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Thursday, October 22, 2026
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गुमला जिला में रावण दहन – की दशकों पुरानी परंपरा – परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम गुमला से लेकर जिले के विभिन्न संबंधित क्षेत्रों तक, आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया 

गुमला : – विजयादशमी का त्योहार “रावण दहन” अपने देश के अधिकांश हिस्सों में “बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर – धर्म की जीत के प्रतीक”* के रूप में मनाया जाता है। झारखंड के गुमला जिले में भी दशहरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यहाँ रावण दहन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारंपरिक उत्सव और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन चुका है। गुमला जिला मुख्यालय के परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम गुमला से लेकर सिसई, अरमई, डुमरडीह, करौंदी, मुरकुंडा और टोटो जैसे क्षेत्रों में विजयादशमी के अवसर पर *रावण दहन* के आयोजन की परंपरा देखने को मिलती है।

उक्त आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालु भक्त अपने आराध्य भगवान पुरुषोत्तम श्रीराम की विजय का उत्सव मनाते हैं। और गुमला जिले के विभिन्न स्थानों पर जगह-जगह भव्य रावण के पुतले का दहन किया जाता है, साथ ही साथ, रामलीला, शोभायात्रा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विजय महोत्सव मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। हालांकि, जिले के सभी स्थानों पर रावण दहन की शुरुआत से संबंधित विस्तृत ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें इस परंपरा की व्यापकता और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती हैं।

*परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम गुमला – रावण दहन – दशहरा दुर्गा पूजा महोत्सव के अवसर पर प्रमुख पहचान और आकर्षण का केंद्र*

गुमला जिला मुख्यालय में विजयादशमी के अवसर पर होने वाले रावण दहन का सबसे प्रमुख केंद्र परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम माना जाता है। यहाँ *रावण दहन सह विजय मेला* का आयोजन बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह आयोजन कई दशकों से लगातार होता आ रहा है और जिले के प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इसकी विशेष पहचान है।

वर्ष 2023 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आयोजन समिति की ओर से बताया गया था कि परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम में रावण दहन की परंपरा लगातार दशकों को से जारी हैं। उक्त गुमला जिला मुख्यालय पहले गुमला बाजार टांड में आयोजन की शुरुआत लगभग 1959 के आसपास मानी जा सकती है इसी क्रम में गुमला बाजार टाड के बाद गुमला परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम निर्माण के बाद रावण दहन का सिलसिला हुआ हैं जो अभी जारी है ।

स्थानीय एक रिपोर्टों में रावण दहन का आयोजन की शुरुआत पंजाबी बिरादरी से जुड़ी बताई गई है। शुरुआती दौर में भाल सिंह का नाम सामने आता है। बाद के वर्षों में अन्य स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी आयोजन की जिम्मेदारी संभाली। समय के साथ यह कार्यक्रम व्यापक जनभागीदारी वाला सार्वजनिक उत्सव बन गया।

वर्तमान स्वरूप में रावण दहन के साथ भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान से जुड़ी झांकियाँ, आकर्षक भव्य और विभिन्न आकार प्रकार के आतिशबाजी सहित रावण दहन सह विजय मेला जैसे आकर्षण देखने को मिलते हैं। दशहरा के दिन बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ परमवीर अल्बर्ट एक्का स्टेडियम पहुँचते हैं और उक्त परंपरा का हिस्सा बनते हैं।

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें स्थानीय संबंधित लोग भाग लेते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सहयोग ने इसे गुमला की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

*सिसई में 1981 से चली आ रही रावण दहन की परंपरा*

गुमला जिले के सिसई प्रखंड में भी रावण दहन का आयोजन विशेष महत्व रखता है। यहाँ रावण मैदान में होने वाला कार्यक्रम स्थानीय लोगों के लिए विजयादशमी के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है।

08 सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिसई में रावण दहन की शुरुआत वर्ष 1981 में हुई थी। इस आधार पर वर्ष 2025 में 44 वें आयोजन की तैयारी की जानकारी सामने आई थी। यह विवरण सिसई में रावण दहन की परंपरा के इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

यहाँ जागृति रावण दहन समिति आयोजन से जुड़ी रही है। समय के साथ कार्यक्रम का स्वरूप धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुका है। रावण दहन के साथ रामलीला, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, रोशनी और आतिशबाजी लोगों को आकर्षित करती हैं।

वर्ष 2025 की एक रिपोर्ट में सिसई में 51 फीट ऊँचे रावण के पुतले के दहन का उल्लेख किया गया था। इससे आयोजन की भव्यता और स्थानीय लोगों के उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सिसई का रावण दहन आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी एकत्र होने का अवसर देता है। इस प्रकार यह आयोजन धार्मिक परंपरा को जीवित रखने के साथ स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

*अरमई और डुमरडीह में भी दशहरा उत्सव का उत्साह*

गुमला जिला मुख्यालय के अरमई और डुमरडीह क्षेत्रों में भी विजयादशमी के अवसर पर “रावण दहन” के आयोजन का उल्लेख स्थानीय एक रिपोर्टों में मिलता है। उक्त स्थानों पर दशहरा स्थानीय समुदायों के लिए धार्मिक आस्था और सामूहिक उत्सव का अवसर बनता है।

डुमरडीह में आसपास के पूर्वी क्षेत्र से लोगों के कार्यक्रम देखने पहुँचने की जानकारी भी एक रिपोर्टों में सामने आई है। इससे स्पष्ट होता है कि इन आयोजनों का महत्व केवल संबंधित गाँव या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के लोगों की भागीदारी भी इसमें शामिल होती है।

हालाँकि, अरमई और डुमरडीह में रावण दहन की शुरुआत किस वर्ष हुई, इसे लेकर अभी पर्याप्त प्रमाणित ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इन आयोजनों के शुरुआती विस्तृत इतिहास तैयार करने के लिए स्थानीय आयोजन समितियों तथा पुराने निवासियों से जानकारी जुटाना जरूरी होगा।

*मालवीय नगर करौंदी में रावण दहन स्थानीय परंपरा और जनभागीदारी*

गुमला जिला मुख्यालय से सटे मालवीय नगर करौंदी क्षेत्र में भी विजयादशमी पर रावण दहन होने का उल्लेख एक रिपोर्टों में मिलता है। जिले के विभिन्न हिस्सों में इस प्रकार के आयोजनों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि दशहरा उत्सव स्थानीय स्तर पर भी व्यापक रूप से मनाया जाता है।

विजयदशमी को मालवीय नगर करौंदी में रावण दहन के रात्रि में मेला का आयोजन स्थानीय लोगों को एक साथ आने और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। ऐसे कार्यक्रमों में सामूहिक भागीदारी और स्थानीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

हालाँकि, मालवीय नगर करौंदी में इस परंपरा की शुरुआत, इसके संस्थापक आयोजकों और पुराने आयोजनों के स्वरूप से संबंधित विस्तृत दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इस आयोजन की अवधि या प्राचीनता को लेकर निश्चित दावा करना उचित नहीं होगा।

*मुरकुंडा के हाई स्कूल मैदान में रावण दहन*

मुरकुंडा क्षेत्र में हाई स्कूल मैदान में विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन आयोजित होने का उल्लेख एक रिपोर्ट में मिलता है। यह मैदान इस अवसर पर स्थानीय लोगों के जुटने का एक प्रमुख स्थान बनता है।

रावण दहन की परंपरा के माध्यम से यहाँ भी भगवान श्रीराम की विजय और बुराई पर अच्छाई के संदेश को याद किया जाता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय धार्मिक कथाओं, परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित कराने में योगदान देते हैं।

मुरकुंडा में रावण दहन की शुरुआत का वर्ष तथा आयोजन के शुरुआती स्वरूप के बारे में फिलहाल पर्याप्त प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।

*टोटो ग्राम में रावण दहन की परंपरा*

गुमला जिले के टोटो ग्राम में भी विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन होने का उल्लेख एक स्थानीय रिपोर्टों से मिलता है। यह आयोजन जिले में दशहरा उत्सव की व्यापकता को दर्शाता है।

टोटो में रावण दहन की शुरुआत कब हुई और शुरुआती वर्षों में इसे किस प्रकार आयोजित किया जाता था, इसकी प्रमाणित जानकारी अभी सीमित है।

 

*रावण दहन का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व*

रावण दहन की परंपरा का मूल संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत है। रामायण की कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने रावण का वध करके अधर्म पर धर्म की विजय स्थापित की। इसी घटना की स्मृति में विजयादशमी के अवसर पर देश के अनेक हिस्सों में रावण के पुतले का दहन किया जाता है।


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