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Thursday, July 2, 2026
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गिरिडीह के बड़ा चौक पर सालों बाद उमड़ा रामभक्तों का सैलाब,ड्रोन से जिला मुख्यालय के हर सेंसेटिव व अतिसंवेदनशील इलाकों पर प्रशासन ने रखी कड़ी नजर

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गिरिडीह: (कमलनयन) सामाजिक समरसता के अग्रदूत भारतीयों के आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का जन्म उसत्व रामनवमी गुरुवार को जिले भर में श्रद्धा, भक्ति, उंमग और उत्साह के साथ भक्तिमय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर सुबह से ही जन-जन के कष्टों को हरने वाले भगवान श्री राम एवं संकट मोचन श्री हनुमान के मंदिरों में भक्तों द्वारा पूजा-अर्चना करने, भोग चढ़ाने,  नारियल फोड़ने का दौर शुरू हुआ, वह देर शाम तक चलता ऱहा। भक्तों ने अपने घरों में भी महावीरी पताकाएं लगाकर बजरंगबली की वंदना आरती कर की।

भजनों से चौक-चौराहे गूंजते रहे

असुरी शक्तियों का नाशकर संतजनों को भयमुक्त करनेवाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जन्मोत्सव का महापर्व रामनवमी पर्व के मौके पर गुरुवार को पूरा जिला जय श्री राम के जयकारे से गूंजता रहा। जिला मुख्यालय समेत जिले के अन्य क्षेत्रों में रामनवमी के भजनों से चौक-चौराहे गूंजते रहे। जय श्री राम के जयघोष के बीच तड़के सुबह एंव शाम में रामनवमी अखाड़ा जूलूस निकाला गया। जुलूस में बड़े-बड़े महावीरी ध्वज थामे खिलाड़ियों की भीड़ जय श्री राम के जयकारे के साथ चौक-चौराहों पर शौर्य का प्रदर्शन करते हुए सभी अखाड़ों का समागम स्थल मुख्य बड़ा चौक पहुंचे। कोरोना काल के बाद इस वर्ष रामभक्तों का यह जोश और उत्साह सालों बाद सड़कों पर देखने को मिला। पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र के प्रदर्शन के साथ लाठियों का अद्भुत खेल दिखाते युवा खिलाड़ियों के उम्दा खेलों को हिंदू संगठन के कार्यकर्ता उत्साह बढ़ा रहे थे।

एसपी ने अहले सुबह में पेट्रोलिंग का जायजा लेते दिखे

हर कोई भगवान राम की भक्ति में डूबा दिखा। सालों बाद शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में भक्तों की भारी भीड़ रामनवमी अखाड़ा में शामिल हुई। इस दौरान पूरे जिले में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये थे। एसपी अमित रेनू अहले सुबह में भी पेट्रोलिंग का जायजा लेते दिखे। उनके साथ सदर एसडीएम विशालदीप खलको, एसडीपीओ अनिल सिंह, डीएसपी संजय राणा, नगर थाना प्रभारी राम नारायण चौधरी, मुफस्सिल थाना प्रभारी कमलेश पासवान भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों के साथ शहर के चप्पे-चप्पे पर शरारती तत्वों पर नजर रखने के लिए तैनात थे। जबकि ग्रामीण इलाकों में एसडीपीओ अनिल सिंह और मुफस्सिल थाना प्रभारी कमलेश पासवान अर्धसैनिक बलों के साथ नजर बनाए हुए थे। ड्रोन से भी जिला मुख्यालय के हर सेंसेटिव और अतिसंवेदनशील इलाकों पर नजर रखी गई।

50 से अधिक अखाड़ा समितियों ने जुुुुलूस निकाला

रामनवमी को लेकर अलग-अलग इलाके से करीब 50 से अधिक अखाड़ा समितियों के नेतृत्व में खिलाड़ियों की हजारों भीड़ लाठी और अस्त्र-शस्त्र लिए अपने-अपने इलाके के चौक-चौराहे में जुटे थे। इस दौरान हजारों रामभक्तों की भीड़ से पूरा बड़ा चौक समेत पूरा शहर पटा पड़ा था। पांव रखने तक की जगह नहीं थी। महिलाएं और युवतियां के साथ बच्चे भी खिलाड़ियों के जोखिम भरे खेलों एवं झांकियों को के देखने जुटी थी। आसपास के दर्जनों गांवों से लोग रामनवमी जुलूस देखने आये थे। फिलहाल अभी तक कहीं से किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. पुलिस-प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद दिखी है.

राम भक्तों के लिए

DVC ने जीरोकट बिजली आपूर्ति के लिए गिरिडीह जिले का किया चयन,MLA के सुझाव पर अर्नेस्ट एंड यंग एजेंसी को मई तक काम पूरा करने का निर्देश दिया गया

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गिरिडीह: डीवीसी के कमांड जिलों में जीरोकट बिजली आपूर्ति के साथ रेवेन्यू की वसूली भी अब डीवीसी करेगा। कमांड जिलों में गिरिडीह को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन होने के बाद गिरिडीह एरिया बोर्ड की बैठक बुधवार को डांड़ीडीह पावर स्टेशन स्थित जीएम कार्यालय में हुई। इस दौरान बैठक में सदर विधायक सुदिव्य कुमार सोनू, गिरिडीह एरिया बोर्ड के जीएम प्रतोष कुमार, अधीक्षक अभियंता विनय, डीवीसी के पुटकी चीफ इंजीनियर एसके श्रीवास्तव, डीवीसी के भोरंडीहा कार्यपालक अभियंता समेत कई अधिकारी शामिल हुए। बैठक में कंसल्टेंसी एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग का चयन किया गया।

रेवेन्यू कलेक्शन का जिम्मा भी डीवीसी के हाथों में होगा

बताया गया कि झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के सहयोग और आपसी तालमेल से ही डीवीसी द्वारा बिजली आपूर्ति किया जाना है। रेवेन्यू कलेक्शन का जिम्मा भी डीवीसी के हाथों में होगा. इस बाबत विधायक सोनू ने कहा कि इसके लिए सबसे पहले आधारभूत संरचना को और मजबूत करने की जरूरत है। साथ ही कमर्शियल और टेक्निकल डाटा तैयार ‍करना जरूरी है। इसके बगैर जीरो पावरकट बिजली आपूर्ति संभव नहीं। विधायक के सुझाव पर अर्नेस्ट एंड यंग एजेंसी को मई तक काम पूरा करने का निर्देश दिया गया। बिजली बोर्ड के अनुसार पूरे जिले में साढ़े तीन लाख बिजली उपभोक्ता हैं. हर माह इन उपभोक्ताओं से बिजली बोर्ड को महज 18 करोड़ का ही राजस्व मिल पाता है। इसे पहले राजस्व बढ़ाने को लेकर कई प्रयास किए गए। लेकिन बिजली चोरी अधिक होने के कारण पिछले कई सालों में राजस्व बढ़ाना संभव नहीं हो पाया।

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राम भक्तों के लिए

गिरिडीह में रामनवमी के मद्देनजर जुलूस की सभी तैयारियां पूरी, जिले भर में सुरक्षा के व्यापक प्रबंध, ड्रोन से रखी जाएगी नजर

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गिरिडीह: (कमलनयन) भारतीय लोक जीवन में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम रचे-बसे हैं. गहरायी से श्रीराम के आदर्श जीवन को पढ़ा जाय तो श्रीराम देश काल से परे हैं. यही कारण है कि श्रीराम का जन्मोत्सव “रामनवमी” देश भर में अलग-अलग तरीके से मनाने की परम्परा रही है. झारखंड में रामनवमी का पर्व आजादी के पहले से ही शौर्य और पराक्रम महोसत्व के रूप में मनाया जाता रहा है. कोरोना महामारी के बाद इस वर्ष रामनवमी का उत्साह गांव से लेकर शहर तक है. गिरिडीह जिले में रामनवमी में महाबीरी झंडों के साथ अखाड़ा जुलूस में झाकियां निकालने की भी परम्परा है. रामनवमी में निकलने वाली झाकियों की अपनी विशेषता होती है. रामनवमी समितियां का उद्देश्य झाकियों के जरिये युवापीढ़ी को धार्मिक-सामाजिक एवं ऐतिहासिक कथाओं से रू-ब-रू कराने के साथ सनातन संस्कृति को दैनिक जीवन में अपनाये जाने के लिए प्रेरित करने का मकसद रहता है.

अप्रिय घटना से निबटने के लिए पुलिस मुस्तैद

जिला मुख्यालय में निकलनेवाली झाकियों को देखने के लिए आस-पास के सौ से अधिक गांवों के लोग आते हैं. इस वर्ष गुरुवार तीस मार्च को भगवान राम का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है. गिरिडीह जिला एंव पुलिस-प्रशासन ने जिले भर में भाईचारे के साथ शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने को लेकर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किये हैं। अखाड़ा कमिटियों के लोग में भी भव्य और शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने के पक्षधर रहे हैं। गुरुवार को गिरिडीह में तड़के सुबह और शाम में परपरागत रामनवमी जुलूस निकाला जायेगा। जिला मुख्यालय में सभी अखाड़ों का समागम परम्परागत बड़ा चौक (अग्रसेन चौक) में होगा। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने एंव किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निबटने के लिए बड़ा चौक समेत अन्य स्थानों पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किये गये हैं. बताया गया कि अखाड़ा जुलूस की मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जायेगी।  इसके अलावा सीसीटीवी और ड्रोन केमरों से भी नजर रखी जायेगी। गिरिडीह जिला मुख्यालय सहित अन्य थाना क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी लगातार विभिन्न इलाकों में फ्लैग मार्च कर जिलेवासियों को शांति-सद्भाव के साथ भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील की है. अधिकारियों ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आर्दशों के तहत उनका जन्म उत्सव मनायें।

विधायक सुदिव्य सोनू व सरफराज ने कहा-भाईचारे के साथ मनाएं रामनवमी

गांडेय के विधायक डा. सरफराज अहमद, विधायक सुदिव्य कुमार सोनू ने अखाड़ा कमिटियों से अनुशासन के साथ जुलूस व झाकियां निकालने एंव भाईचारे के साथ पुरूषोत्तम श्रीराम के जंयती उत्सव मनाने का अनुरोध किया है. जनप्रतिनिघियों ने कहा कि शांति और सद्धभाव के साथ त्योहार मनाना हमारी प्राचीन संस्कृति का हिस्सा है और इसे बनाये रखना हम सबों की जिम्मेवारी है. कहा कि जिला प्रशासन ने रामनवमी की पूरी तैयारी कर ली है. हमें प्रशासन को सहयोग करना चाहिए ताकि किसी भी संप्रदाय को परेशानी नहीं हो.  

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राम भक्तों के लिए

Easy way to Fat Loss

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Fat loss is a common goal for many people looking to improve their health and physique. While it can be a challenging journey, there are many effective strategies that can help individuals achieve their fat loss goals. In this article, we will explore the science behind fat loss and provide tips for safe and effective fat loss.

Understanding Fat Loss

Before diving into the strategies for fat loss, it is important to understand what fat loss actually is. Fat loss refers to the process of reducing body fat, which can be achieved by creating a calorie deficit. This means that the number of calories consumed is less than the number of calories burned.

There are many factors that can influence fat loss, including genetics, diet, exercise, and lifestyle habits. For example, some individuals may have a genetic predisposition to store more fat than others, while others may have a faster metabolism that burns calories more efficiently.

However, while genetics play a role in fat loss, they are not the only determining factor. By implementing effective diet and exercise strategies, individuals can successfully reduce their body fat percentage and improve their overall health.

Diet Strategies for Fat Loss

One of the most effective ways to create a calorie deficit and promote fat loss is by implementing a healthy diet. Here are some key diet strategies that can help individuals achieve their fat loss goals:

  1. Reduce Caloric Intake

To lose fat, individuals need to consume fewer calories than they burn. This can be achieved by reducing overall caloric intake through portion control, tracking food intake, and choosing lower calorie foods.

  1. Focus on Protein

Protein is an important nutrient for fat loss, as it can help preserve lean muscle mass while promoting fat loss. Aim to consume protein with every meal, and choose lean protein sources like chicken, fish, and tofu.

  1. Incorporate Fiber

Fiber is another important nutrient for fat loss, as it can help individuals feel fuller for longer periods of time. Incorporate high fiber foods like fruits, vegetables, and whole grains into your diet.

  1. Limit Processed Foods

Processed foods tend to be high in calories, sugar, and unhealthy fats, making them a poor choice for fat loss. Focus on consuming whole, nutrient-dense foods instead.

Exercise Strategies for Fat Loss

In addition to implementing a healthy diet, exercise is another key strategy for promoting fat loss. Here are some effective exercise strategies for fat loss:

  1. High-Intensity Interval Training (HIIT)

HIIT involves short bursts of high-intensity exercise followed by periods of rest or low-intensity exercise. This type of exercise has been shown to be effective for fat loss, as it can increase calorie burn and improve cardiovascular health.

  1. Strength Training

Strength training is another effective exercise strategy for fat loss, as it can help preserve lean muscle mass while promoting fat loss. Aim to incorporate strength training exercises like squats, lunges, and push-ups into your exercise routine.

  1. Cardiovascular Exercise

Cardiovascular exercise, such as running or cycling, can also be effective for fat loss. Aim to incorporate at least 30 minutes of cardiovascular exercise into your routine most days of the week.

Lifestyle Strategies for Fat Loss

In addition to diet and exercise, there are also lifestyle strategies that can promote fat loss. Here are some key lifestyle strategies for promoting fat loss:

  1. Get Enough Sleep

Getting enough sleep is important for fat loss, as it can help regulate hormones that control hunger and satiety. Aim to get at least 7-8 hours of sleep per night.

  1. Manage Stress

Stress can lead to overeating and poor food choices, making it important to manage stress for fat loss. Try techniques like meditation or deep breathing exercises to manage stress.

  1. Stay Hydrated

Staying hydrated is important for fat loss,

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राम भक्तों के लिए

2025 तक भारत में जलसंकट गहराने के आसार,आसान नहीं वैश्विक जल संकट से बाहर निकलना, सरकारों के लिए भू-जल दोहन पर रोक लगाना बनी है चुनौती

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विशद कुमार

संयुक्त राष्ट्र की संस्‍था यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक भारत में जलसंकट बहुत बढ़ जाएगा। आशंका जताई गई है कि यहां पर ग्लेशियर पिघलने के कारण सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी प्रमुख हिमालयी नदियों का प्रवाह कम हो जाएगा। यूनेस्को के डायरेक्‍टर आंड्रे एजोले ने कहा है कि वैश्विक जल संकट से बाहर निकलने से पहले अंतर्राष्ट्रीय स्‍तर पर तत्काल एक व्यवस्था करने की जरूरत है।

कई दशकों से वर्षा में गिरावट का दौर जारी है

भारत में पेयजल की बात करें तो, पिछले कई दशकों से यहां वर्षा में गिरावट दर्ज की जा रही है। जिस वजह से भूमिगत जल का स्तर भी घटता जा रहा है। पानी की खपत की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय सर्वे रिपोर्टें बताती हैं कि चीन और अमेरिका में जितनी खपत पानी की है, उससे काफी ज्यादा मात्रा में पानी भारत अकेले खर्च करता है। मानसून में अच्छी बारिश नहीं होने के कारण भी भारत के अधिकांश राज्य प्रतिवर्ष सूखे की चपेट में होते हैं। लिहाजा मजबूरन खेती-किसानी के लिए उन्हें भूमिगत जल का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे भू-जल दोहन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में भूमिगत जलस्तर का गिरना कोई आश्यर्च की बात नहीं है।

चेन्नई में पूरी तरह खत्म से हो चुका है भूमिगत जल

इससे पहले चेन्नई में भूमिगत जल पूरी तरह खत्म हो चुका है। महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भी भूमिगत जल की खपत ज्यादा है। इस प्रकार देश के 13 राज्यों में जल का भारी संकट पैदा होने की आशंका है। वर्ष 2021 में साइंस एडवांस में प्रकाशित स्टडी में दावा किया गया है कि 2025 तक उत्तर-पश्चिम और दक्षिण भारत में पानी की भारी किल्लत हो सकती है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार 50 फीसद से भी कम भारतीयों को स्वच्छ पेय जल मिल पाता है। क्योंकि यहां के भूमिगत जल में फ्लोराइड की मात्रा काफी ज्यादा है। सरकार के एक सर्वे में देश के 25 राज्यों के 209 प्रखंडों के भूमिगत जल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई गई है। यह हृदय और फेफड़े के रोग को बढ़ाता है। द लसेंट पत्रिका के अनुसार अकेले 2019 में भारत में दूषित पानी पीने से पांच लाख से अधिक लोगों की जान गई थी। जबकि लाखों लोग बीमार पड़े थे।

रांची में कई जगह ड्राइ जोन घोषित है

झारखंड में पेयजल बात करें तो गर्मी की दस्तक के पहले ही राजधानी और रांची के कई हिस्सों में पीने के पानी की किल्लत होने लगी है। राजधानी के कई मोहल्लों में पानी का स्रोत नीचे चला गया है, वहीं कई जगहों पर बोरिंग फेल हो चुकी है। कई  क्षेत्रों को ड्राइ जोन घोषित किया जा चुका है। शहर के अन्य इलाकों में भी अंधाधुंध बोरिंग हो रहे हैं जिसके कारण वाटर लेबल नीचे खिसकता जा रहा है। नगर निगम की बोर्ड बैठक में जानकारी दी गई थी कि हर साल राजधानी का जलस्तर 20 फीट नीचे खिसकता जा रहा है। शहर में 2.25 लाख से अधिक भवन हैं, जबकि मात्र 20 हजार में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है। आलम यह है कि राजधानी के लोग मार्च महीने के शुरुआती दिनों से ही परेशान हैं। राजधानी रांची के जगन्नाथपुर, धुर्वा, हिनू, हरमू के विद्या नगर, चापुटोली सहित कई इलाकों के लोगों को पीने के पानी का संकट होना शुरू हो गया है। हटिया डैम के बेहद करीब का धुर्वा इलाका सहित जगन्नाथपुर के स्लम एरिया में ज्यादातर चापाकल सूख गए हैं। वहीं डैम से होने वाले पानी की सप्लाई भी अनियमित और बहुत कम समय के लिए होता है जो अपर्याप्त है। इतना ही नहीं विधानसभा के बेहद करीब के इलाके में भी आम जनता पीने के पानी को लेकर परेशान है। वहीं जल संसाधन मंत्री मिथिलेश ठाकुर इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि यहां पेय जल की किल्लत है। शहर के धुर्वा निवासी विराज कहते हैं कि उनके एरिया में 3000 की आबादी है, लेकिन पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। एक नल है, जो रुक्का डैम से जुड़ा है, वहां भी पानी हर दिन नहीं आता है। साधु बागान, निचला तालाब, जगरनाथपुर बड़का घर सहित कई इलाके ऐसे हैं, जहां रोज पीने का पानी नहीं आता है, तीन दिन या दो दिन का गैप कर पानी आता है। मायादेवी, सविता सहित स्थानीय लोगों की शिकायत है कि उन्हें पीने तक का पानी सरकार मुहैया नहीं करा पा रही है।

पेयजल मंत्री का दावा: सरकार ने पेयजल की फुलप्रूफ व्यवस्था की है

इस मामले में पेयजल मंत्री मिथिलेश ठाकुर कहते हैं कि पीने के पानी की फुलप्रूफ व्यवस्था सरकार ने की है। जहां से पेयजल संकट की शिकायत मिलती है, वहां तुरंत समस्या का समाधान कर दिया जाता है। जल संसाधन मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि राज्य का अपना ग्राउंड वाटर बोर्ड बनाए जाने की तैयारी है। ऐसा होने के बाद कड़े कदम उठाए जाएंगे। बोर्ड गठन के लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है, बोर्ड के एक्टिव होने से लाभ मिलेगा। वैसे अभी 33 राज्यों में से 14 में ही राज्य का भू-जल बोर्ड काम कर रहा है। मिथिलेश ठाकुर के मुताबिक भू-जल का दोहन ना हो, इस पर सरकार का ध्यान है। कई योजनाओं के माध्यम से जल संरक्षण की पहल शुरू की है। ‘नीलांबर-पीतांबर जल समृद्धि योजना’ लागू की गयी है। नगर विकास की ओर से भी अलग-अलग योजनाओं के जरिये प्रयास हो रहा है।

2020 की तुलना में भू-जल की निकासी 2.22 प्रतिशत बढ़ी

पिछले दिनों जारी सेंट्रल ग्राउंड बोर्ड द्वारा झारखंड में भू-जल के गिरते स्तर को लेकर की गई रिपोर्ट के अनुसार 2020 की तुलना में भू-जल की निकासी 2.22 प्रतिशत बढ़ी है। वर्ष 2020 में जहां भू-जल की निकासी 29.13 प्रतिशत थी, वह 2022 में बढ़ कर 31.35 प्रतिशत हो गयी। राज्य में सबसे अधिक धनबाद और कोडरमा में भू-जल का दोहन हो रहा है। धनबाद में 75 प्रतिशत तो कोडरमा में 66.10 प्रतिशत है। पश्चिमी सिंहभूम में यह आंकड़ा मात्र 9.93 प्रतिशत का ही है। फिलहाल झारखंड में 1.78 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीक्यूएम) भू-जल का दोहन हो रहा है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति तो स्वच्छ पेयजल को लेकर और भी भयावह है। मैदानी इलाकों और पहाड़ों पर यह संकट गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है।

बोकारो के कई गांव नदी-नालों पर निर्भर

बोकारो जिला अंतर्गत‌ गोमिया प्रखंड के तिलैया पंचायत का हलवैय गांव दनिया रेलवे स्टेशन से छः किलोमीटर दूर जिनगा पहाड़ की तलहटी मे बसा है। मूलभूत समस्याओं से घिरा हलवैय गांव के लोगों की स्थिति यह है कि इन्हें पीने के पानी के लिए नदी नालों पर निर्भर रहना पड़ता है। कुआं तो है लेकिन उसमें पानी नहीं रहने व चापाकल से दूषित पानी निकलने के कारण मजबूरी में लोग जोरिया (नाला) और चूंआ (खेतों में गड्ढा करके पानी निकालना) का पानी पीने को मजबूर है। संथाली आदिवासी बहुल गांव हलवैया काफी पिछड़ा गांव है। गांव की लगभग 250 की आबादी है। गांव में महज दो चापानल है, चापानल के पानी में आयरन की मात्रा अधिक रहने के कारण यहां के लोग चापाकल के पानी का उपयोग नहीं कर पाते हैं।

बोकारो में मनरेगा से बने कुएं में भी नही है पानी

बोकारो जिले में मनरेगा विभाग से कुंओं का निर्माण तो किया गया है, लेकिन कुंए की गहराई इतनी कम है कि उसमें पानी निकलता ही नहीं। ऐसे में बाध्य होकर ग्रामीणों को गांव से डेढ किलोमीटर की दूरी पर भितिया नाला से पानी लाना पड़ता है. ग्रामीण बताते हैं कि पानी  की समस्या का निराकरण का एकमात्र उपाय है डीप बोरिंग करके पानी गांव में सप्लाई किया जाए। विगत छह माह पूर्व क्षेत्र के विधायक डॉ. लम्बोदर महतो को एक पत्र देकर गांव में पानी की समस्याओं से निजात दिलाने के अलावा पथ जो काफी वर्षों से जर्जर है, का भी निर्माण कराने की मांग की गई है। इस सबंध में पूछे जाने पर विधायक महतो ने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग बोकारो को पत्र अग्रसारित कर समस्याओं के समाधान को कहा गया है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि मांग पत्र दिए छह माह से ऊपर हो गए हैं, इसके बावजूद अभी तक कुछ नहीं हुआ है। ऐसे में पानी के लिये पेयजल स्वच्छता विभाग से डीप बोरिंग कर ही पानी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है.

कई दशकों से पेयजल का संकट झेल रहे हैं पहाड़िया समुदाय

साहिबगंज जिला के बोरियो प्रखंड के दुर्गाटोला पंचायत के चंपा पहाड़ के पहाड़िया समुदाय इन दिनों बूंद बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इसको लेकर वो साहिबगंज डीसी रामनिवास यादव से गुहार भी लगा चुके हैं। लेकिन इस पहाड़ पर रहने वाले पहाड़िया समुदाय के लोगों को कोई राहत नहीं मिली है। दूसरी तरफ बोरियो प्रखंड के ही तेलो मांझी टोला के ग्रामीण भी बूंद-बूंद पानी के तरस रहे हैं। पानी की समस्या इतनी गंभीर हैं कि यहां के लोग अगले चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने की बात कह रहे हैं। गांव में 200 से अधिक लोग रहते हैं। जिनका जीवन पानी के बिना बड़ी मुश्किल में है। ग्रामीण बताते हैं कि जल संकट इतना गंभीर हैं कि किसी तरह खाना बनाना तो हो जाता हैं लेकिन नहाना-धोना बहुत मुश्किल है। क्योंकि यहां के आसपास न तो कोई नदी है न ही कोई जोरिया, जिसमें चूंआ बनाकर पानी लाया जा सके। इस संबंध में पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि उस पहाड़ पर पानी का लेयर नहीं है। इस कारण पहाड़ के नीचे बोरिंग कर बहुत जल्द इस गांव को पाइप लाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। इसी गांव में दो वर्ष पूर्व बोरिंग से पानी की व्यवस्था की गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वह बेकार हो गया।

दुनिया की लगभग 26% आबादी को साफ पानी मयस्सर नहीं

पिछले 22 मार्च 2023 को दुनिया भर में ‘विश्‍व जल दिवस’ मनाया गया। इस बीच यूएन (यूनाइटेड नेशन) की रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया की लगभग 1.7 से 2.40 अरब की शहरी आबादी पानी के संकट से जूझेगी। संयुक्त राष्ट्र की तरफ से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 में धरती पर 9.33 करोड़ आबादी पानी के संकट से जूझ रही थी। उसके बाद इस जल संकट कई देशों में तेजी से बढ़ा। रिपोर्ट में एक और बड़ा दावा तो यह भी है कि एशिया में करीब 80% आबादी जल संकट से जूझ रही है। यह संकट पूर्वोत्तर चीन, भारत और पाकिस्तान पर सबसे ज्यादा है। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि 2050 तक दुनिया में पानी का संकट भारत में सबसे ज्यादा होगा। इसके अलावा पड़ोसी देश पाकिस्‍तान और चीन में भी पानी के लिए हाहाकार मचेगा। इन देशों में कई नदियों में बहाव की स्थिति भी कमजोर पड़ जाएगी। दुनिया की लगभग 26% आबादी को साफ पानी नहीं मिल रहा। पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के बहुत-से देशों में पेयजल का संकट है। लोगों को पीने के लिए स्‍वच्‍छ पानी नहीं मिल पाता।

फैक्टशीट : भारत में जितना भी बारिश का पानी जमीन में अंदर जाता है, उसका 63 फीसद पीने और सिंचाई जैसे कार्यों के लिए निकाल लिया जाता है। वर्ष 2021 में आई कैग की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में 100 फीसद भूमिगत जल का दोहन हो रहा है। इसलिए इन राज्यों में भूमिगत जल का पूरी तरह खत्म हो जाने का खतरा मंडरा रहा है।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं.)

राम भक्तों के लिए

निजी स्कूलों में कुल 9,974 सीटों पर बीपीएल के सिर्फ 4,386 बच्चों के ही नामांकन, 2,588 बच्चे रह गए वंचित,ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करे सरकार: वीएस नायक

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रांची: शिक्षा अधिकार कानून से 2,588 बीपीएल वर्ग के दलित आदिवासी-मूलवासी एवं अन्य आर्थिक रूप से कमजोर स्वर्ण समाज के बच्चों को नामांकन से वंचित करनेवाले सभी निजी स्कूलों की मान्यता झारखंड सरकार को रद्द कर देनी चाहिए. मंगलवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष आदिवासी मूलवासी जन अधिकार मंच के केंद्रीय उपाध्यक्ष भाई विजय शंकर नायक ने कही। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2022- 2023 में राज्य के मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में कुल 9,974 सीटों पर बीपीएल वर्ग के दलित आदिवासी-मूलवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर स्वर्ण समाज के बच्चों का नामांकन होना सुनिश्चित था, मगर केवल 4,386 बच्चों का ही नामांकन निजी विद्यालयों में किया गया और 2,588 बच्चों का नामांकन नहीं किया गया, यह जांच का विषय है कि आखिर किस परिस्थिति में इन वर्गों के बच्चों को नामांकन से वंचित किया गया।

नामांकन में फिसड्डी साबित हुई रांची

श्री नायक ने कहा कि सबसे खराब स्थिति राजधानी रांची का रहा, जहां 1,213 बच्चों को नामांकन करना था, जिसमें मात्र 636 बच्चों का ही नामांकन किया गया और 577 बच्चों का नामांकन नहीं किया गया. दूसरे स्थान पर पूर्वी सिंहभूम रहा जहां, 1,540 बच्चों में से मात्र 983 बच्चों का ही नामांकन किया गया और 558 बच्चों को वंचित रखा गया. तीसरे स्थान पर बोकारो जिला रहा, जहां 528 बच्चों में से मात्र 308 बच्चों का नामांकन किया गया और 220 बच्चों का नामांकन नहीं किया गया. चौथे स्थान पर देवघर रहा, जहां 361 बच्चों का नामांकन करना था जिसमें मात्र 152 बच्चों का नामांकन किया गया और 209 बच्चों का नामांकन नहीं किया गया. पांचवे स्थान में सरायकेला रहा, जहां 354 बच्चों का नामांकन करना था, पर मात्र 156 बच्चों का ही नामांकन किया गया और 198 बच्चों का नामांकन नहीं किया गया. अन्य जिलों की स्थिति भी कमोबेश यही है।

सीएम लंबित प्रस्ताव पर गौर फरमाएं

श्री नायक ने कहा कि पूर्व में मुख्यमंत्री से मांग की गई थी कि बच्चों के फीस निर्धारण के लिए जो प्रस्ताव बनाकर दिया गया था, उसे लागू किया जाए. आखिर क्यों आज भी यह प्रस्ताव लंबित है। सीएम को अविलंब उस प्रस्ताव पर अपनी स्वीकृति प्रदान करें ताकि बच्चों को स्कूल में फीस वृद्धि के साथ नामांकन हो सके।

राम भक्तों के लिए

तेजस्वी यादव पिता बने, लालू यादव के घर हुआ पोती का जन्म, डिप्टी सीएम ने खुद शेयर की तस्वीर

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#बिहार के डिप्टी सीएम #तेजस्वी_यादव#पिता बन गए हैं। उन्होंने खुद बेटी के जन्म की खबर ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें वह बच्ची को गोद में लिए दिख रहे हैं।बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव पिता बन गए हैं। उन्होंने खुद बेटी के जन्म की खबर ट्विटर पर साझा की है। उन्होंने एक तस्वीर भी शेयर की है, जिसमें वह बच्ची को गोद में लिए दिख रहे हैं। तेजस्वी यादव ने खुद ही ट्वीट कर बेटी के जन्म की जानकारी दी है। तेजस्वी यादव ने बेटी को गोद में लिए हुए अपनी फोटो शेयर की है और कैप्शन में लिखा है, ‘ईश्वर ने आनंदित होकर पुत्री रत्न के रूप में उपहार भेजा है।तेजस्वी यादव के पिता बनने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ‘पवित्र नवरात्र के दिनों में माता रानी के इस आशीर्वाद के लिए आपको एवं आपके पूरे परिवार को बहुत-बहुत बधाई तेजस्वी जी। बिटिया रानी को ख़ूब सारा दुलार एवं आशीर्वाद, ईश्वर आपके परिवार को सदा ख़ुश रखें।’ बता दें कि हाल ही में सीबीआई की टीम दिल्ली में तेजस्वी यादव के घर पहुंच गई थी। इस पर तेजस्वी की बहन रोहिणी आचार्य ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि मेरी गर्भवती भाभी को भी परेशान किया जा रहा है तेजस्वी की बेटी की पहली तस्वीर आई सामने, बहन रोहिणी ने दी बधाई।आज भी रोहिणी आचार्य ने बुआ बनने पर खुशी जाहिर की है। रोहिणी आचार्य ने भाई और भतीजी की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘आज किलकारी गूंजी है मेरे घर-आंगन में खुशियों का ऐसा तोहफा दिया है ईश्वर ने ।’ रोहिणी आचार्य ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ‘बनकर नन्हीं सी परी मेरे घर मेहमान आई है, खुशियों की संग सौगात लाई है दादा-दादी बनने की खुशी में मम्मी-पापा के चेहरे पे जो मुस्कान लाई है।’

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भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने सुसाइड किया

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भोजपुरी एक्ट्रेस आकांक्षा दुबे ने रविवार को वाराणसी के सारनाथ के एक होटल में सुसाइड कर लिया। उनका शव होटल के कमरा नंबर 105 में पंखे से लटका मिला। पुलिस ने शव कब्जे में ले लिया है। आकांक्षा के सुसाइड की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है। आकांक्षा भदोही जिले के चौरी थाना क्षेत्र के परसीपुर गांव की रहने वाली थीं। वह शुक्रवार रात शूटिंग के बाद होटल में गई थीं और सुबह उनका शव फंदे से लटकता मिला।

पुलिस की मौजूदगी में मैनेजर ने खोला दरवाजा
रविवार सुबह मेकअप मैन ने आकांक्षा दुबे को फोन किया। फोन न उठाने पर मेकअप मैन होटल पहुंचा। वहां आकांक्षा के कमरे का दरवाजा बंद था। होटल के कर्मियों ने मेकअप मैन को बताया कि आकांक्षा ने सुबह से नाश्ते के लिए ऑर्डर नहीं दिया है। इसके बाद होटल के कर्मचारियों ने कमरे का दरवाजा खटखटाया। जब अंदर से कोई रिस्पॉन्स नहीं आया, तो उन्होंने पुलिस को बुलाया।

मैनेजर ने पुलिस की मौजूदगी में मास्टर चाबी से दरवाजा खोला, तो आकांक्षा का शव पंखे से लटका मिला। ACP सारनाथ ने उनके मोबाइल समेत अन्य सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। उनके मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल भी निकाली जा रही है।

सुसाइड के कुछ घंटे बाद रिलीज हुआ उनका भोजपुरी सॉन्ग
सुसाइड के कुछ घंटे बाद ही आकांक्षा का आखिरी भोजपुरी गाना रिलीज हुआ। गाने का टाइटल है ‘ये आरा कभी हारा नहीं।’ गाने के वीडियो को भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और आकांक्षा पर फिल्माया गया है। गाने के बोल जावेद अख्तर और इमामुद्दीन के हैं और म्यूजिक प्रियांशु सिंह ने दिया है।

सुसाइड से पहले इंस्टाग्राम पर किया था लाइव
यहीं नहीं, सुसाइड से पहले इंस्टाग्राम पर लाइव आकांक्षा फूट-फूटकर रोते हुए नजर आई थीं। फिलहाल वीडियो डिलीट हो चुका है। इसके अलावा देर रात उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने भोजपुरी सॉन्ग ‘हिलोर मारे’ पर शीशे के सामने बेली डांस किया था। अभिनेत्री ने कुछ दिन पहले वैलेंटाइन डे पर अपना रिलेशनशिप ऑफिशियल किया था। उन्होंने अपने को-स्टार समर सिंह के साथ फोटो पोस्ट करते हुए हैप्पी वैलेंटाइन्स डे लिखा था।
सोशल मीडिया पोस्ट से धोखा मिलने के संकेत?
सुसाइड के बाद आकांक्षा का एक पुराना पोस्ट वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने फोटो पोस्ट करते हुए लिखा था, ‘मोहब्बत तो तुझसे थी, लेकिन तेरी मोहब्बत ने जोर से खींच के तमाचा मार ही दिया मुझे।’ उनकी फोटोज पर यूजर्स ने कमेंट्स भी किया था कि आखिर किसने उन्हें धोखा दे दिया?

22 मार्च को होटल पहुंची थीं आकांक्षा दुबे..
शनिवार देर रात आकांक्षा दुबे ने अपने इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट किया था।
SP ज्ञानप्रकाश राय ने बताया, ”होटल सोमेंद्र के रूम नंबर 105 में रविवार सुबह एक महिला के आत्महत्या करने की सूचना मिली थी। जानकारी पर पता चला कि वह भोजपुरी अभिनेत्री आकांक्षा दुबे थीं। वे शूटिंग के सिलसिले में बनारस आई थीं और 22 मार्च की रात होटल में रुकी थीं। उनके परिजनों को इसकी सूचना दे दी गई है। उनका परिवार काफी समय से महाराष्ट्र में रहता है। मौके पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। मामले की जांच की जा रही है।

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Madhuban – Tourist Spot in Jharkhand

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Madhuban is a small town in the Giridih district of Jharkhand, India. It is located on the foothills of the Parasnath Hills, which are considered to be one of the most sacred places for Jains. Madhuban is known for its natural beauty, cultural heritage, and religious significance. Let’s take a closer look at what makes Madhuban so special.

Geography and Climate

Madhuban is situated at an altitude of 600 meters above sea level, and it is surrounded by hills and dense forests. The climate of Madhuban is tropical, with hot summers and cool winters. The monsoon season in Madhuban starts in June and lasts till September, and the town receives an average annual rainfall of around 1200 mm.

Tourist Attractions

Madhuban is known for its natural beauty, and there are several tourist attractions that visitors can explore. Some of the most popular tourist attractions in Madhuban are:

  1. Parasnath Hills: Parasnath Hills are a series of hills located near Madhuban, and they are considered to be one of the most sacred places for Jains. The hills are home to several Jain temples, and thousands of devotees visit the place every year.
  2. Madhuban Dam: Madhuban Dam is a popular picnic spot, and it is located at a distance of around 4 km from the town. The dam is built on the Mayurakshi River, and it offers a beautiful view of the surrounding hills.
  3. Nandan Pahar: Nandan Pahar is a famous hill station located near Madhuban, and it is known for its scenic beauty. The hill station is home to several temples, gardens, and parks, and it is a popular destination among tourists.
  4. Deoghar: Deoghar is a famous pilgrimage site located near Madhuban, and it is known for its Baidyanath Temple, which is one of the twelve Jyotirlingas of Lord Shiva. The town is also home to several other temples and shrines.
  5. Tapovan: Tapovan is a natural hot spring located near Madhuban, and it is believed to have medicinal properties. The hot spring is surrounded by lush greenery, and it is a popular destination among tourists.

Religious Significance

Madhuban is considered to be a sacred place for Jains, and it is home to several Jain temples. The most famous temple in Madhuban is the Shri Digambar Jain Siddha Kshetra, which is dedicated to Lord Parasnath. The temple is believed to be more than 2,000 years old, and it is one of the most important pilgrimage sites for Jains. The town is also home to several other temples and shrines, which are visited by thousands of devotees every year.

Culture and Festivals

Madhuban has a rich cultural heritage, and the town is known for its vibrant festivals and fairs. The most popular festival in Madhuban is the Jain festival of Paryushan, which is celebrated with great enthusiasm. During the festival, Jains observe a period of fasting and introspection, and they also perform several rituals and ceremonies.

Apart from Paryushan, Madhuban also celebrates several other festivals such as Holi, Diwali, and Durga Puja. The town also hosts several fairs and melas, where visitors can buy traditional handicrafts and taste local delicacies.

Conclusion

Madhuban is a small town with a big heart, and it offers visitors a unique blend of natural beauty, cultural heritage, and religious significance. Whether you are a nature lover, a religious pilgrim, or a cultural

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Leading the Way to Legal Excellence – Dr. Jaydip Sanyal, Principal University Law College VBU.

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Law is a complex and dynamic field that requires not only extensive knowledge but also exceptional leadership to navigate through the intricacies of the legal system. At the forefront of legal education are law college principals who play a pivotal role in shaping the next generation of legal professionals. These individuals are not only responsible for managing the day-to-day operations of the college but also for creating an environment that fosters academic excellence and personal growth. In this article, we will explore the qualities and contributions of a law college principal who is committed to nurturing legal talent and promoting social justice.

First and foremost, Dr. Jaydip Sanyal is a visionary leader who is passionate about legal education. he has a deep understanding of the challenges facing the legal profession and is committed to prepare their students to meet those challenges. He inspires and motivates the faculty and students to reach their full potential and provide the necessary resources and support to help them succeed. He also adept at identifying emerging trends in the legal industry and adapting the curriculum and programs of the college accordingly.

One of the key responsibilities of Dr. Sanyal is to attract and retain top-notch faculty members who are experts in their fields. He understands the importance of a diverse faculty that represents different backgrounds, experiences, and perspectives and actively recruit faculty members who can bring a wealth of knowledge and expertise to the college, and create an environment that encourages collaboration and innovation. He also provide ongoing professional development opportunities for his faculty members to help them stay current with the latest legal developments and teaching methodologies.

Another important role of Dr. Sanyal is to create a student-centered learning environment that promotes academic excellence and personal growth. As a great principal he is committed to ensuring that his students receive a rigorous and comprehensive legal education that prepares them for the demands of the legal profession. He provide his students with the necessary tools and resources to succeed, including access to state-of-the-art technology, legal clinics, and internships. He also encourage his students to engage in extracurricular activities such as moot court competitions, law review, and community service to develop their skills and interests.

In addition to academic excellence, Dr. Sanyal is also committed to promoting social justice and diversity. He recognize the importance of creating a legal profession that reflects the diversity of society and are committed to fostering an inclusive environment that welcomes students from all backgrounds. He also encourage his students to use their legal skills to promote social justice and make a positive impact on their communities.

Dr. Sanyal, who embodies these qualities is has been the principal of University Law College, VBU Hazaribagh for the past 13 years and has made significant contributions to the legal education community. Under his leadership, Law College has become one of the top law colleges in the Jharkhand, India , known for its rigorous academic programs and commitment to social justice.

Dr. Sanyal is a visionary leader who is passionate about legal education. He understands the challenges facing the legal profession and is committed to preparing his students to meet those challenges. He has introduced new programs and initiatives that have enhanced the academic

Dr. Sanyal with Foreign delegates

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