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Monday, August 31, 2026
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छद्मरूप धारण करने से हक़ीक़त नहीं बदलती मोहन भागवत जी…!, आरएसएस अपने कलंकित इतिहास को खुद उजागर करता आया है

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत देश में बोलें या विदेश में, उनकी बयानबाजियों को हिंदू व अन्य भारतीय समाज का एक बड़ा हिस्सा अब गंभीरता से नहीं लेता. ठीक यही हाल हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है. भारतीय जनमानस में तेजी से इन दोनों महामानवों की विश्वसनीयता घटी है. अब यह कहा जाने लगा है कि संघियों के दो मुंह और दो जीभ होती हैं. विदेशों में और देश में भी सार्वजनिक रूप से एक जीभ से बोलते हैं. संघ की आंतरिक बैठकों में दूसरी और असली जीभ का इस्तेमाल करते हैं. इनके सभी कार्य दूसरी और असली जीभ के अनुसार होते हैं.

हिंदुओं और संघियों में फ़र्क़

अमेरिकी की धरती पर हो रहे विरोध के बीच अपनी लाज बचाने के लिए सर संघचालक मोहन भागवत ने स्वामी विवेकानंद के वचन दोहराये हैं। लेकिन छद्मरूप धारण करने से हक़ीक़त नहीं बदलती ! हिंदुओं और संघियों में यही फ़र्क़ है। सभी धर्मों को सच्चा मानने वाले हिंदू होते हैं पर ऐसे लोग आरएसएस से ख़ारिज हो जाते हैं ! अगर संघ की नज़र में सभी धर्म सच्चे हैं तो ‘घर वापसी’ अभियान किसके लिए चल रहा है और क्यों?

गुरु गोलवलकर की मुस्लिमों और ईसाइयों को दुश्मन मानने की लिखित घोषणा को भागवत सार्वजनिक रूप से निंदा कर सकते हैं?

माफ़ी वीर सावरकर ने देशभक्त होने को भारत में ‘पितृ-भूमि’ और ‘पवित्र-भूमि’ दोनों होने की अनिवार्यता का जो सिद्धांत दिया था, आरएसएस उसी पर चलता है। दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने मुस्लिमों और ईसाइयों को दुश्मन मानने की लिखित घोषणा की है। क्या भागवत सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा कर सकते हैं?

चलिए पुरानी बातों को छोड़ देते हैं। आज क्या हो रहा है? भागवत कहते हैं कि भारत में रहने वाले सभी हिंदू हैं- मुस्लिम भी! तो भागवत बतायें –

जब ‘हिंदू’ अख़लाक की लिंचिंग हुई, तो आरएसएस ने इस हिंदू परिवार के आँसू पोंछने और न्याय दिलाने के लिए क्या किया? यूपी योगी आदित्यनाथ सरकार तो अख़लाक के हत्यारों से मुक़दमा वापस लेने का प्रयास कर रही है। कोर्ट में इसके लिए अर्जी भी दी है। भागवत या संघ के किसी नेता के मुँह से चूँ भी नहीं निकली! क्यों?

जब ‘हिंदू बेटी’ बिल्किस बानो के बलात्कारियों को सरकारी षड़यंत्र से छुड़ा लिया गया तो क्या उनके दिल में वैसा ही दर्द उठा जैसा एक पिता के दिल में उठता है? जब बलात्कारियों का भाजपाइयों द्वारा सार्वजनिक अभिनंदन हुआ तो उन्होंने इसकी सार्वजनिक आलोचना क्यों नहीं की?

महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाली प्रज्ञा ठाकुर सहित तमाम नेता बीजेपी में उच्च पदों पर कैसे रहे? भाजपा नेताओं, सांसदों और विधायकों की सरपरस्ती में निकलने वाले रामनवमी आदि के जुलूस जब मस्जिदों के सामने तांडव करते हैं तो उनकी आँख क्यों बंद रहती है? भागवत क्यों आरएसएस की स्थानीय शाखाओं को निर्देश नहीं देते कि मस्जिद में आस्था रखने वाले ‘पंथ’ के हिंदू भाइयों की रक्षा करें?

हाल ही में केरल के एक आरएसएस नेता ने जंतर-मंतर पर जेन ज़ी लड़कियों के बलात्कार की बात की और उनके मुंह में दही जमी रही ! क्यों?

दुनिया जानती है कि बीजेपी में कौन क्या होगा यह संघ तय करता है। प्रधानमंत्री भी। ऐसे में अगर देश में एक भी मुस्लिम सांसद या मंत्री नहीं है तो क्या यह उसकी ज़िम्मेदारी नहीं है? क्या उसने इस पर चिंता जतायी? लोकसभा में मुस्लिम सांसद को सबके सामने धर्म के आधार पर गाली देने वाला बीजेपी का सम्मानित नेता कैसे बना हुआ है?

आरएसएस के दस मुँह

किसी भी व्यक्ति या संगठन के वचन और कर्म में एकता और द्वैत से उसका चरित्र तय होता है। आरएसएस के दस मुँह हैं जो स्थान और परिस्थितियों के हिसाब से अलग अलग खुलते हैं। इस दशानन की शक्ति भी नाभि में छिपा नफ़रत का ज़हर है जिसे वह अमृत समझता है।

भारत ने इस ज़हर को पहचान लिया है। वह समझ गया है कि धर्म की बात करना और धर्म पर चलना दो बातें हैं। पिछले 12 सालों में आरएसएस के कलंकित इतिहास खुद भाजपा-संघ ने उजागर किया है.सड़क से लेकर संसद तक आरएसएस की छीछालेदर करवायी है. खुद सदा वत्सले का जाप करनेवाले संघी वंदे मातरम् को लेकर तो संसद में भाजपा ने अपनी फजीहत करवा ली है.

-पंकज श्रीवास्तव


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