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Sunday, March 8, 2026
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HomeLocal NewsHazaribaghविभावि मानवविज्ञान विभाग द्वारा जनजातीय दिवस के आलोक में समारोह आयोजित

विभावि मानवविज्ञान विभाग द्वारा जनजातीय दिवस के आलोक में समारोह आयोजित

जनजातियों के जीवन दर्शन से हमें सीखने की जरूर है: कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा

सोहराय चित्रांकन में अंशुश्री हेसा तथा भाषण में मैन्युअल हेंब्रम प्रथम

आदिवासी जीवन संस्कृति को जानने व समझने का आशय मानव समाज के अतीत को जानने और समझने से है। आदिवासी परंपराएं शाश्वत परंपराएं है। यह मानव जीवन मूल्य है। जनजातियों के जीवन दर्शन से हमें बहुत कुछ सीखना है। उक्त बातें विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो चंद्र भूषण शर्मा ने आर्यभट्ट सभागार में कही। प्रो शर्मा शुक्रवार को मानव विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित आदिवासी दिवस कार्यक्रम के समापन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।

कुलपति ने कहा आदिवासी के इतिहास को समावेशित करते हुए मानव इतिहास को देखने की आवश्यकता है। जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करने की आवश्यकता है। आज जनजातीय समाज विकास के पथ पर अग्रसर है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मानवविज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ विनोद रंजन ने कहा कि आदिवासियत के कई तत्व हम खो रहे हैं। इन्हें संजीदगी के साथ सहेजने की जरूरत है। कुलपति के मार्गदर्शन में मानवविज्ञान विभाग इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर वृहद कार्य योजना तैयार करेगा।

विश्वविद्यालय के वित्त सलाहकार श्री अखिलेश शर्मा, वन विभाग के वरीय अवकाश प्राप्त अधिकारी मनीष अरविंद तथा विज्ञान के संकायअध्यक्ष डॉ एच एन सिन्हा बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम को सुशोभित किए। रोटरी इंटरनेशनल के हजारीबाग इकाई के अध्यक्ष श्री सुरेश प्रसाद तथा रोटेरियन विनय कुमार, श्रीमती सरोज कुमार तथा पुष्पा कुमारी के सहयोग से पौधारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

आज आयोजित पेंटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिक्षाशास्त्र विभाग की अंशुश्री हेसा, द्वितीय स्थान शिक्षाशास्त्र विभाग की जया गुर्ती मिंज तथा तृतीय स्थान यूसेट की स्मृति हेंब्रम को प्राप्त हुआ। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान शिक्षा शास्त्र विभाग के मैनुअल हेंब्रम, द्वितीय स्थान यूएलसी की मुस्कान कुमारी और तृतीय स्थान मानव विज्ञान की पूजा कुमारी ने प्राप्त किया। दोनों ही प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका में डॉ नीरज डांग, डॉ अर्चना रीना धान तथा डॉ विनीता बानकीरा रहे।

इसके अलावे झारखंड की जनजातियां विषय पर मुक्त प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। अपने परिचित आकर्षक शैली से इसका संचालन पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ गंगानाथ झा ने किया। समापन समारोह का संचालन डॉ जॉनी रुफिना तिर्की ने किया।

अंत में झारखंड अलग राज्य के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन पर एक लघु चलचित्र दिखाया गया। उसके बाद उनके सम्मान में दो मिनट का मौन धारण किया गया।

न्यूज़ – विजय चौधरी 


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