27.6 C
Ranchi
Saturday, March 7, 2026
Advertisement
HomeNationalतेजस्वी तेज बनने के चक्कर में बुरी तरह से मात खाए, टिकट...

तेजस्वी तेज बनने के चक्कर में बुरी तरह से मात खाए, टिकट बंटवारे में पैसे के खेल का आरोप लगा और अंत में…परिणाम से पूर्व सीएम बनने का ख्वाब भी टूटा

______________________________________________

सुनील सिंह

बिहार में महागठबंधन की ऐतिहासिक हार के नायक तेजस्वी हैं। क्योंकि महागठबंधन का चेहरा वही थे। नीतीश वर्सेस तेजस्वी के बीच यह चुनाव था। तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने को लेकर इतने आत्मविश्वास में थे कि उन्होंने शपथ ग्रहण की तारीख भी तय कर दी थी। कहा था 14 को नतीजे आएंगे और 18 को वह शपथ लेंगे। चुनाव परिणाम को लेकर इतना आत्मविश्वास मैंने पहली बार किसी नेता में देखा। जो चुनाव परिणाम से पहले शपथ ग्रहण की तिथि तय कर रहा है। इसे अहंकार नहीं तो और क्या कहेंगे।

वैसे तो चुनाव परिणाम की कई दिनों तक समीक्षा होगी। दोनों ओर से कई कारण बताए जाएंगे। लेकिन मूल कारण तेजस्वी का अहंकार ही है। लालू यादव के बीमार होने के कारण तेजस्वी ने आरजेडी पर कब्जा कर लिया है। लालू भी पुत्रमोह में फंस गए हैं। उनकी आखरी इच्छा यही थी कि तेजस्वी मुख्यमंत्री बनें। लेकिन अब भविष्य में शायद ही ये इच्छा पूरी हो।

संजय यादव पर पार्टी को हांकने का आरोप

कहते हैं कि तेजस्वी ने टिकट बंटवारे में खूब मनमानी की। कार्यकर्ताओं और नेताओं की उपेक्षा का आरोप लगा। टिकट को लेकर बोली लगी। एक-एक टिकट के लिए चार से पांच करोड रुपए तक लिए जाने की बात सामने आई। पैसे के बल पर कई लोगों ने टिकट हथिया लिया। इनमें एक-दो को छोड़कर सभी उम्मीदवार हार गए।

तेजस्वी को इतना अहंकार हो गया था कि वह कार्यकर्ताओं से मिलते तक नहीं थे। हरियाणा के उनके मित्र राज्यसभा सांसद संजय यादव बिहार को हांक रहे थे। संजय यादव जिसको चाहते थे वही तेजस्वी से मिल सकता था। तेज प्रताप भी संजय यादव के कारण पार्टी से निकाले गए।

तेजस्वी मुख्यमंत्री बनने के लिए इतने बेताब थे कि उन्हें जमीनी हकीकत की जानकारी तक नहीं थी। चुनाव जीतने को लेकर रोज झूठी घोषणाएं कर रहे थे। जनता ने उनकी घोषणाओं पर भरोसा नहीं किया। क्योंकि उन्हें पता था कि ये झूठी घोषणाएं हैं।

चुनाव में एनडीए जहां एकजुट था, वहीं महागठबंधन में पूरी तरह बिखराव और गुटबाजी हावी रहा। महागठबंधन के प्रमुख नेता राहुल गांधी बिहार में मस्ती करने आ रहे थे। वोट चोरी का आरोप लगाकर उन्होंने मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की। लेकिन सफल नहीं हुए।

मुस्लिम वोटरों ने भी राजद-कांग्रेस को निराश किया

बिहार ने पहली बार जातिवाद की राजनीति से ऊपर उठकर विकास के मुद्दे पर वोट किया है। तमाम जातीय समीकरण ध्वस्त हो गए। राजद का माई समीकरण भी ध्वस्त हो गया। यादवों ने भी राष्ट्रीय जनता दल को खुलकर साथ नहीं दिया। यादव समाज का एक बड़ा वर्ग यह महसूस कर चुका है कि लालू परिवार यादव के नाम पर परिवारवाद की राजनीति कर रहा है। यादव जाति के विकास से कोई लेना-देना नहीं है। महागठबंधन को मुस्लिम वोटरों का भी पूरी तरह साथ नहीं मिला।

बिहार में महिलाओं और युवाओं का एक नया समीकरण बना है। जिसने एनडीए का साथ दिया। इस करण प्रचंड बहुमत मिला है। पीएम मोदी ने भी इसकी चर्चा की है। तेजस्वी की हालत राघोपुर में ही खराब हो गई। यादवों के गढ़ में बहुत मुश्किल से जीत पाए।

राघोपुर के लोगों में तेजस्वी को लेकर काफी नाराजगी थी। तेजस्वी अपने क्षेत्र में भी नहीं जाते हैं। उन्हें यह गुमान था कि यादव उनका साथ देंगे और वह चुनाव आसानी से जीत जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया बड़ी मुश्किल से जीत मिली है। महागठबंधन के नेता तेजस्वी थे इसलिए हार की पूरी जिम्मेदारी उनकी है। बिहार की जनता ने मुख्यमंत्री बनने का सपना तोड़ दिया है।

 


Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments

Discover more from Jharkhand Weekly - Leading News Portal

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading