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Wednesday, July 1, 2026
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The High court sought a response from the Jharkhand government for rape victims in Ranchi.

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On Tuesday, September 13, the Jharkhand High Court needs a response from the statement while hearing a petition filed by a 19-year-old rape victim seeking an abortion. The girl is 28 weeks pregnant and visually challenged by society.

The court had on September 9 asked the management of Ranchi Medical College, RIMS, to constitute a medical board for the case and submit a report.

In such a situation, the court has asked the state government to consult RIMS and the advocates of the victim and tell them what can be done in this matter. The next hearing will be held on Wednesday.

On behalf of the state government, the court was told that arrangements would be made for the girl to stay at the women’s shelter in Ramgarh.

The victim, who comes from the tribal community, is a resident of Nagdi in Ranchi. Her father is a rickshaw driver. Her mother has passed away. When her father had gone to work, a person raped her after finding her alone in the house. Because of this she is 28 months pregnant. The girl was raped in 2018 as well and the case related to this is going on in the lower court.

The second incident of rape happened this year. Recently, her medical examination was done at the Community Health Centre after which she was informed that she was 28 weeks pregnant.

She comes from a below the poverty line family. There is neither electricity nor gas in her house. She doesn’t even have money for her treatment. In such a situation, she has filed a petition in the court demanding safe abortion and proper living arrangements.

राम भक्तों के लिए

Fake Loan Apps Scam, Beware, don’t fall into Trap

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Hazaribagh, Jharkhand – On 19 August 2022, Fraudsters committed a cyber crime through a loan application named “Credit Box” victim is Tanviru Ranja.

Victim said, while using mobile “he got a link where he clicked on it, after that asking for some permission which he allowed his phone number then was immediately credited by one rupee into his bank account . He got scarred and uninstalled the app . After 10 min, Rs. 7000 got credited in his bank. after passing Four to five days he was still thinking where has the money come from? Victim’s had many source of income to he ignored thinking it must have been sent by some of his vendor.

After seven days he received a call to repay Rs. 12,812 for Rs 7,000 loan which was credited to his bank account without his information . Victim said, “sir I have not taken or applied for any loan.” Fraudster said, “download the credit box app and see you have taken loan.” He downloaded and saw the app statement where Rs. 7000 loan were reflecting He thought may be by mistake it happened. By mistake he clicked on the extension option of 5,802. He paid to make free himself. Again after 2 days, a call has come to pay 12,812. Your extension date has been finished. He paid 12, 812 to free himself from this stuff then victim checked every detail then uninstall the app.

Victim’s mother was sick and sister was admitted in hospital for 2 days that’s why he did not noticed, money has been credited of 10,000. He knew this thing when he has received a phone call for to pay 18,302 then he checked his bank amount where the amount was 23,000 not 13,000. He denied to repay loan then fraudster shared victims 906 contact number list and started blackmailing they if he is not paying the loan amount things will be worse and they shared shared a message to  his five contacts that “ he has committed a big crime and runaway. He raped a little 16 year old girl. She is in bad condition in hospital and her family is very poor. If you know this disgusting person. Please let me know. Police is also looking for him. Then shared the screenshot to him which got him scared.

One of his neighbor called him to tell this all matter then he said his phone has been hacked and data has been stolen. Everyone knows him that’s why understand this concern. He went to police station and told this matter to police. Police said, “this is the matter of cyber cell go there.”  Meanwhile message has come to pay now otherwise photo and video will be viral.  He did first and two payment from the phonepe but third time from paytm because paytm has been blocked from phonepe. Victim said to the fraudster, “I did all payment now, no loan is going on.” Fraudster said, “yes, done.” But today again, 10,000 has been credited in his bank but he has not getting any phone call from the fraudster side because fraudster will call every time after seven days.

From 21 august, many such cases have been coming in Jharkhand. Cyber fraudster are committing crime in the name of Loan App. They target people by giving them loan and in refund they are charging high interest and if the person deny to repay loan they start blackmailing them by sharing victims personal photos,video and contacts, so one need to be very careful and be away from these Fraud Loan Apps .

राम भक्तों के लिए

दिल्ली का नाम बदल कर इंद्रप्रस्थ कर दिया जाए, ताकि सनातनियों का मान बढ़े और हुजूर का क्रेज भी…!

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आचार्य अमरेंद्र मिश्र

प्रधान सेवक के नए भारत में नाम बदलने को भी विकास से जोड़ दिया जाएगा, इसकी कल्पना 8 साल पूर्व किसी ने नहीं की थी. नए भारत में नाम बदलने का नया युग. बदलिए किसने रोका है. करोड़ों लोगों को ये सब सुहा भी रहा है. विरोधियों को कर्तव्य पथ पर चलना ही नहीं आता है. चलना आता तो सत्ता सुख भोग रहे होते. कर्तव्यपथारोहण की झांकी का दिव्यदर्शन जनगण के कल्याणार्थ है. आत्मनिर्भर भारत में कर्तव्यपरायणता जरूरी है. अलबत्ता नाम बदलने को लेकर अपने भी तंज कस देते हैं. राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कह दिया कि राजपथ का नाम बदलने की जरूरत नहीं थी। यह नाम कोई अंग्रेजों का दिया हुआ नहीं था। प्रधानमंत्री हर तीसरे दिन उद्घाटन करते हैं, आज कुछ नहीं रहा होगा तो राजपथ का नाम बदलकर उसका उद्घाटन कर दिया। वैसे बता दें कि राजपथ एक प्रकार से किंग्स-वे का हिंदी अनुवाद था. लोकतंत्र में कोई किंग नहीं होता. भारत में लोकतंत्र कायम है और संविधान ने इसे बेशुमार मजबूती दी है.

अब तो नाम ही काम का पर्याय बन गया है

काम के नाम पर नाम बदलने से बेचारी जनता बहुत खुश होती है. क्योंकि इसमें उन्हें अपने विकास आईना दिखाई देता है. वैसे नाम ही काम का पर्याय बन जाय तब इसे “राम से बड़ा राम का नाम” पंक्ति चरितार्थ हो जाती है। देश में आये दिन जिल्द बदलने की परिपाटी खूब चल पड़ी है। इतिहास की कोई किताब उठा लें, आवरण पृष्ठ हटा दें। मूल लेखक का नाम गौण कर दें। नई चमकदार जिल्द लगा दें, और भूलें नहीं, स्वर्णाक्षरों में लिख दें अपना नाम। बस हो गया काम। कर्तव्य पथ पर आपके शुभ कदम जैसे पड़ें, सेल्फी या कुछ अन्य झांकियों का बेशुमार प्रचार करवा लें। बुद्धिजीवी आलोचना करते हुए कह देंगे नव संकल्प की इस वेला में यह विकल्पहीन प्रकल्प है. आलोचकों के कहने से हमारे प्रधान सेवक की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता. अलबत्ता आपकी सेहत भले खराब हो जाएगी.

राजपथ नाम सामंतवादी या राजतंत्रवादी प्रतीत होता था

अब समझिए, राजपथ नाम ही था ऐसा जो सामंतवादी या राजतंत्रवादी प्रतीत होता था. यह राजा का पथ था, जनता का नहीं। अब कर्तव्य पथ नाम बदलते ही बोध होने लगा कि  कर्तव्य सम्पादन होगा. इस पर चलनेवाले लोग नागरिक कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित होंगे. राजा बनने या अधिकार पाने का लालच गलती से जेहन में नहीं आएगा। वैसे कई लोगों ने कहा कि कर्तव्य पथ के बदले  लोकपथ कर दिया जाता. हां, इस नाम में दम है, क्योंकि लोकपथ पर चलकर आगे ही लोकतंत्र के मंदिर की चौखट मिलेगी, जहां पहली बार प्रवेश कर हमारे  रहनुमा ने मत्था टेकते हुए कहा था हम प्रधानमंत्री नहीं देश के प्रधान सेवक हैं. भाई मेरा तो मानना है कि राजा या शासक, चाहे जो भी हो, उसका प्रथम लक्ष्य होता है अपनी कुर्सी को बचा कर रखना। पुराने राजपथ पर चलकर पहुंचनेवाले सभी शासक प्रमुख अपनी गद्दी बचाने के लिए जिन नीतियों का प्रयोग करता है साम, दाम, दण्ड, भेद की श्रेणी में रखा जाता है.

करतब दिखाने में जो दक्ष हो, वह राजा अधिक कर्तव्यवान होता है

आज के राजनीतिक परिपेक्ष्य में साम अर्थात गीत-संगीत जैसे मधुर, सुस्वादु घोषणाओं द्वारा जनाकर्षण में अपार वृध्दि कर लेना ही शासकीय कला की निपुणता मानी जाएगी. इस मामले में हमारे प्रधान सेवक का जवाब नहीं. दाम का अर्थ प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मत के बदले में दाम या दान की श्रेणी में आएगा. दण्ड तो आप खूब समझ रहे होंगे. विपक्ष को बुझा रहा है. जांच एजेंसियों मिलता है टारगेटेड टास्क. कानून का धौंस द्वारा प्रताड़ित करके मानसिक दण्ड और कई प्रकार के कर भार द्वारा दंड दिया जाना भी शासक वर्ग का धर्म है. और अंत में बचा बेचारा भेद. इसमें पंथ, समाज, भाषा, जाति-धर्म और दलों में भेद-विभेद उत्पन्न करके खुद जमे रहने की कुनीति। देश में अभी ये तेजी से फल-फूल रहा है. इसमें जो पारंगत होगा वही राज करेगा. अवाम कर्तव्य पथ पर चलते रहें. वैसे मेरा मानना है कि शब्दार्थ-भावार्थ और गूढार्थ का व्यापक क्षेत्र होता है। नाम परिवर्तन किए बिना ही राजनीति का अर्थ आज के परिपेक्ष्य में वह नीति जो राज में ही रहे। राज़ यानी रहस्य में, कुछ भी पारदर्शी नहीं हो, उसे ही राजनीति कहा जाये तो अनुचित नहीं होगा. और कर्तव्य, नाना प्रकार के करतब दिखाने में जो दक्ष हो वह राजा अधिक कर्तव्यवान होता है.

इंद्रप्रस्थ नगर को इंद्र के स्वर्ग की तरह बसाया गया था

मेरा तो मानना है कि नई दिल्ली…पुरानी दिल्ली…तेरी दिल्ली…मेरी दिल्ली…यानी दिल्ली से दिल्लगी बहुत हो गई. दिल्ली के दिल में अगर हिंदुस्तान धड़कता है तो, इसका नामकरण भी अब जरूरी प्रतीत होता है. सदियों से दिल्ली को विदेशी लुटेरों और मुगलों ने लूटा और नाम भी घटिया रख दिया. क्यों न नामकरण के युग में दिल्ली का वही हजारों वर्षों का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ कर दिया जाए. आखिर भगवान के नाम इंद्र के नाम पर इंद्रप्रस्थ बना है. इंद्रप्रस्थ नगर को इंद्र के स्वर्ग की तरह बसाया गया था. भगवान श्रीकृष्ण ने विश्वकर्मा से इंद्र के स्वर्ग के समान एक महान शहर का निर्माण करने के लिए कहा था. विश्वकर्मा ने इस नगर में दिव्य और सुंदर उद्यान और मार्गों का निर्माण किया था. प्रधान सेवक के राज में दिल्ली भी तो इंद्रप्रस्थ जैसा लगने लगा है.

जानिए दिल्ली का नामकरण कैसे हुआ?

मौर्यकाल में दिल्ली या इंद्रप्रस्थ का कोई विशेष महत्व इसलिए नहीं रहा, क्योंकि राजनीतिक शक्ति का केंद्र मगध हो गया था. कुछ इतिहासकार भी कहते हैं कि तोमरवंश के एक राजा धव ने इलाके का नाम ढीली रख दिया था, क्योंकि किले के अंदर लोहे का खंभा ढीला था और उसे बदला गया था। यह ढीली शब्द बाद में दिल्ली हो गया। प्रधान सेवक के राज में दिल्ली अब ढीली नहीं रही. वैसे मौर्य और गुप्त साम्राज्य के बाद दिलई का जिक्र 737 ईस्वी में भी मिलता है. कहते हैं उस दौर में राजा अनंगपाल ने पुरानी दिल्ली (इंद्रप्रस्थ) से दस मील दक्षिण में अनंगपुर बसाया. यहां ढिल्लिका गांव था. दरअसल, दिल्ली को सैकड़ों वर्षों तक बेरहमी लूटा गया. लाखों लोगों को मारा गया. नादिर शाह ने तो पूरी दिल्ली ही उजाड़ दी थी. नादिर के अंतिम शासनकाल के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी की दिल्ली में इंट्री हुई. इसके बाद 1803 में दिल्ली में अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गई. अंग्रेजों ने भी वही किया जो तैमूर लंग और नादिर शाह ने किया. इसलिए अब इस नापाक नाम को भी बदल कर इंद्रप्रस्थ कर दिया जाना चाहिए. इससे सनातनियों का मान बढ़ जाएगा और आपका क्रेज भी…!!


राम भक्तों के लिए

कोरोना कालखंड बनाम सेंट्रल विस्टा: चरमराया रह गया देश के स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा, पर पूरा हुआ प्रधान सेवक का सपना

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नारायण विश्वकर्मा
हमारे लोकतंत्र के नये मंदिर के निर्माण से दिल्ली जगमगा उठी. सेंट्रल विस्टा के निर्माण के साथ-साथ नई दिल्ली के पावर कॉरिडोर के संग ल्युटियन की दिल्ली में खासकर राजपथ (अब कर्तव्य पथ) का चेहरा, चाल और मिजाज सब बदल गया. देसवासी खुश हैं, क्योंकि हमारे प्रधान सेवक का ड्रीम प्रोजेक्ट निर्धारित समय-सीमा में पूरा हुआ. लेकिन हम आपको सेंट्रल विस्टा की जगमगाहट से दूर कोरोना कालखंड के काले इतिहास की ओर ले जाना चाहेंगे. काला इतिहास इसलिए कि जब प्रोजेक्ट के निर्माण की नींव रखी गई थी तो, वैश्विक कोरोना की त्रासदी अपने चरम पर था. अब आप पूछेंगे इससे सेंट्रल विस्टा के निर्माण से कैसा संबंध…? संबंध इसकी टाइमिंग को लेकर है.
अवाम की सलामती नहीं, अपनी जिद को प्रमुखता दी
कोरोना वायरस के बढ़ते प्रभाव और लॉकडाउन को लेकर उस समय दिल्ली में ही चांदनी चौक रीडेवलपमेंट और प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट का काम रोक दिया गया, जबकि 2020 के मई के अंत तक इनका काम पूरा हो जाना था। वहीं दूसरी तरफ सेंट्रल विस्टा के ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ के काम को लॉकडाउन में आवश्यक सेवा का दर्जा देते हुए तीनों शिफ्ट में काम करने की अनुमति दे दी गई, क्योंकि ये हमारे प्रधान सेवक की जिद थी. इसलिए कोरोना कालखंड में सेंट्रल विस्टा निर्माण की जल्दबाजी पर सवाल उठना लाजिमी है. हमारा रहनुमा विषम परिस्थिति में पहले अपने मुल्क की हिफाजत और अवाम की सलामती चाहेगा कि अपनी जिद को प्रमुखता देगा? इसलिए सबसे बड़ा सवाल सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की टाइमलाइन को लेकर था…है…रहेगा. इतिहास से इसका जवाब आनेवाली पीढ़ी भी मांगेगी.
त्रासदी के दौर में ड्रीम प्रोजेक्ट जरूरी क्यों बना?
अब इस टाइमिंग को लेकर मेरा अवाम से सवाल है… मान लीजिए आपको दो महत्वपूर्ण कार्यों को निबटाना है. जैसे आपके यहां के कोई करीबी रिश्तेदार असाध्य रोग से ग्रसित है और उसका जीवन मृत्यु की सीमा पर पहुंच गया है. दूसरा महत्वपूर्ण कार्य… अपने टूटे-फूटे घर को नया रूप देना है. अब आप बताइये कि आप पहले किसे प्राथमिकता देंगे? निश्चित रूप से पहले आप जीवन देखेंगे. जीवन रहेगा तो कई घर बन जाएंगे. आप घर बनाने के लिए रखे पूरे पैसे बीमारी में झोंक देंगे. क्योंकि जीवन अनमोल है. ठीक उसी तरह 2020-21 की वैश्विक त्रासदी कोरोना में जब लोग ऑक्सीजन और इलाज के लिए तड़प-तड़प कर अपनी जान दे रहे थे. पूरे देश में अस्पताल कम पड़ गए थे. लाशों के अंबार को श्मशान में जगह नहीं मिल रही थी. वहां लकड़ियां कम पड़ गई थी. फिर त्रासदी से त्राहिमाम करते देशवासियों को खुद के भरोसे छोड़, प्रधान सेवक के लिए आवश्यक काम सेंट्रल विस्टा का निर्माण कैसे हो गया? अगर दो-तीन साल के लिए इस प्रोजेक्ट को जनहित के कल्याणार्थ टाल दिया जाता तो कौन सी आफत आ जाती? क्या वर्तमान संसद भवन की छत टपक रही थी? ये सत्ताधीशों के लिए यक्ष प्रश्न है.

मुद्दा बना कर्तव्यपथ के नामकरण का
सेंट्रल विस्टा के निर्माण पर मैं सवाल नहीं खड़ा कर रहा हूं. मैं सिर्फ इसकी टाइमिंग पर सवाल उठा रहा हूं. इसकी निर्धारित समय-सीमा की अनिवार्यता पर सवाल खड़ा कर रहा हूं. कहते हैं दिल्ली का दिल हिंदुस्तान के लिए धड़कता है. फिर कोरोना के कालखंड में करोड़ों धड़कनों पर मौत का पहरा क्यों था? देश के करोड़ों लोगों की चारों ओर से उठती चीत्कारें…श्मशानों में महीनों उठती आग की लपटें… क्या ऐसी महाभयंकर आपदा से अपने हिंदुस्तान का कभी वास्ता पड़ा था? ऐसे सैकड़ों सवालों पर आज चर्चा होनी चाहिए थी. ऐसे में प्रधान सेवक को अपनी दूरदर्शिता का परिचय देना चाहिए था. लेकिन किसी ने इसपर सवाल नहीं उठाया. राष्ट्रीय खबरिया चैनलों के कथित देशभक्त टीवी योद्धाओं ने कर्तव्यपथ के नामकरण को मुद्दा बनाया. ऐंकर अपने पैनलिस्टों को इसी में उलझाए रखा. चूंकि मुद्दा उछाल कर उनकी झोली में आसानी से डाल दिया गया था. प्रिंट मीडिया की फौज ने भी कारोना कालखंड के काले इतिहास में झांकने की जहमत नहीं उठाई. इतिहास इन्हें भी कभी माफ नहीं करेगा.

कोरोनाकाल में करोड़ों खर्च का व्यापक विरोध हुआ
सारा देश कोरोना वायरस और लॉकडाउन की मार झेलने को अभिशप्त था. सामाजिक कार्यकर्ताओं से लेकर तमाम बुद्धिजीवियों ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण को आवश्यक सेवा के दायरे में रखने पर आपत्ति जतायी थी. उधर, हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में इस परियोजना को लेकर याचिकाओं के अंबार लग गए थे. आजादी के बाद से ही देश का स्वास्थ्य तंत्र का ढांचा चरमराया हुआ था. दूरदर्शी राजनेता पहले जर्जर स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करता. इसलिए इस प्रोजेक्ट पर करोड़ों खर्च करने का व्यापक विरोध हुआ. इतनी आलोचनाओं के बावजूद सरकार प्रोजेक्ट को वाजिब ठहराने में लगी रही. वहीं प्रबुद्धजन का कहना था कि इस महामारी के ख़त्म होने तक एक-दो साल के लिए इसे स्थगित कर देने से कौन सी आफत आ जाएगी. संसद भवन इतना भी जर्जर नहीं हुआ है कि दो साल में कुछ हो जाएगा. अभी सरकारी धन को लोगों के स्वास्थ्य में अधिक कारगर तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए. जरा सोचिए 20 हजार करोड़ में देश के हजारों गांवों में अस्पतालों का निर्माण कराया जा सकता था. लेकिन हुक्मरान ने स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के बदले अपने सपने को पूरा करने में बेचैनी दिखाई.

शुरू से विवादों में रहा प्रोजेक्ट
यह प्रोजेक्ट शुरू से विवादों में रहा। इसका काम पूरी तरह से पीएमओ की देखरेख में पूरा हुआ. पहले तो इसे मंजूरी देने में गजब की तेजी दिखाई गई। लॉकडाउन के दौरान नए संसद भवन के लिए पर्यावरण मंजूरी दी गई और फिर टेंडर निकाला गया। आमतौर पर ऐसे प्रोजेक्ट पर काफी बहस होती है, लोगों की राय ली जाती है, अध्ययन किए जाते हैं। लेकिन इस प्रोजेक्ट में काफी गोपनीयता बरती गई. टेंडर लेनेवाले ने क्यों प्रेशर बनाया? कहते हैं इसके पीछे एक बहुत बड़ी लॉबी लगी हुई थी, जिसे लॉकडाउन से कोई लेना-देना नहीं था. उस लॉबी ने पीएमओ पर लगातार दबाव बनाए हुए था.

प्रोजेक्ट को आवश्यक सेवाओं में क्यों गिना गया?
ये राष्ट्रीय शर्म का विषय था जब कोरोना काल में इसे अतिमहत्वपूर्ण समझा गया था. इस परियोजना के काम को आवश्यक सेवाओं में गिना गया. कोरोना कालखंड के दो साल बाद भी इनके ज़ख़्म अभी हरे हैं. केंद्र ने तमाम आलोचनाओं का जवाब दिया…सेंट्रल विस्टा आधुनिक भारत का प्रतीक होगा. कुछ लोग इसका महत्व नहीं समझ रहे हैं, कुछ लोग देश को विकास करते नहीं देख सकते. लॉकडाउन तो इनके लिए कोई विषय ही नहीं था. कोरोना कालखंड में निर्मित सेंट्रल विस्टा भले किसी के लिए सपने का महल हो, पर इसकी बुनियाद खोखली है. हमें कभी अपने अतीत को नहीं भूलना चाहिए. लेकिन याद रहे कल की बुनियाद पर आज टिका है और आज को हम कल से जुदा नहीं कर सकते.

राम भक्तों के लिए

इंतजार की घड़ियां खत्म: अब फैसले की घड़ी, ज्योतिषियों ने माना, हेमंत सरकार के शुभ लक्षण नहीं, सीएम अच्छे पर, मित्रमंडली ने कर दिया बंटाधार

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नारायण विश्वकर्मा

झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस के रांची पहुंचने के बाद फिर से एक बार राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. माइनिंग लीज मामले में इलेक्शन कमीशन ने हेमंत सोरेन की सदस्यता पर अपना मंतव्य राज्यपाल को भेजा है. जिस पर अब राज्यपाल को निर्णय लेना है. यानी अब इंतजार की घड़ियां खत्म हो चुकी है. अब सत्ता के गलियारे में बस यही चर्चा है कि हेमंत सोरेन की सदस्यता जाएगी या रहेगी? दूसरी चर्चा ये भी है कि क्या उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहरा दिया जाएगा? इसपर पिछले एक माह से राजनीतिक नफे-नुकसान की बात हो रही है. हेमंत सरकार ने महीने भर के लिए उड़नखटोला भी बुक कर रखा है. उधर, बिरसा एयरपोर्ट से राजभवन की रवानगी पर राज्यपाल मीडिया से मुखातिब नहीं हुए. राज्यपाल का 9 सितंबर को क्या कार्यक्रम है, ये भी अभी रहस्यमय बना हुआ है, इधर, हेमंत सरकार की बेचैनी बढ़ी हुई है.

ज्योतिषियों की राय: हेमंत सोरेन खतरे से बाहर नहीं

हेमंत सरकार की स्थिरता को लेकर कुछ ज्योतिष भी बताते हैं कि सरकार की अभी ग्रह दशा सही नहीं चल रही है. इससे उबरना बहुत मुश्किल है. इसका मुख्य कारण वे हेमंत सोरेन के परिवार को मानते हैं. इसके अलावा सत्ता संचालन में अपने मित्रों की जबर्दस्त दखलअंदाजी से भी सरकार पर संकट आ गया है. दरअसल, हेमंत सोरेन का लोगों से घुलना-मिलना और उनकी शालीनता उन्हें झारखंड के सभी सीएम से बिल्कुल अलग करते हैं. वे अच्छी छवि के मालिक हैं. पर कहते हैं न घर फूटे गंवार लूटे…शायद यही कहावत चरितार्थ होनेवाली है. वे मानते हैं कि सीएम बहुत अच्छे हैं पर उनकी मित्रमंडली ने सबकुछ बंटाधार कर दिया है.

9 सितंबर को रहस्योद्घाटन व विसर्जन का सम्भावित काल

झारखंड के एक प्रख्यात ज्योतिष हैं. उनका नाम लेना अभी उचित नहीं होगा. लेकिन उनकी भविष्यवाणियां अक्सर सच साबित होती रही हैं. वे झारखंड की राजनीति को बहुत करीब से जानते भी हैं. झारखंड की राजनीतिक हलचल से भी वे वाकिफ हैं. 15-20 दिन से चल रहे राजनीतिक उठापटक के बीच उन्होंने हेमंत सरकार की स्थिरता को लेकर भविष्यवाणी की है. उनका कहना है कि 9 सितंबर को रहस्योद्घाटन एवं विसर्जन का सम्भावित काल 09.सितंबर 22 को शाम 14.51 बजे से 18.08 बजे तक का समय हेमंत सरकार के लिए शुभ लक्षण प्रतीत नहीं होते हैं. वैसे ज्योतिषाचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि 9 सितंबर का दिन हेमंत सरकार पर भारी पड़नेवाला है. संभव है कुछ दिनों बाद झारखंड राष्ट्रपति शासन के हवाले हो जाए. बहरहाल, राज्यपाल कल कोई निर्णय सुनाते हैं या फिर और समय लेते हैं, यह भी कहना मुश्किल है.    

राम भक्तों के लिए

विधायक राजेश कच्छप ने ही विधानसभा में धार्मिक स्थल की घेराबंदी की आवाज आवाज उठायी थी: रिया तिर्की

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रांची : खिजरी का विधायक राजेश कच्छप भले कैश कांड में अभी जेल में है, लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में उनकी पत्नी रिया तिर्की लगातार उनके संकल्पों और योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम कर रही है. इसके अलावा उनकी पत्नी अपने क्षेत्र को लोगों से संपर्क बनाए हुए हैं. इसी क्रम में गुरुवार को नामकुम प्रखण्ड के ग्राम हजाम में दो सरना स्थान की घेराबंदी का शिलान्यास रिया तिर्की ने नारियल फोड़ कर किया. इस मौके पर जिला परिषद सदस्य रीता हीरो, नामकुम प्रखण्ड प्रमुख आशा कच्छप, हुड़वा पंचायत मुखिया शिवचरण कच्छप पंचायत समिति सदस्य कल्याण लिंडा एवं विधायक प्रतिनिधि सतीश पंडा ने शिलान्यास कार्यक्रम में अपनी सहभागिता निभाई.

हम आपके हर सुख-दुख में साथ रहेंगे : रिया तिर्की

विधायक पत्नी रिया तिर्की ने इस मौके पर कहा कि झारखंड की धर्म-संस्कृति को बचाए रखना जरूरी है। इसी मकसद को लेकर खिजरी विधानसभा के हर ग्राम के सरना मसना, हड़गड़ी, कब्रिस्तान की घेराबंदी कर विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि हम आपके हर सुख-दुख में आपके साथ हैं। आगे कहा कि हमारे खिजरी विधायक की ही देन है कि हमारे धार्मिक स्थल को विकसित कर इसकी घेराबंदी की जा रही है। विधायक राजेश कच्छप ने ही झारखण्ड विधानसभा में धार्मिक स्थल की घेराबंदी करने की आवाज पुरजोर आवाज उठायी थी। इसका सुपरिणाम कि आपलोगों के सामने है. आगे भी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने की भरपूर कोशिश होगी.

ये लोग थे शामिल

शिलान्यास कार्यक्रम में ग्राम के पाहन लखन पाहन, ग्राम प्रधान मधुर मुण्डा, माधो कच्छप, तेलोस्फोर मिंज, नईम खान, जफर इमाम, राजू उरांव, खुदिया कच्छप, मदन टोप्पो, विजय तिर्की, वार्ड सदस्य अन्नू तिर्की, पांचू तिर्की, शाहिद अंसारी, रेमिश तिर्की, विनोद लकड़ा, आसीन उरांव, दिनेश चन्द्र प्रमाणिक मुख्य रूप उपस्थित थे।

राम भक्तों के लिए

Indians are upscaling their technology. A famous one which is on trend everywhere in India is GPU.

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Everyone is eager to know the in-depth details of computer technology. Indians are doing great in tech, with a channel on YouTube and other digital platforms,spreading knowledge and facts about Indian markets and buying graphics cards (GPU). There have been various facts and information about the different types of graphics cards in the Indian market. Nvidia has gone from Geforce to Titan, GT to RTX, and AMD got the final XT.

All graphics cards have different variations, different purposes,different companies, different manufacturers,etc.

First we will talk about what a graphics card is. What is needed for a computer or any other operating system?

A graphics card’s main purpose is referred to as its name ”Graphics,” which means it renders the graphics. Simply put, your computer cannot display or show information without a graphics card. Editors are aware that pixels are used for resolution and that the number of pixels determines resolution. For example, 720P is high quality, 1080p is FHD, and 2K or 4K is UHD for more realistic and dynamic visuals.

A graphics card Where did it come from? What makes it more important now?

Taiwan,China, manufactures graphics cards. An element of silicon is used in graphics cards to boost their performance and full utilization.

Different companies make the graphics cards, but the base is manufactured by the original Nvidia manufacturers. So everyone asks why there are so many companies. because each company provides different things like clock speed, cuda cores, etc. That’s why the price of a graphics card varies within each model but not across different companies.

Here are some graphics for the main purposes that people use.

For editing, you need a GPU with at least 4 GB of VRAM and a CPU with a core count of 800 or higher. For example, the GTX1650 is slightly over budget for editing PCs.

For budget editing, you can buy T400, T600, or T1000. It is primarily for editing purposes.

For gaming, you should get at least a GTX1650 Super for a mid-level game.

Don’t buy cheap graphics cards as they won’t give optimal performance and will make your customised personal computer lag. For example, gt610,gt710,gt730,or gt1030.

There is a myth that old graphics cards that have good performance but are still old and have an old architecture cannot run new AAA titles, but they can. You have to do experiments, such as lof files. With these settings, you can achieve your favourite frame per second.

This world has so much deep knowledge that Indians are dying in a graphic knowledge world. We need to inspire the next generation so that we can advance our technology in this field and grow at a much faster rate.

राम भक्तों के लिए

हेमंत ने ऑपरेशन लोटस की हवा जरूर निकाल दी, पर खतरा अभी टला नहीं, वार-प्रहार का दौर जारी रहेगा

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नारायण विश्वकर्मा
भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी सहित तमाम विपक्ष के नेताओं ने हेमंत सरकार के विश्वासमत पेश करने की जरूरत पर सवाल उठाया और सदन में सरकार को घेरने की कोशिश की. कहा गया कि राज्यपाल या कोर्ट या विपक्ष द्वारा सरकार को विश्वासमत हासिल करने को नहीं कहा था. लेकिन सदन के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विपक्ष के वार करने से पूर्व ही जमकर हमला बोल दिया. सोमवार को विशेष सत्र शुरू होते ही हेमंत सोरेन अपने खिलाफ चल रहे ऑपरेशन लोटस की आज हवा निकाल दी. यहां तक कि सीएम ने राजभवन को भी नहीं बख्शा. राज्य के राज्यपाल के बारे में कहा कि राज्यपाल पीछे के दरवाजे से निकल गए. समरीलाल के बारे में सीएम ने कहा कि वो फर्जी सर्टिफिकेट लेकर सदस्य बने हुए हैं. उसपर चुनाव आयोग ने अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

निशिकांत ने अगस्त तक सरकार की उम्र बतायी थी
यह ठीक है कि झारखंड में पहली बार सरकार को सदन में विश्वास रहते हुए भी विश्वासमत हासिल करना पड़ा. यह झारखंड का इतिहास बना. लेकिन यह सवाल सुनने-समझने में भले आसान लगे पर ऐसा है नहीं. दरअसल 2019 में सरकार से बेदखल होने के बाद भाजपा ने यह कहना शुरू कर दिया था कि यह सरकार चंद दिनों की मेहमान है. उन्हें लगा कि कांग्रेस या झामुमो के 12-15 विधायकों को तोड़कर सरकार गिरा दी जाएगी. इसके लिए पिछले साल जुलाई माह से ही प्रयास किया जाने लगा था. खासकर गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे का यह ट्वीट कि अगस्त माह तक ही इस सरकार की उम्र है. आज 5 सितंबर हो गया. लेकिन सरकार पर कोई आंच नहीं आई. विश्वासमत के बाद भाजपा की भारी फजीहत हुई है. अब वह पूरी तरह से बैकफुट पर है.

जल्द ही लिफाफे का मजमून पता चल जाएगा
यह भी सही है कि भ्रष्टाचार के कई मामलों में शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन के अलावा उनके विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्र, प्रेस सलाहकार अभिषेक प्रसाद पिंटू और कांग्रेस के मंत्री आलमगीर आलम पर ईडी, सीबीआई और आईटी जैसी जांच एजेंसियों की वक्रदृष्टि है. अभी भी कई लोग रडार पर हैं, जिनका संबंध सीधे सरकार और सीएमओ से है. अब जांच का दायरा और बढ़ेगा. इनमें सरकारी दलालों और कई आईएएस और आईपीएस के फंसने की उम्मीद है. विश्वासमत हासिल कर लेने मात्र से ऑपरेशन लोटस खत्म नहीं होनेवाला है. राजभवन का बंद लिफाफा भले 10-12 दिनों बाद भी नहीं खुला. लेकिन जल्द ही लिफाफे का मजमून पता चल ही जाएगा.
अंतत: महागठबंधन में फूट नहीं पड़ी
अलबत्ता, चुनाव आयोग के राज्यपाल को लिखे पत्र को मीडिया और सोशल मीडिया में लीक कर सरकार को अस्थिर करने की भरपूर कोशिश की गई. महागठबंधन में फूट डालने और विधायकों की खरीद-फरोख्त को अंजाम देना बताया जा रहा है. इस बात पर भाजपा कोई ठोस जवाब नहीं दे पायी कि खदान के लीज वाले मामले में शिकायत मिलने के बाद चुनाव आयोग ने जांच कर यदि हेमंत सोरेन की विधायकी खत्म करने की सिफारिश की तो, इसका खुलासा राज्यपाल ने अबतक क्यों नहीं किया? सोशल मीडिया और अखबारों में यह कहा गया कि निर्वाचन आयोग की तरफ से सदस्यता रद्द कर दी गयी है. लेकिन राजभवन का वह लिफाफा खुलने में देरी की वजह सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा है, यही विश्वासमत का तकाजा था, जो आज पूरा हो गया.

तीन के अलावा और कितने माननीयों को प्रलोभन दिया गया?

सीएम ने असम के सीएम हिमंत विस्व सरमा पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप मढ़ दिया, पर यह नहीं बताया कि उन्होंने महागठबंधन के और कितने माननीयों को प्रलोभन दिया था? हालांकि कैशकांड में फंसे तीन विधायकों ने अभी तक जांच एजेंसी या कलकत्ता हाईकोर्ट में यह नहीं बताया या उनसे अभी तक यह नहीं पूछा गया कि और कितने माननीयों को प्रलोभन दिया गया था. उनके नाम भी उजागर होने चाहिए. कांग्रेस प्रभारी अविनाश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी अबतक यह सवाल नहीं उठाया है. सीएम ने सदन में जब असम के सीएम पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया तो, उन्हें उनसे यह भी पूछना चाहिए था कि वे बताएं कि और कितने माननीयों ने उनसे संपर्क साधा था. आखिर मात्र तीन विधायकों से तो सरकार का गिरना संभव नहीं था. कम से कम और नौ माननीय भी संपर्क में जरूर होंगे. दिलचस्प बात ये है कि उन अन्य नौ विधायकों के बारे में विपक्ष ने भी सवाल नहीं किया. इस वाजिब सवाल का सत्ता के गलियारे में इसका जवाब मिलना चाहिए. वैसे देर-सबेर यह पता जरूर चल जाएगा कि ऑपरेशन लोटस के तहत और कितने माननीय पेशगी ले चुके हैं. फिलहाल हमें इसका इंतजार करना होगा.

राम भक्तों के लिए

Five Employees Engagement to Improve Work Performance

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To improve an individual employees’ work performance and the thrive of the company, the engagement of every five employees in any company and an organization will be a better choice and must for growth.

How it will happen?

It will happen only by the company’s or organization’s rules and regulations of every five employees’ small engagement for the success or thrive and individual employee’s development. Otherwise, it will be a myth and just an option nothing more than it, will not be a reality. There are some techniques for five employees engagement to improve performance:

● Provide good and sufficient tools and technology for employees they are needed to do work with ease and reduce hecticness because employees do not have spare time. They have lots of things to do. In professional and personal life 

● By giving feedback motivates and helps employees know their lacks and what they’ve to do to improve, always showing kindness not only helps people but also gives another person a different kind of relaxation by this attitude other person makes a unique image which influence that person to does work by heart.

● Never discourage employees, always give appreciation for what you can do, and give rewards when employees do great.

● Collaboration with each other. When one employee does not know one thing or task then another employee should come ahead to complete the task. With this technique, everyone can does all work and learn how to does this thing next time.

● Good leadership to divide and arrange all work within every five group team is the initial step that leads everything after this.

● Providing a good and healthy environment automatically leads to the employee’s performance.

● Generate opportunities and reward opportunities for employees to give their best and enhance their performance.

● Accountable towards their work whether it is good or bad that builds confidence and presentation skills in employees

●Building individual attention and listening skills will help employees to make better in work like observing and listening to others how they are doing work and reacting in situations and teaching them to not do such type of mistakes that fellow employees did.

SUCCESSFULL BUSINESS METHODOLOGY

This is not only for employee wellness, growth, success, and development but also for the organization’s success or profit.

When these all things are implemented in the company then success is not far away because the company’s employee’s success means the company’s success. The organizationtion or company will get money, fame, and a good image like this if company is not only focuses on company’s success but also the success and improving the performance of the employer which generates employment and employee hiring opportunities

Now companies and organizations only focus on those employees who have skills and talent rather than focus on how to improve individual performance which helps unemployment raising problems and economic growth of India because India is a country where educated people are higher but still people are not getting jobs that leads brain drain such type of things which dropped down country’s GDP, financial and Economic growth. Not all but maximum Companies focus and think only about their own not others except some companies.

The above techniques and methods are explained every small things to get rid out of these problems and improve employees’ performance. Now, the solution is very cluster and clear, focusing on individual employees’ performance will be solving everything.

राम भक्तों के लिए

हॉकी के जादूगर : ध्यानचन्द

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कोई समय था, जब भारतीय हॉकी का पूरे विश्व में दबदबा था। उसका श्रेय जिन्हें जाता है, उन मेजर ध्यानचन्द का जन्म प्रयाग, उत्तर प्रदेश में 29 अगस्त, 1905 को हुआ था। उनके पिता सेना में सूबेदार थे। उन्होंने 16 साल की अवस्था में ध्यानचन्द को भी सेना में भर्ती करा दिया। वहाँ वे कुश्ती में बहुत रुचि लेते थे; पर सूबेदार मेजर बाले तिवारी ने उन्हें हॉकी के लिए प्रेरित किया। इसके बाद तो वे और हॉकी एक दूसरे के पर्याय बन गये।वे कुछ दिन बाद ही अपनी रेजिमेण्ट की टीम में चुन लिये गये। उनका मूल नाम ध्यानसिंह था; पर वे प्रायः चाँदनी रात में अकेले घण्टों तक हॉकी का अभ्यास करते रहते थे। इससे उनके साथी तथा सेना के अधिकारी उन्हें ‘चाँद’ कहने लगे। फिर तो यह उनके नाम के साथ ऐसा जुड़ा कि वे ध्यानसिंह से ध्यानचन्द हो गये। आगे चलकर वे ‘दद्दा’ ध्यानचन्द कहलाने लगे।चार साल तक ध्यानचन्द अपनी रेजिमेण्ट की टीम में रहे। 1926 में वे सेना एकादश और फिर राष्ट्रीय टीम में चुन लिये गये। इसी साल भारतीय टीम ने न्यूजीलैण्ड का दौरा किया। इस दौरे में पूरे विश्व ने उनकी अद्भुत प्रतिभा को देखा। गेंद उनके पास आने के बाद फिर किसी अन्य खिलाड़ी तक नहीं जा पाती थी। कई बार उनकी हॉकी की जाँच की गयी, कि उसमें गोंद तो नहीं लगी है। अनेक बार खेल के बीच में उनकी हॉकी बदली गयी; पर वे तो अभ्यास के धनी थे। वे उल्टी हॉकी से भी उसी कुशलता से खेल लेते थे। इसीलिए उन्हें लोग हॉकी का जादूगर’ कहते थे।भारत ने सर्वप्रथम 1928 के एम्सटर्डम ओलम्पिक में भाग लिया। ध्यानचन्द भी इस दल में थे। इससे पूर्व इंग्लैण्ड ही हॉकी का स्वर्ण जीतता था; पर इस बार भारत से हारने के भय से उसने हॉकी प्रतियोगिता में भाग ही नहीं लिया। भारत ने इसमें स्वर्ण पदक जीता। 1936 के बर्लिन ओलम्पिक के समय उन्हें भारतीय दल का कप्तान बनाया गया। इसमें भी भारत ने स्वर्ण जीता। इसके बाद 1948 के ओलम्पिक में भारतीय दल ने कुल 29 गोल किये थे। इनमें से 15 अकेले ध्यानचन्द के ही थे। इन तीन ओलम्पिक में उन्होंने 12 मैचों में 38 गोल किये।1936 के बर्लिन ओलम्पिक के तैयारी खेलों में जर्मनी ने भारत को 4-1 से हरा दिया था। फाइनल के समय फिर से दोनों टीमों की भिड़न्त हुई। प्रथम भाग में दोनों टीम 1-1 से बराबरी पर थीं। मध्यान्तर में ध्यानचन्द ने सब खिलाड़ियों को तिरंगा झण्डा दिखाकर प्रेरित किया। इससे सबमें जोश भर गया और उन्होंने धड़ाधड़ सात गोल कर डाले। इस प्रकार भारत 8-1 से विजयी हुआ। उस दिन 15 अगस्त था। कौन जानता था कि 11 साल बाद इसी दिन भारतीय तिरंगा पूरी शान से देश भर में फहरा उठेगा।1926 से 1948 तक ध्यानचन्द दुनिया में जहाँ भी हॉकी खेलने गये, वहाँ दर्शक उनकी कलाइयों का चमत्कार देखने के लिए उमड़ आते थे। आस्ट्रिया की राजधानी वियना के एक स्टेडियम में उनकी प्रतिमा ही स्थापित कर दी गयी। 42 वर्ष की अवस्था में उन्होंने अन्तरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास ले लिया। कुछ समय वे राष्ट्रीय खेल संस्थान में हॉकी के प्रशिक्षक भी रहे।भारत के इस महान सपूत को शासन ने 1956 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया। 3 दिसम्बर, 1979 को उनका देहान्त हुआ। उनका जन्मदिवस 29 अगस्त भारत में ‘खेल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

राम भक्तों के लिए
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