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Friday, October 9, 2026
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गुमला जिला में श्रावण के चौथे और अंतिम सोमवारी को समस्त शिवालयों में शिव भक्तों ने किया जलाभिषेक

न्यूज – गनपत लाल चौरसिया – ब्यूरो प्रमुख – गुमला

हर हर महादेव, हर हर गंगे, ओम् नमः शिवाये , जय माता पार्वती, बोल बम का नारा है, भोलेनाथ एकमात्र सहारा हैं, आदि नारों से गूंजेमन हुआ समस्त गुमला जिला

गुमला : – गुमला जिला में श्रावण के चौथी और अंतिम सोमवार पर बाबा टांगीनाथ, अंजन धाम, बाबा देवकी धाम, बुढ़वा महादेव, बाबा वासुदेव कोना, सहित समस्त जिले के अन्य अनेक शिवालयों में शिव भक्तों का उमड़ा आस्था का जनसैलाब, श्रावण मास के पावन चौथी और अंतिम सोमवार को सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। तड़के प्रातः होते ही उक्त मंदिर परिसरों में हर-हर महादेव, हर हर गंगे, उमापति महादेव की जय, शिव है जहां शक्ति और भक्ति है वहां, जय शिव और बोल बम आदि के गगनभेदी जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। बाबा के दर्शन और जलाभिषेक की लालसा में हजारों की संख्या में कांवरिये और श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में पहुंचे। जिससे पूरा क्षेत्र शिवमय और भक्तिमय हो गया, पूरे पहाड़ी क्षेत्र के बीच प्राकृतिक शिवलिंग एंवृ गुमला जिला मुख्यालय स्थित करमटोली ग्राम में पेड़ को चिरकर निकले स्वयंभू बाबा भोलेनाथ, बुढ़वा महादेव , टांगीनाथ शक्ति और भक्ति का प्रतीक और भगवान परशुराम बाबा के तपस्वी स्थल पर स्थापित विशाल त्रिशूल टांगी और भगवान परशुराम के त्रिशूल और टांगी अभी भी साक्षात बाबा टांगीनाथ मंदिर परिसर में स्थापित है भगवान परशुराम के त्रिशूल और टांगी , अंजन धाम, जहां चारों तरफ बिखरे पड़े हैं शिवलिंग, भगवान श्री राम के अनन्य भक्त वीर हनुमान की जन्मस्थली देवकी धाम, वासुदेव कोना सहित जिले अन्य अनेक क्षेत्रों में स्थापित हैं , उक्त शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग से श्रद्धा और विश्वास से मांगी गई इच्छाएं पूर्ण होती है, जहां शिव भक्त समय-समय पर पहुंच कर जलाअभिषेक, पूजा अर्चना, और अपनी अपनी मनीता पूर्ण होने पर और अपनी श्रद्धा भक्ति के साथ उक्त शिव धामों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना सहित माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं शिवालय , जहां श्रद्धालु स्नान कर पवित्र गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत और सुगंधित पुष्प अर्पित किए। भक्तों ने कतारबद्ध होकर पूरे विधि-विधान के साथ और
हर-हर महादेव, हर हर गंगे, जय मां पार्वती, आदि के जयकारों से गुंजायमान हुआ पूरा क्षेत्र,
बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए उमड़ी कांवरियों व श्रद्धालुओं का जन सैलाब, जिले के समस्त शिवालयों में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की गई और अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की मनोकामना मांगी गई। श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति पूरी तरह अलर्ट नजर आई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं के लिए बैरिकेडिंग बनाकर कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था की गई, श्रावणी मेला प्रबंध समितियों और पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे, जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के सुगमता से बाबा के दर्शन और जलाभिषेक का सौभाग्य प्राप्त हुआ। देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी था। कांवरियों के उत्साह और भक्ति के आगे लंबी कतारों की ‘थकान फीकी नजर आई। शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में श्रावण के चौथे और अंतिम सोमवार का यह धार्मिक आयोजन अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ, शिव भक्त कांवरियों, श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बोल-बम, हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे,और चौथी और अंतिम सोमवारी के पावन अवसर पर पूरा गुमला जिले के समस्त शिवालयों और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गई। केसरिया वस्त्रों में सजे कांवरियों से मेला क्षेत्र का हर मार्ग और गली गुलजार हो उठा। चारों ओर गूंजते शिवभक्ति के उद्घोष और घंटों-घड़ियालों की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और मुस्तैद नजर आया। आधी रात से ही प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी मेला क्षेत्र में तैनात रहे तथा सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखते दिखाई दिए। आधुनिक निगरानी व्यवस्था एवं विभिन्न नियंत्रण बिंदुओं के माध्यम से चौथी और अंतिम सोमवारी का यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया, श्रावण के चौथी और अंतिम सोमवारी पर बाबा टांगीनाथ, अंजन धाम, बाबा देवकी धाम, बुढ़वा महादेव, बाबा वासुदेव कोना, सहित समस्त जिले के शिवालयों में शिव भक्तों का उमड़ा आस्था का सैलाब श्रावण मास के पावन चौथी और अंतिम सोमवार को सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में आस्था, भक्ति और श्रद्धा का अलौकिक दृश्य देखने को मिला। तड़के प्रातः होते ही उक्त मंदिर परिसरों में हर-हर महादेव, हर हर गंगे, उमापति महादेव की जय, शिव है जहां शक्ति और भक्ति है वहां, जय शिव और बोल बम आदि के गगनभेदी जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। बाबा के दर्शन और जलाभिषेक की लालसा में हजारों की संख्या में कांवरिये और श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में पहुंचे। जिससे पूरा क्षेत्र शिवमय और भक्तिमय हो गया, पूरे पहाड़ी क्षेत्र के बीच प्राकृतिक शिवलिंग एंव पेड़ चिरकर निकले बुढ़वा महादेव करम टोली गुमला , टांगीनाथ शक्ति के भक्ति का प्रतीक और परशुराम बाबा के तपस्वी स्थल पर स्थापित विशाल त्रिशूल टांगी और विराजमान बाबा टांगीनाथ, अंजन धाम, देवकी धाम, वासुदेव कोना सहित जिले अन्य अनेक स्थापित शिवलिंग से श्रद्धा और विश्वास से मांगी गई इच्छाएं पूर्ण होती है, जहां शिव भक्त पहुंच कर जिला अभिषेक, पूजा अर्चना, और अपनी अपनी मनीता पूर्ण होने पर और अपनी श्रद्धा भक्ति के साथ उक्त शिव धामों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना सहित माथा टेकने के लिए श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, जहां श्रद्धालु स्नान कर पवित्र गंगाजल, कच्चा दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, अक्षत और सुगंधित पुष्प अर्पित किए। भक्तों ने कतारबद्ध होकर पूरे विधि-विधान के साथ और
हर-हर महादेव, हर हर गंगे, जय मां पार्वती, आदि के जयकारों से गुंजायमान हुआ पूरा क्षेत्र,
बाबा भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए उमड़ी कांवरियों व श्रद्धालुओं का जन सैलाब, जिले के समस्त शिवालयों में भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की गई और अपने परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की मनोकामना मांगी। श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ को ध्यान में रखते हुए स्थानीय पुलिस प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति पूरी तरह अलर्ट नजर आई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए श्रद्धालुओं के लिए बैरिकेडिंग बनाकर कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था की गई, श्रावणी मेला प्रबंध समितियों और पुलिस के जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात रहे, जिससे श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के सुगमता से बाबा के दर्शन और जलाभिषेक का सौभाग्य प्राप्त हुआ। देर शाम तक श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला जारी था। कांवरियों के उत्साह और भक्ति के आगे लंबी कतारों की ‘थकान फीकी नजर आई। शांतिपूर्ण और अनुशासित माहौल में श्रावण के चौथे और अंतिम सोमवार का यह धार्मिक आयोजन अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ।
शिव भक्त कांवरिया श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बोल-बम, हर-हर महादेव और ॐ नमः शिवाय के जयघोष के साथ अपनी बारी का इंतजार करते रहे, चौथी और अंतिम सोमवारी के पावन अवसर पर पूरा गुमला जिले के समस्त शिवालयों और पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गई। केसरिया वस्त्रों में सजे कांवरियों से मेला क्षेत्र का हर मार्ग और गली गुलजार हो उठा। चारों ओर गूंजते शिवभक्ति के उद्घोष और घंटों-घड़ियालों की मधुर ध्वनि ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और मुस्तैद नजर आया। आधी रात से ही प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी मेला क्षेत्र में तैनात रहे तथा सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखते दिखाई दिए। आधुनिक निगरानी व्यवस्था एवं विभिन्न नियंत्रण बिंदुओं के माध्यम से चौथी और अंतिम सोमवारी का यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।

गुमला. गुमला जिले में कई ऐसे प्राचीन शिवस्थल हैं, जिनके

इतिहास और स्थापना काल की स्पष्ट जानकारी किसी को नहीं है. इन्हीं में कामडारा प्रखंड के सरिता पंचायत स्थित पहाड़गांव आमटोली का प्राचीन शिव मंदिर भी शामिल है. जंगल और पहाड़ों के बीच प्रकृति की गोद में स्थित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का इतिहास पुराना है. मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान देवों के देव महादेव विराजमान हैं.
बताया जाता है कि न सीमेंट, न छड़, पत्थरों से बना है प्राचीन शिवालय (मंदिर)
उक्त मंदिर का निर्माण भी प्राचीन पद्धति से पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर किया गया है. इसमें सीमेंट और छड़ का इस्तेमाल नहीं हुआ है. ग्रामीणों का कहना है की वर्षों से आंधी-तूफान झेलने के बावजूद मंदिर को अब तक कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, इसे लोग भगवान शिव की कृपा मानते हैं, उक्त. मंदिर से सटे गुप्त गंगा का विशेष महत्व है. जहां से सालों भर 3,65 दिन पानी निरंतर बहता रहता हैं … श्रद्धालु उक्त गुप्त गंगा से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. सावन माह में मंदिर परिसर में मेला लगता है और पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया जाता हैं, भक्तगण सुख समृद्धि और अपनी मनोकामना पूर्ति की मन्नत मांगने दूर-दराज से पहुंचते हैं, शिव भक्त बिहार, बंगाल, ओड़िशा सहित अन्य राज्यों से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है की मंदिर में पूरी श्रद्धा से मन्नत मांगने पर मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. यही कारण है कि कई दिग्गज नेता और बड़े अधिकारी भी यहां पूजा-अर्चना के लिए आते रहे हैं. मंदिर परिसर में हाल के वर्षों में बजरंगबली, माता पार्वती, भगवान गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाये गये हैं, जहां सालों भर श्रद्धालु पूजा करने पहुंचते हैं.
उक्त मंदिर परिसर की विकास की पहल शुरू हुई, लेकिन आगे नहीं बढ़ सकी, स्थानीय लोगों ने प्राचीन शिव मंदिर और गुप्त गंगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग जिला प्रशासन से की है. उक्त मंदिर के विकास और इसकी पहचान को व्यापक बनाने की पहल शुरू की गई थी. जो अधूरा पड़ा हुआ है, और अपनी विकास की बाट जोह रहा है, उक्त मंदिर में सड़क और रेल दोनों मार्गों से पहुंचना आसान हैं
यह मंदिर कामडारा प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोम दूर पहाड़गांव में स्थित है. यहां सड़क के साथ रेल मार्ग से यहाँ पहुंचा जा सकता है. पकरा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब एक किमी है. सड़क मार्ग से बाकूटोली होते हुए बक्र मोड़ और पकरा मंदिर टोली के रास्ते मंदिर तक पहुंचा जा सकता है.


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