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Wednesday, November 4, 2026
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आजसू पार्टी बोकारो जिला कार्य समिति की मासिक बैठक गोमिया डाक बंगला में संपन्न, पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने बूथ को मजबूत करने

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न्यूज – कहकशां फारुकी

गोमिया__आजसू पार्टी की बोकारो जिला कार्य समिति की मासिक बैठक रविवार को गोमिया प्रखंड अंतर्गत डाक बंगला परिसर, गोमिया में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता बोकारो जिलाध्यक्ष सचिन कुमार महतो ने की, जबकि बतौर मुख्य अतिथि गोमिया के पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो उपस्थित रहे। बैठक में जिला कार्य समिति, प्रखंड कार्य समिति, पंचायत बोकारो जिला अध्यक्ष इसमें मंच का संचालन नरेद्र कुमार महतो, मुख्य अतिथि डॉक्टर लंबोदर महतो, केंद्रीय सचिव राजेश कुमार विश्वकर्मा, नरेन चौधरी, अश्विनी महतो, जयलाल महतो, कमलेश महतो, अरुण कुमार महतो, महेश देशमुख, मिथिलेश महतो, सूरज रजवार, सूरज कपरवार सहित सैकडो सक्रिय कार्यकर्ता मौजूद थे।बैठक में आजसू पार्टी के कार्यकर्ता के पिता गणेश महतो व संतोष महतो के निधन पर दो मिनट का मोन धारण कर शोक प्रकट किया। इस बैठक में लगभग दर्जनों लोगों ने सदस्यता ग्रहण किया, पूजा कुमारी सिंह, सुजीत कुमार, रोनित विजय, सहित दर्जनों ने सदस्यता, पूर्व विधायक डॉक्टर लंबोदर महतो ने बुके व आजसु का पट्टा देकर ने सदस्यता ग्रहण किया। बैठक में संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान और आगामी विधानसभा/लोकसभा चुनावों की रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि किसी भी पार्टी की असली ताकत उसका बूथ स्तर का कार्यकर्ता होता है। जब तक बूथ मजबूत नहीं होगा, तब तक पार्टी मजबूत नहीं हो सकती और जब तक पार्टी मजबूत नहीं होगी, तब तक हम जनता की लड़ाई सड़क से सदन तक नहीं लड़ सकते। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने पंचायत और बूथ पर जाकर संगठन को मजबूत करें। हर बूथ पर 10 से 15 सक्रिय, समर्पित युवाओं की टोली बनाई जाए, जो पार्टी की नीतियों, सिद्धांतों और झारखंडी जनभावना को जन-जन तक पहुंचाएं।
डॉ. महतो ने कहा कि वर्तमान हेमंत सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा, विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल रहा, खतियान आधारित स्थानीय नीति लागू नहीं हुई। इन सभी जनहित के मुद्दों को लेकर गांव-गांव में जनसंपर्क अभियान चलाना है और लोगों को जागरूक करना है। बैठक में सदस्यता अभियान को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. महतो ने निर्देश दिया कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं, महिलाओं, किसानों और बुद्धिजीवियों को आजसू पार्टी से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि आजसू पार्टी हमेशा से झारखंड के हक-अधिकार, विस्थापितों, किसानों, मजदूरों की आवाज रही है और आगे भी रहेगी। उन्होंने सभी प्रखंड अध्यक्षों और पंचायत प्रभारियों को लक्ष्य दिया कि अगले एक महीने के अंदर हर पंचायत में बूथ कमेटी का गठन कर सूची जिला कार्यालय को सौंपी जाए।
बैठक में बोकारो जिला के कई वरिष्ठ नेता, गोमिया प्रखंड अध्यक्ष, बेरमो, पेटरवार, कसमार,जरीडीह,चन्दनकियारी, के प्रखंड अध्यक्ष, फुसरो नगर अध्यक्ष, पंचायत अध्यक्ष, सचिव सहित जिला कार्य समिति एवं केंद्रीय समिति के सभी सदस्य एवं सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे। अंत में सभी ने एकजुट होकर पार्टी को पंचायत से लेकर बूथ स्तर तक मजबूत करने और संगठन को नई ऊंचाई तक ले जाने का संकल्प लिया।

राम भक्तों के लिए

अंदर से उबल रहे ज्ञानेश पसोपेश में, इतनी गालियां शायद ही कोई अफसर भविष्य में खाएगा…!

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विष्णु नागर

महत्वाकांक्षा का मारा ज्ञानेश कुमार बेचारा अब बुरी तरह से फंस चुका है। उसके प्राण अधर में लटके हैं। कब पद रूपी ये प्राण-पखेरू उड़ जाएं, कुछ पता नहीं। कब उसे धर्मेन्द्र प्रधान बना दिया जाए, कम से कम वह नहीं जानता। किसी भी दिन संदेशा आ सकता है, ज्ञानू तू हट जा। न बेचारे से उगलते बन रहा है, न निगलते। रोज ये गरीब गंदी से गंदी गालियां खा रहा है। देशद्रोही, गद्दार, बेईमान, चोर, डाकू और भी उसे न जाने क्या- क्या कहा जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है. बेटी भी बेचारी कुछ कर नहीं पा रही है।

मोदी-शाह कैसे बचा पाएंगे?

राहुल गांधी धमकी दे रहे हैं कि ज्ञानेश, तू सरकार का भंडाफोड़ गवाह बन जा, वरना हम सत्ता में आए तो तू जेल जाएगा ! बच नहीं पाएगा। ये जो तू इम्यूनिटी नामक सुरक्षा तंत्र पर इतरा रहा है न, वह हट जाएगा। बचना हो तो अभी बच जा! ये मोदी-शाह तुझे बचा नहीं पाएंगे। ये तो खुद कहीं छुप होंगे। अपना मोबाइल कूड़ेदान में फेंककर रफूचक्कर हो चुके होंगे! ज्ञानू तू अक्ल से काम ले!

अंदर ही अंदर ज्ञानेश कुमार भी उबल रहा है। मोदी-शाह को मन ही मन बुरी से बुरी गालियां दे रहा होगा कि इन नाशपीटों ने मेरी वफादारी का यह इनाम दिलवाया है ? ज्ञानेश ब्राह्मण होता तो इन्हें श्राप दे देता, इन्हें भस्म कर देता मगर विधि की विडंबना कि बेचारे को बनिया परिवार में जन्म मिला तो इस हद तक जा नहीं सकता।

बेचारा सिविल इंजीनियरिंग छोड़कर आईएएस गालियां खाने के लिए तो नहीं आया था वरना वहां खूब ऊपरी कमाई करता और गुड़गांव में विशाल बंगला बनाकर मस्ती से रहता। हद से हद इनकम टैक्स का छापा पड़ता। केस चलता। जेल हो जाती तो जमानत मिल जाती। फिर से ऐश शुरू हो जाती!

बेचारा इसलिए तो अमित शाह की गोद में नहीं बैठा था कि कल के इन छोकरा-छोकरियों के जूते पे जूते खाऊंगा और चूं तक करने की इजाजत नहीं होगी। इसलिए तो बेचारे ने मोदी-शाह की इच्छापूर्ति के लिए कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिए कानून का ड्राफ्ट बनाने में मदद नहीं की थी। इसलिए तो इस जीव ने श्रीराम तीर्थ क्षेत्र की स्थापना का काम अपने कंधों पर नहीं लिया था और चोरी के लिए बहुत सी दरारें खुली नहीं छोड़ी थीं।

इसलिए तो इस गरीब ने केरल के एक उच्च आईएएस अधिकारी को शाह के कहने पर भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने की पेशकश नहीं की थी। इसलिए तो इस पुअर गाई ने रिटायरमेंट के बाद चुनाव आयुक्त और फिर मुख्य चुनाव आयुक्त के पद के लिए लार नहीं टपकाई थी। इसलिए तो इसने मतदाता सूची से 13 करोड़ के नाम नहीं काटे थे। इसलिए तो इसने अपनी इतनी ज्यादा ऐसी-जैसी नहीं करवाई थी।

सोचा क्या था और हो क्या गया। सोचा था कि इस पद से रिटायर होकर फिर राज्यसभा की सीट पा जाऊंगा और मंत्री बन जाऊंगा। खाऊंगा और खाने दूंगा। मंत्री नहीं बना तो किसी ऐसे राज्य का राज्यपाल बना दिया जाऊंगा, जहां विपक्षी दल की सरकार होगी।

उसके काम में दिन में दस बार टांग अड़ाऊंगा और मोदी-शाह के आशीर्वाद पर आशीर्वाद हासिल करता जाऊंगा और एक दिन इस देश का पहला गुप्ता उपराष्ट्रपति या राष्ट्रपति बन टांगें पसार कर लेट लगाऊंगा। जब सो -सोकर ऊब जाऊंगा तो कुल्ला करने के बाद ये जिस कागज पर दस्तखत करने को कहेंगे, बेझिझक कर दूंगा। इस पर अनंतकाल पछताने की बजाय तिरंगे में लिपट कर इस दुनिया से प्रयाण कर जाऊंगा।

उधर मोदी-शाह इसे फंसाकर चुप बैठे हैं। वे इसे गालियों पर गालियां खाने दे रहे हैं। कह रहे हैं कि चुप बैठ और गालियां सुन। हम भी तो दो-दो, तीन-तीन किलो गालियां रोज खाते हैं, हमारी सेहत तो लगातार सुधर रही है। बिगड़ने का नाम नहीं लेती। देख मोदी जी को कितने टनाटन हैं।

बीच-बीच में झपकी लेते रहते हैं बस। पद नहीं होता तो ऐसे रह पाते! सूख के कांटा हो जाते। दिल के रोगी हो जाते। शुगर बढ़ जाती! देख उनके गाल कितने गोल और लाल हैं। बेटा तेरे पास पद है तो सब है। हेल्थ है, वेल्थ है। तू भी गाली खा और हेल्थ बना। हद से हद जेल होगी,तो चले जाना। हम भी तेरा साथ देने आ जाएंगे। तेरी खैर खबर लेते रहेंगे।

हम तेरे पक्ष में अभी एक शब्द भी बोलेंगे तो हम भी निशाने पर आ जाएंगे। अभी तू भुगत। नौकरी से रिटायर होने के बाद इतना बड़ा तोहफा तुझे इसीलिए तो दिया था कि तू भी मोटी-मोटी गालियां खा। मोटी तनख्वाह लेता है तो गाली भी मोटी खा और ऊपर से मुस्कुरा। मोदी जी की तरह कीर्तन करना सीख। झांझ-मजीरा बजा। ढोल बजा।

मर्जी से त्यागपत्र देगा तो भी फंसेगा…!

अब स्थिति यह है कि बेचारा रोज-रोज के कलह से मुक्ति पाने के लिए चाहे भी तो अपनी मर्ज़ी से इस्तीफा नहीं दे सकता। देगा तो मरेगा और नहीं दे रहा है तो भी जीते जी मर रहा है। त्यागपत्र मर्जी से देगा तो मोदी-शाह उसे छोड़ेंगे नहीं कि क्या पता ये कौन सा रहस्य खोलकर ये हीरो बन जाए! इस डर से उसे किसी न किसी ऐसे केस में फंसा देंगे कि मरते दम तक चैन नहीं मिलेगा।

रोज गालियां पड़ रही हैं। रोज पुतले जलाए जा रहे हैं। रोज गधे पर बैठाया जा रहा है। इसका एक ही दूरगामी लाभ है कि बदनाम होंगे तो क्या, नाम न होगा टाइप, उसका नाम भी हो जाएगा। आज की जेन जी और उसके बाद आनेवाली जेन अल्फा जिंदगीभर मोदी-शाह के साथ उसका नाम लेगी।

राजनाथ सिंह का नाम भूल जाएगी। शिवराज सिंह चौहान का नाम भूल जाएगी मगर ज्ञानेश का नाम बदनाम होकर ही अमर रहेगा, यही गाली खाने का सबसे बड़ा पुरस्कार है। जब भी 2026 की बात होगी, ज्ञानेश उसमें आएगा ही आएगा। इस समय का राजनीतिक इतिहास जब भी लिखा जाएगा तो राजीव कुमार का नाम लोग भूल जाएंगे मगर ज्ञानेश कुमार का नाम अजर भी रहेगा और अमर भी!

सीईसी को लेकर कई तरह की खबरें सोशल मीडिया में तैर रही हैं

ज्ञानेश को लेकर तमाम सोशल मीडिया कई तरह की खबरें तैर रही हैं. एक यूूजर ने लिखा कि जैसे हालात बन रहे हैं उससे ऐसा प्रतीत होता है कि ज्ञानेश पद से नहीं हटेगा, संदेहास्पद परिस्थिति में उसकी मृत्यु की सम्भावना बन रही है और ये भी संभव है कि यदि ज्ञानू को जरा सा भी संदेह हुआ तो वह राहुल गांधी की शरण में चला जाएगा।

इन बेचारे दोनों गुज्जुओं की भी मजबूरी है कि वोट चोरी न करवाएं तो सत्ता पर कैसे काबिज रहें! 2014 में झूठ चल गया, 2019 में नफ़रत चल गई! 2024 में यह सब नहीं चला। बिना घपले के तो 240 सीटें भी न आतीं। चालीस पर अटक जातीं। अब 2029 में सूपड़ा साफ़ होना तय है।

बीस सीटें भी मिल जाएं तो ईश्वर की कृपादृष्टि मानना चाहिए। ऐसे में बेचारे करते भी क्या, जबकि कांग्रेस की तरह पचास साल सत्ता में रहने का सपना था इनका। इनका हिंदुत्व पिट गया। उसका नाम बदलकर सनातन किया, उसका भी मलीदा बन गया।

राम मंदिर बन गया मगर चला नहीं। ऊपर से चढ़ावा चोरी की घपलेबाजी खुल गई। बार-बार पुलवामा-पुलवामा खेल नहीं सकते। मुसलमानों से नफ़रत के खेल की असलियत भी खुल गई। खूब पैसा जमा किया, उसका लाभ भी उत्तरोत्तर कम होता गया। राज्यों को हजार करोड़ और लाख करोड़ की कथित सौगात देने का खेल भी खेला, वह भी बिगड़ गया। पुल बनते ही ढह गए, सड़कें उद्घाटन से पहले ही टूट गईं। पप्पू और जर्सी गाय कहना उल्टा पड़ गया।

पार्टी तोड़ने, सांसद खरीदी का खेल भी अब फ्लाप है। जो इधर आ गए, आज माथा पीट रहे हैं। 2047 का सपना तो आंखों के सामने ही धूल खा रहा है। ज्ञानू तो चाहिए था न बेचारों को! इस देश में इन गरीबों की मजबूरी कोई नहीं सम़झता! सब संवेदनहीन हो चुके हैं।

 

राम भक्तों के लिए

 झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार कमलनयन को कोलकाता में लाईफटाइम एचिवमेंट एवार्ड से नवाजा गया

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कोलकाता में इ-न्यूज कॉन्क्लेव में ‘गांधी आज होते तो पत्रकारिता के बारे में क्या सोचते’ विषयक पर सेमिनार

कोलकाता/गिरिडीह: टेलीविजन पर होनेवाली बहस, सोशल मीडिया पर सुनी-सुनायी  सूचनाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के मौजूदा युग में प्रखर पत्रकार रहे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी होते तो “आज की पत्रकारिता के बारे में क्या सोचते” विषयक पर शनिवार को स्वतंत्र जनहित मीडिया मंच एंव डिजीप्रिज्म मीडिया फाउन्डेशन की पहल पर नेशनल लाईब्रेरी के भव्य ओडिटोरियम हॉल में ई-न्यूजरूम द्वारा कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया, जिसमें गांधी जी की पत्रकारिता पर आयोजित कार्यक्रम में देश के कई जाने माने मूर्धन्य पत्रकारों ने मौजूदा पत्रकारिता पर अपने बेबाक विचार व्यक्त किये।

कॉन्क्लेव में सोशल मीडिया के व्यापक स्वरूप को लेकर चर्चा हुई

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से वरिष्ठ पत्रकार अरफा खानम शेरवानी ने (ऑनलाईन) एवं उपस्थित प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार, वरिष्ठ पत्रकार-लेखक रशीद किदवई, फैक्ट चैकर ऑल्ट न्यूज के सह संपादक प्रतीक सिन्हा ने गांधी जी की पत्रकरिता के प्रति सोच- उनके विचारों और आम जनमानस के प्रति मीडिया की जिम्मेवारी सहित प्रेस को सत्ता से निबटने जैसे अहम सवालों पर मीडिया की आम जनमानस के प्रति जिम्मेवारी और सोशल मीडिया के व्यापक स्वरूप को लेकर चर्चा की। कहा कि सोशल मीडिया का बढ़ता प्रभाव मौजूदा समय में आम जनमानस के चेहरा बनता जा रहा है।
ई-न्यूजरूम कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में डिजीप्रिज्म मीडिया फाउन्डेशन द्वारा  पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए झारखंड-गिरिडीह के वरिष्ठ पत्रकार कमलनयन छापरिया और (पश्चिम बंगाल) अब्दुल अजीम को पत्रकार एनडी शर्मा मेमोंरियल लाइफ टाईम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किये गये।
दरअसल पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक समर्पित रहे पत्रकार कमल नयन ने 1992 में पहले प्रभात खबर, रांची और फिर रांची एक्सप्रेस से पत्रकारिता की लंबे समय तक गिरिडीह-पारसनाथ के इलाके में जमीनी पत्रकारिता और जन सरोकार के मुद्दों पर अपनी रिपोर्टिंग का हिस्सा बनाया।
यह सम्मान उन्हें पत्रकारिता में दीर्घकालीन योगदान एवं प्रतिबद्धता तथा जन पक्षधर की पत्रकारिता को समर्पित है। इसके अलावा (असम) पत्रकार रोकीबुज जमान को विश्वजीत रॉय मेमोरियल स्मृति जर्नलिस्ट अर्वाड प्रदान किया गया. कॉन्वक्लेव के तीसरे सत्र में दिवंगत विश्वजीत रॉय द्वारा गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के यहुदी-अरब संबंधों पर लिखित पुस्तक तथा वरिष्ठ पत्रकार एनडी शर्मा द्वारा लिखित “चोर का शास्त्रज्ञान” पुस्तक का विमोचन किया गया.
इस संवंध में ई-न्यूजरूम के प्रबंध संपादक शहनवाज अख्तर और सविना अख्तर ने बताया कि कोन्क्लेव महज गांधी जयंती का प्रोगाम नहीं था बल्कि गांधी जी की पत्रकारिता के प्रति मीडिया का समाज के प्रति दात्यिव तथा सोशल मीडिया के इस युग में आज की पत्रकारिता गांधी के विचारों से कितना कुछ सीख सकती है।

आज की पत्रकारिता की अंधी दौड़ में शामिल नहीं हैं कमल नयन: एन. विश्वकर्मा

वरिष्ठ पत्रकार नारायण विश्वकर्मा ने कमल नयन को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किए जाने पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कमल नयन इसके हकदार थे. उन्होंने कहा कि मैं यह मानता हूं कि रांची एक्सप्रेस अखबार से तीन दशक से जुड़े रहे कमल जी आज के जमाने की पत्रकारिता के खांचे में कमल फिट नहीं बैठते हैं. फिर भी विपरीत परिस्थितियों में झारखंड की पत्रकारिता में उन्होंने जो अपना स्थान बनाया है, उन चंद पत्रकारों में कमल का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. मधुर स्वभाव के धनी कमल ने पत्रकारिता में कभी समझौता नहीं किया. अपने पेशे के प्रति वे सदा ईमानदार रहे और यही उनकी विशेषता है. गिरिडीह में आज भी कई नामचीन हस्तियों और राजनेताओं ने कमल नयन के बारे में कहते हैं कि आज की पत्रकारिता की अंधी दौड़ से वे बिल्कुल अलग हैं. यही उनकी खासियत है.  

 

राम भक्तों के लिए

विभावि के राजनीति विज्ञान विभाग में व्याख्यान आयोजित

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न्यूज – विजय चौधरी 

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो अभय प्रसाद सिंह ने शोध पद्धति पर दी नई जानकारी

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान विभाग में शनिवार को व्याख्यान का आयोजन किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजी डीएवी महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अभय प्रसाद सिंह ने ‘समाज विज्ञान में शोध पद्धति’ विषय पर अपने विचार रखें। कार्यक्रम की अध्यक्षता विभागाध्यक्ष डॉ सुकल्याण मोइत्रा ने किया।

उन्होंने कहा कि शोधार्थी को यह सुनिश्चित करनी चाहिए कि उनका शोध कार्य अध्ययन के किसी एक निश्चित क्षेत्र में अर्थपूर्ण योगदान करेगा। उन्होंने कहा कि शोध की भाषा में इसे मूल्यवर्धन (value addition) कहते हैं।

प्रोसेसर अभय ने बताया कि समाज विज्ञान के शोध में दो प्रमुख धाराएं हैं। पहली धारा ‘विषय-वस्तु विश्लेषण’ (content analysis) पर आधारित है तथा दूसरी धारा आनुभविक (empirical) है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चुनौती है प्रतिदर्शन (sampling) का निर्धारण। बताया कि समाज विज्ञान में ‘सरल उद्देश्यपूर्ण यादृच्छिक प्रतिचयन’ (simple purposive random sampling) का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।

मुख्य वक्ता ने जानकारी दी कि शोध में गुणात्मक इनपुट रहने से नीति निर्धारण के स्तर तक इसकी उपयोगिता बढ़ सकती है। उन्होंने अर्थ निरूपण (interpretation) के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि इसमें मेटा और चैटजीपीटी जैसे एआई (AI) का सहयोग लेने से बचनी चाहिए। कहा कि इससे शोध की मौलिकता पर प्रतिकूल असर पड़ता है।

विभाग की ओर से मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। शोधार्थियों ने कुछ अर्थपूर्ण प्रश्न भी वक्त से पूछे। मौके पर पूर्व संकायाध्यक्ष प्रोफेसर बीपी सिंह तथा विभागीय प्राध्यापको के अलावे बड़ी संख्या में शोधार्थी तथा द्वितीय समसत्र के विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ अशोक राम तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अजय बहादुर सिंह ने किया।

 

राम भक्तों के लिए

ढोल-नगाड़े के साथ अभियुक्त के घर पहुंची पुलिस, कोर्ट का इश्तिहार चस्पा कर कराई मुनादी

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न्यूज – कहकशां फारूकी 

गोमिया: न्यायालय के आदेश के अनुपालन में शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को गोमिया के चतरोचट्टी थाना क्षेत्र में एक अभियुक्त के घर इश्तिहार चस्पा किया गया। पुलिस टीम ने ढोल-नगाड़े के साथ सार्वजनिक रूप से मुनादी कराकर स्थानीय लोगों को भी न्यायालय से जारी इश्तिहार की जानकारी दी।

यह कार्रवाई चतरोचट्टी थाना कांड संख्या 19/23 के अभियुक्त जयलाल महतो, पिता मोती महतो, निवासी बलथरवा, रहावन ओपी (जागेश्वर बिहार), बोकारो के विरुद्ध की गई।

चौक-चौराहों पर भी चस्पा किया इश्तिहार

न्यायालय के निर्देश पर पुलिस टीम अभियुक्त के घर पहुंची और वहां इश्तिहार चस्पा किया। इसके अलावा इलाके के प्रमुख चौक-चौराहों पर भी इश्तिहार चिपकाया गया।

पुलिस ने ढोल-नगाड़े के साथ मुनादी कर आसपास के लोगों को न्यायालय की ओर से जारी इश्तिहार के बारे में जानकारी दी। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों की मौजूदगी में सार्वजनिक रूप से इसकी सूचना दी गई।

फोटो-वीडियोग्राफी भी कराई गई

पुलिस के अनुसार, न्यायालय के आदेश के तहत की गई पूरी कार्रवाई की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। इश्तिहार की तामिला पु०अ०नि० कुंदन कुमार यादव और सशस्त्र बल की मौजूदगी में न्यायालय के निर्देशानुसार पूरी की गई।

पुलिस के मुताबिक यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश के अनुपालन में की गई है।

राम भक्तों के लिए

संतान की लंबी उम्र की कामना में माताओं ने रखा जितिया व्रत, गुमला में दिखी आस्था और परंपरा की तस्वीर

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला: संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ गुमला जिले में जितिया पर्व श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों तक माताओं ने अपनी संतान के मंगल जीवन की कामना करते हुए व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पर्व के दौरान घरों और आसपास के इलाकों में धार्मिक माहौल के साथ लोक-संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।

जितिया को जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। इस पर्व में माताएं अपनी संतान के कल्याण और दीर्घायु की कामना के लिए कठिन व्रत रखती हैं। गुमला में भी महिलाओं ने पारिवारिक परंपराओं के अनुसार पूजा-पाठ किया और पर्व से जुड़ी मान्यताओं का पालन किया।

मां की आस्था के साथ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा

जितिया की खास बात सिर्फ व्रत नहीं, बल्कि इससे जुड़ी पारिवारिक परंपरा भी है। घर की बुजुर्ग महिलाएं नई पीढ़ी को पर्व की कथा, पूजा की विधि और इससे जुड़ी मान्यताओं के बारे में बताती हैं। इस तरह जितिया के बहाने धार्मिक आस्था के साथ परिवार की सांस्कृतिक विरासत भी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती है।

पर्व के दौरान महिलाओं की भागीदारी और पारंपरिक पूजा-पद्धति ने गुमला की लोक-संस्कृति की तस्वीर को भी सामने रखा।

जीमूतवाहन की कथा से जुड़ी है मान्यता

जितिया पर्व से राजा जीमूतवाहन की लोककथा भी जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीमूतवाहन त्याग और परोपकार के लिए जाने जाते थे। कथा के मुताबिक उन्होंने नागवंश के एक युवक की रक्षा के लिए स्वयं को गरुड़ के सामने समर्पित कर दिया था। उनके त्याग और करुणा से प्रभावित होकर गरुड़ ने हिंसा छोड़ने का संकल्प लिया।

इसी कथा को जितिया की धार्मिक परंपरा से जोड़ा जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में कथा के वर्णन में अंतर जरूर मिलता है, लेकिन इसके केंद्र में त्याग, करुणा और जीवन की रक्षा का संदेश माना जाता है।

जितिया में दिखी गुमला की सांस्कृतिक पहचान

गुमला जैसे जिले में ऐसे पर्व धार्मिक आयोजन के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति को जीवंत रखने का माध्यम भी बनते हैं। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया जितिया पर्व परिवार और समाज को जोड़ने का अवसर भी बना।

बदलते समय और आधुनिक जीवनशैली के बीच जितिया जैसे पर्व नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और लोककथाओं से जोड़ने का काम करते हैं। खासकर बुजुर्गों से बच्चों तक पहुंचती पर्व की कहानियां और रीति-रिवाज सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं।

आस्था के साथ संतान के मंगल की कामना

गुमला में जितिया पर्व के दौरान माताओं की आस्था का केंद्र उनकी संतान रही। किसी ने संतान की लंबी उम्र की कामना की तो किसी ने अच्छे स्वास्थ्य और सुखी भविष्य के लिए व्रत रखा।

इस तरह गुमला में संपन्न हुआ जितिया पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रहा, बल्कि मां के प्रेम, त्याग और परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा बनकर सामने आया।

राम भक्तों के लिए

गुमला में योजनाओं की समीक्षा के दौरान उठे कई सवाल, बीज से लेकर जुडको के काम तक मांगी रिपोर्ट

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला: सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, खर्च और राजस्व सृजन की जमीनी स्थिति जानने के लिए झारखंड विधानसभा की सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति ने गुमला में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा की। शनिवार को गुमला परिसदन सभागार में हुई बैठक की अध्यक्षता समिति के सभापति निरल पूर्ति ने की। बैठक में उपायुक्त दिलेश्वर महतो, उप विकास आयुक्त अनिमेश रंजन समेत विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में सिर्फ योजनाओं की प्रगति की जानकारी नहीं ली गई, बल्कि आवंटन के मुकाबले कितना खर्च हुआ, कितना राजस्व आया, काम की गुणवत्ता कैसी है और योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं, इससे जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे गए।

बीज की कीमत पर समिति ने मांगी जानकारी

कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान पिछले एक साल में संचालित योजनाओं, आवंटन और खर्च की जानकारी ली गई। समिति ने जिले में किसानों को दिए जा रहे बीज और अन्य कृषि सामग्री के वितरण की स्थिति की रिपोर्ट मांगी।

बैठक में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बीज बेचे जाने की सूचनाओं के संबंध में भी जानकारी मांगी गई। कृषि विभाग और आत्मा की योजनाओं का योजनावार विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

जुडको के काम की जांच की बात

शहरी जलापूर्ति योजना और जुडको के माध्यम से संचालित परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। जल शोधन संयंत्रों से जुड़े काम के दौरान आम लोगों को होने वाली परेशानी और कार्यों के समन्वय पर समिति ने चर्चा की।

समिति ने जुडको की परियोजनाओं की प्रगति और वर्तमान स्थिति की विस्तृत जानकारी विधानसभा को उपलब्ध कराने को कहा। साथ ही संबंधित कार्यों की जांच के लिए आवश्यक स्तर पर जांच दल गठित करने की बात भी कही गई।

पर्यटन से कितना राजस्व, परिसंपत्तियों का हो रहा कितना उपयोग?

झारखंड पर्यटन विकास निगम और संबंधित उपक्रमों की समीक्षा के दौरान पर्यटन भवन समेत उपलब्ध परिसंपत्तियों के रख-रखाव, खर्च और उनसे होने वाली आय का ब्योरा मांगा गया।

समिति ने गोबरसिल्ली, अंजन धाम और टांगीनाथ धाम जैसे पर्यटन स्थलों के विकास पर भी चर्चा की। सवाल यह भी रहा कि उपलब्ध पर्यटन परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कैसे हो और उनसे राजस्व सृजन की संभावनाओं को कैसे बढ़ाया जाए।

वन विभाग से ऑडिट रिपोर्ट तलब

वन विभाग के कैंपा मद से हो रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई। पौधरोपण के अलावा अन्य कार्यों पर कितना आवंटन मिला और कितना खर्च हुआ, इसकी जानकारी ली गई।

समिति ने वन विभाग के कार्यों और खर्च से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

खनन और स्वास्थ्य व्यवस्था की भी समीक्षा

खनन विभाग से जिले में अब तक किए गए खनन संबंधी कार्यों, राजस्व और अन्य गतिविधियों की जानकारी ली गई। वहीं स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में रक्त की उपलब्धता, सिकल सेल एनीमिया की जांच और उपचार, दवाओं की उपलब्धता समेत अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर चर्चा हुई।

ग्रामीण कार्य विभाग की सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों की प्रगति एवं गुणवत्ता, विद्युत विभाग की योजनाओं और गुणवत्ता परीक्षण, भवन निर्माण तथा नगर निकाय के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों से सिर्फ आंकड़े नहीं, जमीनी क्रियान्वयन पर जोर

समिति के सभापति निरल पूर्ति ने अधिकारियों को अपने विभागीय दायित्वों का प्रभावी तरीके से निर्वहन करने और योजनाओं की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य सरकारी उपक्रमों और विभागों के कार्यों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करना, योजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना तथा संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

बैठक में विभिन्न विभागों से कार्य प्रगति रिपोर्ट, आय-व्यय का ब्योरा, जरूरी अभिलेख और ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया। ऐसे में अब समिति की समीक्षा के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि गुमला में सरकारी योजनाओं पर हुए खर्च और उनके जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर क्या है।

राम भक्तों के लिए

25 साल सेवा संकल्प अभियान के तहत गुमला जिले के जारी व डुमरी पहुंची बाइक यात्रा, कार्यकर्ताओं ने किया भव्य स्वागत

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

कमलपुर में भाजपा कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने किया स्वागत, सभा में केंद्र सरकार की योजनाओं की दी जानकारी

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित जारी प्रखंड डुमरी प्रखंड क्षेत्र में पहुंची, भाजपा के 25 साल सेवा संकल्प अभियान के तहत वडनगर से वाराणसी तक निकाली जा रही बाइक यात्रा शनिवार को जारी प्रखंड के कमलपुर गांव पहुंची, जहाँ भाजपा पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने उक्त बाइक यात्रा में शामिल सभी लोगों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया । उक्त यात्रा के पहुंचने ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया और अंगवस्त्र भेंट कर सभी यात्रियों को सम्मानित किया।

कमलपुर में स्वागत कार्यक्रम के बाद एक आमसभा का आयोजन किया गया। इसमें भाजपा नेताओं ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और पार्टी के सेवा संकल्प अभियान की जानकारी ग्रामीणों को दी। वक्ताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने गरीब, किसान, महिला और युवाओं को ध्यान में रखकर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इन योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

जनकल्याणकारी योजनाओं की दी जानकारी

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने शौचालय निर्माण, आयुष्मान भारत, गरीबों को राशन, उजाला योजना, सड़क निर्माण सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाना संगठन के कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है।
वक्ताओं ने सेवा संकल्प अभियान के उद्देश्य पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यात्रा के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में जनसंवाद किया जा रहा है और लोगों से संपर्क कर सेवा एवं जनभागीदारी का संदेश दिया जा रहा है। भाजपा की ओर से जारी यह यात्रा विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों में शामिल होते हुए आगे बढ़ रही है।

डुमरी पहुंची बाइक यात्रा, टांगीनाथ धाम में किया दर्शन-पूजन

कमलपुर में कार्यक्रम के बाद बाइक यात्रा डुमरी के लिए रवाना हुई। डुमरी पहुंचने के बाद यात्रा में शामिल लोगों ने प्रसिद्ध टांगीनाथ धाम में दर्शन-पूजन किया। इसके बाद वहां जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्य अतिथियों ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सेवा संकल्प अभियान तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी।
यात्रा में शामिल अतिथियों और कार्यकर्ताओं के लिए भोजन की भी व्यवस्था की गई। स्थानीय कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों ने यात्रा में शामिल लोगों का स्वागत किया। कई स्थानों पर पुष्पवर्षा कर तथा अंगवस्त्र भेंट कर यात्रियों का सम्मान किया गया।

लातेहार की ओर रवाना हुई यात्रा

डुमरी में कार्यक्रम और दर्शन-पूजन के बाद बाइक यात्रा आगे लातेहार जिले की ओर रवाना हुई। यात्रा के साथ स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता भी सम्मानपूर्वक आगे तक पहुंचे। विभिन्न स्थानों पर पड़ाव और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यात्रा का उद्देश्य सेवा, जनसंपर्क और जनभागीदारी के संदेश को विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाना बताया गया है।

भाजपा की ओर से जारी

जानकारी के अनुसार वडननगर से शुरू हुई यह यात्रा विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए वाराणसी में समाप्त होगी। यात्रा के दौरान अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय कार्यकर्ताओं की ओर से स्वागत कार्यक्रम और जनसंवाद आयोजित किए जा रहे हैं।

कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद

कार्यक्रम में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप शाही एवं मुनेश्वर साहू, प्रदेश महामंत्री मनोज सिंह, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, पूर्व सांसद सुदर्शन भगत, पूर्व विधायक कमलेश उरांव, पूर्व राष्ट्रीय एसटी मोर्चा अध्यक्ष समीर उरांव, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव, भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष अमन यादव, भाजयुमो प्रभारी सुरेश शर्मा, भाजपा जिलाध्यक्ष सागर उरांव,
जिला उपाध्यक्ष श्याम सुंदर साहू, पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, विनय कुमार लाल,जिला महामंत्री संदीप प्रसाद,सुरेश सिंह कार्यक्रम संयोजक देवेंद्र लाल उरांव, जारी मंडल अध्यक्ष संत कुमार भगत सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा दिलीप, कोशलेन्द्र जमवार,हरिहर साहू, गौरी किंडो, सोनामनी देवी, सीता देवी, शशिभूषण सिंह, जयंत प्रसाद, नीतीश बड़ाईक, बुधराम नायक, अरविंद मौर्य, अमित किशोर पांडेय और मनोहर बड़ाईक सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता एवं ग्रामीण उपस्थित थे।

कार्यकर्ताओं ने लिया सेवा का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रम संयोजक देवेंद्र लाल उरांव ने उपस्थित लोगों और यात्रा में शामिल अतिथियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले कार्यकर्ताओं एवं ग्रामीणों का धन्यवाद किया। इसके बाद बाइक यात्रा अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई।

भाजपा की ओर से इस अभियान को संगठनात्मक गतिविधियों के साथ जनसंवाद और सेवा गतिविधियों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। हाल की पार्टी तैयारियों में भी वडननगर से वाराणसी तक की सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सेवा, जनभागीदारी और संगठन की सक्रियता को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

राम भक्तों के लिए

गुमला सदर अस्पताल में मरीजों की कतार, डॉक्टर नदारद; गर्भवती महिलाओं को फर्श पर बैठने की नौबत

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला: जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल गुमला सदर अस्पताल में मरीजों की भीड़ और कथित अव्यवस्था ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं गर्भवती महिलाओं को बैठने तक के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने की बात सामने आई है। कुछ मरीजों का आरोप है कि संबंधित समय पर डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें इलाज के लिए इंतजार करना पड़ा।

सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को हो रही है। अस्पताल में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को फर्श पर बैठने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस वर्ग को अस्पताल में प्राथमिकता और विशेष देखभाल मिलनी चाहिए, उसे ही बुनियादी सुविधा के लिए क्यों परेशान होना पड़ रहा है?

मरीजों की भीड़ के बीच डॉक्टर की उपलब्धता पर सवाल

गुमला सदर अस्पताल में जिले के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल में मरीजों की संख्या अधिक होना स्वाभाविक है। लेकिन भीड़ के बीच चिकित्सकों की उपलब्धता और मरीजों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

मरीजों और उनके परिजनों की ओर से पहले भी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर हंगामा किए जाने की बात कही गई है। अब एक बार फिर डॉक्टरों की उपलब्धता, मरीजों की लंबी कतार और बैठने की व्यवस्था जैसे सवाल सामने हैं।

गर्भवती महिलाओं को प्राथमिकता देने की जरूरत

गर्भवती महिलाओं को लंबे समय तक कतार में खड़ा रहना पड़े या बैठने के लिए जगह नहीं मिले, तो अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनके लिए अलग और पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, नियमित चिकित्सकीय जांच और जरूरत पड़ने पर तत्काल उपचार की सुविधा सुनिश्चित करना अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

सवाल सिर्फ सुविधा का नहीं, समय पर चिकित्सा सेवा उपलब्ध होने का भी है। अगर किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को डॉक्टर के इंतजार में लंबे समय तक रहना पड़े, तो ऐसी स्थिति में अस्पताल की व्यवस्था और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

आखिर डॉक्टर उपलब्ध क्यों नहीं थे?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस समय मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे, उस समय संबंधित डॉक्टर उपलब्ध क्यों नहीं थे? अगर डॉक्टर ड्यूटी पर थे, तो मरीजों को इलाज के लिए इंतजार क्यों करना पड़ा? और अगर किसी वजह से डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे, तो उनकी जगह वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग को इन सवालों का जवाब देना होगा। साथ ही मरीजों की भीड़ को व्यवस्थित करने, गर्भवती महिलाओं के लिए प्राथमिकता व्यवस्था बनाने और डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की जरूरत है।

गुमला सदर अस्पताल जिले के हजारों लोगों के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों को इलाज के साथ सम्मानजनक और बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है। अब देखना होगा कि सामने आई इन शिकायतों पर अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग क्या कदम उठाता है।

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राजी पड़हा दीवान गुमला पहुंचे और अस्वस्थ राजी पडहा के बेल से मिलकर उनके स्वास्थ्य संबंधी चर्चा की

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गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – राजी पड़हा दीवान बसंत कुमार भगत गुमला पहुंचे और उन्होंने राजी पड़हा के बेल खुदी भगत दुखी से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में उनसे चर्चा की और पूरे देश के पड़हा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी खुदी भगत दुखी ने राजी पड़हा के दीवान बसंत भगत को निर्देश दिया की झारखंड के सभी मूली पड़हा का निबंध करने का निर्देश दिया और उन्होंने ने राजी बेल को जानकारी देते हुए बताया कि 11 10.26 को राजी पड़हा का बैठक राजी पड़हा के मुख्यालय दीपू बगीचा जशपुर में बुलाया गया है, उन्होंने यह भी बताया कि उक्त बैठक में देश के असम, बंगाल,झारखंड,उड़ीसा, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के सभी पादा पड़हा एवं मूली पड़हा के पदाधिकारी गण उक्त बैठक में भाग लेंगे,राजी बेल खुद भगत दुखी से मुलाकात करने वालों में राजी दीवान बसंत कुमार भगत, महेंद्र उरांव काहतो मूली पड़हा, राज बेल उरांव प्रर्मश दात्री सदस्य मूली पड़हा, हिंदू भगत सामाजिक कार्यकर्ता एवं पादा पड़हा झारखंड के बेल राजू उरांव इत्यादि उपस्थित थे। |

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