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Tuesday, June 30, 2026
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गिरिडीह – क्यो पड़ा एक होटल का नाम बेवकूफ होटल

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गिरिडीह – अगर आपको लगता है सिर्फ आमिर खान ही इडियट है तो ये आपका भरम है, झारखंड के गिरिडीह शहर मे चले आइए आपको एक दर्जन से भी जायेदा बेवकूफ लोग मिलेंगे, माफ कीजिएगा लोग नहीं होटल मिलेंगे, दरअसल मे गिरिडीह शहर मे एक दर्जन से जायेदा होटेलों के नाम मे बेवकूफ लगा हुआ है , मसलन बेवकूफ होटल , सबसे बड़ा बेवकूफ होटल , बेवकूफ नंबर वन होटल, इत्यादि | 1971 मे बीरबल प्रसाद और उनके चाचा जी आर्थिक परेशानी से गुजर रहे थे तो उन्होने गिरिडीह मे एक बिना नाम का होटल खोला और चलाने लगे , खाने के दाम सस्ता रखा था तो लोगों की भीड़ लगी रहती थी इसी भीड़ का फायेदा उठा कर कुछ छात्र खा कर बिना पैसे दिये चलते बने तो होटल के मालिक बीरबल प्रसाद के चाचा ने कहा की ये लोग तो हमको बेवकूफ बना के चले गए बस फिर क्या था बिना नाम के होटल का नाम बेवकूफ होटल कर दिया और फिर ये बेवकूफ होटल आगे चलकर कितना फेमस हो गया की मिलते जुलते नाम से एक दर्जन से जाएडा लोगों ने होटल खोल लिया , अगर आप गिरिडीह जाये तो सस्ते मे अच्छा खाने का मजा लेना चाहे तो बेवकूफ होटल चले जाये और बीरबल प्रसाद जी से उनकी कहानी भी सुनके आए | बीरबल प्रसाद जी बड़े ही मजेदार इंसान है खाना खिलाने के साथ साथ अपनी आपबीती भी सुनते है कैसे उन्होने 1971 से अब तक का सफर पूरा किया झारखंड वीकली की पूरी टीम के तरफ से उनको सादर प्रणाम |

राम भक्तों के लिए

माया नगरी के खेल निराले, काम करे कोई नाम ले जाए कोई

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मुंबई – मायानगरी मुंबई मे प्रतिभावान कलाकारों का शोषण कोई नयी बात नहीं , शुशांत सिंह राजपूत जैसे बड़े कलाकार भी इससे अछूते नहीं रहे | फ़िल्मनगरी मे कई बार ऐसा होता है की मेहनत कोई करता है और नाम कोई और ले जाता है , बहुत सारी किस्से हैं जहां पर प्रतिभावान कलाकारों श्रेय कोई और ले जाता है, ऐसा ही कुछ हुआ बॉलीवुड के जाने माने डायरेक्टर आनंद शास्त्री जी के साथ , इन्होने एक फिल्म का निर्देशन किया जिसका नाम है सेक्रेट अटैक , फिल्म के प्रोडूसर हैं बरेली, उत्तर प्रदेश के डॉक्टर हेमेंद्र कुमार सिंह , प्रोडूसर ने डायरेक्टर के साथ बहुत बड़ा धोखा किया, फिल्म बन जाने के बाद डायरेक्टर साहब और उनकी टीम को कोई मेहताना नहीं दिया गया और ना ही फिल्म में उनका श्रेय दिया गया यहाँ तक की डायरेक्टर आनंद शास्त्री का नाम हटा के प्रोडूसर ने अपना ही नाम कर दिया , झारखण्ड वीकली टीम से बात करते हुए डायरेक्टर आनंद शास्त्री जी काफी भावुक हो गए , उन्होंने कहा की सारा काम करा लेने के बाद ना ही उनके और ना ही उनके टीम को कोई मेहताना दिया गया और ना ही उनके काम का श्रेय दिया गया | प्रोडूसर साहब ने अपनी पुरे घरवालों को अपने फिल्म में लिया और निर्देशक आनंद शास्त्री ने नाकाबिल लोगों को काबिल बना के फिल्म में काम करवाया , आगे आनंद ने कहा हम इतनी मेहनत से कोई फिल्म का निर्देशन करते हैं और लोग अपना नाम निर्देशक की स्थान पर चिपका देते हैं इससे एक कलाकार पर क्या गुजरती है कलाकार ही जनता है , डायरेक्टर आनंद शास्त्री ने अपनी शिकायत फिल्म एसोसिएशन को किया है और उम्मीद करते है की बहुत जल्द प्रोडूसर पर इसकी गाज गिरेगी |

राम भक्तों के लिए

शौक बड़ी चीज़ है – नवीन कुमार, आईटी इंजीनियर और फॉटोग्राफर

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रांची – बॉलीवुड फिल्म 3 इडियट के फहरान कुरेशी को कोई कैसे भूल सकता है , फिल्म मे फहरान ने अपनी फोटोग्राफी के शौक के लिए इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ दी और ज़िंदगी मे कामयाब बने | कुछ इसी तरह है अपने मोराबादी, रांची के रहने वाले नवीन कुमार हैं, अपनी प्रारम्भिक पढ़ाई इनहोने झारखंड के अलग अलग स्कूल से पूरा किया फिर आईटी की पढ़ाई दिल्ली से करके बंगलोर मे एक बड़े बहुराष्ट्रिय कंपनी मे नौकरी करते हैं | नवीन अपनी नौकरी के साथ साथ अपने फोटोग्राफी के शौक को पूरा कर रहे है | हमसे बातचीत मे इनहोने बताया प्रकृति से इन्हे बहुत प्यार है अच्छे फोटो की तलाश मे देश का कोना कोना सफर कर चुके हैं | जब भी अपने काम से फुर्सत मिलती है तो गाँव,शहर, अपनी फोटोग्राफी किट लेकर बेहतरीन क्षण को अपने कमेरे मे कैद करने निकाल पड़ते हैं | आगे इनहोने बताया फोटोग्राफी की कोई पढ़ाई नहीं की बस काम करते करते इनहोने महारत हासिल कर ली, अगर आप किसी अच्छे फॉटोग्राफर को अपने बजट मे तलाश कर रहे है तो आप नवीन कुमार से संपर्क कर सकते है आजकल ये रांची, झारखंड मे हैं

राम भक्तों के लिए

एक मुलाक़ात झारखंड के प्रसिद्द संगीतकार भूपेश कुमार जी से

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रांची – भूपेश कुमार झारखंड संगीत मे जाना माना नाम है , रांची दूरदर्शन से पिछले 20 साल से ये जुड़े हुए है और हमे अच्छे संगीत से मनोरंजन कराते आये हैं | भूपेश कुमार जी रांची जैसे छोटे शहर में कई सालों से संगीत के क्षेत्र में कार्य कर रहे है और नए प्रतिभावो को निखारते हैं और उनको मंच प्रदान करते है , झारखंड वीकली ने इन्होने अपने जीवन के संघर्षो को साझा किया | हमने इनसे मुलाक़ात इनके रांची निवास पर किया |

राम भक्तों के लिए

जब एक किसान गंदे कपड़े पहन थाने में पहुंचा, थाने में कुछ ऐसा हुआ कि पूरा थाना हुआ सस्पेंड

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रांची – सन 1979 की बात है। शाम 6 बजे एक किसान इटावा ज़िला के ऊसराहार थाने में मैला कुचैला कुर्ता धोती पहने पहुँचा और अपने बैल की चोरी की रपट लिखाने की बात की।छोटे दरोग़ा ने पुलिसिया अंदाज में 4 आड़े-टेढ़े सवाल पूछे और बिना रपट लिखे किसान को चलता किया। जब वो किसान थाने से जाने लगा तो एक सिपाही पीछे से आया और बोला “बाबा थोड़ा खर्चा-पानी दे तो रपट लिख जाएगी।”अंत में उस समय 35 रूपये की रिश्वत लेकर रपट लिखना तय हुआ।रपट लिख कर मुंशी ने किसान से पूछा “बाबा हस्ताक्षर करोगे कि अंगूठा लगाओगे?”किसान ने हस्ताक्षर करने को कहा तो मुंशी ने दफ़्ती आगे बढ़ा दी जिस पर प्राथमिकी का ड्राफ़्ट लिखा था। किसान ने पेन के साथ अंगूठे वाला पैड उठाया तो मुंशी सोच में पड़ गया।हस्ताक्षर करेगा तो अंगूठा लगाने की स्याही का पैड क्यों उठा रहा है?किसान ने हस्ताक्षर में नाम लिखा चौधरी चरण सिंह और मैले कुर्ते की जेब से मुहर निकाल के कागज पर ठोंक दी, जिस पर लिखा था “प्रधानमंत्री, भारत सरकार “ये देखकर सारे थाने में हड़कंप मच गया।असल में ये मैले कुर्ते वाले बाबा किसान नेता और भारत के उस समय के प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह थे।जो थाने में किसानों की सुनवाई का औचक निरीक्षण करने आये थे। अपनी कारों का दस्ता-क़ाफ़िला थोड़ी दूर खड़ा करके कुर्ते पर थोड़ी मिट्टी डाल कर आ गए थे।ऊसराहार का पूरा थाना सस्पेंड कर दिया गया। आज देश को भी ऐसे नेताओं की ज़रूरत है।।

राम भक्तों के लिए

साइबर अपराधियों की जब्त होगी संपत्ति,फर्जी पते पर सिम देने वालों पर भी दर्ज होगा मुकदमा

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रांची – झारखंड पुलिस मुख्यालय से गुरुवार को प्रभारी डीजीपी एमवी राव ने सभी जिलों के एसएसपी-एसपी व रेंज डीआइजी के साथ प्रदेश में बढ़ते साइबर क्राइम व इसकी रोकथाम के मुद्दे पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की।उन्होंने जिलों को आदेश दिया है कि साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए लोगों में जागरूकता आवश्यक है।इसके लिए पुलिस व्यापक स्तर पर विभिन्न माध्यमों से आम जनता को साइबर क्राइम व इसके रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान चलाएगी।

इसके लिए पोस्टर वार,पर्चा,टेलीविजन,समाचार पत्र व वेबिनार आदि माध्यम का सहारा लिया जाएगा।इतना ही नहीं,चिह्नित साइबर अपराधियों की संपत्ति को जब्त करने और ऐसे अपराधियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में कानून सम्मत कार्रवाई करने की भी कार्रवाई होगी।फर्जी पते पर सिमकार्ड बेचने वालों के विरुद्ध मुकदमा दर्जन करने का भी आदेश दिया गया है।यह भी कहा गया है कि वैसे पुराने साइबर अपराधियों का पता लगाना है,जो जमानत पर बाहर आ गए हैं।वर्तमान में उनकी गतिविधियों की जानकारी लेनी है और संदिग्ध मिलने पर उनके जमानत को रद कराने की कोशिश करनी है।साइबर क्राइम के मामले में मजबूत अनुसंधान के साथ ज्यादा से ज्यादा ट्रायल कराना है ताकि ऐसे अपराध करने वालों में भय उत्पन्न हो।इसके लिए पुलिस अफसरों को विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाना है।जिलों के एसएसपी-एसपी को साइबर अपराध के हॉट स्पॉट को भी चिह्नित करने को कहा है,जहां अनुसंधान को मजबूती के साथ फोकस किया जा सके।

राम भक्तों के लिए

खलारी – सांसद संजय सेठ के मांग पर खलारी में सेंट्रल स्कूल खोलने की सकारात्मक पहल

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डकरा। रांची के सांसद संजय सेठ ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल से रांची लोकसभा के अंतर्गत खलारी एवं सिल्ली में केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग की थी। इस आलोक में केंद्रीय मानव संसाधन विभाग द्वारा इस पर संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई हेतु संबंधित विभाग को पत्र भेज दिया गया है। साथ ही केंद्र ने राज्य सरकार से इस पर प्रस्ताव तैयार कर भेजने का आग्रह किया है। ज्ञात हो की रांची के सांसद संजय सेठ ने सिल्ली एवं खलारी क्षेत्र जो ग्रामीण बहुल क्षेत्र है और यहां के बच्चों को बुनियादी पढ़ाई से लेकर उच्च शिक्षा मिले इसके लिए केंद्रीय विद्यालय खोलने की मांग की थी। सांसद संजय सेठ ने राज्य सरकार से मांग करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग जल्द से केंद्रीय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव को भेजें जिससे विद्यालय खोलने का मार्ग प्रशस्त हो सके।

राम भक्तों के लिए

साइबर ठगों से कैसे बचें

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रांची – आजकल साइबर ठगी का मामला प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है लोग जागरूक न होने से साइबर ठग आपको चुना लगा जाते है आइये कुछ सावधानियां बरते और अपने आप को नुकसान होने से बचाये
१। कभी भी किसी भी फ़ोन करने वाले को अपना बैंक खाते की जानकारी न दे | बेशक वो अपने आप को बैंक का कर्मचारी ही क्यों न बता रहा हो , या अनजान आदमी ये कह रहा हो की गलती से उसने आपके फ़ोन का नंबर अपने किसी जगह भर दिया था और आपके पास उसका OTP आ गया है वो आप उसको दे | अपना OTP कभी भी किसी को शेयर न करें
२. सोशल मीडिया , अन्य वेबसाइट , दुकान , होटल , मॉल इत्यादि में | किसी भी तरह जी निजी जानकारीको सार्जनिक न करे , जैसे की मोबाइल नंबर , जन्म तिथि, अपना पता , परिवार की जानकारी
३. मोबाइल पर ऐसे आप को डाउनलोड न करें जिसकी आपको जाएदा जानकारी न हो या आप जो आपकी निजी जानकारी के लिए आपसे अनुमति मांगती हो
4 . सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से निजी जानकारी साझा ना करें , मित्र बनाने में सावधानी बरते |
5 . ऐसे फ़ोन या ईमेल के प्रलोभन में ना आये जो आपको फायदा की बात करे मसलन लाटरी , इन्शुरन्स सरेंडर , महिला मित्रत्रा , फ्रेंडशिप क्लब , मोबाइल टावर लगवाने , केबीसी या कोई और लाटरी के इनाम , इ वॉलेट में पैसे देने की बात इत्यादि |
6 olx , quikr जैसे साइट पर सामान को देखने परखने के बाद ही लेनदेन का भुगतान नकद ले या दे
7 अपने सोशल मीडिया , ईमेल , बैंकिंग के पासवर्ड आसान ना रखे |
8 अपने मित्रो फेसबुक या सोशल मीडिया या मैसेज पर पैसे मांगे तो न दे जब तक आप उससे फ़ोन पर बात न कर ले , हो सकता है की हैकर आपके मित्र के सोशल मीडिया अकाउंट को क्लोन करने आपसे पैसे की मांग कर रहा हो , कोई अगर ये कहे की आपका कोई जानने वाला हस्पताल में है और पैसे की जरुरत है तो ऐसे में सावधान रहे पैसे ना दे
9 मोबाइल कंपनी के नाम से आने वाले कॉल्स से सावधान रहे वो सिम अपग्रेड के नाम पर आपसे OTP माँगा के फ्रॉड कर सकते हैं
ऊपर की सलाह साइबर एक्सपर्ट द्वारा दी गई है जो आपको साइबर ठगो से बचाएगी

राम भक्तों के लिए

हबीब तनवीर – एक समंदर जिसे रहती थी बूंदों की तलाश

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हबीब तनवीर ने नाटक लिखे नहीं उन्हें गढे है ,वह पूरी तरह IMPROWAAIZESHAN इम्प्रोवाईज़ेशन का रंगमंच था | हबीब तनवीर के लिखे को अभिनेता ने नहीं कहा , अभिनेता के कहे को हबीब तनवीर ने लिखा | लिखे को कहे कि तुलना में कहे को लिखना , नाटक की इस भाषा को रंगमंच में हाथो हाथ लिया गया था और हबीब तनवीर के थियेटर को कहा गया था “नया थियेटर” | हबीब तनवीर ने मंच पर अभिनेता को स्थापित किया था , उनके अभिनेताओं ने अपने निर्देशक का नाम कला की सभी दिशाओं में गुंजित कर दिया था | ग्रामीण रंगमंच को शहरी रंगमंच में तब्दील कर हबीब तनवीर ने नाट्य कर्मियों और नाट्य दर्शको को चौकाया था | हबीब तनवीर का यह रंग मंचीय ट्रीटमेंट ही हबीब तनवीर का समूचा रंगमंच नहीं है जैसा कि बहुत से आलोचक कहते है | हबीब तनवीर के रंगमंच के आंकलन में चरणदास चोर , मोर नाव दामाद , पोंगा पंडित , बहादुर कलारिन के साथ साथ आगरा बाज़ार , मिटटी की गाडी , लाला शोहरत राय , मुद्रा राक्षस , ज़हरीली हवा ,देख रहे है नयन ,मिड नाईट ड्रीम , हिरमा की अमर कहानी , जादूगर कलाकार , जिन लाहोर नहीं देख्या वो जन्मा ही नहीं , मोटे राम का सत्याग्रह जैसे अनेको अनेक नाटक का शुमार किये बिना बात की ही नहीं जा सकती | हबीब तनवीर ने रंगमंच की एक नई भाषा गढ़ी थी जिसके शब्द चमकीले थे , धारदार थे और उन शब्दों में अभिनय एवंम दृश्य समाया हुआ था | उस समाहित अभिनय और दृश्य को हबीब साहब ने अपनी निर्देशकीय कल्पना से विस्तार दिया ,उस विस्तार में गहराई थी, उसे भव्यता प्रदान की , उसमें लय और रिदम का ऐसा घोल मिलाया कि जब मंच पर अभिनेता थिरकता तब उसके समानांतर दर्शक भी उसी लय में झूमने लगते | दर्शको का झूमना ही हबीब तनवीर की क्षमता को मापने वाला तराज़ू था |
गिरीश कर्नाड , सुरेन्द्र वर्मा , मोहन राकेश , बादल सरकार , विजय तेंदुलकर आदि नाटककारो ने जो नाट्य लेखन किया वह इस आधार पर किया कि इसे अलग अलग निर्देशक खेलेगे , लेकिन हबीब तनवीर का नाट्य लेखन उनके स्वयं के लिये था , वह भी लिखने का एक अंदाज़ था और यह भी लिखने का एक अंदाज़ था | यह उनकी रंगमंचीय व्यवसायिकता भी कही जा सकती है कि हयवदन , सूर्य की पहली किरण से अंतिम किरण तक , आधे अधूरे , पगला घोडा , घासीराम कोतवाल जैसे नाटक आप को देखने के अलग अलग अवसर मिल सकते है लेकिन चरणदास चोर , मिटटी की गाडी , गावं के नाम ससुराल , आगरा बाज़ार , लाला शोहरत राय देखना है तो उसे सिर्फ हबीब तनवीर ही दिखायेगे | शौकिया रंगमंच करने वालो को हबीब जी का यह तरीका शायद उचित न भी लगे लेकिन जो प्रोफेशनल थियेटर कर रहे है वे इसे भी एक उपलब्धि ही कहेगे कि व्यवसायिक रंगमंच करने का यह एक व्यवसायिक अंदाज़ है |
हबीब तनवीर का रंगकर्म इस अंदाज़ का रंगकर्म था जिसमे कठिन से कठिन दृश्य को सरल से सरलतम बना दिया जाता था | मिटटी की गाडी , लाला शोहरत राय तथा आगरा बाज़ार इसके सब से अच्छे उदाहरण है | गीत , संगीत और नृत्य के माध्यम से कथानक को आगे बढाने का उनका दिलकश अंदाज़ समूचे भारतीय रंगमंच में उन्हें अलग से स्थापित करता है | चरनदास चोर में देवदास बंजारे का पंथी नृत्य और हिरमा की अमर कहानी में एक आदिवासी नृत्य का समावेश नाटक में भव्यता को स्थापित करने का उनका नुस्खा था | लोग यह भी कहते थे कि नृतक दल को पेमेंट देकर नचवा दिया इस में हबीब तनवीर का क्या कमाल है ? हबीब तनवीर का कमाल ऐसा करने में नहीं था उनका कमाल ऐसा सोचने में था | कारीगरी संसाधन के इंतेज़ाम में नहीं उसके इस्तेमाल में होती है | जिन लोगो ने हबीब जी के काम को समझा है वो जानते है कि हबीब जी अपने पात्रो को गढ़ते थे , अपने अभिनेता के अन्दर की गहराई को बखूबी नाप लेते थे और उसके अन्दर से उसका वह श्रेष्ठ निकाल लेते थे जिसके बारे में वह खुद अनजान था | हबीब तनवीर के नाटको का विषय उनकी पसंद का होता था लेकिन प्रस्तुतिकरण में दर्शको की पसंद को तरजीह दी जाती थी क्योकि अंततः नाटक दर्शको के लिए ही होता है | दर्शक ही उस पर सफल या असफल होने की मुहर लगाते है |
हबीब तनवीर का रंगमंच इत्मीनान का रंगमंच था , वे कभी जल्दबाज़ी में नाटक तैयार नहीं करते थे | बहुत ही धीमी आंच पर उनकी कल्पना पकती थी | एक ही दृश्य को कई कई दिनों तक अलग अलग अभिनेता से कराते रहना उनका शगल था , हर बार वो अभिनय की नई फुहारे पा ही लेते थे | समंदर थे लेकिन हमेशा बूंदों की खोज करते रहते | नाटक के हर दृश्य पर नहीं , नाटक की हर लाइन पर नहीं बल्कि नाटक के हर शब्द पर वे बारिकी से काम करते ,वे नाटक के एक एक शब्द में सौन्दर्य भर देते थे | हास्य का स्तर इतना शालीन और मस्ती भरा होता कि प्रेक्षागृह में ठहाके लगते , पल भर में चुटीला हास्य नुकीला व्यंग्य बन जाता तो दर्शक दंग रह जाते , संगीत की ऐसी सरिता बहती की दर्शक गुनगुनाने लगते , नृत्य का ऐसा समावेश होता की दर्शक झूमने लगता | हबीब तनवीर के रंगमंच का उरूज यह था कि लोग नाटक देखने दर्शक बन कर आते और वहाँ से अभिनेता बन कर जाते |
हबीब तनवीर सरकारी ग्रांट लेते थे क्योकि यह उनका अधिकार था , यह हर रंगमंच करने वाले का अधिकार है | हबीब जी सरकार से ग्रांट लेते ज़रूर थे लेकिन रंगमंच अपने अंदाज़ का करते थे | नया थियेटर में सरकार को खुश रखने का कोई उपक्रम नहीं था , इसका सब से बड़ा सबूत उनका नाटक “ हिरमा की अमर कहानी “ है , यह नाटक सरकारी तन्त्र के खिलाफ़ था , जिसमें बस्तर के राजा हिरम देव की हत्या का आरोप सरकारी मशीनरी पर लगाया गया था , यह नाटक हबीब साहब के गहन अध्ययन के पश्चात रचा गया था जिसे हबीब तनवीर डंके की चोट पर खेला करते थे |
हबीब तनवीर —– आप ने जो बेहतर रंगमंच करने की सोच , सीख , तरीके , इरादे और ज़िद के जो अंदाज़ छोड़ गए है , उसमे जो वज़न है , उसमे जो घनत्व है , उसमे जो पाकीज़गी है , उसमे जो दीवानगी है , उसमे जो कमेन्टमेंट है , उसमे जो चुनौती है वह किस तरह राह दिखा रही है , किस तरह हमारा प्रतिनिधित्व कर रही है यह कहने के लिए मै वो शब्द कहा से लाऊ जो आप के किरदार के अनुकूल हो , आप के कद को बयाँ कर सकू मै उस हैसियत का कलमकार नहीं हूँ | मै अपने पाठको से यही विनती करता हूँ कि मेरे शब्द नहीं मेरे इरादे को पढिये , शब्दों में अर्थ नहीं मेरी भावना को जानिये , मै कहना चाह रहा हूँ की ” हबीब तनवीर एक महान नाटककार थे , ऐसे महान व्यक्ति न जन्म लेते है न इनकी मृत्यु होती है , ये तो अवतरित होते है और फिर प्रस्थान कर जाते है ” |
अखतर अली
निकट मेडी हेल्थ हास्पिटल
आमानाका , रायपुर ( छत्तीसगढ़ )
मो.न. 9826126781

राम भक्तों के लिए

भारतीय सेना के नाम पर कर रहे है साइबर चोर ठगी – रहें सावधान

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रांची – आज कल साइबर चोर इंडियन आर्मी के नाम पर ठगी कर रहे है, ये चोर, इंडियन आर्मी के नाम पर सोश्ल मीडिया और ओलेक्स जैसे वेब्सीटेस पर अकाउंट खोल कर , भोले भाले लोगों को लूटते है , अब हम सबको थोड़ा सतर्क होना पड़ेगा और इंडियन आर्मी को बदनाम करने वालों के खिलाफ शक्त होना पड़ेगा , आजकल साइबर चोर फेसबुक , ओलेक्स , और मिलते जुलते साइट्स पर सामान ( कार , बाइक , मोबाइल फ़ोन ) बिक्री के लिए डालते है और इंडियन आर्मी में काम करता हु बोल के पैसे पहले माँगा के ठगी करते है , हमारी टीम ने ऐसे ही कई साइबर ठगो से बात की और उनकी ठगी को उजागर किया , ये आजकल हम सब साइबर ठुगों से कितना परेशान है ये साइबर चोर हमसबको बेवकूफ बना कर हमारा कमाया हुआ मेहनत का पैसा को हमसे ठग लेते है , फोटो में ऐसे कुछ ठग के द्वारा डाला हुआ एड का फोटो हमने दाल रहा है , बात करने पर इसने कहा मैं पुणे एयरपोर्ट पर आर्मी ड्यूटी पर हु और आपको ये गाडी आपके पते पर भेज दूंगा हमे इसको आर्मी ट्रैंपोर्टेशन चार्ज 3500 रुपया पहले देना पड़ेगा, इसी तरह से हमने फेसबुक , ओलेक्स , क्विकर पर बहुत सारे जाली एड देखे और सबसे बात किया 100 में से 99 एड वाले हमें जालसाज़ मिले , आप लोग तो ऑनलाइन खरीदारी करते है कुछ बातों का हमेशा ख्याल रखें , जो भी सामान आप खरदीना चाहे उसे देख , जांच परख कर ही खरीदे , फोटो या ऑनलाइन देख कर ना खरीदे , पेमेंट कभी भी ऑनलाइन न करें और हमेशा कॅश मे ही कीजिये , समान देखने के लिए अपने पते पर या भीड़भाड़ वाले जगह पर बेचने वाले को बुलाये , बेचने वाला अपने आप को आर्मी का बोले तो सावधान हो जाए ये 99% फ़्रौड होगा । इस समाचार को जाएदा से जाएदा शेयर करें और अपने दोस्तों को नुक्सान होने से बचाये

राम भक्तों के लिए
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