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Wednesday, July 1, 2026
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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस पर एनसीसी शिविर में जागरूकता अभियान, 500 से अधिक कैडेट्स को किया गया जागरूक

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला में 7 जून 2026 को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर गुमला जिला के सिसई प्रखंड स्थित बी.एन. जालान कॉलेज में आयोजित एनसीसी शिविर में खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवा कैडेट्स एवं विद्यार्थियों को सुरक्षित, पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन के महत्व से अवगत कराना तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में उनकी भूमिका को सशक्त बनाना था। कार्यक्रम में 500 से अधिक एनसीसी कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी ने किया। उन्होंने उपस्थित कैडेट्स को खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ भोजन, संतुलित आहार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की पहचान तथा उपभोक्ताओं के अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में युवाओं की भुमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

अपने संबोधन में गुग्गी ने फोर्टिफाइड फूड, ईट राइट इंडिया अभियान एवं “आज से थोड़ा कम तेल, चीनी और नमक” जैसी जनहितकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए स्वस्थ खान-पान की आदतों को अपनाने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि बिना वैध एफएसएसएआई लाइसेंस, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि, बैच नंबर एवं अन्य आवश्यक विवरण वाले खाद्य उत्पादों का निर्माण, भंडारण एवं विक्रय खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर सिसई क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी जागरूकता अभियान चलाया गया, जहां खाद्य कारोबारियों एवं आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक किया गया।

यह कार्यक्रम नागरिक क्लब, पटना (बिहार) के सहयोग से आयोजित किया गया। नागरिक क्लब, पटना सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के अंतर्गत पंजीकृत संस्था है। संस्था के संस्थापक एवं सचिव तथा फूड सेफ्टी ट्रेनर डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि सुरक्षित भोजन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूकता एक स्वस्थ एवं सशक्त भारत के निर्माण की आधारशिला है।

कार्यक्रम को सफल बनाने में खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी प्रकाश चंद्र गुग्गी, फूड सेफ्टी ट्रेनर डॉ. राकेश कुमार सिंह, रवि कुमार, संतोष पाठक, प्रियांशु कुमार, सूरज कुमार,सुधांशु कुमार, उदय कुमार खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम, ज्ञान सिटी एजुकेशनल ट्रस्ट, एनसीसी शिविर के पदाधिकारियों एवं नागरिक क्लब, पटना (बिहार) का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

कार्यक्रम के अंत में सभी एनसीसी कैडेट्स एवं विद्यार्थियों ने सुरक्षित भोजन अपनाने, खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने तथा समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

राम भक्तों के लिए

शादी के मात्र 15 दिन बाद ही एक युवक ने फांसी के फंदे में झूल कर कर ली आत्महत्या, घर में छाया मातम

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमलाः- गुमला सदर थाना क्षेत्र के लूटो ग्राम से एक बेहद खौफनाक और सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, बताया जाता है कि शनिवार के संध्या में एक 23 वर्षीय युवक ने अपने ही घर के अंदर पंखे से प्लास्टिक की रस्सी से फांसी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान पारा शिक्षक रोशन अंसारी के 23 वर्षीय पुत्र मुर्शिद अंसारी के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक, महज 15 दिन पहले ही मुर्शिद की शादी हुई थी,अभी उसकी पत्नी के हाथों की मेहंदी का रंग भी नहीं छूटा था, इसी क्रम में मृतक युवक द्वारा उक्त खौफनाक कदम उठाने से, उसके पूरे हंसते-खेलते परिवार की सभी अरमानों में पानी फेंक दिया, बाद में उक्त घटना की सूचना परिजनों द्वारा नजदीकी टोटो थाना पुलिस को दी गई, इतना मिलते ही टोटो थाना पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए टोटो थाना के सब इंस्पेक्टर कुंदन कुमार अपने दलबल के साथ उक्त घटनास्थल पर पहुंचने और उन्होंने परिवार और परिजनों से गहराई से पूछताछ करने के बाद उक्त शव को अपने कब्जे में लेते हुए पोस्टमार्टम हेतु, उक्त शव को गुमला सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम भिजवाया गया, घटना के फलस्वरूप परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है, टोटो थाना के सब-इंस्पेक्टर कुंदन कुमार ने उक्त मामले की हर पहलुओं से छानबीन कर रहे है ताकि आत्महत्या की असली वजह सामने आ सके।

राम भक्तों के लिए

गुमला जिले में विभिन्न आकर प्रकार के प्रजातियां वाले आम की खेती और बीजू आम से ग्रामीण क्षेत्र में विशेष कर आदिवासी महिलाओं की अर्थव्यवस्था एक मजबूत आधार बन चुकी है

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

झारखंड की राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड क्षेत्र में गुमला जिले के आमों की खुशबू फैल चुकी है

गुमला : – झारखंड का गुमला जिला खेल नगरी, वन उत्पाद, बांस की कलाकृति – वाद्य यंत्र मंदार, मड़ुवा (रागी ) के व्यंजन, आम की खेती – खुखडी ( मशरूम) उत्पादन चावल – चूड़ा – पते से बना पत्तल दोना – दातुन – सहित अन्य अनेक सामग्रियों के कारण पूरे झारखंड राज्य में अपनी एक अलग पहचान रखने वाला आदिवासी बहुल गुमला जिला में विशेष कर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले आदिवासी समाज की महिलाएं अपनी आर्थिक दृष्टि कोण से आत्मनिर्भर की डगर पर निकल पड़ी है, और आत्मनिर्भर बन चुकी है,और अपनी एक अलग पहचान बनाते हुए, उक आदिवासी महिलाएं अपनी आत्मनिर्भर की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण तो है ही , साथ ही साथ कृषि और जैव विविधता के मामले में भी गुमला जिला अपनी अलग पहचान रखता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों और पूरा जिला पर्यटन और धार्मिक स्थलों की अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी अलग पहचान और जगह बनाने वाले गुमला जिला के जंगल, पहाड़, नदी नाला और झरनों के कल कल बहती निर्मल धाराओं की करणप्रिय गुज के बीच – गुमला जिला के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला बीजू आम केवल एक फल नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन, की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है, और तो और पूरा गुमला जिला में आमों की विभिन्न आकार प्रकार के आम के प्रजातियों की खेती, स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभ कराईये जा चुके है, इसके अलावे पूरे गुमला जिला में दशकों पूर्व से बीजू आम का व्यापार झारखंड, उड़ीसा, आदि राज्यों में होता रहा है, फिलहाल गुमला जिला हो रहे आम की विशेष खुशबू, विशिष्ट स्वाद और पूरी तरह जैविक उत्पादन इसे अन्य आमों से अलग बनाते हैं। यही कारण है कि झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आसपास के राज्यों के लोग भी इसके स्वाद के दीवाने हैं। प्रकृति का

अनमोल उपहार विशेष कर गुमला जिला के नए उत्पाद खेती वाले आम का स्वाद और अलग पहचान बन चुकी है, वही गुमला जिले के बीजू आम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे उगाने के लिए किसी विशेष देखभाल, रासायनिक खाद या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती। जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षों से मौजूद पेड़ प्राकृतिक रूप से फल देते हैं। यही वजह है कि बीजू आम को शत-प्रतिशत जैविक फल माना जाता है। हाइब्रिड किस्मों जैसे आम्रपाली, मालदा, लंगड़ा, दशहरी आदि या मल्लिका

की तुलना में इसका आकार छोटा जरूर होता है, लेकिन स्वाद और सुगंध में यह बेहद खास माना जाता है। इसका गूदा (पल्प) रेशेदार और अत्यंत रसदार होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे काटकर खाने के बजाय सीधे चूसकर खाना पसंद करते हैं। स्वाद के साथ रोजगार का भी साधन बीजू आम केवल खाने तक सीमित नहीं है। इसके कच्चे फलों का उपयोग बड़े पैमाने पर अचार, अमचूर और पारंपरिक अमावट (आम पापड़) बनाने में किया जाता है। गर्मियों के मौसम में ग्रामीण परिवार इन उत्पादों को तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पूर्ण विकसित बीजू आम का पेड़ सालाना आठ से दस क्विंटल

तक फल दे सकता है। यही कारण है कि दशकों से अबतक गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों के हाट-बाजारों में बिकने वाले आमों का बड़ा हिस्सा बीजू आम का हुआ करता था। सामुदायिक संस्कृति की अनूठी मिसाल बीजू आम को लेकर गुमला जिला के ग्रामीण इलाकों में एक विशेष परंपरा भी देखने को मिलती है। यहां कई स्थानों पर इन पेड़ों पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं माना जाता, बल्कि पूरे गांव का सामूहिक अधिकार होता है। फल पकने के मौसम में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण मिलकर आम संग्रह करते हैं और स्थानीय हाटों में बेचते हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभहोता है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकता भी मजबूत होती है, इसके अलावे गुमला जिला प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आम की खेती प्रारंभ कराई गई है, जिसकी खुशबू पूरे छोटा नागपुर, झारखंड क्षेत्र में फैल चुकी है,

*समाहरणालय परिसर में कैनोपी आम स्टॉल का उद्घाटन, किसानों एवं महिला समूहों को मिलेगा सीधा बाजार*

गुमला जिला मुख्यालय स्थित नए समाहरणालय परिसर में सांसद सुखदेव भगत द्वारा उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की उपस्थिति में कैनोपी आम स्टॉल का विधिवत उद्घाटन किया गया। स्टॉल का संचालन जेएसएलपीएस द्वारा सुपोषित गुमला रायडीह फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा आम की सीधी बिक्री को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत इस वर्ष जिले में लगभग 2,500 मीट्रिक टन आम उत्पादन संभावित है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जेएसएलपीएस, प्रदान एवं नाबार्ड के सहयोग से विभिन्न फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां एवं सहकारी समितियां बाजार व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं। जिले की विभिन्न एफपीओ द्वारा अब तक लगभग 3,50 मीट्रिक टन आम का सफल विपणन किया जा चुका है।

उद्घाटन के दौरान सांसद सुखदेव भगत ने महिला स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की तथा स्टॉल से आम एवं अन्य उत्पादों की खरीदारी कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया।

 

मौके पर उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, जेएसएलपीएस गुमला के पदाधिकारी, प्रदान संस्था के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठनों के सदस्य, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

DPS Bokaro Alumnus Neelkanth Mishra Appointed India’s Executive Director at the World Bank

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Bokaro has added another glorious chapter to its legacy as renowned economist and DPS Bokaro alumnus Neelkanth Mishra has been appointed as India’s next Executive Director (ED) at the World Bank headquarters in Washington, D.C. The Appointment Committee of the Cabinet (ACC) has officially approved his appointment. Mishra will succeed former IAS officer Parameswaran Iyer, a retired 1981-batch Uttar Pradesh cadre officer. According to the government notification, his tenure will be effective from the date he assumes charge and will continue for three years or until further orders.

Neelkanth Mishra is one of India’s most respected economists and has played a significant role in shaping economic policy discussions in the country. A former Chief Economist at Axis Bank, he has also served as a member of Prime Minister Narendra Modi’s Economic Advisory Council. In addition, he contributed as an advisor to the Unique Identification Authority of India (UIDAI), which spearheaded India’s digital identity revolution.

The appointment has brought immense pride to DPS Bokaro, where Mishra studied in the Class of 1993. An outstanding student from the very beginning, he secured an All India Rank 4 in the IIT entrance examination in 1993. He is the son of former Bokaro Steel Plant officer Prakash Chandra Mishra and Mrs. Kiran Mishra.

DPS Bokaro Principal Dr. A. S. Gangwar congratulated Mishra on his remarkable achievement, describing him as a global asset in the field of economics. He recalled teaching him Chemistry and praised his keen interest in mathematics, science, and economics, as well as his active participation in co-curricular activities. Dr. Gangwar said Mishra’s success serves as an inspiration for millions of young Indians, particularly students from Bokaro.

राम भक्तों के लिए

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी को बढ़ावा देने से हुआ कोचिंग सेंटरों का बोलबाला  और नौनिहालों के सरकारी स्कूल बन रहे डंपिंगयार्ड, माफियाओं के हाथों में है शिक्षा की कमान

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भारत में शिक्षा प्रणाली को लंबे समय से निजी हाथों में सौंप दिया गया है. यह सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ है. सरकारी स्कूल डंपिंगयार्ड बन चुके हैं. स्कूूल मर्जर के नाम पर सरकारी स्कूलों को बंद किया जा रहा है. लाखों सरकारी स्कूलों के जीर्णशीर्ण भवनों का हाल बुरा है. वहीं लंबे समय से स्कूूूूलों को बगैर शिक्षक के रखना आम बात है. अब प्राथमिक शिक्षा की बदहाली से सरकारी तंत्र को कोई लेेेेेेेेना-देना नहीं है और न ही कोई जवाबदेही.

यह हकीकत है कि केंद्र-राज्य की सरकारों ने प्राथमिक शिक्षा में गुणात्मक परिवर्तन लाने का कभी प्रयास नहीं किया. आज देश में शिक्षा निजी हाथों में चला गया है. कोचिंग सेंटरों की देश में भरमार है. शिक्षा माफिया सरकारी तंत्र के लचीले रवैये का खूब फायदा उठा रहा है. इसलिए भारत में शिक्षा महंगी हो चुकी है. गरीब के बच्चे निजी स्कूूूूलों में नहीं पढ़ सकते. ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की तो और भी बुरी स्थिति है.

“सरकारी नौकरी की तैयारी” के नाम पर इकोसिस्टम शिक्षा व्यवस्था पर हावी है

कोचिंग और ऑनलाइन टीचिंग की दुनिया को लेकर आज जो सबसे बड़ा भ्रम फैला हुआ है, वह यह है कि इन्हें “टीचर” कहा जाता है। जबकि जमीनी हकीकत इससे काफी अलग दिखाई देती है।

असल में यह पूरा सिस्टम एक शिक्षा उद्योग यानी एजुकेशन मार्केट बन चुका है, जहां ज्ञान से ज्यादा फोकस बिज़नेस मॉडल, ब्रांडिंग और एडमिशन बढ़ाने पर होता है। “सरकारी नौकरी की तैयारी” के नाम पर एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया गया है, जिसमें करोड़ों छात्र हर साल प्रवेश लेते हैं, लेकिन सफलता का अनुपात बेहद सीमित रहता है।

इस पूरे सिस्टम की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि यह युवाओं के सबसे कीमती समय को खींच लेता है। 8–10 साल तक लगातार एक ही दिशा में लगाए रखना, बिना यह स्पष्ट किए कि चयन की संभावनाएं कितनी सीमित हैं, कई बार छात्रों के करियर पर भारी पड़ता है।

सिर्फ परीक्षा पास कराने की रणनीति 

इस दौरान अगर कोई छात्र स्किल डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी या किसी वैकल्पिक करियर पथ पर ध्यान देता, तो शायद वह अलग स्तर पर पहुंच सकता था। लेकिन तैयारी के नाम पर एक ही ट्रैक पर लंबे समय तक बनाए रखना कई सवाल खड़े करता है।

यह भी कहा जाता है कि इस सिस्टम में शिक्षा का स्तर अक्सर सीमित दायरे में रह जाता है। ज्यादातर कंटेंट नोट्स, ट्रिक्स और परीक्षा-आधारित पैटर्न तक सिमट कर रह जाता है। आलोचकों का मानना है कि यहां गहराई से विषय समझाने की बजाय परीक्षा पास कराने की रणनीति ज्यादा हावी रहती है। इसी कारण यह सवाल उठता है कि क्या ऐसे संस्थान वास्तव में शिक्षा दे रहे हैं या केवल परीक्षा-उन्मुख प्रशिक्षण।

एक और बड़ा मुद्दा यह है कि लाखों छात्रों की भीड़ के बावजूद सरकारी नौकरियों की संख्या बेहद सीमित है। हर साल कुछ लाख पदों के मुकाबले करोड़ों छात्र तैयारी करते हैं, जिससे असंतुलन साफ दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठता है कि बाकी बचे छात्रों का भविष्य क्या होता है, खासकर तब जब वे सालों बाद भी चयनित नहीं हो पाते और न ही किसी अन्य स्किल पर मजबूत पकड़ बना पाते हैं।

“टीचर” की छवि के पीछे मजबूत मार्केटिंग और कमर्शियल स्ट्रक्चर काम करता है

इसी संदर्भ में यह आलोचना सामने आती है कि यह पूरा सिस्टम एक तरह का बिज़नेस मॉडल है, जहां छात्र लंबे समय तक जुड़े रहते हैं और संस्थान लगातार विस्तार करते रहते हैं। “टीचर” की छवि के पीछे एक मजबूत मार्केटिंग और कमर्शियल स्ट्रक्चर काम करता है। इसलिए कई लोग इसे शिक्षा से ज्यादा एक उद्योग मानते हैं, जिसका उद्देश्य ज्ञान से अधिक स्थिर ग्राहक आधार बनाए रखना है।

हालांकि, दूसरी तरफ यह भी सच है कि इसी सिस्टम ने लाखों छात्रों को दिशा भी दी है और कई लोगों का करियर भी बनाया है। लेकिन इसके साथ यह बहस भी लगातार बनी रहती है कि क्या यह मॉडल छात्रों को वास्तविक रूप से सक्षम बना रहा है या सिर्फ एक सीमित लक्ष्य की दौड़ में उलझाए रखता है।

इस वक्त लाखों गरीब परिवार के बच्चे आन लाइन शिक्षा से लाभान्वित हो पा रहे हैं. दूसरी तरफ हमें इस बात को अब स्वीकार कर लेेेना चाहिए कि कोचिंग सेंटर इसलिए खुले, क्योंकि स्कूलों की शिक्षा का स्तर गिर गया है. गरीब मां-बाप भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं भेजना चाहते. हमारी प्राथमिक शिक्षा पर शिक्षा माफियाओं का कब्जा है.  

नर्सरी से ही शुरू हो जाता है प्राइवेट स्कूलों का दोहन

हमारी वर्तमान शिक्षा प्रणाली में शिक्षा का स्तर प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर का नहीं है, इसलिए इस गैप कोचिंग संस्थान दूहते हैं। अभिभावक अपने बच्चों का भविष्य संवारने की गरज से खेत गिरवी रखकर या कर्ज लेेेकर कोचिंग में पढ़ाने के लिए मजबूर होती है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या हमारी सरकारें सभी को काम दे सकती हैं? 

हालांकि यह कटू सत्य है कि कोचिंग तो बहुत बाद की बात है, प्राइवेट का ये तथाकथित घिनौना खेल तो बच्चे के साथ नर्सरी से ही शुरू हो जाता है. प्राइवेट स्कूलों प्रबंधनों की मनमानी को सरकारों का मौन समर्थन है. क्योंकि इनके बच्चे सरकारी स्कूलों का मुंह नहीं देख सकते. 

अहम सवाल ये कि जब सरकारें सब कुछ प्राइवेट हाथों में सौंप रही है, तब हम ही बड़े खुश होकर समर्थन में लगे हुए हैं-अच्छी सर्विस, अच्छी व्यवस्था के नाम पर और अब कोचिंग के प्राइवेट होने पे इतनी हाय-तौबा क्यों? दूसरी तरफ ये भी हकीकत है कि बहुत सारे कोचिंग सेंटरों ने बेहद गरीब बच्चों के सपनों को भी उड़ान भरने का अवसर उपलब्ध कराया है। 

राम भक्तों के लिए

दर्दनाक सड़क हादसा, बिजली खंभे के सपोर्टिंग तार से टकराकर बाइक सवार की घटनास्थल पर हुई दर्दनाक मौत

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित सिसई थाना क्षेत्र के छारदा गांव के समक्ष शनिवार को एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा प्रकाश में आया है। बताया जाता है की अनियंत्रित तेज रफ्तार बाइक में सवार एक 27 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार युवक की बिजली के खंभे के सपोर्टिंग तार से टकराने के कारण घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान छारदा निवासी पिंटू उरांव पिता बुधवा उरांव के रूप में हुई है।
दुर्घटना की सूचना मिलते हैं सिसई थाना पुलिस त्वरित कार्रवाई करते हुए अपने दल बल के साथ उक्त घटनास्थल पर पहुंचकर उक्त शव को अपने कब्जे में लेते हुए, पोस्टमार्टम हेतु गुमला सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस भिजवाया गया, यहां पोस्टमार्टम के बाद उक्त शव को उसके परिजनों को सौंप दिया गया, पुलिस मामले की छानबीन में जुटी

राम भक्तों के लिए

वेतन न मिलने से भुखमरी की कगार पर आउटसोर्सिंग कर्मचारी, आंदोलन की चेतावनी

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित पुराना समाहरणालय, गुमला के परिसर में शनिवार को जिला आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में गुमला जिले के सभी प्रखंडों से लगभग 500 की संख्या में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भाग लिया और अपनी समस्याओं को लेकर हुंकार भरी।बैठक में कर्मचारियों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि पिछले 4 महीनों से उन्हें मानदेय (वेतन) नहीं मिला है, जिसके कारण उनके सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कर्मचारियों का कहना था कि एक तो उन्हें पहले से ही काफी कम वेतन मिलता है, जिससे घर चलाना मुश्किल होता है, ऊपर से समय पर भुगतान न होने के कारण वे अपने परिवार का बीमारी में इलाज तक कराने में असमर्थ हैं।कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनका मानसिक और आर्थिक शोषण किया जा रहा है। उन्हें सरकारी कर्मचारियों के समान न तो वेतन मिलता है और न ही अवकाश, मैटरनिटी लीव या विशेष अवकाश जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।बैठक में उपस्थित आक्रोशित कर्मचारी ने कहा “अगर जल्द ही हमारे बकाए वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो हम उग्र आंदोलन करने पर मजबूर हो जाएंगे। इससे होने वाले किसी भी सरकारी कार्य के बाधित होने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।” बैठक में विशेष रूप से उपस्थित झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव भूषण कुमार और चिकित्सा संघ के जिला सचिव जितवाहन उरांव ने कर्मचारियों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मियों के वेतन की मांग को लेकर सरकार और संबंधित विभाग को पत्र भेजा जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही वेतन का आवंटन आ जाएगा। दोनों नेताओं ने भरोसा दिलाया कि महासंघ हमेशा कर्मचारियों के साथ खड़ा है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा।बैठक के समापन की घोषणा संघ के अध्यक्ष द्वारा की गई। उक्त बातों की विस्तृत जानकारी झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के जिला सचिव भूषण कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

राम भक्तों के लिए

समाहरणालय परिसर में कैनोपी आम स्टॉल का उद्घाटन, किसानों एवं महिला समूहों को मिलेगा सीधा बाजार

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न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय स्थित नए समाहरणालय परिसर में आज सांसद सुखदेव भगत द्वारा उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की उपस्थिति में कैनोपी आम स्टॉल का विधिवत उद्घाटन किया गया। स्टॉल का संचालन जेएसएलपीएस द्वारा सुपोषित गुमला रायडीह फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा आम की सीधी बिक्री को बढ़ावा देना है।
इस अवसर पर जानकारी दी गई कि मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत इस वर्ष जिले में लगभग 2,500 मीट्रिक टन आम उत्पादन संभावित है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जेएसएलपीएस, प्रदान एवं नाबार्ड के सहयोग से विभिन्न फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां एवं सहकारी समितियां बाजार व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं। जिले की विभिन्न एफपीओ द्वारा अब तक लगभग 3,50 मीट्रिक टन आम का सफल विपणन किया जा चुका है।
उद्घाटन के दौरान सांसद सुखदेव भगत ने महिला स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की तथा स्टॉल से आम एवं अन्य उत्पादों की खरीदारी कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया।

मौके पर उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, जेएसएलपीएस गुमला के पदाधिकारी, प्रदान संस्था के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठनों के सदस्य, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक संपन्न

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

योजनाओं में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के दिए निर्देश, विभिन्न विभागों की योजनाओं की हुई व्यापक समीक्षा

गुमला : गुमला जिला समाहरणालय सभागार में सांसद, लोहरदगा लोकसभा क्षेत्र सह अध्यक्ष, जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) सुखदेव भगत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय दिशा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई तथा योजनाओं के प्रभावी, समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

*पूर्व बैठक के अनुपालन प्रतिवेदन की समीक्षा, निर्देशों के शत-प्रतिशत पालन पर जोर*

बैठक की शुरुआत पूर्व दिशा समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन प्रतिवेदन की समीक्षा से हुई। उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन द्वारा विभिन्न विभागों से प्राप्त अनुपालन प्रतिवेदन की जानकारी प्रस्तुत की गई। समीक्षा के दौरान सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि सरकार की प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को दिशा समिति की बैठकों को गंभीरता से लेने तथा पूर्व में दिए गए निर्देशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

*राष्ट्रीय उच्च पथ एवं एनएचएआई परियोजनाओं में लापरवाही पर जताई नाराजगी*

राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल एवं एनएचएआई की समीक्षा के दौरान सांसद ने पूर्व बैठक में अनुपस्थित रहने को लेकर कार्यपालक अभियंता राष्ट्रीय उच्च पथ प्रमंडल से स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही दिशा समिति को योजनाओं की प्रगति एवं जांच संबंधी सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना से संबंधित जांच अथवा महत्वपूर्ण गतिविधियों की जानकारी समिति एवं जिला प्रशासन को समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।

*सड़क सुरक्षा, ब्लैक स्पॉट सुधार एवं मॉनिटरिंग व्यवस्था पर विशेष जोर*

एनएचएआई परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान सड़क दुर्घटनाओं एवं सुरक्षा संबंधी विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। एक दुर्घटना मामले में आयु संबंधी तथ्यों में विसंगति पर सांसद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को संवेदनशीलता एवं सतर्कता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कॉरिडोर मॉनिटरिंग, कैमरा स्थापना तथा चिन्हित ब्लैक स्पॉट्स के सुधार हेतु आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

*खनन प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार एवं मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने के निर्देश*

हिंडाल्को प्रबंधन से संबंधित समीक्षा के दौरान सांसद ने हाड़ुप पंचायत सहित विभिन्न खनन एवं पाट क्षेत्रों में पेयजल, जलापूर्ति तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। उन्होंने खनन प्रभावित क्षेत्रों के रैयतों एवं स्थानीय नागरिकों को रोजगार में प्राथमिकता देने, स्थानीय वाहनों का उपयोग सुनिश्चित करने तथा युवाओं को सम्मानजनक रोजगार एवं उचित पारिश्रमिक उपलब्ध कराने पर बल दिया। साथ ही हिंडाल्को को रोजगार मेलों में भाग लेकर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।

*महिला समूहों की आजीविका एवं एफपीओ सशक्तिकरण पर हुई चर्चा*

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की समीक्षा के दौरान स्वयं सहायता समूहों की आजीविका गतिविधियों, एचजीएम नवीनीकरण एवं एफपीओ को बैंकिंग सहयोग उपलब्ध कराने से संबंधित विषयों पर चर्चा हुई। सांसद ने बैंक प्रतिनिधियों को स्थानीय भाषा में संवाद स्थापित कर ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी सरल तरीके से उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। चिप्सोना आलू की खेती एवं अन्य आजीविका कार्यक्रमों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के रोजगार संवर्धन हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

*किसानों को स्थानीय भाषा में तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का निर्देश*

कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान सांसद ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त किसानों को जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने तथा नियमित रूप से मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने किसानों को स्थानीय भाषा में तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। खाद एवं उर्वरकों विशेषकर यूरिया एवं डीएपी की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि “धरती बचाओ अभियान” के तहत किसानों को नैनो यूरिया एवं वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है तथा अवैध बिक्री रोकने हेतु कार्रवाई की जा रही है।

*उद्यानिकी, विपणन एवं चाय खेती परियोजना की प्रगति की समीक्षा*

उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान किसानों द्वारा उत्पादित फसलों के विपणन, कोल्ड स्टोरेज निर्माण एवं विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर चर्चा की गई। विशुनपुर प्रखंड के नरमा गांव में प्रस्तावित चाय खेती परियोजना की प्रगति की जानकारी लेते हुए सांसद ने कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया।

*नगर परिषद के कार्यों की समीक्षा, अवैध वसूली पर सख्त कार्रवाई के निर्देश*

नगर परिषद से संबंधित समीक्षा के दौरान बाजार टांड़ क्षेत्र की साफ-सफाई, जलजमाव, अवैध वसूली, पार्किंग शुल्क एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। सांसद ने आउटसोर्सिंग एजेंसियों की कार्यप्रणाली की नियमित मॉनिटरिंग करने, लापरवाही बरतने पर नोटिस जारी करने तथा अवैध वसूली पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी।

*जुडको परियोजनाओं में समन्वय की कमी पर जताई नाराजगी*

जुडको द्वारा संचालित पेयजल एवं अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान सांसद ने योजनाओं की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन को उपलब्ध नहीं कराए जाने पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये की योजनाओं के संबंध में स्थानीय स्तर पर समुचित सूचना एवं समन्वय आवश्यक है। विद्युत शवदाह गृह की स्थापना के बाद उसके प्रभावी संचालन नहीं होने पर भी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने दस दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

*स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार एवं एंबुलेंस व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर बल*

स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान मातृत्व वार्ड विस्तार, ब्लड बैंक एवं एंबुलेंस व्यवस्था पर चर्चा की गई। सांसद ने ब्लड स्टोरेज यूनिट को शीघ्र पूर्ण रूप से संचालित करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अतिरिक्त एंबुलेंस उपलब्ध कराने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया।

*शिक्षा विभाग के लंबित मामलों की जांच के दिए निर्देश*

शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान अंबेडकर नगर स्थित जर्जर विद्यालय भवन, मदरसा इस्लामिया गुमला में प्रबंध समिति गठन, अल्पसंख्यक प्राथमिक उर्दू विद्यालय गोया (घाघरा) से संबंधित मामलों सहित अन्य लंबित विषयों पर चर्चा हुई। सांसद ने संबंधित मामलों की विशेष जांच कराने तथा जांच समिति में दिशा समिति के सदस्यों को भी शामिल करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी मामलों में तथ्यपरक एवं ठोस प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा।

*मनरेगा, आवास, पशुपालन एवं मत्स्य योजनाओं की प्रगति की समीक्षा*

मनरेगा की समीक्षा के दौरान लंबित देयताओं, पौधारोपण कार्यों तथा पंचायतवार योजनाओं के संतुलित वितरण पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री आवास योजना, पेयजल एवं स्वच्छता, पशुपालन, मत्स्य, आपूर्ति, खेल एवं युवा कार्य विभाग सहित अन्य विभागों की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। पशुपालन विभाग को पशु मृत्यु की स्थिति में त्वरित सूचना एवं बीमा दावा प्रक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मत्स्य विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत लाभुकों को प्रदत्त सहायता की भी समीक्षा की गई।

*रेलवे एवं आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विषयों पर भी हुई चर्चा*

बैठक में रेलवे से संबंधित लंबित प्रस्तावों, क्षेत्रीय संपर्क एवं आधारभूत संरचना विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा की गई। सांसद ने कहा कि दिशा समिति केवल अनुश्रवण का मंच नहीं बल्कि समन्वय का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तथा समिति द्वारा दिए गए निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

*समन्वय, अनुश्रवण एवं जवाबदेही से विकास कार्यों को मिलेगी नई गति : सांसद*

बैठक के समापन अवसर पर सांसद सह दिशा समिति अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कहा कि दिशा समिति केवल योजनाओं की समीक्षा का मंच नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री आवास, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, कृषि, खनन, ग्रामीण विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर विस्तृत एवं सकारात्मक चर्चा हुई है।

उन्होंने कहा कि समिति के सदस्यों द्वारा जनहित से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव एवं मुद्दे उठाए गए, जिन पर गंभीरतापूर्वक विचार किया गया है। जिला प्रशासन एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा अधिकांश मामलों में सकारात्मक पहल की जा रही है, वहीं जिन मामलों में लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आई है, उनमें आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही अपने दायित्वों का बेहतर निर्वहन करने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों को प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

सांसद ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि दिशा समिति की बैठकों में दिए गए निर्देशों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें तथा अंतिम तिथि की प्रतीक्षा करने के बजाय समस्याओं के समाधान हेतु त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बेहतर समन्वय, नियमित अनुश्रवण एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से जिले के विकास कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा गुमला के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।

बैठक में मुख्य रूप से उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हरिश बिन जमां, जिला वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर, जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा, नगर परिषद अध्यक्ष शकुंतला उरांव, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, सभी अनुमंडल पदाधिकारी, विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, दिशा समिति के सदस्यगण एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

निजी कार्य से निकले व्यक्ति को अज्ञात अपराधियों ने पत्थर आदि से मारकर मौत के घाट उतार दिया , पुलिस करेंगी – जल्द खुलासा

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गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित जारी थाना क्षेत्र के श्रीनगर गांव में दिल दहला देने वाली दर्दनाक घटना प्रकाश में आया है, दिनदहाड़े अज्ञात अपराधियों ने चटकपुर गांव निवासी 45 वर्षीय बसंत तिर्की की माथे पर भारी वस्तु (पत्थर – आदि) से वार कर निर्मम हत्या कर दी गई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल है, प्राप्त जानकारी के अनुसार, चटकपुर निवासी बसंत तिर्की शनिवार को अपने किसी निजी काम के सिलसिले में पास के गांव श्रीनगर आए हुए थे,इसी क्रम में लगभग 12 बजे दिन में किसी अज्ञात अपराधियों ने उसपर पहले से घात लगाकर हमला कर दिया और उक्त अपराधियों ने उनके माथे पर पत्थर आदि से ताबड़तोड़ वार किए उसे मौत के घाट उतर दिया, उसपर हमला इतना जोरदार था कि बसंत तिर्की की घटनास्थल पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई, घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी सूचना जारी थाना पुलिस को दी, सूचना मामले ही जारी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए और उक्त घटना की सूचना अपने उच्च अधिकारियों पुलिस अधीक्षक ( गुमला पुलिस कप्तान हरिश बिन जामां ) महोदय गुमला को दी, और उनके निर्देश पर एंव चैनपुर एसडीपीओ श्रुति कुमारी के नेतृत्व में एंव जारी थाना प्रभारी शनि कुमार सहित जारी थाना पुलिस जवानों का एक छापामारी दल गठित कर अनुसंधान कार्य प्रारंभ करते हुए अज्ञात अपराध कर्मियों की खोज कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया, जिस पर कार्रवाई करते हुए उक्त पुलिस दल ने सर्वप्रथम उक्त घटनास्थल पर पहुंचकर, उक्त शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हेतु उक्त शव को गुमला सदर अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस , भेजवाया गया, जारी थाना प्रभारी शनि कुमार ने बताया की सूचना मिलते ही जारी पुलिस अपनी तलवल के साथ “श्रीनगर गांव पहुंची, जहाँ पूछताछ के क्रम में मृतक की पहचान चटकपुर निवासी 45 वर्षीय बसंत तिर्की के रूप में हुई है। प्रथम दृष्टया मृतक के माथे पर गहरी चोट के निशान मिले हैं, जिससे प्रतीत होता है की अज्ञात अपराधियों द्वारा पत्थर आदि से वार कर उक्त हत्याकांड को अंजाम दिया गया है, हत्या किसने और किस कारण से की गई हैं , क्या अनुसंधान के क्रम में पता चलेगा, गहराई से जांच पड़ताल की जा रही है और उक्त अपराधियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा, पोस्टमार्टम के बाद बसंत तिर्की के शव को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है, शव घर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम पसरा हुआ है। फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है। अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस संभावित क्षेत्रों में छापेमारी शुरू कर दी है।

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