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Friday, March 20, 2026
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विभावि में राष्ट्रीय भूगर्भ संगोष्ठी का भव्य आयोजन, खनिज संसाधनों पर देशभर के विशेषज्ञों ने रखे विचार

विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के भूविज्ञान विभाग में शनिवार से “झारखंड के आर्थिक खनिज संसाधनों की भूविज्ञान एवं अन्वेषण” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। यह आयोजन झारखंड राज्य उच्च शिक्षा परिषद के सहयोग से आर्यभट्ट सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें देश के कई शीर्ष संस्थानों के विद्वानों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया।

भागीदारी और उद्घाटन समारोह:
इस संगोष्ठी में विभाग के स्नातकोत्तर समसत्र 2 और 4 के विद्यार्थियों के अलावा संत कोलंबस महाविद्यालय, रांची विश्वविद्यालय, डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, IIT-ISM धनबाद और IIT खड़गपुर जैसे संस्थानों के 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया।

मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने संगोष्ठी के आयोजन के लिए विभागाध्यक्ष प्रो. एच.एन. सिन्हा की सराहना की। उन्होंने उच्च शिक्षा में शिक्षकों की कमी पर चिंता जताते हुए कॉलेजों में ऑनलाइन कक्षाओं और संसाधन साझेदारी की आवश्यकता बताई।

वित्त सलाहकार श्री अखिलेश शर्मा, कुलसचिव डॉ सादिक रज़्ज़ाक और प्रॉक्टर डॉ मिथिलेश कुमार सिंह भी मंचासीन रहे। डॉ मिथिलेश ने पर्यावरणीय समझौतों में विकासशील देशों की भूमिका पर रियो डी जनेरियो सम्मेलन का उल्लेख करते हुए विचार साझा किए।

संगोष्ठी में विमोचित शोध-संकलन और तकनीकी सत्र:
सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से संगोष्ठी की विस्तारित शोध-सार पुस्तिका (Extended Abstract Volume) का विमोचन किया। पहले दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित हुए, जिनकी अध्यक्षता क्रमशः डॉ एस.के. सिन्हा और डॉ हर्षवर्धन ने की।

विशेषज्ञ वक्ताओं के प्रमुख बिंदु:

  • श्री मनोज कुमार (निदेशक, खान एवं भूविज्ञान, झारखंड सरकार): कोडरमा-गिरिडीह के लिथियम युक्त मिका-पेग्माटाइट पर विस्तृत प्रस्तुति
  • प्रो. एस. सारंगी (आईएसएम धनबाद): बोकारो कोलफील्ड में लैम्फ्रोफायर अंतःप्रवेश और लाइट रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मौजूदगी
  • श्री कुमार अमिताभ (अपर निदेशक, खान एवं भूविज्ञान विभाग): झारखंड की खनिज-आधारित अर्थव्यवस्था पर व्याख्यान
  • श्री बोधिसत्व हाजरा (वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीआईएमएफआर): रॉक-इवैल तकनीक का हाइड्रोकार्बन भूविज्ञान में उपयोग
  • डॉ प्रीति कुमारी (दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय): सिमडेगा क्षेत्र के ग्रेनाइटिक कॉम्प्लेक्स में लैम्फ्रोफायर और एम्फीबोलाइट शैलों पर शोध
  • डॉ दिव्या कुमारी (बीरबल साहनी जीवाश्म विज्ञान संस्थान): दक्षिण करनपुरा बेसिन में पर्मियन कोयला शृंखला की स्रोत शैलों की विशेषताएं
  • डॉ दिनेश कुमार (पटना विश्वविद्यालय): भवनाथपुर क्षेत्र के सेमरी समूह की भू-रासायनिक व तलछटी विशेषताओं का विश्लेषण

समापन एवं अन्य गतिविधियाँ:
संगोष्ठी का समापन डॉ एच.एन. सिन्हा द्वारा तकनीकी सत्रों के संक्षिप्त विश्लेषण के साथ हुआ। मंच संचालन अंचित सृजन और तिलोतमा भारती ने किया, जबकि सांस्कृतिक प्रस्तुति प्रतिभानंद सिंह के समूह द्वारा दी गई।

आयोजन समिति में सक्रिय योगदान देने वाले:
डॉ भैया अनुपम, डॉ हर्षवर्धन कुमार, प्रतिभानंद सिंह, अनिल कुमार, ऋतुजया केरकेट्टा, शिल्पी तिर्की, शीला सहित विभाग की पूरी टीम ने आयोजन की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भूगर्भ विज्ञान पर केंद्रित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी ने न केवल झारखंड की खनिज संपदा के भविष्य पर प्रकाश डाला, बल्कि विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को प्रासंगिक विषयों पर गहन जानकारी का मंच भी प्रदान किया। विश्वविद्यालय प्रशासन के सहयोग और विशेषज्ञों की सहभागिता से यह आयोजन शैक्षणिक दृष्टिकोण से अत्यंत सफल रहा।

News – Vijay Chaudhary


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