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Wednesday, November 4, 2026
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सहिया साथियों के 14 लाख के मानदेय भुगतान में हुई गड़बड़ी, मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी – चिकित्सा प्रभारी

गुमला न्यूज ब्यूरो प्रमुख – गणपत लाल चौरसिया

गुमला : – गुमला जिला अंतर्गत स्थित बसिया थाना क्षेत्र के रेफरल अस्पताल, बसिया में वित्तीय अनियमितता और बड़ी लापरवाही का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, उक्त अस्पताल के अकाउंटेंट ने 110 सहिया साथियों के चार महीने के लंबित मानदेय और प्रोत्साहन राशि, कुल 14 लाख रुपए, के ऑनलाइन ट्रांसफर में भारी गड़बड़ी कर दी है। इस गंभीर गड़बड़ी के बाद क्षेत्र की सहिया साथी भारी मानसिक तनाव और परेशानी में हैं। जानकारी के अनुसार बसिया प्रखंड के 88 राजस्व गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए कुल 110 सहिया साथी कार्यरत हैं।

इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य कार्यों, जैसे खखार जांच, स्लाइड जांच, बलगम जांच, बूस्टर नमक जांच, और अन्य मैदानी स्वास्थ्य गतिविधियों के एवज में प्रोत्साहन राशि व मानदेय दिया जाता है। इनका चार महीने का 14 लाख रुपए का भुगतान लंबित था, जिसे उक्त अस्पताल के अकाउंटेंट रोशन इंदवार ने उक्त राशि गत 21 अगस्त को सहिया साथियों के बैंक खातों में भेजी। बैंक खातों के मिलान और ट्रांसफर में बड़ी गड़बड़ियां सामने आईं।

वित्तीय वितरण में बरती गई लापरवाही के कारण उक्त राशि गलत खातों में ट्रांसफर हो गई। इससे सहिया साथियों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई है। कुछ प्रमुख गड़बड़ियां इस प्रकार हैं: सरूडा गांव की सहिया पिंकी कुमारी के 30 हजार रुपए रायकेरा गांव निवासी सहिया बसंती के खाते में गए। मोरेंग गांव निवासी पारो देवी के 12,825 रुपए पिंकी के खाते में गए। लोंगा गांव निवासी सुषमा कुमारी के 29,425 रुपए सहिया पारो देवी के खाते में गए। लोंगा गांव निवासी सहिया मंजू देवी के खाते में 12 हजार रुपए गए। सायटोली गांव की मुनि देवी के खाते में 12 हजार रुपए गए। सहिया सुषमा के खाते में आए 5 हजार रुपए किसके हैं, यह पता नहीं चल पाया है। मानदेय मिलने के बाद सहिया साथियों ने खुशी-खुशी अपनी पारिवारिक और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार वह राशि खर्च कर दी। अब अस्पताल प्रबंधन और अकाउंट्स विभाग सहिया साथियों पर लगातार दूरभाष (फोन) के जरिए पैसे वापस करने का दबाव बना रहा है। डर के मारे कुछ सीधी-सादी सहिया साथियों ने अपनी जेब से पैसे वापस भी कर दिए हैं। इस तरह की लापरवाही, बिना सत्यापन के बैंक खातों में लाखों रुपए ट्रांसफर किए जाने से स्वास्थ्य विभाग में किसी बड़े वित्तीय गबन या भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेने के लिए स्वास्थ्य विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल तैयार नहीं दिख रहा है। मामले पर जब अकाउंटेंट रोशन इंदवार से बात की गई, तो उन्होंने भुगतान में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की। उनका कहना है कि गलत तरीके से ट्रांसफर हुई राशि की वापसी के लिए प्रक्रिया चल रही है। वहीं इस पूरे प्रकरण पर जब रेफरल अस्पताल की चिकित्सा प्रभारी डॉ. शिपिंग विभा बारला से संपर्क किया गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मानदेय गड़बड़ी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि गड़बड़ी हुई है, तो इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। महीनों की मेहनत के बाद मिलने वाले मानदेय में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही ने धरातल पर स्वास्थ्य सेवा देने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं को बुरी तरह उलझन में डाल दिया है। स्थानीय ग्रामीणों और सहिया साथियों ने जिला प्रशासन एंव संबंधित विभाग से मांग की है कि उक्त पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। इस संबंध में चिकित्सा प्रभारी ने साफ कहां है कि उक्त मानदेय भुगतान में गड़बड़ी के मामले की उच्च स्तरीय जांच होंगी l


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