24.6 C
Ranchi
Saturday, March 7, 2026
Advertisement
HomeLocal NewsGumlaगुमला में नवजात शिशु खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, तीन स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त

गुमला में नवजात शिशु खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, तीन स्वास्थ्यकर्मी बर्खास्त

गुमला जिला प्रशासन ने नवजात शिशु खरीद-बिक्री के इंटर-स्टेट रैकेट का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। इस मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े तीन स्वास्थ्यकर्मियों को दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में साबित हुआ है कि ये स्वास्थ्यकर्मी प्रसूता महिलाओं को बहला-फुसलाकर नवजात शिशुओं को लाखों रुपये में बेचने में शामिल थे।

गुमला से रांची, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा तक फैला नेटवर्क

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रायडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबंधित बीटीटी दीदी सुमन कुजूर, सहिया पार्वती देवी (माझाटोली, शंख मोड़ रायडीह) और सीएचओ रिमझिम लकड़ा (आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बांसडीह रायडीह) का नाम इस घोटाले में सामने आया है।
यह रैकेट सिर्फ गुमला तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड की राजधानी रांची, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा तक फैला हुआ था।

24 घंटे में दोनों नवजात शिशुओं की सकुशल बरामदगी

गुमला उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं संज्ञान लिया और जांच टीम गठित की। टीम को 24 घंटे के भीतर दोनों नवजातों की सकुशल बरामदगी का निर्देश दिया गया था।
इस आदेश के बाद गुमला सदर थाना प्रभारी महेंद्र करमाली, सीडब्ल्यूसी (बाल कल्याण समिति) और बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने संयुक्त अभियान चलाया। सोमवार की शाम चार बजे से शुरू हुई कार्रवाई रात साढ़े नौ बजे तक चली। बड़ी मशक्कत के बाद दोनों नवजातों को ढूंढ निकाला गया।

पहले नवजात को ओडिशा राज्य में ले जाया गया था। खरीदारों ने प्रशासनिक दबाव के चलते उस बच्चे को लेकर रांची और फिर गुमला के टावर चौक स्थित शहीद चौक पर पहुंचकर अधिकारियों को सौंप दिया।
दूसरे नवजात को सीएचओ रिमझिम लकड़ा के जरिए गुमला मुख्यालय के लूथरन मिशन स्कूल के पीछे, कब्रिस्तान क्षेत्र से रात करीब नौ बजे बरामद किया गया। दोनों शिशुओं को बाद में गुमला सदर अस्पताल के चाइल्ड सेंटर में भर्ती कराया गया।

प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ मामला, खुला बड़ा रैकेट

जांच से जुड़े सूत्र बताते हैं कि पूरा मामला तब उजागर हुआ जब रायडीह थाना क्षेत्र की मोकरो गांव की एक अविवाहित युवती प्रेम प्रसंग में गर्भवती हुई और उसने छत्तीसगढ़ में बच्चे को जन्म दिया। उस नवजात को बाद में रांची के रास्ते ओडिशा भेज दिया गया।
दूसरे मामले में रायडीह प्रखंड के कुडो छत्तरपुर निवासी जस्टिन एक्का की पत्नी सुमन एक्का ने 10 सितंबर की सुबह प्रसव के बाद नवजात को जन्म दिया था। सहिया और बीटीटी दीदियों ने सुमन को झांसे में लेकर बच्चे को बेचने के लिए राजी कर लिया। सौदा तय होने के बाद इसे आधिकारिक रूप देने के लिए स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराए गए। प्रसूता को डिस्चार्ज के बाद घर छोड़ दिया गया जबकि शिशु को तस्कर अपने साथ ले गए।

झगड़े के बाद खुला राज, प्रशासन ने की त्वरित कार्रवाई

लेन-देन को लेकर सहिया और बीटीटी दीदी के बीच हुए विवाद के बाद मामला सामने आया। जानकारी मिलते ही उपायुक्त ने कार्रवाई शुरू की और सिविल सर्जन ने तत्काल प्रभाव से तीनों आरोपित स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा समाप्त कर दी।
प्रशासन ने माना है कि यह मामला न केवल मानवता के नाम पर कलंक है बल्कि स्वास्थ्य तंत्र पर भी गंभीर प्रश्न उठाता है। आगे की जांच जारी है और पुलिस रैकेट से जुड़े अन्य व्यक्तियों की पहचान में जुटी है।

न्यूज़ – गणपत लाल चौरसिया 


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading