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Monday, August 3, 2026
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सावन के पहले सोमारी को शिवालयों में शिवभक्तों की उमड़ी भीड़ , पूरे भक्ति भाव से शिवगुरु, देवों के देव, महादेव का किया गया जलाभिषेक

गुमला (ब्यूरो प्रमुख ) – गणपत लाल चौरसिया

ओम नमः शिवाय, हर हर महादेव, हर हर गंगे, जय माता पार्वती,आदि गगन भेदी नारों से गूंजेमन हुआ पूरा क्षेत्र

गुमला : – पहले सावन के दिन गुमला जिला के समस्त शिवालयों मैं भक्तों की उमड़ी भीड़, हर हर महादेव, हर हर गंगे,ओम नमः शिवाय, जय मां पार्वती आदि अन्य अनेक नारों से गंजेमन हुआ गुमला जिला के धार्मिक महत्व और जागृत देवी देवताओं के स्थलों और पर्यटन स्थलों से पूरा गुमला जिला भारा पड़ा हैं, सावन के पहले सोमारी के दिन श्री राम भक्त हनुमान के जन्मस्थली अंजन धाम, जहां जगह-जगह पर बिखरे पड़े हैं, शिवलिंग, भगवान परशुराम की तपोभूमि प्राचीन स्थल टांगीनाथ धाम, घागरा प्रखंड मुख्यालय स्थित देवकी धाम गुमला, गुमला जिला मुख्यालय स्थित बुढ़वा महादेव करम टोली गुमला के बुढ़वा महादेव एक पीपल पेड़ को चीरकर निकाले है (बुढ़वा महादेव), वासुदेव कोना, सिसई प्रखंड केग्राम नगर के शिवलिंग, पालकोट प्रखंड मुख्यालय स्थित दसभुजी मां एंव शिवालयों में श्री श्री 108 श्री देवों के
देव महादेव – भोलेनाथ का किया गया जलाभिषेक प्रातः होते ही शिव भक्तों की समस्त शिवालयों में भीड़ उम्र पड़ी, सभी शिव भक्त बड़े बूढ़े बुजुर्ग, नर नारी, युवक युक्तियां और छोटे-छोटे मासूम बच्चे सावन के ड्रेस,गरवे रंग के आकर्षक परिधानों में कंवर लिए हुए और हांथ में बेलपत्र आकर्षक फुल मलाई और जल का पात्र लिए हुए भोले शंकर के मंदिर पहुंचकर शिवलिंग पर किया जलाभिषेक और साथ ही साथ गगन भेजी नारों ओम नमः शिवाय, हर हर महादेव, हर हर गंगे, जय मां पार्वती आदि और अनेक तारों से पूरा क्षेत्र गुंजमन हो उठा, जगह-जगह पर शिव भक्तों का स्वागत किया गया, और अखंड हरी कीर्तन का आदि का दृश्य पूरे क्षेत्र को भक्ति मैय बना रहा था, मंदिर परिश्रम में नारियल,प्रसाद, चूड़ी सिंदूर, सावन से संबंधित अन्य अनेक वस्तुएं सहित मिठाई और चाट, आलू काटा, फूचका ( पानी पुरी – गोलगप्पा ) आदि के दुकान सजे हुए थे, जहां लोगों ने पूजा अर्चना के बाद, विभिन्न आकार प्रकार के व्यंजनों का लुफ्त उठाते दिखे, विशेष कर बच्चों में मिठाइयां, चाट,खिलौने और फोकना – बैलून खरीदने के लिए अभिभावकों को परेशान करते नजर आयें l,
[03/08, 3:18 pm] Ganpat Lal Chourasia: डुमरी प्रखंड में स्थित बाबा टांगीनाथ धाम झारखंड के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिव धामों में से एक माना जाता है। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास, इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत केंद्र है। उक्त मंदिर परिसर में स्थापित शिवलिंग और भगवान परशुराम की तपोभूमि में लोहे का एक विशाल फरसा (टांगी) स्थापित है, जिसमें जंग नहीं लगता है, उक्त टांगी को काटने के आरोपी लोहार परिवार का सर्वनाश हो गया था, तब से अब तक लोहार परिवार का कोई भी व्यक्ति शाम ढलने से पहले ही उक्त टांगीनाथ धाम से चला जाता है, भगवान परशुराम के उक्त टांगी के नाम पर ही उक्त स्थान का नाम टांगीनाथ धाम पड़ा हैं और तो और सदियों बीत जाने के बावजूद उक्त फरसे( टाँगी ) पर अब तक जंग नहीं लगना आज के आधुनिक दुनिया में भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं,वैज्ञानिकों लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में महान तपस्वी भगवान परशुराम ने उक्त स्थान पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर साक्षात भगवान देवों के देव महादेव स्वयं प्रकट हुए थे और तपस्वी भगवान परशुराम की प्रार्थना से खुश होकर उक्त स्थान को शिवधाम का आशीर्वाद दिया था, कहा जाता है कि उसी समय यहां शिवलिंग की स्थापना हुई थी और तपस्वी भगवान परशुराम ने अपनी लोहे की टांगी (फरसा) को उक्त स्थान पर स्थापित कर दी थी , जो आज भी उसी अवस्था में विद्यमान है। मान्यता है कि उक्त दिव्य फरसे ( टाँगी ) को आज तक कोई भी व्यक्ति अपनी अकड़, बाहुबल और घमंड दिखाकर उक्त फरसा ( टाँगी ) को हिला नहीं सका है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान देवों के देव महादेव बाबा टांगीनाथ के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि महाशिवरात्रि और सावन माह में झारखंड ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों से शिव भक्त टांगीनाथ धाम माथा टेकने और अपनी मनीता पूर्ण करने के लिए बाबा टांगीनाथ के दरबार में हाजिरी लगाते हैं l


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