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Monday, August 24, 2026
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विकास अनुदान व मध्याह्न भोजन का पैसा रुका, वेतन से स्कूल खर्च चला रहे प्राचार्य

न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

राजकीयकृत मध्य विद्यालय नगर परहाटोली

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित प्रखण्ड-चैनपुर,सरकारी विद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच जिले के 7,56 प्राथमिक व 4,61 मध्य विद्यालय गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि कई विद्यालयों में चाक-डस्टर खरीदने तक के लिए राशि उपलब्ध नहीं है, जबकि विद्यालय विकास, खेल गतिविधियों, पीटीएम और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओ परिणामस्वरूप विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और शिक्षक अपने निजी वेतन से खर्च कर व्यवस्था को किसी तरह बनाए हुए हैं। जानकारी के अनुसार पिछले शैक्षणिक सत्र 2025-26 में विद्यालय विकास अनुदान, खेलो झारखंड योजना की राशि तथा अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम) के लिए मिलने वाली राशि अधिकांश विद्यालयों को प्राप्त नहीं हुई। इसके बावजूद विद्यालयों के संचालन, रखरखाव और आवश्यक व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए प्रधानाध्यापकों ने अपने स्तर से खर्च किया। विद्यालयों में रंग-रोगन, छोटे-मोटे मरम्मत कार्य, रजिस्टर व पंजियों की खरीद, चाक-डस्टर, स्टेशनरी सामग्री, साफ-सफाई और अन्य आवश्यक कार्यों का खर्च शिक्षकों को अपनी जेब से वहन करना पड़ा। शिक्षकों का कहना है कि विद्यालयों में उपयोग होने वाले कई आवश्यक सामान स्थानीय दुकानों से उधार लेकर खरीदे गए हैं।

समय बीतने के साथ दुकानदार भी बकाया भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं। ऐसे में कई प्रधानाध्यापक आर्थिक और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की योजनाओं का क्रियान्वयन तो विद्यालय स्तर पर पूरी जिम्मेदारी के साथ कराया जा रहा हैं, और विद्यालय विकास अनुदान की राशि केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती थी। पिछले वित्तीय वर्ष में यह राशि प्राप्त नहीं हुई थी। इस वर्ष राशि प्राप्त होगी या नहीं, इसकी स्थिति बाद में स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में पीटीएम की राशि नहीं मिली थी, इस साल उम्मीद है कि अगस्त तक मिल जाएगी। डीएसई नूर खान ने कहा कि मध्याह्न भोजन योजना का पैसा दिसंबर तक दिया जा चुका है। वित्तीय संकट का सबसे बड़ा असर मध्यान्ह भोजन योजना पर दिखाई दे रहा है। विभागीय निर्देशों के अनुसार सभी विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन का नियमित संचालन अनिवार्य है, लेकिन चालू सत्र में इस मद में भी विद्यालयों को राशि प्राप्त नहीं हुई है। इसके बावजूद बच्चों का भोजन बाधित न हो, इसके लिए सरस्वती वाहिनी माता समिति, प्रधानाध्यापक और शिक्षक स्वयं पैसे लगाकर या उधार लेकर खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन से जुड़े लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर दुकानदारों ने उधार देना भी सीमित कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन पर संकट गहरा सकता है। यदि समय पर राशि नहीं मिली तो विद्यालयों के लिए योजना को नियमित रूप से चलाना कठिन हो जाएगा।


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