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Sunday, June 7, 2026
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गुमला जिले में विभिन्न आकर प्रकार के प्रजातियां वाले आम की खेती और बीजू आम से ग्रामीण क्षेत्र में विशेष कर आदिवासी महिलाओं की अर्थव्यवस्था एक मजबूत आधार बन चुकी है

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

झारखंड की राजधानी रांची सहित पूरे झारखंड क्षेत्र में गुमला जिले के आमों की खुशबू फैल चुकी है

गुमला : – झारखंड का गुमला जिला खेल नगरी, वन उत्पाद, बांस की कलाकृति – वाद्य यंत्र मंदार, मड़ुवा (रागी ) के व्यंजन, आम की खेती – खुखडी ( मशरूम) उत्पादन चावल – चूड़ा – पते से बना पत्तल दोना – दातुन – सहित अन्य अनेक सामग्रियों के कारण पूरे झारखंड राज्य में अपनी एक अलग पहचान रखने वाला आदिवासी बहुल गुमला जिला में विशेष कर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में निवास करने वाले आदिवासी समाज की महिलाएं अपनी आर्थिक दृष्टि कोण से आत्मनिर्भर की डगर पर निकल पड़ी है, और आत्मनिर्भर बन चुकी है,और अपनी एक अलग पहचान बनाते हुए, उक आदिवासी महिलाएं अपनी आत्मनिर्भर की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण तो है ही , साथ ही साथ कृषि और जैव विविधता के मामले में भी गुमला जिला अपनी अलग पहचान रखता है। इन्हीं प्राकृतिक धरोहरों और पूरा जिला पर्यटन और धार्मिक स्थलों की अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर अपनी अलग पहचान और जगह बनाने वाले गुमला जिला के जंगल, पहाड़, नदी नाला और झरनों के कल कल बहती निर्मल धाराओं की करणप्रिय गुज के बीच – गुमला जिला के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला बीजू आम केवल एक फल नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन, की आजीविका और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा हुआ है, और तो और पूरा गुमला जिला में आमों की विभिन्न आकार प्रकार के आम के प्रजातियों की खेती, स्थानीय जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभ कराईये जा चुके है, इसके अलावे पूरे गुमला जिला में दशकों पूर्व से बीजू आम का व्यापार झारखंड, उड़ीसा, आदि राज्यों में होता रहा है, फिलहाल गुमला जिला हो रहे आम की विशेष खुशबू, विशिष्ट स्वाद और पूरी तरह जैविक उत्पादन इसे अन्य आमों से अलग बनाते हैं। यही कारण है कि झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आसपास के राज्यों के लोग भी इसके स्वाद के दीवाने हैं। प्रकृति का

अनमोल उपहार विशेष कर गुमला जिला के नए उत्पाद खेती वाले आम का स्वाद और अलग पहचान बन चुकी है, वही गुमला जिले के बीजू आम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे उगाने के लिए किसी विशेष देखभाल, रासायनिक खाद या कीटनाशक की आवश्यकता नहीं होती। जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षों से मौजूद पेड़ प्राकृतिक रूप से फल देते हैं। यही वजह है कि बीजू आम को शत-प्रतिशत जैविक फल माना जाता है। हाइब्रिड किस्मों जैसे आम्रपाली, मालदा, लंगड़ा, दशहरी आदि या मल्लिका

की तुलना में इसका आकार छोटा जरूर होता है, लेकिन स्वाद और सुगंध में यह बेहद खास माना जाता है। इसका गूदा (पल्प) रेशेदार और अत्यंत रसदार होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे काटकर खाने के बजाय सीधे चूसकर खाना पसंद करते हैं। स्वाद के साथ रोजगार का भी साधन बीजू आम केवल खाने तक सीमित नहीं है। इसके कच्चे फलों का उपयोग बड़े पैमाने पर अचार, अमचूर और पारंपरिक अमावट (आम पापड़) बनाने में किया जाता है। गर्मियों के मौसम में ग्रामीण परिवार इन उत्पादों को तैयार कर स्थानीय बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पूर्ण विकसित बीजू आम का पेड़ सालाना आठ से दस क्विंटल

तक फल दे सकता है। यही कारण है कि दशकों से अबतक गुमला जिले के विभिन्न क्षेत्रों के हाट-बाजारों में बिकने वाले आमों का बड़ा हिस्सा बीजू आम का हुआ करता था। सामुदायिक संस्कृति की अनूठी मिसाल बीजू आम को लेकर गुमला जिला के ग्रामीण इलाकों में एक विशेष परंपरा भी देखने को मिलती है। यहां कई स्थानों पर इन पेड़ों पर किसी एक व्यक्ति का अधिकार नहीं माना जाता, बल्कि पूरे गांव का सामूहिक अधिकार होता है। फल पकने के मौसम में महिलाएं, बच्चे और ग्रामीण मिलकर आम संग्रह करते हैं और स्थानीय हाटों में बेचते हैं। इससे न केवल आर्थिक लाभहोता है, बल्कि सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक एकता भी मजबूत होती है, इसके अलावे गुमला जिला प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आम की खेती प्रारंभ कराई गई है, जिसकी खुशबू पूरे छोटा नागपुर, झारखंड क्षेत्र में फैल चुकी है,

*समाहरणालय परिसर में कैनोपी आम स्टॉल का उद्घाटन, किसानों एवं महिला समूहों को मिलेगा सीधा बाजार*

गुमला जिला मुख्यालय स्थित नए समाहरणालय परिसर में सांसद सुखदेव भगत द्वारा उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो की उपस्थिति में कैनोपी आम स्टॉल का विधिवत उद्घाटन किया गया। स्टॉल का संचालन जेएसएलपीएस द्वारा सुपोषित गुमला रायडीह फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी द्वारा किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर बाजार उपलब्ध कराना तथा आम की सीधी बिक्री को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर जानकारी दी गई कि मनरेगा अंतर्गत बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत इस वर्ष जिले में लगभग 2,500 मीट्रिक टन आम उत्पादन संभावित है। किसानों को उचित मूल्य दिलाने के लिए जेएसएलपीएस, प्रदान एवं नाबार्ड के सहयोग से विभिन्न फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां एवं सहकारी समितियां बाजार व्यवस्था सुनिश्चित कर रही हैं। जिले की विभिन्न एफपीओ द्वारा अब तक लगभग 3,50 मीट्रिक टन आम का सफल विपणन किया जा चुका है।

उद्घाटन के दौरान सांसद सुखदेव भगत ने महिला स्वयं सहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठनों की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की तथा स्टॉल से आम एवं अन्य उत्पादों की खरीदारी कर महिला समूहों का उत्साहवर्धन किया।

 

मौके पर उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, अपर समाहर्ता राजीव नीरज, सिविल सर्जन डॉ. शंभूनाथ चौधरी, जेएसएलपीएस गुमला के पदाधिकारी, प्रदान संस्था के प्रतिनिधि, किसान उत्पादक संगठनों के सदस्य, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।


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