न्यूज – कहकशां फारूकी
गोमिया। पिट्स मॉडर्न स्कूल, गोमिया में सोमवार को “विविधता में एकता” की भावना को साकार करते हुए अंबेडकर जयंती, बैसाखी और बिहू पर्व का संयुक्त रूप से भव्य आयोजन किया गया। 13 अप्रैल 2026 को आयोजित इस विशेष प्रार्थना सभा में सांस्कृतिक समृद्धि, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री मंत्र के उच्चारण के साथ हुई, जिससे पूरे विद्यालय परिसर में सकारात्मक और शांतिपूर्ण वातावरण स्थापित हुआ। एलकेजी से लेकर कक्षा 12वीं तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए कार्यक्रम को सफल बनाया।
अंबेडकर जयंती के अवसर पर कक्षा 12वीं (अल्फा) की छात्रा कनिष्का ने प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समानता और संविधान निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनके आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 6 से 8 की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत बिहू नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। इस प्रस्तुति के माध्यम से असम की पारंपरिक संस्कृति और उत्सव की झलक देखने को मिली। इसके पश्चात छात्रा अनुष्का कपूर ने बिहू और बैसाखी जैसे फसल उत्सवों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दर्शकों को इनके सांस्कृतिक पक्ष से अवगत कराया।
कार्यक्रम में बैसाखी नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने माहौल को उत्साह और उल्लास से भर दिया। छात्रों की ऊर्जा और रंगारंग प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य बृजमोहन लाल दास ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों में सांस्कृतिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर जैसे महान व्यक्तित्वों को स्मरण करना हमें समानता और न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष अरिंदम दासगुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं को अपनी विविध परंपराओं को उत्साहपूर्वक अपनाते देखना अत्यंत सुखद है। ऐसे कार्यक्रम छात्रों को जिम्मेदार एवं संस्कारवान नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
आईईपीएल (ओरिका), गोमिया के महाप्रबंधक अभिषेक विश्वास ने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्रीयता और सामाजिक समरसता की भावना को भी सुदृढ़ करने में सफल रहा।

















