न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला
गुमला से वर्ष 2018 में लापता हुई थी छह वर्षीय बच्ची
रांची झारखंड हाईकोर्ट ने गुमला से वर्ष 2018 में लापता हुई छह वर्षीया बच्ची के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। बच्ची की मां चंद्रमुनि उराइन द्वारा दायर ‘हेबियस कॉर्पस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि , पुलिस अब भी विफल रहती है, तो जांच सीबीआई को हस्तांतरित की जाएगी, इसके अलावे हाई कोर्ट ने अबतक गुमला में पदस्थापित रहे सभी पुलिस अधीक्षकों और मामले से संबंधित जांचकर्ताओं को तलब करते हुए, खंडपीठ ने मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि पुलिस इस मामले में अब भी विफल रहती है, तो जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हस्तांतरित कर दी जाएगी।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि लगभग सात साल बीत जाने के बावजूद बच्ची का अबतक कोई सुराग नहीं मिला है, जो पुलिस तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
मामला हाईकोर्ट में आने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और बार-बार समय की मांग की जा रही है। ऐसी स्थिति में अदालत ने माना कि मामले को सीबीआई को सौंपना ही न्यायसंगत होगा। इससे पूर्व की सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि विशेष जांच दल द्वारा विभिन्न राज्यों में छानबीन कर रहा है और वर्ष 2018 के दौरान संबंधित आयु वर्ग के यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री के लिए रेलवे से विवरण मांगा गया था। हालांकि, इन दलीलों से अदालत संतुष्ट नहीं हुई। कोर्ट
ने कहा कि इतने लंबे समय तक बच्ची का पता न चल पाना न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह पुलिस की जांच क्षमता पर भी गंभीर संदेह पैदा करता है। ज्ञात हो कि पिछली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक और गुमला एसपी भी अदालत के समक्ष पेश हुए थे, लेकिन जांच में कोई सार्थक प्रगति नहीं दिखी। हाईकोर्ट ने पूर्व में भी लापता बच्चों के मामलों में डाटा के प्रभावी इस्तेमाल और मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने पर जोर दिया था, मगर धरातल पर इस मामले में अबतक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है। खंडपीठ ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून 2026 की तिथि निर्धारित की है, जिसमें तलब किए गए सभी अधिकारियों को उपस्थित होकर जवाब देना होगा, ज्ञातव्य हैं की नाबालिग 6 वर्षीय बच्ची सन् 2018 से लापता मामले पर हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद स्वंय डीजीपी तदाशा मिश्रा गुमला पहुंची थी और डीजीपी ने पीड़ित परिवार से मिलकर स्वंय घंटो विस्तृत रूप से पूछताछ करते हुए उन्हें आश्वासन और भरोसा दिया कि हम आपके साथ हैं
हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं देखी तो, उक्त मामले को सीबीआई को सौपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके, गौरतलब है कि गुमला जिला के खोरा गांव की एक नाबालिक 6 वर्षीय बच्ची सन् 2018 से लापता मामले पर हाईकोर्ट के द्वारा डीजीपी तदाशा मिश्रा एंव गुमला एसपी हरिश बिन जामां से जांच रिपोर्ट की मांग की, वही पुलिस अनुसंधान में अभी तक बच्ची का पता नही चलने पर कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए,तेजी से परिणाम लाने का निर्देश दिया , और दो सप्ताह के भीतर जांच में कोई ठोस प्रगति नही होने पर उक्त केस की जांच सीबीआई को सौंपने की बात कही थी, हाईकोर्ट के द्वारा नाराजगी व्यक्त करने के बाद झारखंड राज्य की डीजीपी तदाश मिश्रा स्वंय गुमला पहुची, जहां डीजीपी ने एसपी सहित संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर अब तक किये गये अनुसंधानों की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के परिजनों को भी बुलाकर उनके साथ लगभग 2 घंटे तक पीडीत परिजनों से बंद कमरे में पूरी जानकारी ली, और इसके अलावा डीजीपी ने कहा कि पुलिस के द्वारा लापता बच्ची के उक्त केस में काफी मेहनत की गई है और लंबे समय से अनुसंधान कर्ताओं द्वारा उक्त अनुसंधान के क्रम में अब तक कोई खास सफलता प्राप्त नही होने पर, गुमला पुलिस के द्वारा किए गए उक्त पूरे केस के अनुसंधान की स्थिति की भी विस्तार पूर्वक समीक्षा की गई, और उक्त केस से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के संकलन पर भी जोर दिया गया, डीजीपी ने पुलिस खुफिया तंत्र को और मजबूत किये जाने पर विशेष बल दिया, ताकि हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए समय सीमा के अंदर रहते हुए,सटीक करवाई संभव हो सके, उन्होंने गुमला एसपी हरिश बिन जामां सहित उक्त अभियान से संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के उक्त केस से रहस्यों का पर्दा उठ सके, और सच्चाई सामने आ सके, और सफलता प्राप्त की जा सके , डीजीपी ने उक्त बैठक के दौरान उपस्थित एसपी सहित सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करते हुए, उन्होंने कहा कि उक्त लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होगा,,,,,
गुमला की लापता उक्त बच्ची के मामले में हाईकोर्ट सख्त दो हफ्ते में प्रगति नहीं हुई तो सीबीआई जांच संभव, गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई, नाबालिक छह वर्षीय बच्ची के मामले में गत सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि इस दौरान अनुसंधान में कोई ठोस और संतोषजनक प्रगति नहीं हुई, तो मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने पर विचार किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं और मामले की वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दीं। अदालत ने उनसे पूछा कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्ची का पता क्यों नहीं लगा सकी, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है l वही गुमला के एसपी से भी अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल किए, प्रस्तुत रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोष जनक जवाब दाखिल करें, यह मामला गुमला की रहने वाली चंद्र मुनि उराइन द्वारा अपनी बेटी की बरामदगी के लिए दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है।
इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। पूर्व में अदालत को बताया गया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर जाकर बच्ची की तलाश की, साथ ही उसकी तस्वीरें भी विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा करवाई। इसके बावजूद बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की कार्रवाई के दौरान छापेमारी में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था, जो इस जांच की एक सकारात्मक उपलब्धि मानी गई। फिर भी, संबंधित बच्ची की तलाश अब तक जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सकेगी,
खंडपीठ ने पुलिस अनुसंधान में अब तक बच्ची का पता नही चलने पर कोर्ट ने जांच की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाते हुए,तेजी से परिणाम लाने का निर्देश दिया गया, हाईकोर्ट के द्वारा नाराजगी व्यक्त करने के बाद झारखंड राज्य की डीजीपी तदाश मिश्रा गुमला पहुची थी और डीजीपी ने गुमला पहुंच कर संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ विशेष बैठक कर अभी तक किये गये अनुसंधानों की समीक्षा करते हुए उन्होंने उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के परिजनों को भी बुलाकर लगभग 2 घंटे तक उनसे बंद कमरे में पूरी जानकारी ली थी , और इसके अलावा डीजीपी ने कहा था कि पुलिस के द्वारा लापता बच्ची के उक्त केस में काफी मेहनत की गई है और लंबे समय से अनुसंधान कर्ताओं द्वारा उक्त अनुसंधान के क्रम में अब तक कोई खास सफलता प्राप्त नही होने पर, गुमला पुलिस के द्वारा किए गए उक्त पूरे केस के अनुसंधान की स्थिति की भी विस्तार पूर्वक समीक्षा की गई, और उक्त केस से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के संकलन पर भी जोर दिया गया, डीजीपी ने पुलिस खुफिया तंत्र को और मजबूत किये जाने पर विशेष बल दिया, ताकि हाई कोर्ट के द्वारा दिए गए समय सीमा के अंदर रहते हुए,सटीक करवाई संभव हो सके, उन्होंने गुमला एसपी हरिश बिन जामां सहित उक्त अभियान से संबंधित अनुसंधानकर्ताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिए ताकि उक्त 6 वर्षीय नाबालिक लापता बच्ची के उक्त केस से रहस्यों का पर्दा उठ सके, और सच्चाई सामने आ सके, और सफलता प्राप्त की जा सके , डीजीपी ने उक्त बैठक के दौरान उपस्थित एसपी सहित सभी संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को जिम्मेदारी पूर्वक कार्य करते हुए, उक्त लक्ष्य को प्राप्त करना ही हमारा मुख्य उद्देश्य होगा,,,,, गुमला जिले से वर्ष 2018 में लापता हुई, नाबालिक छह वर्षीय बच्ची के मामले में सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए। अदालत ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का अंतिम अवसर दिया था और उक्त सुनवाई के दौरान झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुईं थी और मामले की वर्तमान जांच स्थिति की जानकारी दीं थी। जिस पर अदालत ने उनसे पूछा था कि सात वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पुलिस बच्ची का पता क्यों नहीं लगा सकी, कोर्ट ने यह भी जानना चाहा था कि उक्त जांच किस दिशा में आगे बढ़ रही है l वही गुमला के एसपी से भी अदालत ने जांच की प्रगति पर सवाल किए, प्रस्तुत रिपोर्ट से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने टिप्पणी की कि मामले में अब तक कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है, इस पर अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह दो सप्ताह के भीतर विस्तृत और संतोष जनक जवाब दाखिल करें, यह मामला गुमला की रहने वाली चंद्र मुनि उराइन द्वारा अपनी बेटी की बरामदगी के लिए दायर हेबियस कॉर्पस याचिका से जुड़ा है। इसकी सुनवाई न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ कर रही है। पूर्व में अदालत को बताया गया था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। एसआईटी ने दिल्ली समेत कई स्थानों पर जाकर बच्ची की तलाश की, साथ ही उसकी तस्वीरें भी विभिन्न प्लेटफॉर्म पर साझा करवाई। इसके बावजूद बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वर्ष 2023 में गठित एसआईटी की कार्रवाई के दौरान छापेमारी में नौ लापता बच्चों को बरामद किया गया था, जो इस जांच की एक सकारात्मक उपलब्धि मानी गई। फिर भी, संबंधित बच्ची की तलाश अब तक जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि अगले दो सप्ताह में जांच में ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो मामले को सीबीआई को सौंपा जा सकता है, जिससे जांच को नई दिशा मिल सके। कोर्ट के आदेश को देखते हुए, पुलिस विभाग द्वारा लापता युवती की तलाश में जनसहयोग की अपील, सूचना देने पर 2 लाख का इनाम घोषित किया गया है साथ ही साथ गुमला पुलिस अधीक्षक, गुमला (गुमला पुलिस कप्तान हरिशा बिन जामां ) के निदेर्शानुसार एक महत्वपूर्ण सूचना सर्वसाधारण के लिए जारी की गई है। गुमला जिले के खोरा जामटोली निवासी पीड़िता संजीता कुमारी, जो अगस्त 2018 से लापता है, की तलाश हेतु पुलिस द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता के लापता होने के समय उसकी उम्र लगभग 13 वर्ष थी, जो वर्तमान में लगभग 21 वर्ष हो चुकी है। पीड़िता की पहचान के रूप में उसकी लंबाई करीब 4 फीट, चेहरा गोल तथा लापता होने के समय पीले
रंग का सूट पहने होने की जानकारी दी गई है। इस संबंध में थाना कांड सांख्यया -03/2020, दिनांक 06 फरवरी 2020 को भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 365, 367, 368, 370 एवं 371 के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। पुलिस द्वारा विभिन्न संभावित स्थानों पर छानबीन एवं तकनीकी माध्यमों से भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक पीड़िता का कोई ठोस सुराग प्राप्त नहीं हो सका है। गुमला पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आमजन से सहयोग की अपील की है।
हाईकोर्ट द्वारा गुमला पुलिस को बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया था जिसके आलोक में दिनांक को 20.04.2026 को गुमला पुलिस को माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची में अहतु थाना (गुमला) कांड सं0-03/20, दिनांक-06.02.2020, धारा-363/365/367/368/370/371 भा०द०वि०, 16/15 बंधुआ मजदूर अधि० एवं 75/79 जे0जे0 एक्ट की पीड़िता संजीता कुमारी के लापता होने के मामले की सुनवाई के दौरान कांड में बेहतर अनुसंधान हेतु दिशा निर्देश दिया गया। माननीय उच्च न्यायालय, झारखण्ड, राँची द्वारा दिये गये निर्देश के आलोक में पुलिस अधीक्षक, गुमला के अनुरोध पर अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध अनुसंधान विभाग, झारखण्ड, राँची द्वारा पीड़िता की बरामदगी हेतु पीड़िता का फोटो एवं सभी विस्तृत विवरणी के साथ Hue and Cry Notice सभी राज्यों के महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षकों को भेजी गई है।
पीड़िता का हुलिया (लापता के समय):- नाम-संजीता कुमारी, उम्र 13 वर्ष (वर्तमान 21 वर्ष),
पिता-स्व० चन्दरू उराँव, सा०-खोरा, जामटोली, थाना+जिला-गुमला, चेहरा-गोल, बाल-काला, लम्बाई-4 फीट।

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