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Tuesday, August 25, 2026
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पत्थरों से खड़ा शिवालय, जहां सालभर बहती है ‘गुप्त गंगा’; सावन में दूर-दराज से पहुंचते हैं श्रद्धालु

गुमला न्यूज़ ब्यूरो – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला: गुमला की पहचान सिर्फ घने जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक खूबसूरती से नहीं, बल्कि उन प्राचीन धार्मिक स्थलों से भी है, जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। जिले के कामडारा प्रखंड के सरिता पंचायत अंतर्गत पहाड़गांव आमटोली में स्थित प्राचीन शिव मंदिर ऐसा ही एक आस्था का केंद्र है। जंगल और पहाड़ियों के बीच प्रकृति की गोद में बसे इस शिवालय की खासियत इसकी प्राचीन बनावट और इससे जुड़ी मान्यताएं हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर की स्थापना कब और किसने की, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। हालांकि, वर्षों से यहां पूजा-अर्चना होती आ रही है और श्रद्धालुओं की गहरी आस्था इस स्थल से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि इस प्राचीन मंदिर में स्वयं देवों के देव महादेव विराजमान हैं।

बिना सीमेंट और छड़ के पत्थरों से बना है मंदिर

इस शिवालय की सबसे खास बात इसका निर्माण है। मंदिर को पारंपरिक पद्धति से पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर रखकर बनाया गया है। निर्माण में न तो सीमेंट का इस्तेमाल हुआ है और न ही छड़ का। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आंधी-तूफान और मौसम की मार झेलने के बावजूद मंदिर की संरचना आज भी कायम है। श्रद्धालु इसे भगवान शिव की कृपा से जोड़कर देखते हैं।

मंदिर के पास बहती है ‘गुप्त गंगा’

शिव मंदिर से सटी ‘गुप्त गंगा’ भी इस धार्मिक स्थल को विशेष बनाती है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यहां से सालभर पानी बहता रहता है। श्रद्धालु इसी जलधारा से जल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। सावन के महीने में इस स्थल की धार्मिक रौनक और बढ़ जाती है। मंदिर परिसर में मेला लगता है और पूजा-अर्चना के साथ अखंड हरिकीर्तन का आयोजन भी किया जाता है।

बिहार, बंगाल और ओड़िशा से पहुंचते हैं श्रद्धालु

सावन में इस शिवधाम पर सिर्फ स्थानीय श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि बिहार, बंगाल और ओड़िशा समेत दूसरे राज्यों से भी भक्त पहुंचते हैं। श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन कर जलाभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि के साथ अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की मन्नत मांगते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बड़े नेता और अधिकारी भी इस मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं।

समय के साथ मंदिर परिसर में बजरंगबली, माता पार्वती, भगवान गणेश समेत अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी बनाए गए हैं। इन मंदिरों में सालभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है।

विकास की राह देख रहा प्राचीन शिवधाम

इतनी धार्मिक और प्राकृतिक विशेषताओं के बावजूद यह स्थल अब भी अपेक्षित विकास की बाट जोह रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर और गुप्त गंगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल शुरू हुई थी, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से प्राचीन शिव मंदिर और गुप्त गंगा को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की है, ताकि इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल को व्यापक पहचान मिल सके।

सड़क और रेल दोनों से पहुंचना आसान

कामडारा प्रखंड मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर पहाड़गांव में स्थित इस मंदिर तक सड़क और रेल, दोनों मार्गों से पहुंचा जा सकता है। पकरा रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी करीब एक किलोमीटर बताई गई है। वहीं सड़क मार्ग से बाकूटोली, बक्र मोड़ और पकरा मंदिर टोली होते हुए शिव मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।

सावन की भीड़ के बीच जब जिले के टांगीनाथ, अंजन धाम, देवकी धाम, बुढ़वा महादेव और वासुदेव कोना समेत विभिन्न शिवालयों में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते हैं, उसी आस्था की कड़ी में पहाड़गांव का यह प्राचीन शिवालय भी श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है। पत्थरों से बनी इसकी संरचना, सालभर बहती गुप्त गंगा और जंगल-पहाड़ों के बीच इसका प्राकृतिक परिवेश इसे गुमला के अनछुए धार्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देता है।


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