विकास योजनाओं का स्थलीय निरीक्षण, पेयजल, आवास एवं आजीविका सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर
गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने जारी प्रखंड अंतर्गत मेराल पंचायत के सुदूरवर्ती एवं अंतिम गांव सकतार के विभिन्न टोलों का व्यापक दौरा किया। इस भ्रमण का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र की वास्तविक स्थिति का आकलन करना एवं ग्रामीणों से सीधे संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं को समझना रहा।
भ्रमण के दौरान उपायुक्त सबसे पहले सकतार गांव के कुदर टोला पहुँचे, जहाँ उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनीं। ज्ञात हुआ कि सकतार में कुल 60 परिवार निवास करते हैं, जिनमें 26 परिवार विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह ( पीवीटीजी ) आदिम जनजाति कोरबा समुदाय से संबंधित हैं।
ग्रामीणों ने मुख्य रूप से पेयजल संकट को अपनी प्राथमिक समस्या के रूप में रखा। इस पर उपायुक्त ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को योजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही ग्रामीणों की मांग पर ममता वाहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में भी आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया गया।
महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा मल्टी पर्पस कम्युनिटी ( एमपीसी ) भवन की मांग रखी गई, जिस पर उपायुक्त ने प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र अग्रसारित करने का निर्देश दिया। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए उन्होंने लाह की खेती एवं अन्य वैकल्पिक आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रेरित किया तथा जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जेएसएलपीएस को आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
आवास योजना के संबंध में ग्रामीणों द्वारा भुगतान में विलंब की शिकायत पर उपायुक्त ने शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया तथा जो पात्र लाभुक अब तक योजना से वंचित हैं, उन्हें चिन्हित कर जोड़ने के निर्देश दिए। विशेष रूप से आदिम जनजाति कोरबा समुदाय के सभी पात्र परिवारों को आवास योजना से आच्छादित करने हेतु कड़े निर्देश दिए गए।
पानी की समस्या के स्थायी समाधान हेतु उपायुक्त ने तालाब, कुआं एवं चुआ निर्माण के लिए उपयुक्त स्थलों का चिन्हांकन करने का निर्देश दिया, जिससे सिंचाई, मत्स्य पालन एवं जल संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
सभा को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने स्वास्थ्य, पोषण एवं शिक्षा के प्रति जागरूकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण नियमित रूप से नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य जांच कराएं, आंगनवाड़ी केंद्रों का लाभ लें तथा कुपोषित बच्चों का उपचार सुनिश्चित करें। उन्होंने ममता वाहन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं पोषण पुनर्वास केंद्र (एमटीसी) से संबंधित योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
उपायुक्त ने कहा कि “सकतार जैसे सुदूरवर्ती गांवों तक पहुंचना हमारी प्राथमिकता है, ताकि योजनाओं की वास्तविक स्थिति को नजदीक से समझा जा सके। सरकार की योजनाएं तभी सार्थक हैं जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। आज यहां आकर हमने ग्रामीणों की समस्याओं को प्रत्यक्ष रूप से जाना है और उनका समाधान सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। हमारा प्रयास है कि विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के हर जरूरतमंद तक पहुंचे और गांव आत्मनिर्भर बने।”
भ्रमण के क्रम में उपायुक्त ने पूरे गांव का निरीक्षण करते हुए आवास योजना, जलमीनार, विद्युत व्यवस्था सहित विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने आम बागान का भी निरीक्षण किया, उन्होंने सोलर आधारित सिंचाई प्रणाली को आम बागवानी क्षेत्रों में स्थापित करने हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए, ताकि किसानों को सिंचाई की सुगम सुविधा उपलब्ध हो सके और उत्पादकता में वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
आज उपायुक्त के गुमला जिला अंतर्गत स्थित जारी प्रखंड आगमन के अवसर पर उपायुक्त द्वारा मेराल पंचायत भवन का उद्घाटन किया गया।
इसके उपरांत कोड़ी गांव एवं सीसी करम टोली में जल छाजन (वाटरशेड) कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई। ग्रामीणों द्वारा जंगली हाथियों के कारण खेती में हो रही कठिनाइयों की जानकारी देने पर उपायुक्त ने इसकी वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने हेतु संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया, उन्होंने जल संरक्षण एवं जल उपयोग आधारित खेती को बढ़ावा देने हेतु वाटरशेड समिति गठन के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने जारी प्रखंड स्थित स्वास्थ्य केंद्र का भी निरीक्षण किया, जहां एक जीएनएम के समय से पूर्व अनुपस्थित पाए जाने पर एक दिन का वेतन काटने का निर्देश दिया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा एएनएम – जीएनएम की समय पर उपस्थिति अनिवार्य है।
इसके अलावा प्रखंड कार्यालय जारी का भी निरीक्षण किया गया, जहां सभी कर्मियों को समयपालन, कार्यालय में उपस्थिति एवं साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए। साथ ही जहां सोलर प्रणाली कार्यरत नहीं है, वहां उसकी शीघ्र मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा गया।
मौके पर अपर समाहर्ता गुमला, अनुमंडल पदाधिकारी चैनपुर, भूमि सुधार उप समाहर्ता चैनपुर, प्रखंड विकास पदाधिकारी जारी, अंचल अधिकारी जारी, जिला परिवहन पदाधिकारी गुमला, भूमि संरक्षण पदाधिकारी, पंचायत मुखिया सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
गुमला : – गुमला जिला मुख्यालय में भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने दहाड़ते हुए कहा कि जो सरकार मात्र एयर कंडीशन दफ्तर मे बैठ कर अपने अधिकारियों से सिर्फ समय बर्बाद ना करें, जनता के बीच कार्य योजना को क्रियान्वित करें और सरकार को जो कार्य करने का अवसर मिला है, उसे ना गवाएं बल्कि जनता के लिए कार्य करें और सरकार को अवसर का लाभ उठाने का का नसीहत देते हुए, अर्जुन मुंडा ने कहां की – बिजली पानी दे ना सके वह सरकार निकम्मी है, जो सरकार निकम्मी है वह सरकार बदलनी है का आह्वान करते हुए, सरकार बदलने की चेतावनी दी l
वही भाजपा द्वारा आक्रोश प्रदर्शन के कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सागर उरांव ने किया और जबकि कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री संदीप प्रसाद ने किया ! उक्त आक्रोश प्रदर्शन को भाजपा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत, मनिका के पूर्व विधायक हरे कृष्णा सिंह , शिव शंकर उरांव ,कमलेश उरांव, अमन यादव ,अनूप चंद्र अधिकारी ,किरण माला बाड़ा और शकुंतला उरांव ने भी उक्त आक्रोश प्रदर्शन को सम्बोधित किया !
हमारे देश में एक कहावत है आग लगने पर कुआं खोदना। देश की सरकारें इसी पर अमल करती रहीं हैं। मौजूदा संकट के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी वही कर रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने इस कहावत से मुक्ति पाने का मोदी सरकार को एक स्वर्णिम मौका दिया है. आपदा को अवसर में बदलने का दावा करनेवाली सरकार को इस आपदा का स्थायी निदान निकालना चाहिए ताकि आगे किसी सरकार को आग लगने पर कुआं खोदने की जरूरत न पड़े।
पीएम मोदी ने तेल की खपत कम करने, एक साल तक सोना नहीं खरीदने आदि की अपील की है। इस अपील पर सबसे पहले सरकार को अमल कर उदाहरण पेश करना चाहिए, जो वो करती नहीं दिख रही है।
शास्त्री जी का अनुसरण करेंगे मोदी जी…?
1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद देश में अनाज संकट से निपटने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सप्ताह में एक शाम उपवास करने की अपील देश से की थी। उन्होंने खुद इसका पालन किया। तब पूरा देश अपने प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हो गया। गांव-गांव तक लोग एक शाम उपवास करने लगे।
उस समय अमेरिका ने गेहूं की आपूर्ति रोकने की धमकी दी थी। शास्त्री जी की अपील का असर यह हुआ कि अमेरिका की धमकी बेअसर हो गई। उसी समय उन्होंने जय जवान जय किसान का मशहूर नारा दिया जिसके चलते देश अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया। फिर कभी अमेरिका के आगे अन्न के लिए हाथ पसारने की जरूरत नहीं पड़ी। देश के किसी भी प्रधानमंत्री को अनेरिका के सामने घुटने नहीं टेेेकने पड़े पर ये तो हथियार ही डाल चुके हैं.
अभी क्या हुआ? पीएम मोदी ने जिस दिन पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की, उसके अगले दिन पूरे लाव-लश्कर के साथ सोमनाथ पहुंच गए।
चलिए मान लिया वह अत्यंत जरूरी था। पर इसके बाद पीएम समेत सभी भाजपा मुख्यमंत्री हेमंता के शपथ ग्रहण के लिए गुवाहाटी पहुंच गए। प्रधानमंत्री चाहते तो गुवाहाटी न जाकर देश को एक बड़ा संदेश दे सकते थे। लेकिन वे मौका चूक गए।
आज पेट्रोल-डीजल और बिजली का सर्वाधिक दुरुपयोग सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों-अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
हाइड्रोजन और इथेनॉल से बस चलाने का सपना दिखानेवाले मंत्री कहां हैं?
केंद्र में एक मंत्री हैं जिन्होने हाइड्रोजन और इथेनॉल से बस चलाने का सपना दिखाया था। अब समय है उस पर उन्हें अमल करना चाहिए? परहेज सिर्फ आम आदमी करे, संकट वह भुगते और राज दरबार के सदस्य मौज करें, यह नहीं चलने वाला। अगर वाकई पीएम मोदी और उनकी राज्य सरकारें इस मामले में गंभीर हैं तो पूरे देश में सरकारी और संसदीय व्यवस्था पर होनेवाले खर्च का सोशल ऑडिट कराना चाहिए ताकि पता चले कि किस तरह सरकारी धन को पानी की तरह बहुत जा रहा है।
एक-एक मंत्री किस तरह सरकारी गाड़ियों का काफिला लेकर चलता है? अधिकारी और मंत्री कैसे मीटिंग-मीटिंग खेलते हैं? संसदीय समितियों की उपयोगिता क्या है?
नेताओं की सुरक्षा के नाम पर किस तरह सरकारी खर्च पर उनके पीछे पलटन लगाई जाती है? यहां तक कि सजायाफ्ता नेताओं को भी भारी-भरकम सुरक्षा दी जाती है। इसकी जरूरत क्या है?
सोशल ऑडिट से ये सब बातें स्पष्ट होंगी। फिर सरकार कानून बनकर मंत्रियों के साथ चलने वाली गाड़ियों, सुरक्षा बल की संख्या तय करे। जिन्हें जान का बहुत खतरा हो वे राजनीति छोड़ घर बैठें।
देश के एक बड़े नेता थे जॉर्ज फर्नांडिस वे कभी सुरक्षा लेकर नहीं चले। कामरेड इंद्रजीत गुप्त संयुक्त मोर्चा सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री थे, उनकी सुरक्षा न्यूनतम थी। पीएम मोदी ने अनेक साहसिक फैसले लिए हैं,एक फैसला सरकारी खर्च को आधा करने का लें। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर सब्सिडी दें।
बैलगाड़ी की गति से चल रही मेट्रो रेल परियोजनाओं को गति दें। देश में सार्वजनिक परिवहन मजबूत करें। वे ऐसा कर सकते हैं। क्या उनसे उम्मीद की जाए कि वे राजनेताओं को जननेता बनने के लिए कानून लाएंगे? उनकी राजशाही सुविधाओं में कटौती करेंगे?
हमारे देश में एक कहावत है आग लगने पर कुआं खोदना। देश की सरकारें इसी पर अमल करती रहीं हैं। मौजूदा संकट के दौर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी वही कर रही है। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने इस कहावत से मुक्ति पाने का मोदी सरकार को एक स्वर्णिम मौका दिया है. आपदा को अवसर में बदलने का दावा करनेवाली सरकार को इस आपदा का स्थायी निदान निकालना चाहिए ताकि आगे किसी सरकार को आग लगने पर कुआं खोदने की जरूरत न पड़े।
पीएम मोदी ने तेल की खपत कम करने, एक साल तक सोना नहीं खरीदने आदि की अपील की है। इस अपील पर सबसे पहले सरकार को अमल कर उदाहरण पेश करना चाहिए, जो वो करती नहीं दिख रही है।
1965 में भारत-पाक युद्ध के बाद देश में अनाज संकट से निपटने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने सप्ताह में एक शाम उपवास करने की अपील देश से की थी। उन्होंने खुद इसका पालन किया। तब पूरा देश अपने प्रधानमंत्री के साथ खड़ा हो गया। गांव-गांव तक लोग एक शाम उपवास करने लगे।
उस समय अमेरिका ने गेहूं की आपूर्ति रोकने की धमकी दी थी। शास्त्री जी की अपील का असर यह हुआ कि अमेरिका की धमकी बेअसर हो गई। उसी समय उन्होंने जय जवान जय किसान का मशहूर नारा दिया जिसके चलते देश अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया। फिर कभी अमेरिका के आगे अन्न के लिए हाथ पसारने की जरूरत नहीं पड़ी।
अभी क्या हुआ? पीएम मोदी ने जिस दिन पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील की, उसके अगले दिन पूरे लाव-लश्कर के साथ सोमनाथ पहुंच गए।
चलिए मान लिया वह अत्यंत जरूरी था। पर इसके बाद पीएम समेत सभी भाजपा मुख्यमंत्री हेमंता के शपथ ग्रहण के लिए गुवाहाटी पहुंच गए। प्रधानमंत्री चाहते तो गुवाहाटी न जाकर देश को एक बड़ा संदेश दे सकते थे। लेकिन वे मौका चूक गए।
आज पेट्रोल-डीजल और बिजली का सर्वाधिक दुरुपयोग सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों-अधिकारियों द्वारा किया जाता है।
केंद्र में एक मंत्री हैं जिन्होने हाइड्रोजन और इथेनॉल से बस चलाने का सपना दिखाया था। अब समय है उस पर उन्हें अमल करना चाहिए? परहेज सिर्फ आम आदमी करे, संकट वह भुगते और राज दरबार के सदस्य मौज करें, यह नहीं चलने वाला। अगर वाकई पीएम मोदी और उनकी राज्य सरकारें इस मामले में गंभीर हैं तो पूरे देश में सरकारी और संसदीय व्यवस्था पर होनेवाले खर्च का सोशल ऑडिट कराना चाहिए ताकि पता चले कि किस तरह सरकारी धन को पानी की तरह बहुत जा रहा है।
एक-एक मंत्री किस तरह सरकारी गाड़ियों का काफिला लेकर चलता है? अधिकारी और मंत्री कैसे मीटिंग-मीटिंग खेलते हैं? संसदीय समितियों की उपयोगिता क्या है?
नेताओं की सुरक्षा के नाम पर किस तरह सरकारी खर्च पर उनके पीछे पलटन लगाई जाती है? यहां तक कि सजायाफ्ता नेताओं को भी भारी-भरकम सुरक्षा दी जाती है। इसकी जरूरत क्या है?
सोशल ऑडिट से ये सब बातें स्पष्ट होंगी। फिर सरकार कानून बनकर मंत्रियों के साथ चलने वाली गाड़ियों, सुरक्षा बल की संख्या तय करे। जिन्हें जान का बहुत खतरा हो वे राजनीति छोड़ घर बैठें।
देश के एक बड़े नेता थे जॉर्ज फर्नांडिस वे कभी सुरक्षा लेकर नहीं चले। कामरेड इंद्रजीत गुप्त संयुक्त मोर्चा सरकार में केंद्रीय गृह मंत्री थे, उनकी सुरक्षा न्यूनतम थी। पीएम मोदी ने अनेक साहसिक फैसले लिए हैं,एक फैसला सरकारी खर्च को आधा करने का लें। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों पर सब्सिडी दें। बैलगाड़ी की गति से चल रही मेट्रो रेल परियोजनाओं को गति दें। देश में सार्वजनिक परिवहन मजबूत करें।
वे ऐसा कर सकते हैं। क्या उनसे उम्मीद की जाए कि वे राजनेताओं को जननेता बनने के लिए कानून लाएंगे? उनकी राजशाही सुविधाओं में कटौती करेंगे?
धनबाद : धनबाद के सांसद ढुलू महतो के सांसद प्रतिनिधि (धनबाद विधानसभा क्षेत्र) राज आर्यन शर्मा ने जबसे कार्यभार संभाला है, तबसे जनसमस्याओं के प्रति उनकी गंभीरता और उनकी सहज उपलब्धता के कारण उन्होंने अपने क्षेत्र के लोगों में बेहतरी की उम्मीद जगाई है. सांसद प्रतिनिधि लगातार लोगों की समस्याओं के समाधान के प्रति सजग हैं. इसलिए लोग उनसे मिलते हैं और अपने इलाके की समस्याओं से उन्हें अवगत कराते हैं.
मंगलवार को धनबाद विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ठाकुरकुल्ही,धैया स्थित श्रीश्री सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों एवं स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में पेयजल संकट एवं मंदिर परिसर की मूलभूत समस्याओं को लेकर सांसद प्रतिनिधि (जल संसाधन विभाग) राज आर्यन शर्मा से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा. इसके बाद सांसद प्रतिनिधि समिति के सदस्यों के साथ मंदिर परिसर पहुंच कर निरीक्षण किया.
निरीक्षण के दौरान समिति के पदाधिकारियों एवं स्थानीय निवासियों ने मंदिर परिसर में नगर निगम जलापूर्ति एवं चापाकल की व्यवस्था नहीं होने की समस्या से सांसद प्रतिनिधि को अवगत कराया। समिति के लोगों ने उन्हें बताया कि प्रतिवर्ष यहां भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन होता है, लेकिन पेयजल एवं पूजा-अर्चना के लिए चापाकल नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं एवं स्थानीय लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सांसद प्रतिनिधि ने समिति के सदस्यों के साथ मंदिर परिसर का निरीक्षण किया
मौके पर श्री शर्मा को इस संबंध में समिति द्वारा एक लिखित आवेदन भी सौंपा गया, जिसमें मंदिर परिसर में नगर निगम जलापूर्ति एवं एक चापाकल लगाने की मांग की गई है। सांसद प्रतिनिधि ने स्थानीय लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मंदिर में एक भी चापाकल नहीं होना दुखद है.
उन्होंने संबंधित विभाग से बात कर जल्द आवश्यक कार्रवाई के प्रयास का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं का त्वरित समाधान उनकी प्राथमिकता सूची में शामिल है. पूजा समिति के सदस्य एवं स्थानीय गणमान्य लोगों की उपस्थिति में उन्होंने कहा कि मंदिर जैसे पवित्र स्थान में एक चापाकल का होना नितांत आवश्यक है. लोगों को पूजा-पाठ के लिए पेयजल की समुचित व्यवस्था कराना उनकी जिम्मेवारी है.
गुमला से वर्ष 2018 में लापता हुई थी छह वर्षीय बच्ची रांची झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीया बच्ची के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि , पुलिस अब भी विफल रहती है, तो जांच सीबीआई को हस्तांतरित की जाएगी, इसके अलावे हाई कोर्ट ने अबतक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों और मामले से संबंधित जांचकर्ताओं को तलब करते हुए, खंडपीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि पुलिस इस मामले में अब भी विफल रहती है, तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित कर दी जाएगी। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लगभग सात साल बीत जाने के बावजूद बच्ची का अबतक कोई सुराग नहीं मिला है, जो पुलिस तंत्र की विफलता को दर्शाता है। मामला हाईकोर्ट में आने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और बार-बार समय की मांग की जा रही है। ऐसी स्थिति में अदालत ने माना कि मामले को सीबीआई को सौंपना ही न्यायसंगत होगा। इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि विशेष जांच दल द्वारा विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है और वर्ष 2018 के दौरान संबंधित आयु वर्ग के यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री के लिए रेलवे से विवरण मांगा गया था। हालांकि, इन दलीलों से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय तक बच्ची का पता न चल पाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह पुलिस की जांच क्षमता पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है। ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक और गुमला एसपी भी अदालत के समक्ष पेश हुए थे, लेकिन जांच में कोई सार्थक प्रगति नहीं दिखी। हाईकोर्ट ने पूर्व में भी लापता बच्चों के मामलों में डाटा के प्रभावी इस्तेमाल और मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने पर जोर दिया था, मगर धरातल पर इस मामले में अबतक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। खंडपीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून 2026 की तिथि निर्धारित की है, जिसमें तलब किए गए सभी अधिकारियों को उपस्थित होकर जवाब देना होगा, ज्ञातव्य हैं की नाबालिग 6 वर्षीय बच्ची सन् 2018 से लापता मामले पर हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद स्वंय डीजीपी तदाशा मिश्रा गुमला पहुंची थी और डीजीपी ने पीड़ित परिवार से मिलकर स्वंय घंटो विस्तृत रूप से पूछताछ करते हुए उन्हें आश्वासन और भरोसा दिया कि हम आपके साथ हैं
हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं देखी तो, उक्त मामले को सीबीआई को सौपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके, गौरतलब है कि गुमला जिला के खोरा गांव की एक नाबालिक 6 वर्षीय बच्ची सन् 2018 से लापता मामले पर हाईकोर्ट के द्वारा डीजीपी तदाशा मिश्रा एंव गुमला एसपी हरिश बिन जामां से जांच रिपोर्ट की मांग की, वही पुलिस अनुसंधान में अभी तक बच्ची का पता नही चलने पर कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए,तेजी से परिणाम लाने का निर्देश दिया , और दो सप्ताह के भीतर जांच में कोई ठोस प्रगति नही होने पर उक्त केस की जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही थी, हाईकोर्ट के द्वारा नाराजगी व्यक्त करने के बाद झारखंड राज्य की डीजीपी तदाश मिश्रा स्वंय गुमला पहुची, जहां डीजीपी ने एसपी सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर अब तक किये गये अनुसंधानों की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के परिजनों को भी बुलाकर उनके साथ लगभग 2 घंटे तक पीडीत परिजनों से बंद कमरे में पूरी जानकारी ली, और इसके अलावा डीजीपी ने कहा कि पुलिस के द्वारा लापता बच्ची के उक्त केस में काफी मेहनत की गई है और लंबे समय से अनुसंधान कर्ताओं द्वारा उक्त अनुसंधान के क्रम में अब तक कोई खास सफलता प्राप्त नही होने पर, गुमला पुलिस के द्वारा किए गए उक्त पूरे केस के अनुसंधान की स्थिति की भी विस्तार पूर्वक समीक्षा की गई, और उक्त केस से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के संकलन पर भी जोर दिया गया, डीजीपी ने पुलिस खुफिया तंत्र को और मजबूत किये जाने पर विशेष बल दिया, ताकि हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए समय सीमा के अंदर रहते हुए,सटीक करवाई संभव हो सके, उन्होंने गुमला एसपी हरिश बिन जामां सहित उक्त अभियान से संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के उक्त केस से रहस्यों का पर्दा उठ सके, और सच्चाई सामने आ सके, और सफलता प्राप्त की जा सके , डीजीपी ने उक्त बैठक के दौरान उपस्थित एसपी सहित सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करते हुए, उन्होंने कहा कि उक्त लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होगा,,,,, गुमला की लापता उक्त बच्ची के मामले में हाईकोर्ट सख्त दो हफ्ते में प्रगति नहीं हुई तो सीबीआई जांच संभव, गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई, नाबालिक छह वर्षीय बच्ची के मामले में गत सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि इस दौरान अनुसंधान में कोई ठोस और संतोषजनक प्रगति नहीं हुई, तो मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर विचार किया जाएगा। सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं और मामले की वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दीं। अदालत ने उनसे पूछा कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्ची का पता क्यों नहीं लगा सकी, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है l वही गुमला के एसपी से भी अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल किए, प्रस्तुत रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोष जनक जवाब दाखिल करें, यह मामला गुमला की रहने वाली चंद्र मुनि उराइन द्वारा अपनी बेटी की बरामदगी के लिए दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है।
इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। पूर्व में अदालत को बताया गया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर जाकर बच्ची की तलाश की, साथ ही उसकी तस्वीरें भी विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा करवाई। इसके बावजूद बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की कार्रवाई के दौरान छापेमारी में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था, जो इस जांच की एक सकारात्मक उपलब्धि मानी गई। फिर भी, संबंधित बच्ची की तलाश अब तक जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सकेगी, खंडपीठ ने पुलिस अनुसंधान में अब तक बच्ची का पता नही चलने पर कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए,तेजी से परिणाम लाने का निर्देश दिया गया, हाईकोर्ट के द्वारा नाराजगी व्यक्त करने के बाद झारखंड राज्य की डीजीपी तदाश मिश्रा गुमला पहुची थी और डीजीपी ने गुमला पहुंच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर अभी तक किये गये अनुसंधानों की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के परिजनों को भी बुलाकर लगभग 2 घंटे तक उनसे बंद कमरे में पूरी जानकारी ली थी , और इसके अलावा डीजीपी ने कहा था कि पुलिस के द्वारा लापता बच्ची के उक्त केस में काफी मेहनत की गई है और लंबे समय से अनुसंधान कर्ताओं द्वारा उक्त अनुसंधान के क्रम में अब तक कोई खास सफलता प्राप्त नही होने पर, गुमला पुलिस के द्वारा किए गए उक्त पूरे केस के अनुसंधान की स्थिति की भी विस्तार पूर्वक समीक्षा की गई, और उक्त केस से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के संकलन पर भी जोर दिया गया, डीजीपी ने पुलिस खुफिया तंत्र को और मजबूत किये जाने पर विशेष बल दिया, ताकि हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए समय सीमा के अंदर रहते हुए,सटीक करवाई संभव हो सके, उन्होंने गुमला एसपी हरिश बिन जामां सहित उक्त अभियान से संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के उक्त केस से रहस्यों का पर्दा उठ सके, और सच्चाई सामने आ सके, और सफलता प्राप्त की जा सके , डीजीपी ने उक्त बैठक के दौरान उपस्थित एसपी सहित सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करते हुए, उक्त लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होगा,,,,, गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई, नाबालिक छह वर्षीय बच्ची के मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया था और उक्त सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं थी और मामले की वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दीं थी। जिस पर अदालत ने उनसे पूछा था कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्ची का पता क्यों नहीं लगा सकी, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि उक्त जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है l वही गुमला के एसपी से भी अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल किए, प्रस्तुत रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोष जनक जवाब दाखिल करें, यह मामला गुमला की रहने वाली चंद्र मुनि उराइन द्वारा अपनी बेटी की बरामदगी के लिए दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। पूर्व में अदालत को बताया गया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर जाकर बच्ची की तलाश की, साथ ही उसकी तस्वीरें भी विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा करवाई। इसके बावजूद बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की कार्रवाई के दौरान छापेमारी में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था, जो इस जांच की एक सकारात्मक उपलब्धि मानी गई। फिर भी, संबंधित बच्ची की तलाश अब तक जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके। कोर्ट के आदेश को देखते हुए, पुलिस विभाग द्वारा लापता युवती की तलाश में जनसहयोग की अपील, सूचना देने पर 2 लाख का इनाम घोषित किया गया है साथ ही साथ गुमला पुलिस अधीक्षक, गुमला (गुमला पुलिस कप्तान हरिशा बिन जामां ) के निदेर्शानुसार एक महत्वपूर्ण सूचना सर्वसाधारण के लिए जारी की गई है। गुमला जिले के खोरा जामटोली निवासी पीड़िता संजीता कुमारी, जो अगस्त 2018 से लापता है, की तलाश हेतु पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता के लापता होने के समय उसकी उम्र लगभग 13 वर्ष थी, जो वर्तमान में लगभग 21 वर्ष हो चुकी है। पीड़िता की पहचान के रूप में उसकी लंबाई करीब 4 फीट, चेहरा गोल तथा लापता होने के समय पीले
रंग का सूट पहने होने की जानकारी दी गई है। इस संबंध में थाना कांड सांख्यया -03/2020, दिनांक 06 फरवरी 2020 को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 365, 367, 368, 370 एवं 371 के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। पुलिस द्वारा विभिन्न संभावित स्थानों पर छानबीन एवं तकनीकी माध्यमों से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक पीड़िता का कोई ठोस सुराग प्राप्त नहीं हो सका है। गुमला पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आमजन से सहयोग की अपील की है।
हाईकोर्ट द्वारा गुमला पुलिस को बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया था जिसके आलोक में दिनांक को 20.04.2026 को गुमला पुलिस को माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची में अहतु थाना (गुमला) कांड सं0-03/20, दिनांक-06.02.2020, धारा-363/365/367/368/370/371 भा०द०वि०, 16/15 बंधुआ मजदूर अधि० एवं 75/79 जे0जे0 एक्ट की पीड़िता संजीता कुमारी के लापता होने के मामले की सुनवाई के दौरान कांड में बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची द्वारा दिये गये निर्देश के आलोक में पुलिस अधीक्षक, गुमला के अनुरोध पर अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, झारखण्ड, राँची द्वारा पीड़िता की बरामदगी हेतु पीड़िता का फोटो एवं सभी विस्तृत विवरणी के साथ Hue and Cry Notice सभी राज्यों के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षकों को भेजी गई है।
पीड़िता का हुलिया (लापता के समय):- नाम-संजीता कुमारी, उम्र 13 वर्ष (वर्तमान 21 वर्ष),
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गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो के निर्देश के आलोक में आज समाहरणालय परिसर में अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक की अध्यक्षता में साप्ताहिक जिला स्तरीय जन शिकायत निवारण दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए लगभग 100 से अधिक नागरिकों ने अपनी-अपनी समस्याएं प्रशासन के समक्ष रखीं।
कार्यक्रम में प्राप्त शिकायतों में मुख्य रूप से मानदेय भुगतान, भूमि संबंधित विवाद, सड़क एवं बुनियादी सुविधाओं का अभाव, पेंशन स्वीकृति, विद्युत विभाग से जुड़ी समस्याएं एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास से संबंधित मामले शामिल रहे।
जन शिकायत निवारण दिवस के दौरान कामडारा प्रखंड के एक आवेदक द्वारा विगत वर्षों के लंबित मानदेय भुगतान एवं उपस्थिति पंजी में नाम दर्ज नहीं किए जाने की समस्या रखी गई। इस पर अपर समाहर्ता ने संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी को आवश्यक जांच कर शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
रायडीह प्रखंड अंतर्गत कोब्जा पंचायत के ग्रामीणों द्वारा अमर शहीद वीर सैनिक पूर्णिमा मुण्डा के सम्मान में सड़क निर्माण, प्रतिमा स्थापना एवं क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग रखी गई। इस पर संबंधित विभागों को प्रस्ताव तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
इसी क्रम में भूमि से संबंधित उत्तराधिकार (दाखिल-खारिज) के मामलों, विभिन्न गांवों में कच्ची सड़कों एवं गलियों के पीसीसी निर्माण, विधवा पेंशन स्वीकृति एवं झारखंड आंदोलनकारी पेंशन हस्तांतरण से संबंधित मामलों पर भी सुनवाई की गई। संबंधित अधिकारियों को त्वरित निष्पादन हेतु निर्देशित किया गया।
घाघरा प्रखंड से आए एक आवेदक द्वारा विद्युत विभाग पर गलत तरीके से जुर्माना लगाए जाने एवं कनेक्शन विच्छेद की शिकायत की गई, जिस पर अपर समाहर्ता ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
अपर समाहर्ता ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जन शिकायत निवारण दिवस में प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक मामले की गंभीरता से जांच कर पारदर्शिता के साथ समाधान करें, ताकि आम जनता को त्वरित न्याय मिल सके।
गुमला : – गुमला समाहरणालय स्थित सभागार में आज उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर ) से संबंधित कार्यों की समीक्षा हेतु बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों एवं हिंडाल्को कंपनी द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने सीएसआर के तहत संचालित योजनाओं को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा, पेयजल, खेल एवं सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर क्रियान्वित किया जाए, ताकि अधिकाधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पाट क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने तथा पीएचईडी विभाग को नियमित निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उपायुक्त ने जरूरतमंद क्षेत्रों में स्कूल बस की उपलब्धता सुनिश्चित करने, विद्यालयों में बेंच-डेस्क की व्यवस्था करने तथा आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए।
इसके अतिरिक्त खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने, विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता तथा समाज कल्याण से संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उपायुक्त ने हिंडाल्को कंपनी के प्रतिनिधियों को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित योजनाओं को यथाशीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ।
बैठक में अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार, जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खां, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी, हिंडाल्को कंपनी के प्रतिनिधि सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।
गुमला : – गुमला उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में समाहरणालय सभाकक्ष में आगामी 18 मई को आयोजित होने वाले जिला स्थापना दिवस के सफल आयोजन को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित किए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा एवं तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह, खेल प्रतियोगिताएं (टूर्नामेंट), बुक फेयर एवं “रन फॉर झारखंड” जैसे आयोजनों पर विस्तार से चर्चा की गई। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्यक्रमों को व्यवस्थित एवं आकर्षक ढंग से आयोजित करने का निर्देश दिया।
उपायुक्त ने कहा कि जिला स्थापना दिवस जिले की गौरवशाली पहचान का प्रतीक है, अतः सभी कार्यक्रमों को जनभागीदारी के साथ भव्य एवं गरिमामय रूप से आयोजित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों एवं आमजन की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
बैठक में कार्यक्रम स्थल, व्यवस्थापन, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल, विद्युत, प्रचार-प्रसार सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में अपर समाहर्ता शशिंद्र कुमार बड़ाइक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) राजीव नीरज, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा सह जिला नजारत उप समाहर्ता ललन कुमार रजक, जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार, जिला खेल पदाधिकारी प्रवीण कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खां, पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।