँ, उसी क्षण वे सरेंडर मोड में स्विच हो जाते हैँ। सारा अहंकार, सारा रौब, सारी 56 इंची छाती पिघल कर बह जाती है। दृश्य ऐसा होता है जैसे कोई मदारी भालू को नचा रहा हो और वे बिना सोचे-समझे नाचने लग जाएं। कमर नब्बे डिग्री झुक जाती है और आत्मसम्मान ज़मीन पर गिर जाता है।

अमेरिका हमारी संप्रभुता को अपने बूटों तले रौंद रहा है…और आप चुप्पी साधे हैँ…!

ट्रम्प बार-बार 140 करोड़ भारतीयों और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के स्वाभिमान और संप्रभुता को अपने बूटों तले रौंद रहा है, लेकिन मजाल है कि उस बंदे के मुंह से एक शब्द भी निकल जाए। यह चुप्पी सामान्य नहीं हैँ। यह चुप्पी किसी गहरे डर, किसी बड़े राज़ और किसी भारी अपराध की गवाही देती है।

आखिर ट्रम्प ने उनके कुकर्मों और ढीली लंगोट की ऐसी कौन-सी नस दबा रखी है कि पूरा देश अमेरिका के पास गिरवी रख दिया गया है। किस भय ने, किस मजबूरी ने, किस समझौते ने भारत को इस अपमानजनक स्थिति तक पहुंचा दिया है।

वहीं दूसरी ओर, अपने ही देश के विपक्ष पर और दशकों पहले गुजर चुकी इंदिरा नेहरू पर वे खोखली 56 इंची छाती लेकर कीचड़ उछालते है। यह इन अजैविक जी की गहरी हीन ग्रंथि है, जो उन्हें कमजोर और मृत व्यक्तियों पर हमला करने के लिए मजबूर करती है, जबकि जीवित और ताकतवर विदेशी आकाओं के सामने वे घुटनों के बल बैठ जाते हैँ.

यह अजन्मा अजैविक अब केवल एक आत्ममुग्ध नहीं रहा। यह इस देश पर एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है. यह देश की बर्बादी का कारण बन चुका है। संस्थाओं को खोखला करनेवाला, भविष्य को गिरवी रखने वाला और पीढ़ियों को अंधकार में धकेलने वाला खतरा।

यदि कोई गलत हो भी गया है, तो थोड़ी हिम्मत दिखाइए। उस सनकी ट्रम्प दादा से कहिए कि जो उखाड़ना हैँ उखाड़ ले। जो तेरे पास है, सब रिलीज़ कर दे। मैं नहीं डरता। मैं गद्दी छोड़ दूंगा और अपनी जनता के दरबार में जाऊंगा। यदि आप ऐसा करेंगे, तो शायद यह देश आपको माफ भी कर दे।

पश्चिमी जगत के नेताओं से कुछ सीखिए, जो अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते हैं और जनता उन्हें माफ भी कर देती है। लेकिन इसके लिए जिगरा चाहिए। और वह जिगरा आप में है नहीं और माफी शब्द तो आपकी डिक्शनरी है नहीं, फिर समय ही आपका हिसाब करेगा.

आप आखिरी सांस तक सत्ता सुख भोगना चाहते हैं, लेकिन अब यह संभव नहीं हैँ। आपने 2014 में शेर की सवारी चुनी थी। तब बहुत मज़ा आ रहा था। अब शेर की पीठ से उतरने का समय आ गया हैँ। लेकिन डर यह है कि उतरते ही शेर आपको छोड़ेगा नहीं।

-सुरेंद्र सिंह के फेसबुक से साभार

राम भक्तों के लिए

देश कोई दुकान नहीं है और न एक व्यक्ति…जो अपने बचाव में देशवासियों का भविष्य दाव पर लगा दे…अपने पूर्ववर्तियों को गाली देकर कोई बड़ा नहीं बन सकता

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बलराज मधोक पूर्व जनसंघ अध्यक्ष और RSS नेता थे, जिन्हें पार्टी से मतभेदों के कारण निकाल दिया गया था। अपनी किताब में उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाए, जिसमें कहा गया कि अटल जी ने दिल्ली के 30 राजेंद्र प्रसाद रोड स्थित जनसंघ कार्यालय/आवास को “व्यभिचार का अड्डा” बना दिया था, जहाँ नित्य नई-नई लड़कियाँ आती थीं। मधोक ने यह भी लिखा कि उन्होंने अटल जी को शादी करने की सलाह दी थी ताकि बदनामी से बचा जा सके।

“अय्याशी” जैसे शब्द का प्रयोग केवल मधोक की इस किताब में मिलता है

इसका मतलब कि यहाँ व्यभिचार की परंपरा बहुत पुरानी है। ग्रोक यह भी बताता है कि ये आरोप पार्टी के आंतरिक विवादों और मधोक की कड़वाहट से प्रेरित माने जाते हैं। कोई स्वतंत्र या विश्वसनीय स्रोत इनकी पुष्टि नहीं करता। अटल जी का निजी जीवन मुख्य रूप से उनकी लंबी साथी राजकुमारी कौल से जुड़ा रहा, जो सार्वजनिक रूप से जाना जाता है, लेकिन “अय्याशी” जैसे शब्द का प्रयोग केवल मधोक की इस किताब में मिलता है।

लंबी गोरी लड़की …..अब अनिल अंबानी का नाम एपस्टीन फाइलों में आ रहा है।

डरपोक लोग झूठे तो होते ही हैं लेकिन इतने डरपोक होंगे कि देश को संकट में डालकर भाग जाय …..क्या जनता के साथ धोखा नहीं है। संसद में अगर खतरा है तो फिर कहाँ सुरक्षित जगह है ? डील है या ढील, यह भी सामने आ रहा है ।

क्या हमें अमेरिका डिक्टेट कर रहा है ?

अजीब बात है न कि हम सिर्फ अमेरिकी बयानों पर रिएक्ट कर रहे हैं। क्या हमें अमेरिका डिक्टेट कर रहा है ? पहले कहा कि कृषि को नहीं खोला जाएगा , पर अब आप सस्ते डेयरी उत्पाद भी पाएंगे और उन गाय के जिन्हें मांस मिश्रित चारा खिलाया जाता है।

कहाँ गया अब धर्म और सनातन और हिंदूवादी संगठन ? देश को मूर्ख बनाया जा रहा है …..पर इस चक्कर में सिर्फ यह कहकर तो नहीं बचा जा सकता कि यह एक अय्याश आदमी की करतूत है। कुछ तो काला है दाल में।

सवाल यह भी उठता है कि हम इतने कमजोर कैसे साबित हुए ? अपने पूर्ववर्ती लोगों को गाली देकर आप बड़े नहीं हो सकते।

अब आप ही बताएं कि विदेशों में लोग अपना परिचय किस तरह देंगे, क्या कहेंगे कि हम उस देश से आए हैं जहां का मुखिया एक अय्यास आदमी है?

बिका हुआ मीडिया कभी सवाल नहीं कर पाएगा

दुनियाभर के बड़े-बड़े लोगों ने नाम आने पर एप्सटीन फाइल में इस्तीफा दे दिया.  मगर क्या यहां जरा भी नैतिकता बची है ? कोई वक्तव्य दिया क्या ? चुप्पी माना कि कई बातों का जवाब होती है मगर क्या इस तरह की चुप्पी सही है ? ये बिका हुआ मीडिया क्या कभी सवाल कर पाएगा देश हित में ?

अचानक इस किताब ने इसे पढ़ने की जिज्ञासा पैदा कर दी है। जब अगली पीढ़ी इनके बारे में जानेगी तो इन्हें किस तरह संबोधित करेगी ? प्रश्न देश का है, देश की इज्जत का है, देश के किसानों का है।

हम तो ईरान जितनी इच्छाशक्ति के भी नहीं निकले…! 

जनरल नरवाने की किताब को लेकर पहले ही बबाल मचा हुआ है। लोकसभा में भाषण भी नहीं हो सका, राज्यसभा में भी बस गालियों का जिक्र और पुराने लोगों का अपमान ही हुआ। ऐसा लगता है जैसे नेताओं की इज्जत उतारने का स्ट्रिप शो चल रहा हो। न देश के लिए कोई दिशा है और दशा पर चिंतन है ही नहीं। रूस जैसा भरोसेमंद दोस्त भी करीब-करीब हम खो चुके हैं। अब तो यह साफ हो चुका है कि हम अमेरिका के सामने घुटने टेक चुके हैं। हम तो ईरान जितनी इच्छाशक्ति के भी नहीं निकले ।

यह सब साबित करता है कि इज़राइल और उसका मोसाद अमेरिका में और भारत में किस हद तक घुसा हुआ है। देश कोई दुकान नहीं है और न एक व्यक्ति जो अपने बचाव में 140 करोड़ लोगों का भविष्य दाव पर लगा दे।

-केदार नाथ शब्द मसीहा, (फेसबुक से) 

 

राम भक्तों के लिए

राजनीति, सेवा और नेतृत्व की अमर विरासत को प्रदर्शित करते भारत के प्रमुख सिख नेता

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न्यूज – मुस्कान

भारतीय लोकतंत्र की नींव उसकी अद्भुत विविधता और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की भावना में निहित है। इसमें सिख समुदाय का योगदान अत्यंत गौरवशाली और प्रेरणादायक रहा है। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आज के आधुनिक भारत के निर्माण तक, सिख नेताओं ने राजनीति, प्रशासन, सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय सुरक्षा के हर मोर्चे पर अद्वितीय पराक्रम दिखाया है। उनकी पहचान सिख धर्म के मूल मंत्र ‘किरत करो’ (मेहनत), ‘वंड छको’ (बाँटो) और ‘नाम जपो’ (ईश्वर का स्मरण) को अपने कार्यों में उतारने के कारण बनी। इस लेख के माध्यम से मैं भारतीय राजनीति के इतिहास में शामिल रहे ऐसे ही कुछ नेताओं का जिक्र करने जा रहा हूँ, जिनके बगैर भारतीय राजनीतिक पटकथा अधूरी है।
डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारत के आर्थिक इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। एक साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचने का उनका सफर हर युवा के लिए एक सपने जैसा है। वर्ष 1991 में जब देश भयंकर आर्थिक संकट से गुजर रहा था, तब वित्त मंत्री के रूप में डॉ. सिंह ने साहसिक आर्थिक सुधारों की नींव रखी। उन्होंने लाइसेंस राज को समाप्त कर, अर्थव्यवस्था को खोला और भारत को वैश्विक बाजार से जोड़ा। उनकी इस नीति ने देश में उद्यमिता की एक नई लहर पैदा की और भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया। सन 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री के रूप में उनके दो कार्यकालों में देश ने तीव्र आर्थिक विकास देखा। उनका शांत, विद्वतापूर्ण और ईमानदार व्यक्तित्व राजनीति में एक अलग ही मिसाल कायम करता है। उन्होंने ‘चुप्पी’ को अपनी ताकत बनाया और सिद्ध किया कि कर्म ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान है।
ज्ञानी ज़ैल सिंह का नाम भारतीय गणतंत्र के इतिहास में एक ऐसे राष्ट्रपति के तौर पर दर्ज है, जिन्होंने सादगी और जनसंपर्क से इस उच्च पद को आम जनता के और नजदीक ला दिया। पंजाब के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक का उनका सफर भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है। राष्ट्रपति बनने से पहले वह पंजाब के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके थे। उनके कार्यकाल में ही ऑपरेशन ब्लू स्टार और सिख विरोधी दंगे जैसे दुखद घटनाएँ घटीं, किंतु उन्होंने पूरी निष्ठा और संवैधानिक जिम्मेदारी के साथ देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई।
पंजाब की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का नाम एक युग का प्रतीक है। शिरोमणि अकाली दल से जुड़े बादल साहब पाँच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने, जो एक रिकॉर्ड है। उनका कार्यकाल पंजाब के विकास, खासकर कृषि, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए जाना जाता है। वह एक ऐसे नेता थे जिनकी जड़ें जमीन से गहराई से जुड़ी थीं। उनकी सादगी और अनुभव ने न केवल पंजाब बल्कि केंद्र की राजनीति में भी उन्हें एक सम्मानजनक स्थान दिलाया। राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन सरकारों के दौर में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उन्होंने हमेशा पंजाब और पंजाबियत के हितों को सर्वोपरि रखा और क्षेत्रीय राजनीति में एक मजबूत विरासत छोड़ी।
बूटा सिंह एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने बिहार की राजनीति में सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। वह केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों, जैसे कि गृह मंत्रालय और कृषि मंत्रालय, की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा में समाज के पिछड़े और दलित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए प्रयास विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। एक सिख नेता के रूप में बिहार जैसे राज्य में उनकी सफलता भारत की सांस्कृतिक एकता और धर्मनिरपेक्षता का एक जीवंत उदाहरण है। उन्होंने साबित किया कि सेवा और समर्पण की भावना किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती।
सुरजीत सिंह बरनाला पंजाब की राजनीति के एक और स्तंभ थे। वह शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री रहे। उनके शासनकाल को राज्य में कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के लिए याद किया जाता है। एक मजबूत संगठनकर्ता और दूरदर्शी नेता के रूप में उन्होंने पार्टी को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनका व्यक्तित्व सीधेपन और दृढ़ता के लिए जाना जाता था। पंजाब के एक जिम्मेदार प्रशासक के रूप में उनकी छवि आज भी कायम है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति में एक ऐसा नाम हैं जो परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं। पटियाला के पूर्व शाही परिवार से आने के बावजूद उनकी छवि एक आम किसान के नेता की रही है। भारतीय सेना में अपनी सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और दो बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने। उनके नेतृत्व में पंजाब ने कृषि सुधारों और बुनियादी ढाँचे के विकास में उल्लेखनीय प्रगति की।
हरदीप सिंह पुरी एक कुशल राजनयिक और प्रशासक से सफल राजनीतिज्ञ बने हैं। भारतीय विदेश सेवा में अपने लंबे और समृद्ध कार्यकाल के बाद, उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल हुए। आवासन और शहरी मामलों के मंत्री के रूप में उनकी भूमिका देश में शहरी बुनियादी ढाँचे के विकास, विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यान्वयन में अहम रही है। उनका काम अनुशासन, पारदर्शिता और निष्पादन क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
नवजोत सिंह सिद्धू एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिन्होंने क्रिकेट के मैदान से निकलकर राजनीति के मैदान में बराबर धूम मचाई। एक आक्रामक बल्लेबाज से लेकर एक जोशीले राजनेता तक के उनके सफर ने उन्हें जनता के बीच अत्यधिक लोकप्रिय बना दिया। वह भाजपा और बाद में कांग्रेस में रहकर पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहे। उनकी पंचलाइनें और सार्वजनिक मंचों पर उनका अंदाज उनकी विशिष्ट पहचान है।
इन नेताओं की जीवन यात्रा और उनके योगदान से स्पष्ट है कि सिख समुदाय ने भारतीय लोकतंत्र को न केवल संख्या बल से, बल्कि गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व से समृद्ध किया है। ये नेता अलग-अलग विचारधाराओं, अलग-अलग क्षेत्रों और अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं, लेकिन इन सबमें एक सूत्र देशभक्ति, सेवाभाव और ईमानदारी समान मात्रा में है। इनकी विरासत हमें याद दिलाती है कि सच्चा नेतृत्व धर्म, जाति या क्षेत्र से ऊपर उठकर मानवता और राष्ट्र की सेवा में निहित है।

राम भक्तों के लिए

गोमिया हवाई अड्डा को नशेड़ियों का अड्डा नहीं बनने देंगे: मंटू कुमार यादव

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

गोमिया |  गोमिया थाना क्षेत्र में सामाजिक सरोकारों के लिए सक्रिय माने जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मंटू कुमार यादव एक बार फिर जनहित के मुद्दे पर आगे आए हैं। शनिवार संध्या को वे अपने सहयोगियों के साथ गोमिया हवाई अड्डा परिसर पहुंचे, जहां शराबियों और नशेड़ियों की गतिविधियों के खिलाफ जागरूकता एवं निगरानी अभियान चलाया गया।
मौके पर मौजूद सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में कहा कि किसी भी परिस्थिति में हवाई अड्डा परिसर को नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों की गरिमा बनाए रखना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
मंटू कुमार यादव ने कहा कि अपराध और नशे के विरुद्ध लड़ाई केवल पुलिस या प्रशासन के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। इसके लिए समाज के जागरूक नागरिकों को आगे आना होगा, ताकि युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सके।
स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यदि ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता हर गांव और मोहल्ले में सक्रिय हों, तो क्षेत्र को नशामुक्त और अपराधमुक्त बनाने में अधिक समय नहीं लगेगा।

 

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